Sapiens A Graphic History, Volume 1- Maanav Jaati ka Janm
(0)
Author:
Madan Soni, Yuval Noah HarariPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Society-social-sciences₹
1099
879.2 (20% off)
Unavailable
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
इस महागाथा का यह पहला खंड युवाल नोआ हरारी की अंतरराष्ट्रीय बेस्टसेलर पुस्तक पर आधारित और खूबसूरती से रेखांकित मानव जाति का चित्र इतिहास है। यह कहानी बताती है कि कैसे तुच्छ बन्दर पृथ्वी का शासक बन गया, जो आज परमाणु विखंडन, चाँद तक उड़ने और जीवन के गुणसूत्रों तक को बदलने की क्षमता रखता है। हरारी बतौर मार्गदर्शक, कुछ और किरदार जैसे आद्य ऐतिहासिक बिल, डॉ. फ्रिक्शन और जासूस लोपेज़ के साथ आप इतिहास के बीहड़ में भ्रमण के लिए आमंत्रित हैं। मनष्यु का उद्विकास एक रियलिटी टीवी शो की तरह कल्पित किया गया है। सेपियंस और नियंडरथल्स के मुठभेड़ को प्रसिद्ध आधुनिक कलाकृतियों के ज़रिए कहा गया है तथा मैमथ और घुमावदार दांतों वाले बाघों की विलुप्ति को जासूसी मूवी की तरह दिखाया गया है। सेपियंस: चित्र इतिहास एक विलक्षण रचना है— मनुष्यता की विलक्षण मजेदार कथा, हाज़िरजवाबी की तनक, हास्य और ऊर्जा से भरपूर ।
Read moreDon’t Miss Out
Pick a membership and see exactly what it gets you
- 15 Free Deliveries
- 1 Free Book up to ₹500 MRP
- 0% off every book, every time
Subscribed already? Continue to your
benefits Login
You pay ₹1,499/Year
You will be auto-charged ₹1,499 every year. Cancel auto-charge anytime.
Benefits with Rachnaye Connoisseur
1 Free Physical Book up to ₹500 MRP
Personal Recommendations
15 Free Deliveries Per Year
Format:
Piracy Free
Express Delivery
Secure Payment
About the Book
इस महागाथा का यह पहला खंड युवाल नोआ हरारी की अंतरराष्ट्रीय बेस्टसेलर पुस्तक पर आधारित और खूबसूरती से रेखांकित मानव जाति का चित्र इतिहास है। यह कहानी बताती है कि कैसे तुच्छ बन्दर पृथ्वी का शासक बन गया, जो आज परमाणु विखंडन, चाँद तक उड़ने और जीवन के गुणसूत्रों तक को बदलने की क्षमता रखता है। हरारी बतौर मार्गदर्शक, कुछ और किरदार जैसे आद्य ऐतिहासिक बिल, डॉ. फ्रिक्शन और जासूस लोपेज़ के साथ आप इतिहास के बीहड़ में भ्रमण के लिए आमंत्रित हैं। मनष्यु का उद्विकास एक रियलिटी टीवी शो की तरह कल्पित किया गया है। सेपियंस और नियंडरथल्स के मुठभेड़ को प्रसिद्ध आधुनिक कलाकृतियों के ज़रिए कहा गया है तथा मैमथ और घुमावदार दांतों वाले बाघों की विलुप्ति को जासूसी मूवी की तरह दिखाया गया है। सेपियंस: चित्र इतिहास एक विलक्षण रचना है— मनुष्यता की विलक्षण मजेदार कथा, हाज़िरजवाबी की तनक, हास्य और ऊर्जा से भरपूर ।
Book Details
-
ISBN9789392088162
-
Pages248
-
Avg Reading Time8 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Ant Aur Arambh
- Author Name:
Madan Soni
- Book Type:

- Description:
‘‘यह पुस्तक बीसवीं शताब्दी के अन्त और इक्कीसवीं शताब्दी के आरम्भ पर वैचारिक स्थिति, बल्कि स्थितियों पर एकाग्र एक अनूठा संचयन है। हमारे जाने हिन्दी में ऐसी कोई और पुस्तक नहीं है जिसमें इस तरह से व्यापक और कुशाग्र विचार किया गया हो। इस संचयन में दृष्टियों की बहुलता है; उनमें दार्शनिक, साहित्यिक, वैज्ञानिक, पारम्परिक आदि शामिल हैं। इस विचार में अन्त और आरम्भ की अवधारणाओं को भी प्रश्नांकित किया गया है। अभी हमारी नयी शताब्दी के दो दशक भी पूरे नहीं हुए हैं और सारे संसार में हिंसा, युद्ध, हत्या, धर्मोन्माद, अनुदारता आदि का भयावह विस्तार हुआ है। विचार मात्र को ध्यान और आवश्यकता के परिसर से देशनिकाला देने की लगातार कोशिश हो रही है। ऐसे मुक़ाम पर इस वैचारिक बहुमुखी हस्तक्षेप का महत्त्व है।’’
—अशोक वाजपेयी
Nexus
- Author Name:
Yuval Noah Harari
- Book Type:

