Sapiens A Graphic History, Volume 1- Maanav Jaati ka Janm
Author:
Yuval Noah HarariPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Society-social-sciences0 Ratings
Price: ₹ 879.2
₹
1099
Available
इस महागाथा का यह पहला खंड युवाल नोआ हरारी की अंतरराष्ट्रीय बेस्टसेलर पुस्तक पर आधारित और खूबसूरती से रेखांकित मानव जाति का चित्र इतिहास है। यह कहानी बताती है कि कैसे तुच्छ बन्दर पृथ्वी का शासक बन गया, जो आज परमाणु विखंडन, चाँद तक उड़ने और जीवन के गुणसूत्रों तक को बदलने की क्षमता रखता है। हरारी बतौर मार्गदर्शक, कुछ और किरदार जैसे आद्य ऐतिहासिक बिल, डॉ. फ्रिक्शन और जासूस लोपेज़ के साथ आप इतिहास के बीहड़ में भ्रमण के लिए आमंत्रित हैं। मनष्यु का उद्विकास एक रियलिटी टीवी शो की तरह कल्पित किया गया है। सेपियंस और नियंडरथल्स के मुठभेड़ को प्रसिद्ध आधुनिक कलाकृतियों के ज़रिए कहा गया है तथा मैमथ और घुमावदार दांतों वाले बाघों की विलुप्ति को जासूसी मूवी की तरह दिखाया गया है। सेपियंस: चित्र इतिहास एक विलक्षण रचना है— मनुष्यता की विलक्षण मजेदार कथा, हाज़िरजवाबी की तनक, हास्य और ऊर्जा से भरपूर ।
ISBN: 9789392088162
Pages: 248
Avg Reading Time: 8 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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Pani Ka Shap : Bihar Mein Badh-Sukhad
- Author Name:
Dinesh Kumar Mishra
- Book Type:

- Description: जो प्रायः हर साल बाढ़ या सूखे के कारण और कभी-कभी दोनों कारणों से चर्चा में बना रहता है। उत्तर बिहार में जहाँ सहायक धाराओं समेत नदियों की संख्या बहुत अधिक है, बाढ़ का क्षेत्र बना रहता है। ऐसा भी होता है कि नेपाल के क्षेत्र में अच्छी-खासी वर्षा हो जाने पर बिहार में बाढ़ आ जाती है और ऐसे समय में अगर स्थानीय वर्षा यहाँ न हो तो जहाँ-जहाँ नदी का पानी पहुँच जाता है वहाँ तो बाढ़ रहती है पर उसके ठीक बगल में आधे-पौने किलोमीटर के फासले पर सूखे का ही साम्राज्य बना रहता है। राज्य में गंगा के दक्षिण वाला इलाका, अगर आसमान से पानी न बरसे तो वर्षाभाव से त्रस्त रहता है। सिंचाई के क्षेत्र में आजादी के बाद बहुत प्रगति हुई है पर मौसम की अनिश्चितता अभी भी इन प्रयासों पर भारी पड़ती है। समय से अगर खेतों में बीज पड़ जाएँ, धान की रोपनी हो जाए, कुछ-कुछ भी पानी बरसता रहे और हथिया नक्षत्र की वर्षा समय से हो जाए तो किसान गंगा नहाएँ। 5 जनवरी, 1950 को पटना में पूना की सेंट्रल वाटरवेज, इरिगेशन एंड नेविगेशन कमीशन के एक्सीक्यूटिव इंजीनियर का बयान प्रमुखता से बिहार के अखबारों में छपा था जिसमें कहा गया था कि नेपाल में बराहक्षेत्र में कुतुबमीनार से तीन गुना ऊँचा बाँध बनेगा। उसके निर्माण से बिहार की बाढ़ और सिंचाई की समस्या का समाधान हो जाएगा। न यह बाँध बना और न समस्या का समाधान हुआ। यह अगर बन भी जाए तो इससे हमारी कितनी जरूरतें पूरी होंगी, यह विचारणीय विषय है। इतना जरूर हुआ कि विपत्ति के समय राहत-सामग्री मिलने लगी पर वह तो समाधान नहीं है। राहत सामग्री कितने दिन तक चल पाती है, यह तो हम सब जानते हैं। एक बदलाव जरूर स्पष्ट दिखाई पड़ता है कि हमारे श्रमिक जो पहले बंगाल या असम की तरफ जाते थे वे अब देश के पश्चिम और दक्षिण के राज्यों की तरफ जाने लगे हैं। रेलगाड़ियों के नाम श्रमजीवी एक्सप्रेस, गरीब रथ, श्रमशक्ति एक्सप्रेस आदि रखकर हमने अपनी स्थिति देश के सामने स्पष्ट कर दी है। विकल्प के रूप में हमने राज्य की नदियों के किनारे तटबन्ध बनाए जिनकी लम्बाई 1950 के दशक में 160 कि.मी. थी और अब लगभग 3800 कि.मी. है। परिणाम हुआ कि तब राज्य का बाढ़ प्रवण क्षेत्र 25 लाख हेक्टेयर था, अब लगभग 74 लाख हेक्टेयर है। परिणाम की दृष्टि से यह एक चिन्ता का विषय होना चाहिए था पर इस पर कोई बहस नहीं होती। इस प्रयास का मूल्यांकन आवश्यक है और इसके विकल्पों की तलाश होनी चाहिए।
Andhavishwas Unmoolan : Vol. 1 : Vichar
- Author Name:
Narendra Dabholkar
- Book Type:

