Abhishapt : Masoom Chehre
Author:
Jaan KunnappallyPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Society-social-sciences0 Ratings
Price: ₹ 236
₹
295
Unavailable
‘मनुष्य! कितना सुन्दर शब्द है!’—मैक्सिम गोर्की ने कहा था लेकिन सब जानते हैं कि सारे मनुष्य ‘सुन्दर’ शब्द से अलंकृत होने का सौभाग्य प्राप्त नहीं कर पाते। सुन्दरता की तीव्र इच्छा रखते हुए भी देश के हज़ारों मनुष्य असुन्दर जीवन जीने के लिए बाध्य होते हैं।</p>
<p>हमारे संविधान में सभी नागरिकों के लिए समान रूप से अधिकारों की सुरक्षा का प्रावधान है, लेकिन हज़ारों-लाखों नागरिक ऐसे हैं जो इस तथ्य से अवगत नहीं हैं। बड़ी संख्या में ऐसे दलित, पीड़ित, शोषित इनसान हैं जो मानव अधिकारों से बिलकुल वंचित हैं। ये निरन्न, निर्वस्त्र, निस्सहाय लोग भी मानव कहलाने योग्य हैं। उनके प्रति मानवोचित बर्ताव करना सभ्य समझे जानेवाले समाज का धर्म है। उपेक्षा और अवहेलना का पात्र बनकर सामाजिक जीवन के अँधेरे बन्द कमरों में ढकेले गए पशु समान जीवन बितानेवाले इन निरीहों को मानवता के महान आसन पर आसीन कराना अनिवार्य है।</p>
<p>इस महान उद्देश्य से प्रेरित होकर मलयालम के मशहूर पत्रकार जॉन कुन्नप्पल्लि ने सात मर्मस्पर्शी लेख लिखे। जीवन के भिन्न-भिन्न क्षेत्रों से सम्बन्धित कुछ ज्वलन्त समस्याओं का गहन अध्ययन तथा विशद विश्लेषण इनमें किया गया है। उन्होंने यथार्थ की ठोस धरती पर खड़े होकर तथ्यों का अनावरण किया है जिसमें असत्य या अतिशयोक्ति का रंग नहीं पोता गया।</p>
<p>इस तरह देखें तो मलयालम से हिन्दी में अनूदित यह पुस्तक सामयिक मुद्दों के सन्दर्भ में चिन्तन और विश्लेषण-दृष्टि के स्तर पर जो पृष्ठभूमि तैयार करती है, वह बहुत ही महत्त्वपूर्ण और उपयोगी है। सुविज्ञ पाठकों के लिए एक संग्रहणीय पुस्तक है ‘अभिशप्त मासूम चेहरे’।
ISBN: 9788180310249
Pages: 169
Avg Reading Time: 6 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Description: गीता भारतीय संस्कृति की आधारशिला है। इसमें अत्यंत प्रभावशाली ढंग से दैनंदिन जीवन से जुड़े बिंदुओं पर प्रकाश डाला गया है। यह संपूर्ण मानव जाति के उद्धार के लिए है। इसका अध्ययन करने से हम अपने जीवन के किसी भी प्रकार के कष्ट और समस्याओं का समाधान ढूँढ़ सकते हैं। यह चरित्र-निर्माण का सबसे व्यावहारिक और उत्तम शास्त्र है। गीता जीवन की यात्रा पर निकलते समय साथ रखने का कलेवा है। बच्चे की उँगली पकड़कर उसे स्कूल में ले जानेवाली माता गीता है। यह पुस्तक जनसाधारण को गीता क्या बताती है, इसे समझाने के लिए लिखी गई है। गीतावाचन पुण्य प्राप्त करने के लिए नहीं, अपितु इसके संदेश को जीवन में उतारने का माध्यम है। श्रीमद्भगवद्गीता के ज्ञान-सागर में से कुछ सूत्ररत्न चुनकर उन्हें सरल-सुबोध भाषा में प्रस्तुत करने का एक विनम्र प्रयास है यह पुस्तक। बच्चे-बड़े-स्त्री-पुरुष—सबके लिए समान रूप से उपयोगी और महत्त्वपूर्ण है भगवद्गीता। इसका नियमित अध्ययन आपको जीवन के पथ पर मर्यादित ढंग से सफलतापूर्वक चलने के सूत्र बताएगी।
Kinnar : Abujh Rahasyamay Jeevan
- Author Name:
Sharad Dwivedi
- Book Type:

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Description:
‘किन्नर : अबूझ रहस्यमय जीवन’ में किन्नरों के दर्द, उनकी खूबी, उनके संस्कार, संस्कृति व परम्पराओं को समाहित किया गया है।