- Description:
Desc awaiting from Publisher
21vi Sadi Ke Liye 21 Sabak
- Author Name:
Yuval Noah Harari
- Book Type:

- Description:
हम स्वयं को परमाणु युद्ध, परिस्थितिकीय विनाश और प्रौद्योगिकीय विध्वंस से कैसे बचा सकते हैं? झूठी ख़बरों की महामारी या आतंकवाद के खतरे के बारे में हम क्या कर सकते हैं ? हमें अपने बच्चों को क्या शिक्षा देनी चाहिए ?
Gandhi Aur Akathaniya : Satya Ke Sath Unka Antim Prayog
- Author Name:
James W. Douglass +1
- Book Type:

- Description:
“इतिहास जब-तब जीवन की शक्तियों और मृत्यु की शक्तियों के बीच ऐसे संघर्षों का साक्षी बनता है जहाँ एक ओर, मृत्यु की शक्ति की हर पराजय असत्य पर सत्य की विजय में आस्था को बल प्रदान करती है तो दूसरी ओर, असत्य की हर कामयाबी में मनुष्यता के सम्पूर्ण विनाश की सम्भावना निहित होती है। अहिंसा में गाँधी की आस्था और उनके हत्यारों की पथभ्रष्ट विचारधारा पर आधारित जेम्स डॅगलॅस की यह गहन शोधपरक, छोटी-सी अद्भुत कृति उन दो परस्पर विरोधी फ़लसफ़ों की एक वाग्मितापूर्ण कहानी है जिनका सामना आज मानव-जाति कर रही है—एक ऐसी कहानी जो हमें ठहरकर सोचने के लिए विवश करती है।” —नारायण देसाई
Gandhi Aur Akathaniya : Satya Ke Sath Unka Antim Prayog
James W. Douglass
20% off₹ 350
₹ 280
Available
Homo Deus: Aanewale Kal Ka Sanshipt Itihas
- Author Name:
Yuval Noah Harari
- Book Type:

- Description:
होमो डेयस उन परियोजनाओं, स्वप्नों और दुःस्वप्नो की पड़ताल करती है जो इक्कीसवीं सदी को आकार देने वाले हैं - मृत्यु पर विजय प्राप्त करने से लेकर कृत्रिम जीवन की रचना तक। यह किताब कुछ बुनियादी सवाल पूछती है: हम यहाँ से कहाँ जाएँगे? और हम अपनी ही विनाशकारी शक्तियों से इस नाज़ुक संसार की रक्षा कैसे करेंगे?
Sapiens: Manav Jati ka Sankshipt Itihas
- Author Name:
Yuval Noah Harari
- Book Type:

- Description:
Desc awaiting from Publisher
Sapiens A Graphic History, Maanav Jaati ka Janam Volume 1
- Author Name:
Yuval Noah Harari
- Book Type:

- Description:
इस महागाथा का यह पहला खंड युवाल नोआ हरारी की अंतरराष्ट्रीय बेस्टसेलर पुस्तक पर आधारित और खूबसूरती से रेखांकित मानव जाति का चित्र इतिहास है। यह कहानी बताती है कि कैसे तुच्छ बन्दर पृथ्वी का शासक बन गया, जो आज परमाणु विखंडन, चाँद तक उड़ने और जीवन के गुणसूत्रों तक को बदलने की क्षमता रखता है। हरारी बतौर मार्गदर्शक, कुछ और किरदार जैसे आद्य ऐतिहासिक बिल, डॉ. फ्रिक्शन और जासूस लोपेज़ के साथ आप इतिहास के बीहड़ में भ्रमण के लिए आमंत्रित हैं। मनष्यु का उद्विकास एक रियलिटी टीवी शो की तरह कल्पित किया गया है। सेपियंस और नियंडरथल्स के मुठभेड़ को प्रसिद्ध आधुनिक कलाकृतियों के ज़रिए कहा गया है तथा मैमथ और घुमावदार दांतों वाले बाघों की विलुप्ति को जासूसी मूवी की तरह दिखाया गया है। सेपियंस: चित्र इतिहास एक विलक्षण रचना है— मनुष्यता की विलक्षण मजेदार कथा, हाज़िरजवाबी की तनक, हास्य और ऊर्जा से भरपूर ।
Sapiens A Graphic History, Maanav Jaati ka Janam Volume 1
Yuval Noah Harari
17% off₹ 1099
₹ 912.17
Available
Sapiens A Graphic History Volume 2
- Author Name:
Yuval Noah Harari
- Book Type:

- Description:
सेपियन्स भाग दो सभ्यता के स्तम्भ यह अद्भुत चित्र इतिहास... बौद्धिक, मज़ेदार और एक मानवजाति के बतौर हमारी वास्तविकता की गहनतम उद्भावना है - बिग इशू जीवंत, आकर्षक... और मनुष्यता के उलझे हुए इतिहास की इतनी सुगम प्रस्तुति कि कोई भी इसका आनंद ले सकता है -बी.बी.सी. हिस्ट्री मैगज़ीन यह इंसान के आदिम इतिहास से बेहद कल्पनाशील और खिलंदड़े ढंग से गुज़रना है - स्पेक्टेटर ख़ूबसूरत रूपांतरण...यह किताब बेहतरीन चित्रांकन से ज़रिए मानव जाति की कहानी सुनाती है तथा विज्ञान और इतिहास को जोड़कर हमें यह समझने में मदद करती है कि इंसान इस धरती पर बसे कैसे - बी.बी.सी. साइंस फोकस मैगज़ीन यह हमारे दिमाग के जालों को साफ़ करती है और उसे उजाले से भर देती है, जिससे हम दुनिया को नयी नज़रों से देखने लगते हैं - संडे टाइम्स सेपियन्स इतनी दिलचस्प और विचारोत्तेजक इसलिए है क्योंकि यह उलझे और व्यापक इतिहास के कुछ केन्द्रीय विषयों पर बात करती है और इस अद्भुत मानव सभ्यता की पुनर्रचना के लिए तैयार करती है। यह इस बात का एक प्ररिप्रेक्ष्य देती है कि हम कितने कम समय से इस धरती पर हैं - बराक ओबामा हरारी इतनी आसानी से हमें हमारा इतिहास बताते हैं कि एक बार इस किताब को उठाने के बाद रखना मुश्किल होगा। मैं उन सबको यह किताब पढ़ने के लिए कहूँगा जो मनुष्य के इतिहास और उसके भविष्य में रुचि रखते हैं - बिल गेट्स अविश्वसनीय रूप से बेहतरीन किताब - क्रिस इवांस चित्र इतिहास
Ajey Hum : Insaano ne Kaisi Jeeti Duniya
- Author Name:
Yuval Noah Harari
- Book Type:

- Description:
हम शेरों जैसे ताक़तवर नहीं हैं, न डॉल्फिन की तरह तैर सकते हैं, और निश्चय ही हमारे पंख भी नहीं हैं! तो फिर हमने इस दुनिया पर राज कैसे किया? इसका जवाब एक ऐसी अजीब कहानी में है, जो शायद ही फिर कभी सुनने को मिले। वह भी एक सच्ची कहानी ! कभी आपके दिमाग़ में यह सवाल पैदा हुआ कि हमने यह मुक़ाम कैसे हासिल किया? हाथियों के शिकार से लेकर स्मार्ट फोन चलाने तक का सफ़र ? आखिर कैसे बने हम.. अजेय? इसके पीछे की सच्चाई यह है कि हमारे पास एक सुपर पावर है। और वह यह कि हम कहानियाँ गढ़ सकते हैं। यह ऐसा इतिहास है जिसे आपने पहले कभी अनुभव नहीं किया होगा। जानिए कि कैसे क़िस्सागोई की इस अनोखी ख़ूबी का इस्तेमाल हमने अच्छाई-बुराई को समझने और दुनिया पर राज करने के लिए किया। और जानिए कि दुनिया को बदल देने की यह ताक़त हासिल केसे हुई? हरारी युवा पाठकों को साथ लेकर मानव जाति के इतिहास की यात्रा पर निकले हैं। रोमांचक तथ्य और जानदार चित्रांकन के ज़रिए विस्तृत और उलझे हुए विषय को खूबसूरती से पेश करते हैं। सबीना सदेवा, 'ओरिजिन ऑफ़ स्पीशीज़ की लेखिका
Shabdon Ka Mandal
- Author Name:
Renata Czekalska +1
- Book Type:

- Description:
यह पुस्तक हिन्दी के लब्धप्रतिष्ठ लेखक अशोक वाजपेयी के कृतित्व की प्रमुख काव्यात्मक स्पेसों का भाष्यपरक (हर्मेन्यूटिक) विश्लेषण है। पुस्तक के चार अध्याय उन महत्त्वपूर्ण नृतात्त्विक प्रश्नों पर केन्द्रित हैं जो इस कवि के सन्दर्भ में साधनभूत हैं, इस कवि के सन्दर्भ में विश्व के साथ एकत्व के सिद्धान्त की खोज की प्रक्रिया में भाषा को अस्तित्व के एक रूप और विस्तार में बदल देता है। लेखिका ने दर्शाया है कि किस तरह वाजपेयी भारतीय और पाश्चात्य सांस्कृतिक परम्पराओं का सहयोजन करते हुए अपनी कविता को ‘सभ्यताओं के बीच’ स्थित करते हैं, जहाँ वह काव्यात्मक सम्प्रेषण के मौलिक और आकर्षक पैटर्नों का रूप लेते विमर्श का आत्मनिर्भर विमर्श बनती है। यह पुस्तक आधुनिक वैश्वीकृत दुनिया में पूरब और पश्चिम की सांस्कृतिक मुठभेड़ के एक महत्त्वपूर्ण प्रकरण को चित्रित करती है।
मूर्धन्य आलोचक मदन सोनी द्वारा किया गया पुस्तक का हिन्दी अनुवाद मूलतः पोलिश भाषा में लिखी गई पुस्तक के (स्वयं रेनाता चेकाल्स्का द्वारा किए गए) अंग्रेज़ी अनुवाद पर आधारित है।
Khali Naam Gulab Ka
- Author Name:
Umberto Eco +1
- Book Type:

- Description:
प्रख्यात इतालवी कथाकार, सौन्दर्यशास्त्री और साहित्य-चिन्तक अम्बर्तो इको की यह क्लासिक औपन्यासिक कृति चौदहवीं सदी के एक ईसाई मद में घटित रोमांचकारी घटनाओं का वृत्तान्त है। मठ में एक के बाद एक होती आधा दर्जन से ज़्यादा संन्यासियों की रहस्यमय हत्याएँ और उपन्यास के मुख्य चरित्र, फ़्रांसिस्कन संन्यासी और पंडित ब्रदर विलिमय द्वारा इस रहस्य को भेदने की कोशिशें, एक दूसरे गहरे स्तर पर, ज्ञान की क़िलेबन्दी तथा उसको तोड़ने के विलक्षण रूपक में फलित होती हैं जिसमें पुस्तकें और बौद्धिक प्रत्यय, पठन, ज्ञान और जिज्ञासा के संवेग, धार्मिक आस्था और श्रद्धा के उत्कट, हिंसक आवेग जैसी अनेक चीज़ें अपनी साधारण ऐन्द्रियता के साथ हमारे अनुभव का हिस्सा बनती हैं। एक ओर चौदहवीं सदी के ईसाई जगत के धर्मपरीक्षणों और धर्मयुद्धों की पृष्ठभूमि में घटित होती रहस्य और रोमांच से भरी रक्तरंजित घटनाएँ, और दूसरी ओर, मानो, योरोपीय रेनेसां और एनलाइटमेंट की अगुवाई करते, बेहद सघन किन्तु उतने ही प्रांजल और अन्तर्दृष्टिपूर्ण बौद्धिक विमर्श, एक-दूसरे से अन्तर्गुम्फित होकर, एक-दूसरे में रूपान्तरित होकर जिस महान त्रासद रूपक की रचना करते हैं, वह इस उपन्यास का चमत्कृत कर देनेवाला अनुभव है।
Svaraj
- Author Name:
Ramchandra Gandhi +1
- Book Type:

- Description:
रामचन्द्र गाँधी एक ऐसे भारतीय दार्शनिक थे जिनकी साहित्य और कलाओं में गहरी दिलचस्पी थी : उनका चिन्तन अक्सर अध्यात्म, कला और साहित्य को अपनी समझ के भूगोल में समाविष्ट करता था। अपने जीवन में उनका अपने समय के कई बड़े लेखकों और कलाकारों से सम्पर्क और दोस्ताना था। चित्रकार तैयब मेहता के एक त्रिफलक से प्रेरित होकर रामचन्द्र गाँधी ने यह अद्भुत पुस्तक लिखी है। सम्भवत: किसी कलाकृति पर ऐसी विचार-सघन पुस्तक कम से कम भारत में दूसरी नहीं है। उसमें जितने दार्शनिक आशय कला के खुलते हैं, उतने ही अभिप्राय स्वयं रामचन्द्र गाँधी के चिन्तन के भी। यह सीमित अर्थों में कलालोचना नहीं है पर यह दिखाती है कि गहरा कलास्वादन उतने ही गहरे मुक्त चिन्तन को उद्वेलित कर सकता है। तैयब मेहता रज़ा साहब के घनिष्ठ मित्र थे। इस पुस्तक का आलोचक मदन सोनी द्वारा बड़े अध्यवसाय से किया गया हिन्दी अनुवाद उस कला-मैत्री को एक प्रणति भी है। —अशोक वाजपेयी
Rashtra Nirman Mein Adivasi By Dr. Jitendra Meena
- Author Name:
Dr. Jitendra Meena
- Book Type:

- Description:
*राष्ट्र-निर्माण में आदिवासी* लेखक: डॉ. जितेंद्र मीणा यह पुस्तक उनके लिए है: जो इतिहास को सिर्फ विजेताओं की कथा नहीं मानते जो भारत की सामूहिक स्मृति में आदिवासियों की उपस्थिति दर्ज करना चाहते हैं जो वैकल्पिक और समावेशी विमर्श की तलाश में हैं *"इतिहास में किसी को नज़रअंदाज़ करना, वर्तमान में उसकी हिस्सेदारी छीनने का सबसे महीन तरीका होता है।"* यह पुस्तक उसी ऐतिहासिक अन्याय के विरुद्ध एक सशक्त हस्तक्षेप है- जो सदियों से भारत के आदिवासी समुदायों के साथ होता आया है। उत्तर से दक्षिण, पूरब से पश्चिम तक फैले इन समुदायों ने अंग्रेज़ी हुकूमत के खिलाफ सबसे शुरुआती और सबसे दीर्घकालिक विद्रोह किए, लेकिन मुख्यधारा के इतिहास में उन्हें वह स्थान नहीं मिला जिसके वे अधिकारी थे। ‘राष्ट्र-निर्माण में आदिवासी’ सिर्फ एक इतिहास पुस्तक नहीं, बल्कि एक वैचारिक यात्रा है जो हमें भारत के भूले-बिसरे जननायकों से मिलवाती है। यह किताब पूछती है- क्यों आदिवासी विद्रोह, बलिदान और संघर्ष हमारी ऐतिहासिक चेतना का हिस्सा नहीं बन सके? लेखक डॉ. जितेंद्र मीणा इतिहास के प्रोफ़ेसर और सामाजिक विमर्शकार हैं। उन्होंने प्रमाणों और वैकल्पिक इतिहास दृष्टि से भारत के हर हिस्से से आदिवासी संघर्ष की बहुरंगी छवियाँ प्रस्तुत की है। यह पुस्तक न केवल पाठकों को एक भुला दिए गए इतिहास से जोड़ती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि आदिवासी भारत के राष्ट्र-निर्माण में कैसे केंद्रीय भूमिका निभाते रहे हैं।
Rashtra Nirman Mein Adivasi By Dr. Jitendra Meena
Dr. Jitendra Meena
17% off₹ 249
₹ 206.67
Available
Bolna Hi Hai
- Author Name:
Ravish Kumar
- Book Type:

- Description:
रवीश कुमार की यह किताब ‘बोलना ही है’ इस बात की पड़ताल करती है कि भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता किस-किस रूप में बाधित हुई है, परस्पर संवाद और सार्थक बहस की गुंजाइश कैसे कम हुई है और इससे देश में नफ़रत और असहिष्णुता को कैसे बढ़ावा मिला है। कैसे जनता के चुने हुए प्रतिनिधि, मीडिया और अन्य संस्थान एक मज़बूत लोकतंत्र के रूप में हमें विफल कर रहे हैं। इन स्थितियों से उबरने की राह खोजती यह किताब हमारे वर्तमान समय का वह दस्तावेज़ है जो स्वस्थ लोकतंत्र के हर हिमायती के लिए संग्रहणीय है। हिन्दी में आने से पहले ही यह किताब अंग्रेज़ी, मराठी और कन्नड़ में प्रकाशित हो चुकी है।
Jung Andhvishwaso Ki
- Author Name:
Narendra Dabholkar +4
- Book Type:

- Description:
कुशेरा के नेत्रोपचार करनेवाले गुरव बंधु हों, निःसन्तानों को सन्तान प्रदान करानेवाली पार्वती माँ हों, या एक ही प्रयास में व्यसनमुक्त करानेवाले शेषराव महाराज हों, थोड़ा-सा विचार करें, तो समझ में आता है कि लोग असहाय होते हैं। अतः वे दैववादी बनते हैं। इसी से अंधविश्वास का जन्म होता है। समाज जागरूक नहीं है। लोग अविवेकी, व्याकुल हैं, यह बिल्कुल सच है; लेकिन क्या लोगों की इस कमज़ोरी का इस्तेमाल उनकी लूट करने के लिए किया जाए? क्या लोगों की पीड़ा से अपनी झोली भरी जाए?
लोग श्रद्धा रखते हैं, देवाचार माननेवाले हैं, इसका यह मतलब नहीं कि लोग मूर्ख हैं और इसी कारण वे श्रद्धा, देवाचार, नैतिकता, पवित्रता आदि से सम्बन्धित बन्धनों का पालन करते हैं। हम देवताओं की ओर जाते हैं, वह चमत्कार के डर से नहीं बल्कि प्रेमभाव के कारण होता है। लेकिन प्रेम में भय और दहशत का कोई स्थान नहीं है। इस श्रद्धा में जो चीज़ें ग़ैरज़रूरी और अतार्किक हैं, उनका परीक्षण क्यों न किया जाए? कालबाह्य मूल्यों के प्रभावहीन होने से तथा नवविचारों के प्रभावी व्यवहार से लोग परिवर्तन चाहते हैं। हम जब ऐसा कहते हैं कि हिन्दू धर्म की बुनियादी मूल्य-व्यवस्था ही असमानता पर आधारित है, तो वास्तव में यह विधान भूतकाल को सम्बोधित करके किया गया होता है। जन्म से जातीय वरीयता का पुनरुज्जीवन आज कोई नहीं चाहता। प्रत्येक धर्म में मूल नीति तत्त्व बहुतांश रूप में समान हैं। प्रखर नास्तिक भी इसे स्वीकार करेगा। धर्म जब कर्मकांड मात्र रह जाता है, तब उसका विकृतिकरण होता है। क्या चमत्कार धर्मश्रद्धा का हिस्सा है?
स्वामी विवेकानन्द कहते हैं, "जिस शुद्ध हिन्दू धर्म का सम्मान मैं करता हूँ, वह चमत्कार पर आधारित नहीं है। चमत्कार एवं गूढ़ता के पीछे मत पड़ो। चमत्कार सत्य-प्राप्ति के मार्ग में आनेवाला सबसे बड़ा रोड़ा है। चमत्कारों का पागलपन हमें नादान और कमज़ोर बनाता है।"
इसी वैचारिक पृष्ठभूमि में 'महाराष्ट्र अन्धश्रद्धा निर्मूलन समिति' विगत 24 वर्षों से कार्यरत है। अपने नि:स्वार्थ कार्यकर्ताओं के साथ उसने इस दौरान अनेक बार आन्दोलन किए हैं, अनेक बार अपनी जान जोखिम में डालकर और अपनी जेब से पैसा ख़र्च करके समाज में चल रहे अन्धविश्वासों के व्यापार का विरोध किया है। इस पुस्तक में ऐसे ही कुछ आन्दोलनों की रपट है। इन घटनाओं का विवरण पढ़कर पाठक स्वयं ही समझ सकता है कि अन्धविश्वासों से यह जंग कितनी ख़तरनाक लेकिन कितनी ज़रूरी है।
Man-Man Ke Sawal
- Author Name:
Narendra Dabholkar +4
- Book Type:

- Description:
मनोविकार एक ऐसा विषय है जिसको लेकर भारतीय समाज में कई तरह के अन्धविश्वास व्याप्त हैं। मानसिक बीमारियाँ भी शरीर की अन्य व्याधियों की ही तरह होती हैं, इस तथ्य को आज भी भारत के लोग स्वीकार नहीं कर पाते। शिक्षित समाज का व्यवहार भी इस मामले में कुछ अलग नहीं है। पहले तो वे हर मनोविकार को पागलपन से जोड़ देते हैं, और इसे छिपाने की कोशिश करने लगते हैं। दूसरे ऐसे अनेक मनोरोग जो व्यक्ति के जीवन पर दीर्घकालीन प्रभाव डालते रहते हैं, उन्हें इलाज के योग्य ही नहीं माना जाता। यही वजह है कि हमारे यहाँ मनोरोग-विशेषज्ञों की भी भारी कमी है, और उनके स्थान पर झाड़-फूँक और गंडा-ताबीज का बोलबाला है।
अपने मौजूदा हालात से सामंजस्य न बिठा पाने की स्थिति को मानसिक तनाव कहा जाता है, इस परिभाषा की रोशनी में देखें तो हमारे आसपास कोई भी ऐसा नहीं है जो आज की बदलती हुई सामाजिक-पारिवारिक-नैतिक और आर्थिक परिस्थितियों के चलते तनाव से पूरी तरह मुक्त हो। तनाव की शुरुआती अवस्थाओं से लेकर सिज़ोफ्रेनिया और पागलपन तक मनोविकारों की एक लम्बी शृंखला होती है। इसलिए यह जरूरी है कि इस समस्या को गंभीरता से लिया जाए और तनाव कम करने की आध्यात्मिक विधियाँ बेचनेवाले गुरुओं और बाबाओं की शरण में जाने के बजाय इसे वैज्ञानिक ढंग से देखा-समझा जाए।
तार्किक जीवन-पद्धति के जुझारू पैरोकार नरेंद्र दाभोलकर की यह पुस्तक इसी विषय पर केन्द्रित है। इस पुस्तक का लेखन उन्होंने मनोविकार विशेषज्ञ हमीद दाभोलकर के साथ संयुक्त रूप से किया है। इस तरह एक तरफ़ जहाँ हम इसमें मानसिक विकारों की संरचना का वैज्ञानिक परिचय पाते हैं, वहीं भारतीय समाज में मनोरोगों को लेकर जो धार्मिक-सामाजिक और आध्यात्मिक अन्धविश्वास व्याप्त हैं, उनकी विसंगतियों को भी समझ पाते हैं। साथ ही मनोविकारों और उनके उपचार, मन के व्यवहार, बच्चों और स्त्रियों के मनोविकार तथा व्यसनों से जुड़े मानसिक दोषों को भी तर्कसंगत रूप में यहाँ विश्लेषित किया गया है?
Gatiman Bharat
- Author Name:
K.J. Alphons +1
- Book Type:

- Description:
गतिमान भारत' पुस्तक मोदी सरकार के विगत आठ वर्षो में सरकार की नीतियों और नागरिकों के साथ ही देश पर उनके प्रभाव का अत्यंत व्यावहारिक और वस्तुपरक मूल्यांकन करती है। यह शिक्षा, डिजिटल क्रांति, कृषि, उद्योग, पर्यावरण, ग्रामीण विकास, स्वच्छता, बुनियादी ढाँचे, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था सहित पच्चीस प्रमुख क्षेत्रों पर विहंगम दृष्टि डालती है। प्रत्येक अध्याय में संबंधित क्षेत्र का अनुभव रखनेवाले विशेषज्ञों एवं प्रख्यात सिविल सेवकों ने अपने गहन अध्ययन के आधार पर भारत को गति देने में विभिन्न सरकारी नीतियों और योजनाओं के प्रभाव की विवचना की है। इनमें से कुछ क्षेत्रों में पूर्ण सुधार हुआ है, जबकि अन्य क्षेत्रों को दक्ष बनाने के लिए उन्हें फिर से व्यवस्थित किया गया है। प्रधानमंत्री मोदीजी के नेतृत्व में भारतीय लोकतंत्र ने जो सफर तय किया है और प्रत्येक क्षेत्र में आगे की जो राह है, उस पर एक वस्तुनिष्ठ एवं अनुभवजन्य विश्लेषण को प्रस्तुत करना ही इस पुस्तक का उद्देश्य है। भारत के चहुँमुखी विकास और विश्व में भारत के बढ़ते सम्मान और स्वीकार्यता का दिग्दर्शन करवाती यह पुस्तक हर भारतीय को स्वर्णिम भविष्य के प्रति आश्वस्त करती है। Hindi Translation of Accelerating India
Dharma Ki Sadhana
- Author Name:
Swami Vivekanand
- Book Type:

- Description:
स्वामी विवेकानंद ने भारत में उस समय अवतार लिया, जब यहाँ हिंदू धर्म के अस्तित्व पर संकट के बादल मँडरा रहे थे। पंडित-पुरोहितों ने हिंदू धर्म को घोर आडंबरवादी और अंधविश्वासपूर्ण बना दिया था। ऐसे में स्वामी विवेकानंद ने हिंदू धर्म को एक अलग पहचान दिलाई। स्वामीजी का विश्वास था कि पवित्र भारतवर्ष धर्म एवं दर्शन की पुण्यभूमि है। यहीं बड़े-बड़े महात्माओं तथा ऋषियों का जन्म हुआ; यह संन्यास एवं त्याग की भूमि है तथा यहीं आदिकाल से लेकर आज तक मनुष्य के लिए जीवन के सर्वोच्च आदर्श एवं मुक्ति का द्वार खुला हुआ है। प्रस्तुत पुस्तक ' धर्म की साधना' में स्वामीजी ने भारत के प्राचीन गौरव का उल्लेख करते हुए देश के युवकों का आह्वान किया है कि यही उचित समय है, जब वे हिंदू धर्म की पुनर्स्थापना में जुट जाएँ और भारतीय पुनर्जागरण में सहभागी बनें। सही अर्थों में धर्म की साधना करना, उस पर चलना सिखाने वाली प्रेरणादायी पुस्तक!
Vishwas Aur Andhvishwas
- Author Name:
Narendra Dabholkar +3
- Book Type:

