Stephen Hawking
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Author:
Vivek GovilkarPublisher:
Manovikas Prakashan LLPLanguage:
MarathiCategory:
Biographies-and-autobiographies₹
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विज्ञानातील अत्युच्च श्रेणीचे कार्य, त्यांच्या दिव्यांगामुळे आलेल्या मर्यादांच्या पलीकडे जाऊन किंबहुना त्यावर विजय मिळवून त्यांनी प्राप्त केलेले दैदिप्यमान यश, जीवनाला सामोरी जाणारी त्यांची दुर्दम्य ऊर्जा, त्याचबरोबर त्यांना मिळालेली अमाप प्रसिद्धी आणि प्रसारमाध्यमांमध्ये त्यांचे झालेले कौतुक अशा अनेक अंगांनी स्टीव्हन हॉकिंग यांचे व्यक्तिमत्त्व असाधारण बनले होते. त्यांचे हे अनेकविध पैलू वाचकांसमोर आणण्यात लेखक विवेक गोविलकर यशस्वी झाले आहेत. कधीकधी अशा व्यक्तिमत्त्वाचे विभुतिकरण करणारे एक अवाजवी चित्र मांडले जाऊ शकते. हे टाळून लेखकाने त्यांचे एक यथार्थ व्यक्तिचित्र रेखाटण्याचा कसोशीने प्रयत्न केला आहे. त्यामुळे मराठी वाचकांसाठी हे एक रंजक, प्रेरक आणि बोधक पुस्तक ठरेल याची मला खात्री आहे. - डॉ. अतीश दाभोलकर डिरेक्टर, अब्दुस सलाम इंटरनॅशनल सेंटर फॉर थिअरेटिकल फिजिक्स (ICTP), इटली Stephen Hawking | Vivek Govilkar स्टीव्हन हॉकिंग | विवेक गोविलकर
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विज्ञानातील अत्युच्च श्रेणीचे कार्य, त्यांच्या दिव्यांगामुळे आलेल्या मर्यादांच्या पलीकडे जाऊन किंबहुना त्यावर विजय मिळवून त्यांनी प्राप्त केलेले दैदिप्यमान यश, जीवनाला सामोरी जाणारी त्यांची दुर्दम्य ऊर्जा, त्याचबरोबर त्यांना मिळालेली अमाप प्रसिद्धी आणि प्रसारमाध्यमांमध्ये त्यांचे झालेले कौतुक अशा अनेक अंगांनी स्टीव्हन हॉकिंग यांचे व्यक्तिमत्त्व असाधारण बनले होते. त्यांचे हे अनेकविध पैलू वाचकांसमोर आणण्यात लेखक विवेक गोविलकर यशस्वी झाले आहेत. कधीकधी अशा व्यक्तिमत्त्वाचे विभुतिकरण करणारे एक अवाजवी चित्र मांडले जाऊ शकते. हे टाळून लेखकाने त्यांचे एक यथार्थ व्यक्तिचित्र रेखाटण्याचा कसोशीने प्रयत्न केला आहे. त्यामुळे मराठी वाचकांसाठी हे एक रंजक, प्रेरक आणि बोधक पुस्तक ठरेल याची मला खात्री आहे.
- डॉ. अतीश दाभोलकर
डिरेक्टर, अब्दुस सलाम इंटरनॅशनल सेंटर फॉर थिअरेटिकल फिजिक्स (ICTP), इटली
Stephen Hawking | Vivek Govilkar
स्टीव्हन हॉकिंग | विवेक गोविलकर
Book Details
-
ISBN9788195977376
-
Pages220
-
Avg Reading Time7 hrs
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Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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लीडिया एविलोव चेख़व से चार वर्ष छोटी थीं। उनका जन्म 1864 में मॉस्को में हुआ और पहली बार जब वे चेख़व से मिलीं तो केवल पच्चीस की थीं। चेख़व के साथ अपने सम्बन्ध के ब्यौरे में—जो 1942 में, 78 वर्ष की आयु में उनकी मृत्यु के कई वर्ष बाद ‘चेख़व इन माई लाइफ़’ शीर्षक से छपा—उन्होंने 1889 और 1899 के बीच चेख़व के साथ अपनी केवल आठ मुलाक़ातों का वर्णन किया है, मगर साफ़ मालूम होता है कि वे अक्सर ही मिलते रहे होंगे। संस्मरण में काफ़ी कुछ दिलचस्प सामग्री है मगर उसमें भी ख़ास महत्त्व चेख़व के जीवन की उन घटनाओं का है जो उनके सबसे कल्पना-प्रणव नाटक ‘द सी गल’ की पृष्ठभूमि में थीं। इस नाटक ने उनके कई आलोचकों की बुद्धि की आज़माइश की और नाटक के कई पात्रों के विषय में उनके अनुमान अब सर्वथा निराधार मालूम देते हैं।
इस पुस्तक में लीडिया ने अपने और चेख़व के, दस वर्ष तक चले दुखद प्रेम-प्रसंग का वर्णन किया है। यही समय चेख़व के लेखकीय जीवन का सबसे महत्त्वपूर्ण समय भी था। चेख़व के जीवन के अब तक अनजाने इस अध्याय से उनकी कहानियों और नाटकों में उपस्थित उस वेदना और विषाद को समझने में अन्य किसी भी बात से ज़्यादा मदद मिलती है जो ‘चेरी ऑर्चर्ड’ में वायलिन के तार टूटने की मातमी आवाज़ की तरह ही उनकी सृजन-प्रतिभा और लेखनी से निकली हर प्रेमकथा की विशेषता है।
Adolf Hitler
- Author Name:
Mahesh Dutt Sharma
- Book Type:

