Tishnagi (Diwan-A-Hafeez)
Author:
Gaurav Krishna Bansal ‘Hafiz’Publisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Academics-and-references0 Ratings
Price: ₹ 240
₹
300
Available
तिश्नगी महज़ एक किताब नहीं है। यह आपकी दोस्त है। अगर आपके दिल में कोई जज़्बा है—प्यार, मसर्रत, अफसोस, गुस्सा या और भी कुछ—तो आप उसे इस दीवान में ज़रूर पाएँगे।
कई बार ऐसा होता है कि हम अपने जज़्बे को लफ्ज नहीं दे पाते। अगर आपके अंदर जज़्बात हैं, तो बहुत मुमकिन है कि दीवान-ए-हाफज़ आपके जज़्बात को अल्फाज़ दे दे। अगर आप किसी से कुछ कहना चाहते हैं तो शायद ये किताब बड़ी तहज़ीब से, तरीके से अपनी बात कहने में आपकी मददगार साबित हो।
ऐसा भी हो सकता है कि जो नए शोअरा अदब की दुनिया में कदम रख रहे हैं, उन्हें इस दीवान से कुछ सीखने को मिल जाए। इस किताब में उर्दू शायरी की तीनों सिनफें हैं—गज़ल, रुबाई और नज़्म।
आप इस किताब के पन्ने पलटिए और बहुत मुमकिन है कि आपको किसी पन्ने पर आपकी खुशी बाँटती हुई कोई गज़ल, या आपके बिछड़े दोस्त को बुलाती हुई कोई नज़्म, या फिर आपकी उदासी को साझा करती हुई कोई रुबाई मिल जाए।
दीवान-ए-हािफज़ एक तोहफा है उन सबके लिए, जिन्हें अच्छी शायरी पसंद है और उर्दू अदब से मुहब्बत है।
ISBN: 9788119032044
Pages: 224
Avg Reading Time: 7 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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लेखिकाओं की आत्मकथा में स्त्री-वेदना के विविध स्वर सुनाई पड़ते हैं। इनकी वेदना समस्त स्त्रियों को शोषण के खिलाफ विरोध की ताकत देती है। इन्होंने अपने आत्मकथा-साहित्य के द्वारा जहाँ स्त्री करुणा, शोक, वेदना, विवशता को व्यक्त किया वहीं उसे हिंसा, शोषण, अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने की शक्ति भी प्रदान की। इन्होंने स्त्री स्वतन्त्रता, समानता, सम्मान, सहभागिता इत्यादि जैसे प्रश्नों पर विचार करते हुए पितृसत्तात्मक व्यवस्था से स्त्री-मुक्ति की भी वकालत की।
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