Gods, Giants And The Geography Of India
Author:
Nalini RamachandranPublisher:
Hachette IndiaLanguage:
EnglishCategory:
Society-social-sciences1 Ratings
Price: ₹ 311.22
₹
399
Available
In the east, a pirate king finds his plans foiled by a formidable force of nature.In the north, a majestic mountain range emerges from a demon's tantrum. In the west, a sea keeps a city safely hidden in its deep waters. In the south, the avatar of a god gives a forest its name. Long ago, before science came up with explanations for the events that occurred in nature, people turned to stories to make sense of the wondrous workings of the natural world. And so, a life-giving stream became the gift of a goddess, a hot spring arose from the breath of a celestial snake and a heap of broken boulders served as a testament to a divine battle. Zigzagging through myths, folklore, local history and geological theories, this extraordinary book draws fascinating connections between ancient tales and the science behind the spectacular geography of India. Join Nalini Ramachandran on a most unusual, adventure-filled expedition up, down and across the country's varied terrain!
ISBN: 9789391028220
Pages: 289
Avg Reading Time: 10 hrs
Age: 11-18
Country of Origin: IN
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Dr. Vikrant Singh Tomar
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- Description: ऋषियों की भूमि भारत, जहाँ वेद और उपनिषदों का प्रादुर्भाव हुआ। ऐसे शास्त्र, जिन्होंने न केवल मनुष्य को उसके जीवन के मुख्य उद्देश्य के बारे में अवगत कराया, बल्कि उसके साथ ही उन उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए मार्ग भी बताया और प्रशस्त किया। वेदांत मनुष्य के जीवन के सबसे महत्त्वपूर्ण लक्ष्य ‘स्वाआत्मानुभूति’ का राजमार्ग है। इस पुस्तक के प्रारंभिक तीन अध्यायों में वेदांत का प्रारंभिक परिचय कराने का प्रयास किया गया है और अंतिम तीन अध्यायों में जीवन प्रबंधन के वैदिक मॉडल पर चर्चा की गई है। इस पुस्तक के प्रथम अध्याय ‘वेदांत की रूपरेखा’ में वेदांत के सृजन का कारण और उसके उद्देश्यों को उल्लेखित किया गया है। दूसरे अध्याय ‘चार पुरुषार्थ’ में मनुष्य के जीवन के चार प्रमुख लक्ष्यों का उल्लेख है। तीसरे अध्याय ‘शास्त्र में भारतीय दर्शन’ में विभिन्न शास्त्रों का संक्षेप में वर्णन है, जो उन लक्ष्यों को प्राप्त करने का मार्ग सुझाते हैं। चौथे अध्याय ‘वर्ण व्यवस्था’ में उस मार्ग पर चलने की व्यक्तिगत तैयारी का मार्गदर्शन है। पाँचवाँ अध्याय ‘आश्रम व्यवस्था’ उन लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु वृहद् सामाजिक संरचना प्रस्तुत करता है। छठे अध्याय ‘सोलह संस्कार’ में मील के वे पत्थर हैं, जो हमें बताते हैं कि हम सही रास्ते पर चल रहे हैं।
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