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Description:
अंधविश्वास उन्मूलन और डॉ. नरेंद्र दाभोलकर एक-दूसरे के पर्यायवाची हैं। निरन्तर 25 वर्षों की मेहनत का फल है यह। अंधविश्वास उन्मूलन का कार्य महाराष्ट्र में विचार, उच्चार, आचार, संघर्ष, सिद्धान्त जैसे पंचसूत्र से होता आ रहा है। भारतवर्ष में ऐसा कार्य कम ही नज़र आता है।
'अंधविश्वास उन्मूलन : विचार' पुस्तक में अंधविश्वास उन्मूलन से सम्बन्धित बुनियादी बातों का ज़िक्र है। इसमें 'वैज्ञानिक दृष्टिकोण', 'विज्ञान की कसौटी पर फलित ज्योतिष', 'वास्तुशास्त्र नहीं वास्तुश्रद्धाशास्त्र', 'छद्म विज्ञान अर्थात् स्यूडो साइंस', 'मनोविकार', 'भूतप्रेत बाधा या भूतावेश', 'सम्मोहन', 'देवी सवारना' जैसे विषयों पर विचार और विवेचन किया गया है जिससे यथार्थ और भ्रम का सदियों पुराना अन्तर स्पष्ट होता है।
लेखक के आत्मप्रत्यय और चेतना की नींव पर खड़ी यह पुस्तक अंधविश्वास के तिमिर से विवेक और विज्ञान के तेज की ओर ले जानेवाली परम्परा का तिमिर-भेद भी है और विज्ञान का लक्ष्य भी।
Vivah Sanskar : Swaroop Evam Vikas
- Author Name:
Tapi Dharma Rao
- Book Type:

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Description:
तेलगू के ख्यात लेखक तापी धर्माराव के लेखन का आधार इतिहास व किंवदन्तियों का वैज्ञानिक अन्वेषण है। प्रत्यक्ष अनुभव के आधार पर उन्होंने सामाजिक यथार्थ की पुस्तकें लिखी हैं। स्थापित रूढ़ मान्यताओं के पैरवीकारों को थोड़ी आपत्ति अवश्य हो सकती है, लेकिन इन मुद्दों पर विचार करने के लेखकीय आग्रह को वे टाल नहीं सकते।
यह पुस्तक विवाह संस्कार के स्वरूप और विकास का बख़ूबी मनोविश्लेषण करती है। नर तथा नारी के सम्बन्धों के समाज पर पड़े प्रभाव के कारण बहुतेरी कुप्रथाएँ भी प्रचलित हो जाती हैं और उचित जानकारी के अभाव में यह यथावत् रहती हैं। यदि समाज के सम्मुख इन कुप्रथाओं को उजागर किया जाए तो इसके नैतिक स्वरूप में परिवर्तन सम्भव है। समस्याओं की यथावत् पहचान कर उन्हें स्पष्ट कर दिया जाए तो स्वयमेव उनके नैतिक स्वरूप में अन्तर आ जाता है। ऐसा ही सार्थक प्रयास तापी धर्माराव ने अपनी इस समाज–मनोविज्ञान की पुस्तक में किया है।
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