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Jeevan Sangit

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‘जीवन संगीत’ विख्यात ख़याल गायिका विदुषी गंगूबाई हंगल की आत्मकथा है, जो मूलतः कन्नड़ भाषा में लिखी गई थी। पहले यह कन्नड़ से अंग्रेज़ी में अनूदित हुई और अब हिन्दी में आपके सामने है। गंगूबाई हंगल निचली कही जाने वाली जाति में पैदा हुईं, वे उस देवदासी परम्परा से आती थीं जहाँ स्त्रियाँ ब्राह्मण पुरुष की ‘रक्षिता’ होती थीं। लेकिन जाति, जेंडर और परम्परा की कठिनाइयों को चीरती हुई, सामाजिक-आर्थिक मुश्किलों को पार करती हुई वे संगीत के प्रति समर्पण और साधना से भारतीय संगीत जगत के आकाश पर छा गईं। गले के ऑपरेशन के चलते उनकी आवाज़ में एक ‘मर्दाना भारीपन’ आ गया था, लेकिन इस सीमा को भी उन्होंने शक्ति में बदल दिया। ‘संगीत नाटक अकादेमी सम्मान’, ‘तानसेन सम्मान’, ‘पद्म भूषण’ एवं ‘पद्म विभूषण’ जैसे सम्मानों से नवाज़ी गईं गंगूबाई हंगल की यह आत्मकथा हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के एक दौर की गवाही तो देती ही है, साथ ही हमें लगन, मेहनत, जीवट, समर्पण और प्रतिभा की आभा से दमकती ऐसी इनसान से भी मिलवाती है, जिसने कभी हार नहीं मानी, जिसने समाज द्वारा दी गई पहचान का अतिक्रमण कर अपनी अस्मिता ख़ुद गढ़ी।

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‘जीवन संगीत’ विख्यात ख़याल गायिका विदुषी गंगूबाई हंगल की आत्मकथा है, जो मूलतः कन्नड़ भाषा में लिखी गई थी। पहले यह कन्नड़ से अंग्रेज़ी में अनूदित हुई और अब हिन्दी में आपके सामने है।

गंगूबाई हंगल निचली कही जाने वाली जाति में पैदा हुईं, वे उस देवदासी परम्परा से आती थीं जहाँ स्त्रियाँ ब्राह्मण पुरुष की ‘रक्षिता’ होती थीं। लेकिन जाति, जेंडर और परम्परा की कठिनाइयों को चीरती हुई, सामाजिक-आर्थिक मुश्किलों को पार करती हुई वे संगीत के प्रति समर्पण और साधना से भारतीय संगीत जगत के आकाश पर छा गईं। गले के ऑपरेशन के चलते उनकी आवाज़ में एक ‘मर्दाना भारीपन’ आ गया था, लेकिन इस सीमा को भी उन्होंने शक्ति में बदल दिया।

‘संगीत नाटक अकादेमी सम्मान’, ‘तानसेन सम्मान’, ‘पद्म भूषण’ एवं ‘पद्म विभूषण’ जैसे सम्मानों से नवाज़ी गईं गंगूबाई हंगल की यह आत्मकथा हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के एक दौर की गवाही तो देती ही है, साथ ही हमें लगन, मेहनत, जीवट, समर्पण और प्रतिभा की आभा से दमकती ऐसी इनसान से भी मिलवाती है, जिसने कभी हार नहीं मानी, जिसने समाज द्वारा दी गई पहचान का अतिक्रमण कर अपनी अस्मिता ख़ुद गढ़ी।

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Paperback
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
1st
Publication year
2026
Weight
105 grams
ISBN-13
9789360865863
Pages
96
Reading time
~3 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
13 × 20 cm
Language
Hindi

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