Lokbharti Hindi Angreji Paryayvachi Evam Viparyay Kosh
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Author:
Badrinath KapoorPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Academics-and-references₹
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इस कोश में 5000 से कुछ अधिक ही पर्यायमालाएँ दी गई हैं जिनमें 30000 से अधिक पर्याय शब्दों का संकलन हुआ है। सहस्राधिक मालाएँ बिलकुल नई हैं। पर्यायमालाओं के निर्धारण में प्रामाणिक एवं वैज्ञानिक पद्धति का अनुसरण किया गया है। एकाधिक अर्थों के सूचक शब्दों को पर्यायमाला में सम्मिलित नहीं किया गया है। संज्ञा-सूचक शब्दों के पर्याय के रूप में विशेषण–सूचक शब्दों को भी शामिल कर लेने के अभ्यास से इस कोश को सचेत रूप से मुक्त रखा गया है। प्रचलन से बाहर हो चुके शब्दों को पर्यायमालाओं के निर्धारण में शामिल नहीं किया गया है। कभी–कभी कुछ कोशकार ऐसे शब्दों को भी परस्पर पर्याय घोषित कर देते हैं जिनके अर्थों में कुछ भी समानता नहीं होती। यह कोश इस दोष से सर्वथा मुक्त है। कुछ ऐसी पर्यायमालाएँ भी हैं जिनके एक से अधिक शब्द प्रमुख प्रतीत होते हैं। ऐसी स्थिति में निर्णय करना कठिन होता है कि किस शब्द को प्रमुख शब्द माना जाए। इसलिए इस कोश में कुछ ऐसी मालाएँ हैं जो दो–दो मूल शब्दों के अन्तर्गत रखी गई हैं। ऐसा पाठकों की सुविधा की दृष्टि से किया गया है। पर्यायमाला में शब्दों के क्रम का निर्धारण कोश विज्ञान के नियमानुसार किया गया है। एक उल्लेखनीय विशेषता यह भी है कि इस कोश में प्रचलित साहित्य तथा लोक-जीवन से भी पर्याय–शब्द सम्मिलित किए गए हैं। कोश में पर्याय वर्णानुक्रम में रखे गए हैं, जिससे इस कोश में पर्यायों की खोज सर्वथा सुगम है। प्रत्येक पर्यायमाला के साथ कुछ अंग्रेज़ी समानक या तदर्थी शब्द इस कोश में दिए गए हैं जिससे कोश की गुणवत्ता बढ़ गई है। इस कोश में पहली बार विपर्यायों की लम्बी सूची भी दी गई है।</p> <p>अध्यापकों, विद्यार्थियों, लेखकों, शोधार्थियों व पत्रकारों के लिए यह कोश संग्रहणीय है।
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इस कोश में 5000 से कुछ अधिक ही पर्यायमालाएँ दी गई हैं जिनमें 30000 से अधिक पर्याय शब्दों का संकलन हुआ है। सहस्राधिक मालाएँ बिलकुल नई हैं। पर्यायमालाओं के निर्धारण में प्रामाणिक एवं वैज्ञानिक पद्धति का अनुसरण किया गया है। एकाधिक अर्थों के सूचक शब्दों को पर्यायमाला में सम्मिलित नहीं किया गया है। संज्ञा-सूचक शब्दों के पर्याय के रूप में विशेषण–सूचक शब्दों को भी शामिल कर लेने के अभ्यास से इस कोश को सचेत रूप से मुक्त रखा गया है। प्रचलन से बाहर हो चुके शब्दों को पर्यायमालाओं के निर्धारण में शामिल नहीं किया गया है। कभी–कभी कुछ कोशकार ऐसे शब्दों को भी परस्पर पर्याय घोषित कर देते हैं जिनके अर्थों में कुछ भी समानता नहीं होती। यह कोश इस दोष से सर्वथा मुक्त है। कुछ ऐसी पर्यायमालाएँ भी हैं जिनके एक से अधिक शब्द प्रमुख प्रतीत होते हैं। ऐसी स्थिति में निर्णय करना कठिन होता है कि किस शब्द को प्रमुख शब्द माना जाए। इसलिए इस कोश में कुछ ऐसी मालाएँ हैं जो दो–दो मूल शब्दों के अन्तर्गत रखी गई हैं। ऐसा पाठकों की सुविधा की दृष्टि से किया गया है। पर्यायमाला में शब्दों के क्रम का निर्धारण कोश विज्ञान के नियमानुसार किया गया है। एक उल्लेखनीय विशेषता यह भी है कि इस कोश में प्रचलित साहित्य तथा लोक-जीवन से भी पर्याय–शब्द सम्मिलित किए गए हैं। कोश में पर्याय वर्णानुक्रम में रखे गए हैं, जिससे इस कोश में पर्यायों की खोज सर्वथा सुगम है। प्रत्येक पर्यायमाला के साथ कुछ अंग्रेज़ी समानक या तदर्थी शब्द इस कोश में दिए गए हैं जिससे कोश की गुणवत्ता बढ़ गई है। इस कोश में पहली बार विपर्यायों की लम्बी सूची भी दी गई है।</p>
<p>अध्यापकों, विद्यार्थियों, लेखकों, शोधार्थियों व पत्रकारों के लिए यह कोश संग्रहणीय है।
Book Details
-
ISBN9788180316296
-
Pages464
-
Avg Reading Time15 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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