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Udati Stree : Nari-Mukti Ke Arddh-Kathanak

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थेरीगाथा का नारीवाद ठीक वही नारीवाद नहीं है, जिसे पश्चिम की देखादेखी हमने स्वीकार कर लिया। थेरियों की रचनाओं से हम उसके लिए कुछ समर्थन पा सकते हैं, लेकिन उसे उसका प्रतिरूप नहीं कह सकते। थेरियों ने अपने समय में एक प्रतिसमय रचा था जिसे पूरी तरह स्वीकारने में स्वयं बुद्ध को भी समय लगा। उन प्रौढ़ा थेरियों ने अपने शब्दहीन लेकिन स्वानुभूत सच को साकार करने के लिए बुद्ध के धम्म की भट्टी में अपने समय की परम्पराओं, लोक मान्यताओं और दर्शन को पहले किस तरह पिघलाया, और कैसे उसे जनभाषा में ढाला, उसे समझना स्त्री-स्वातंत्र्य की एक बड़ी अवधारणा की तरफ जाना है। थेरीगाथा की रचनाओं का लक्ष्य केवल सामाजिक, नैतिक प्रतिबन्धों से ही नहीं सांसारिकता से भी मुक्ति है और केवल मुक्ति नहीं एक नई स्त्री के रूप में एक नए प्रस्थान की नींव डालना है, एक नई उड़ान भरना है। इन रचनाओं से केवल उनकी कामना को नहीं, उस समय के राज-समाज की शक्ल, स्त्रियों के भौतिक संसार और धर्म-जाति सम्बन्धी प्रतिबन्धों को भी समझना ज़रूरी है, और थेरियों के स्त्रीवाद की संभावनाओं को भी। थेरियों के प्रतिसमय से लेकर हमारे वर्तमान तक फैले स्त्री विरोध की परतें टटोलती यह किताब इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए एक प्रस्ताव भी है और आरम्भ भी।

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थेरीगाथा का नारीवाद ठीक वही नारीवाद नहीं है, जिसे पश्चिम की देखादेखी हमने स्वीकार कर लिया। थेरियों की रचनाओं से हम उसके लिए कुछ समर्थन पा सकते हैं, लेकिन उसे उसका प्रतिरूप नहीं कह सकते।

थेरियों ने अपने समय में एक प्रतिसमय रचा था जिसे पूरी तरह स्वीकारने में स्वयं बुद्ध को भी समय लगा। उन प्रौढ़ा थेरियों ने अपने शब्दहीन लेकिन स्वानुभूत सच को साकार करने के लिए बुद्ध के धम्म की भट्टी में अपने समय की परम्पराओं, लोक मान्यताओं और दर्शन को पहले किस तरह पिघलाया, और कैसे उसे जनभाषा में ढाला, उसे समझना स्त्री-स्वातंत्र्य की एक बड़ी अवधारणा की तरफ जाना है।

थेरीगाथा की रचनाओं का लक्ष्य केवल सामाजिक, नैतिक प्रतिबन्धों से ही नहीं सांसारिकता से भी मुक्ति है और केवल मुक्ति नहीं एक नई स्त्री के रूप में एक नए प्रस्थान की नींव डालना है, एक नई उड़ान भरना है।

इन रचनाओं से केवल उनकी कामना को नहीं, उस समय के राज-समाज की शक्ल, स्त्रियों के भौतिक संसार और धर्म-जाति सम्बन्धी प्रतिबन्धों को भी समझना ज़रूरी है, और थेरियों के स्त्रीवाद की संभावनाओं को भी।

थेरियों के प्रतिसमय से लेकर हमारे वर्तमान तक फैले स्त्री विरोध की परतें टटोलती यह किताब इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए एक प्रस्ताव भी है और आरम्भ भी।

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Paperback
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
1st
Publication year
2026
Weight
140 grams
ISBN-13
9789347265860
Pages
136
Reading time
~5 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
13 × 20 cm
Language
Hindi

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