Yug Nirmata JRD Tata
Author:
Bakhtiar K DadabhoiPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Biographies-and-autobiographies0 Ratings
Price: ₹ 120
₹
150
Unavailable
"कुशल पायलट, नवप्रवर्तक उद्यमी, संस्थान निर्माता, परमार्थी व महान् जन-प्रबंधक जे. आर.डी टाटा उन राष्ट्र- निर्माताओं में थे, जो आबाल-वृद्ध सभी के प्रेरणा-स्रोत रहे हैं ।
एक उद्योगपति के रूप में उनको टाटा उद्योग समूह को अंतरराष्ट्रीय पटल पर लाने का श्रेय प्राप्त है । श्री टाटा विज्ञान व कलाओं के संरक्षक रहे । साहित्य, ललित-कलाओं, तेज रफ्तार कारों, स्कीइंग एवं उड़ान में उनकी गहरी रुचि थी । उन्होंने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च, नेशनल सेंटर फॉर द परफार्मिग आर्ट्स एवं अन्य अनेक संस्थानों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ।
जे. आर.डी टाटा को जन-प्रेरक के रूप में सदा याद किया जाएगा । सही व्यक्ति को सही काम के लिए चुनने की उनमें विलक्षण क्षमता थी । किसी टीम को सुगठित करने, विभिन्न कर्मियों से सबसे अच्छे परिणाम हासिल करना उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि थी । वह जिजीविषा से परिपूर्ण थे और नवाचार व उद्यम की प्रेरणा देने में अत्यंतमुखर ।
अपने सभी कर्मियों को अगाध स्नेह करनेवाले, दूरदर्शी, युग -निर्माता जे. आर.डी टाटा के जीवन से प्रेरणा और शिक्षा देनेवाली उपयोगी पुस्तक ।
ISBN: 9788173157592
Pages: 160
Avg Reading Time: 5 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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Shivani
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- Description: कथाकार और उपन्यासकार के रूप में शिवानी की लेखनी ने स्तरीयता और लोकप्रियता की खाई को पाटते हुए एक नई ज़मीन बनाई थी, जहाँ हर वर्ग और हर रुचि के पाठक सहज भाव से विचरण कर सकते थे। उन्होंने मानवीय संवेदना और सम्बन्धगत भावनाओं की इतने बारीक और महीन ढंग से पुनर्रचना की कि वे अपने समय में सबसे ज़्यादा पढ़े जानेवाले लेखकों में एक होकर रहीं। कहानी, उपन्यास के अलावा शिवानी ने संस्मरण और रेखाचित्र आदि विधाओं में भी बराबर लेखन किया। अपने सम्पर्क में आए व्यक्तियों को उन्होंने क़रीब से देखा, कभी लेखक की निगाह से तो कभी मनुष्य की निगाह से, और इस तरह उनके भरे-पूरे चित्रों को शब्दों में उकेरा और कलाकृति बना दिया। इस पुस्तक में ‘गुरुपल्ली’, ‘गुरुदेव की कर्मभूमि’, ‘शान्तिनिकेतन की गुरुपल्ली’, ‘आश्रम के पर्व’, ‘कुछ महत्त्पूर्ण उत्सव’, ‘आश्रम के विकास में गुरुदेव का योग’, ‘गांधीजी और गुरुदेव’, ‘अनेक विभूतियों का आगमन’, ‘श्रीनिकेतन का मेला’, ‘खेलकूद और मनोरंजन’, ‘आश्रमवासियों के लिए गुरुदेव के गीत’, ‘छात्रों का अतिथि-प्रेम’, ‘गुरुदेव की आत्मीयता’, ‘सादा पर कलापूर्ण रहन-सहन’, ‘गुरुर्ब्रह्मा’, ‘ओ रे गृहवासी’, ‘तुई जे पुरुष मानुष रे!’, ‘आश्रम पर काले बदल’ शीर्षक निबन्ध शामिल हैं, जिनका सम्बन्ध लेखिका के शान्तिनिकेतन प्रवास से है। आशा है, शिवानी के कथा-साहित्य के पाठकों को उनकी ये रचनाएँ भी पसन्द आएँगी!
Yaadon Ki Roshni Mein
- Author Name:
Harishankar Parsai
- Book Type:

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Description:
‘यादों की रोशनी में’ परसाई के भाषणों, संस्मरणों, रेखाचित्रों और निबन्धों का संकलन है। वर्ष 1989 में पहली बार प्रकाशित इस पुस्तक में लेखक की जीवन-दृष्टि और सामाजिक सरोकारों का परिचय तो मिलता ही है, उस समय के बारे में भी हमें कई सूचनाएँ प्राप्त होती हैं।
पुस्तक के तीन खंड हैं जिनमें भिन्न-भिन्न प्रकृति की रचनाओं को विभाजित किया गया है। पहले हिस्से में ‘मतवाला और उसकी भूमिका’ जैसा आलेख जहाँ बीसवीं सदी के पूर्वार्द्ध की साहित्यिक-राजनीतिक पृष्ठभूमि से परिचित कराता है, वहीं ‘लेखकों का सचेत और सतर्क दायित्व’ शीर्षक उनका अभिभाषण प्रगतिशील लेखकों और संगठनों की सामाजिक भूमिका को रेखांकित करता है। दहेज की समस्या को लेकर लिखे गए दो व्यंग्यात्मक आलेख बताते हैं कि परसाई अपने लेखकीय दायित्व को लेकर कितने सजग थे।
इनके अलावा श्रीकांत वर्मा, ताज भोपाली और बाबा नागार्जुन पर उनके दिलचस्प संस्मरण भी इस पुस्तक का हिस्सा हैं। कुछ और रचनाओं के अलावा ग़ालिब को लेकर चुटीले अन्दाज में लिखा गया एक व्यंग्य भी इस संकलन में शामिल है जिसमें वे अपने प्रिय शायर को अपने ही ढंग से याद करते हैं।
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