- Description: "ऑस्ट्रिया में जनमा एडोल्फ हिटलर बारह वर्ष तक जर्मनी का शासक रहा। उसके शासनकाल की परिणति द्वितीय विश्व युद्ध के रूप में हुई, जिसमें लाखों लोग मारे गए। यही कारण है कि आज तक के इतिहास में उसकी गणना सबसे घृणित एवं दुष्ट व्यक्तियों में की जाती है। हिटलर को शुरू से ही कला में बहुत दिलचस्पी थी और वह एक वास्तुकार बनना चाहता था। वह सन् 1913 में म्यूनिख (जर्मनी) गया और वहाँ की कला एवं वास्तुशिल्प ने उसे मोहित कर लिया। एक जर्मन देशभक्त होने के बावजूद उसे कोई सरकारी पद नहीं मिल सका, क्योंकि उसके पास वहाँ की पूर्ण नागरिकता नहीं थी। प्रथम विश्व युद्ध के बाद भी वह सेना में ही रहा और तरक्की करते हुए उसने पुलिस जासूस का दर्जा प्राप्त कर लिया।"
An Unsuitable Boy
- Author Name:
Karan Johar +1
- Book Type:

- Description: Karan Johar is synonymous with success, panache, quick wit, and outspokenness, which sometimes inadvertently creates controversy and makes headlines. KJo, as he is popularly called, has been a much-loved Bollywood film director, producer and actor. With his flagship Dharma Production, he has constantly challenged the norms, written and rewritten rules, and set trends. But who is the man behind the icon that we all know? Baring all for the first time in his autobiography, An Unsuitable Boy, KJo reminisces about his childhood, the influence of his Sindhi mother and Punjabi father, obsession with Bollywood, foray into films, friendships with Aditya Chopra, SRK and Kajol, his love life, the AIB Roast, and much more. In his trademark frank style, he talks about the ever-changing face of Indian cinema, challenges and learnings, as well as friendships and rivalries in the industry. Honest, heart-warming and insightful, An Unsuitable Boy is both the story of the life of an exceptional film-maker at the peak of his powers and of an equally extraordinary human being who shows you how to survive and succeed in life.
Ye Shahar Lagai Mohe Ban
- Author Name:
Jabir Husain
- Book Type:

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Description:
इस किताब के आख़िरी सफहे पर यह इबारत दर्ज है—
‘कहते हैं, रूहों की आँखें हमेशा सलामत होती हैं। उनकी याददाश्त कभी फिना नहीं होती। वो सिर्फ़ गैब
से आनेवाली किसी मोतबर आवाज़ की मुन्तजिर होती हैं।’
अपनी पिछली तमाम तहरीरों से बिलकुल अलग, इस किताब में, जाबिर हुसेन ने अपने पात्रों के नाम नहीं लिए। उस बस्ती का नाम लेने से भी परहेज़ किया, जिसकी बे-चिराग़ गलियों में इस लम्बी कथा-डायरी की बुनियाद पड़ी।
एक बिलकुल नए फ्रेम में लिखी गई यह कथा-डायरी कुछ लोगों को ज़िन्दा रूहों की दास्ताँ की तरह लगेगी। लेकिन इस दास्ताँ की जड़ें किसी पथरीली ज़मीं की गहराइयों में छिपी हैं।
जाबिर हुसेन ने इस पथरीली ज़मीन की गहराइयों में उतरने का ख़तरा मोल लिया है। जिन ज़िन्दा रूहों को उन्होंने इस तहरीर में अपना हमसफ़र बनाया है, वो अगर उनसे खूं-बहा तलब करें, तो उनके पास टूटे ख़्वाबों के सिवा देने को क्या है! जाबिर हुसेन जानते हैं, ये टूटे ख़्वाब उनके लिए चाहे जितने क़ीमती हों, बस्ती की ज़िन्दा रूहों के सामने उनकी कोई वक्अत नहीं।
Film Udyogi Dadasaheb Phalke
- Author Name:
Gangadhar Mahambre
- Book Type:

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Description:
भारतीय सिने-जगत के जनक धुंडीराज गोविन्द फाल्के उर्फ़ दादासाहेब फाल्के के जीवन व योगदान को यथोचित रेखांकित करनेवाला ‘फ़िल्म उद्योगी दादासाहेब फाल्के’ एक महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ है।
अनेक प्रक्रम, विक्रम और अपार चुनौतियों को पार करते हुए दादा साहब ने अपने जीवन के अन्त तक भारतीय सिनेमा की बुनियाद और उसके सर्वांगीण विकास के लिए अपना सर्वस्व झोंक दिया।
इस यात्रा में उन्हें कई अपमानों, मतभेदों, स्थालान्तरों, बीमारियों का सामना करना पड़ा। अन्ततः इस क्षेत्र के सर्वोच्च मान-सम्मान सहित कई अनुभव उन्होंने हासिल किए और भारत को अत्यन्त गौरवशाली स्थान दिलाया। यह पुस्तक इसी का लेखा-जोखा है।
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