थर्ड जेंडर अर्थात किन्नर कानूनी दायरे में नहीं आते। इनसान होने के बावजूद किन्नर उपेक्षित हैं। इनके हित में कानून तो बने लेकिन उसका जमीनी स्तर पर पालन नहीं हो रहा है। इसके पीछे तर्क दिया जाता है कि किन्नर न स्त्री हैं और न ही पुरुष। फिर उन्हें कोई आरक्षण अथवा कानून का लाभ कैसे दिया जाए? यह स्थिति भारत सहित विश्व के लगभग सभी देशों में है। आखिर यह बड़ी विडम्बना है ना! यहाँ व्यक्ति को बिना किसी गलती की सजा दी जा रही है। उन्हें धार्मिक, सांस्कृतिक पहचान दिलाने की कागजी कार्रवाई शुरू हुई। लेकिन अभी बहुत कुछ करना बाकी है।
यह पुस्तक किन्नरों से आत्मीय जुड़ाव कराती है। साथ ही किन्नरों के अधिकार व सम्मान के लिए पुरजोर आवाज उठाने को प्रेरित भी करती है।
Dr. Rammanohar Lohia Ka Samajwadi Darshan
- Author Name:
Tarachand Dixit
- Book Type:

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Description:
डॉ. लोहिया का समाजवादी चिन्तन देश-प्रेम एवं जन-कल्याण की भावनाओं से ओतप्रोत है, उसका दर्शन नितान्त मौलिक है। जहाँ वे मार्क्स या गांधी से असहमत हैं, उन्होंने अत्यन्त निर्भीकता एवं ईमानदारी से अपनी असहमति व्यक्त की है। उन्होंने समाजवाद पर अत्यन्त गहराई से सोचा-समझा है। उनके समर्थकों का दावा है कि समाजवाद का अस्थिपंजर तो बहुत पहले से तैयार हो गया था, डॉ. लोहिया ने इसमें ‘फ्लैश एंड ब्लड’ डालकर इसको एक नया जीवन दिया है। उनका समाजवादी दर्शन मानवतावाद की पूर्ण अभिव्यक्ति है। उनके सिद्धान्त और कर्म वे आधार हैं जिन पर एक नवीन विश्व-व्यवस्था, नवीन संस्कृति और नवीन सभ्यता के कल्याणकारी भवन निर्मित हो सकते हैं और उनमें सम्पूर्ण मानवता जाति, धर्म, वंश, लिंग, संस्कृति, सम्पत्ति आदि की भिन्नता (कटुता) से मुक्त हो निवास कर सकती है। इसमें कोई सन्देह नहीं कि लोहिया जी भारत के ही नहीं, अपितु विश्व के मौलिक राजनीतिक विचारकों में प्रतिष्ठित स्थान रखते हैं।
प्रस्तुत पुस्तक में न तो डॉ. लोहिया की अन्धविश्वास के साथ प्रशंसा की गई है और न ही किसी पूर्वग्रह के साथ आलोचना। जहाँ उनकी प्रशंसा अपेक्षित है वहाँ प्रशंसा की गई है और जहाँ आलोचना आवश्यक है वहाँ आलोचना। इस प्रकार इस दृष्टि को सामने रखकर डॉ. लोहिया के सम्बन्ध में सम्यक् विचार प्रस्तुत किए गए हैं।
इस पुस्तक में डॉ. लोहिया के कृतित्व और व्यक्तित्व पर प्रकाश डालने के अतिरिक्त समाजवाद की विशिष्टताओं को देते हुए डॉ. लोहिया द्वारा चलाए गए समाजवादी आन्दोलन का भी उल्लेख किया गया है। डॉ. लोहिया की सामाजिक साधना, समाजवादी राज्य का स्वरूप एवं उसके प्रशासनिक ढाँचे का तुलनात्मक ढंग से उल्लेख किया गया है। भाषा-विषयक विचारों और लोहिया की मौलिक अधिकार-सम्बन्धी धारणा का विश्लेषण भी किया गया है। विश्व की समाजवादी विचारधारा को डॉ. लोहिया की देन, विश्व-समाजवाद का नवदर्शन, संयुक्त राष्ट्रसंघ का पुनर्गठन, विश्व सरकार, विश्व विकास समिति, अन्तरराष्ट्रीय जाति-प्रथा उन्मूलन, साक्षात्कार का सिद्धान्त, निशस्त्रीकरण आदि विषयों से सम्बन्धित उनकी विचारधाराएँ स्पष्ट की गई हैं। मार्क्स, गांधी और डॉ. लोहिया के समाजवादी दर्शनों का तुलनात्मक विवेचन कर यह स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है कि किस प्रकार मार्क्स और गांधी-दर्शनों का संशोधन एवं समन्वय कर डॉ. लोहिया ने उन्हें पूर्ण किया और एक नया सन्तुलन और सम्मिलन का दर्शन जन-मानस को दिया।
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