- Description:
विश्वास क्या है? कब वह अन्धविश्वास का रूप ले लेता है? हमारे संस्कार हमारे विचारों और विश्वासों पर क्या असर डालते हैं? समाज में प्रचलित धारणाएँ कैसे धीरे-धीरे सामूहिक श्रद्धा और विश्वास का रूप ले लेती हैं। टेलीविज़न जैसे आधुनिक आविष्कार के सामने मोबाइल साथ में लेकर बैठा व्यक्ति भी चमत्कारों, भविष्यवाणियों और भूत-प्रेतों से सम्बन्धित कहानियों पर क्यों विश्वास करता रहता है? क्यों कोई समाज लौट-लौटकर धार्मिक जड़तावाद और प्रतिक्रियावादी-पश्चमुखी राजनीतिक और सामाजिक धारणाओं की तरफ़ जाता रहता है?
क्या यह संसार किसी ईश्वर द्वारा की गई रचना है? या अपने कार्य-कारण के नियमों से चलनेवाला एक यंत्र है? ईश्वर के होने या न होने से हमारी सोच तथा जीवन-शैली पर क्या असर पड़ेगा? वह हमारे लिए क्या करता है और क्या नहीं करता? क्या वह ख़ुद ही हमारी रचना है? मन क्या है, उसके रहस्य हमें कैसे प्रकाशित या दिग्भ्रमित करते हैं? फल-ज्योतिष और भूत-प्रेत हमारे मन के किस ख़ाली और असहाय कोने में सहारा बनकर आते हैं? क्या अन्धविश्वासों का विरोध नैतिकता का विरोध है? क्या धार्मिक जड़ताओं पर कुठाराघात करना सामाजिक व्यक्ति को नीति से स्खलित करता है? या इससे वह ज्यादा स्वनिर्भर, स्वायत्त, स्वतंत्र और सुखी होता है?
स्त्रियों के जीवन में अन्धविश्वासों और अन्धश्रद्धा की क्या भूमिका होती है? वे ही क्यों अनेक अन्धविश्वासों की कर्ता और विषय दोनों हो जाती हैं? इस पुस्तक की रचना इन तथा इन जैसे ही अनेक प्रश्नों को लेकर की गई है। नरेंद्र दाभोलकर के अन्धविश्वास या अन्धश्रद्धा आन्दोलन की वैचारिक-सैद्धान्तिक तथा व्यावहारिक पृष्ठभूमि इस पुस्तक में स्पष्ट तौर पर आ गई है जिसकी रचना उन्होंने आन्दोलन के दौरान उठाए जानेवाले प्रश्नों और आशंकाओं का जवाब देने के लिए की।
Mahila Lekhan Ke Sau Varsh
- Author Name:
Mamta Kaliya +1
- Book Type:

- Description:
लेखन में बीसवीं सदी से आज तक का समय यदि एक प्रस्थान-बिन्दु के रूप में लिया जाए तो यह स्पष्ट है कि इन सौ वर्षों में स्त्रियों की लेखनी में सबसे अधिक परिवर्तन की प्रक्रिया दिखी। पुरुष-लेखन में मात्र एक पात्र होने की भूमिका से निकलकर स्त्री-लेखक ने स्वयं अपनी क़लम से अस्तित्व, व्यक्तित्व और विचार को अभिव्यक्ति देना अभीष्ट समझा। प्रस्तुत संकलन में स्त्री-रचनाकारों के कोमल संवेगों के साथ-साथ आत्मसजग सृजन और विकास-प्रक्रिया का परिचय मिलता है। राजेन्द्र बाला घोष (बंग महिला) से लेकर अलका सरावगी तक एक लम्बी परम्परा तैयार हुई है जहाँ क़लम की साँकलें कहीं अनायास तो कहीं सायास खुली हैं। हर्ष और गर्व का विषय है कि महिला-लेखन अब हिन्दी साहित्य में एक सशक्त सचेत और संवेदनायुक्त धारा है। आनेवाला समय यह याद रखे कि अपने इर्द-गिर्द खड़े किए समस्त चौखटे और कोष्ठक तोड़कर इक्कीसवीं सदी की स्त्री अपने पूरे तेवर के साथ हर क्षेत्र में उठ खड़ी हुई है। प्रस्तुत संकलन में हमें कहानी और निबन्ध, जीवनी और संस्मरण, आलोचना और विमर्श, गोया हर विधा और विषय पर स्त्री की तेजस्विता का परिचय मिलेगा। महादेवी वर्मा, सुभद्रा कुमारी चौहान, कृष्णा सोबती, मन्नू भंडारी से लेकर गीतांजलि श्री, मधु कांकरिया, सारा राय और अलका सरावगी तक अपने पूरे तेवर के साथ यहाँ मौजूद हैं। पृष्ठ सीमा के चलते कई विधाओं का मात्र उल्लेख ही कर पाये हैं। यहीं से अगले खंड की सम्भावना नज़र आती है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book