Whispers of Wisdom
(0)
Author:
Radhika NagrathPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
EnglishCategory:
Short-story-collections₹
300
₹ 240 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
It is modern wisdom for modern problems, packed into this book. If one has clarity of concept, the age-old truths and scientific principles apply to modern-age problems in a fitting manner. Each chapter is drawn from a different domain of life. There are tips for becoming a successful manager, leading a happy married life, health benefits of fasting, the role of the mind in curing diseases and the like. Besides, the challenges facing all-inclusive Hindu Dharma, the needs of a healthy society, and the power of the feminine divine make it a universal handbook. It explains why faith is not merely a material emotion or an illogical argument, but has a reason and a revelation attached to it. This book asks us to wake up for the sake of our own happiness. So, come and know yourself, thus recreating happiness for yourself. Goodness is all-inclusive, and it needs to be spread. Why does a worker bee work tirelessly with no individual benefit of its own? Its behaviour is for the greater being of the whole colony, similar to the behaviour of wasps and other such social insects. They inspire the bigger social animal, man, to keep spreading goodness. And this ‘WOW’ (Whispers of Wisdom) goads us to do good, be good and speak good. Scattered here and there are power-packed energy whispers with the power to blast dormant minds and uplift the depressed spirits Forgive, forget and move on. Many such mantras help us move forward in life and break our karmic cycle—liberating us from the knots, making us free. Contents A Word to The fellow seekers... —7 1. Making or Marring our Image——15 2. Life of Values and Virtues——35 3. Stirring a Spoonful of Happiness in Your Life—52 4. Mother Mine — Mother Divine——68 5. Love is the Only Way—86 6. Needs of a Healthy Society——98 7. Education for Enablement and Liberation——115 8. Life of Fulfilment——132 9. Path to Reality——145 10. Steps to the Ultimate Journey of Death——159
Read moreAbout the Book
It is modern wisdom for modern problems, packed into this book. If one has clarity of concept, the age-old truths and scientific principles apply to modern-age problems in a fitting manner. Each chapter is drawn from a different domain of life. There are tips for becoming a successful manager, leading a happy married life, health benefits of fasting, the role of the mind in curing diseases and the like. Besides, the challenges facing all-inclusive Hindu Dharma, the needs of a healthy society, and the power of the feminine divine make it a universal handbook.
It explains why faith is not merely a material emotion or an illogical argument, but has a reason and a revelation attached to it. This book asks us to wake up for the sake of our own happiness. So, come and know yourself, thus recreating happiness for yourself.
Goodness is all-inclusive, and it needs to be spread. Why does a worker bee work tirelessly with no individual benefit of its own? Its behaviour is for the greater being of the whole colony, similar to the behaviour of wasps and other such social insects. They inspire the bigger social animal, man, to keep spreading goodness. And this ‘WOW’ (Whispers of Wisdom) goads us to do good, be good and speak good. Scattered here and there are power-packed energy whispers with the power to blast dormant minds and uplift the depressed spirits
Forgive, forget and move on. Many such mantras help us move forward in life and break our karmic cycle—liberating us from the knots, making us free.
Contents
A Word to The fellow seekers... —7
1. Making or Marring our Image——15
2. Life of Values and Virtues——35
3. Stirring a Spoonful of Happiness in Your Life—52
4. Mother Mine — Mother Divine——68
5. Love is the Only Way—86
6. Needs of a Healthy Society——98
7. Education for Enablement and Liberation——115
8. Life of Fulfilment——132
9. Path to Reality——145
10. Steps to the Ultimate Journey of Death——159
Book Details
-
ISBN9788184305272
-
Pages162
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Pratinidhi Kahaniyan : Ismat Chugtai
- Author Name:
Ismat Chugtai
- Book Type:

- Description: उर्दू कथा-साहित्य में इस्मत चुग़ताई एक ऐसा नुमाया नाम है, जिसने साहित्य और साहित्य से बाहर हर तरह की रूढ़ परम्परा को नामंजूर किया। जिस दौर और जिस समाज से उनकी क़लम का रिश्ता रहा है, एक महिला कथाकार के नाते उसे अपनी शर्तों पर निबाह ले जाना बेहद मुश्किल काम था। इस संग्रह में चुग़ताई की चुनिन्दा कहानियाँ शामिल हैं। ये कहानियाँ हमारी दुनिया और उसकी समाजी सच्चाइयों का ऐसा बयान हैं जिनकी कड़वाहट पर भरोसा किया जा सकता है। इनके माध्यम से हम आज की उस जद्दोजहद से वाबस्ता होते हैं जो इनसानी वजूद और इनसानियत के हक़ में सबसे ज़्यादा ज़रूरी है। आदमी द्वारा आदमी पर होनेवाला ज़ुल्म और ऐसे आदमी को पैदा करनेवाले निज़ाम की तीखी आलोचना इन कहानियों में पूरी कलात्मकता के साथ मौजूद है। यथार्थ की गहरी पकड़, नए अर्थ खोलती अछूती उपमाएँ, बेबाकी-भरा व्यंग्यात्मक लहज़ा, चरित्रों का स्वाभाविक विकास और शब्दों का बेहद किफ़ायती इस्तेमाल इस्मत चुग़ताई के रचनाकर्म की कुछ ख़ास ख़ूबियाँ हैं।
Sapne
- Author Name:
Rajendra Kumar Kanojiya
- Book Type:

- Description: Short Stories
Zara Si Roshani
- Author Name:
Ravindra Kaliya
- Book Type:

-
Description:
रवीन्द्र कालिया ने साठ के दशक में ‘सिर्फ़ एक दिन’, ‘नौ साल छोटी पत्नी’, ‘गड़े शहर का आदमी’ और ‘काला रजिस्टर’ जैसी कहानियों से शिल्प और संवेदना दोनों स्तरों पर हिन्दी कहानी की परम्परा को रूमान और भावुकता के दलदल से बाहर निकालकर उसे यथार्थ की ठोस ज़मीन पर खड़ा होने में मदद की थी। इसका सबूत इस संग्रह की कहानियाँ हैं।
रवीन्द्र कालिया की ये कहानियाँ मनुष्य की जिजीविषा, उसके संकल्प और अदम्य विसंगतिबोध को अपना विषय बनाती हैं और विलक्षण कलात्मकता और अचूक राजनीतिक दृष्टि के साथ उनका निर्वाह करती हैं। इन कहानियों के बच्चे, बूढ़े, युवक, युवतियाँ यहाँ तक कि पशु-पक्षी और पौधे भी कथाकार की आत्मा का स्पर्श पाकर मानवीय उद्यम और नियति में साझा करनेवाले प्रतिनिधि चरित्र बन जाते हैं। इस नज़रिए से सबसे उल्लेखनीय कहानी ‘सुन्दरी’ है। सुन्दरी नाम की घोड़ी एक दुर्घटना में अपनी एक आँख गँवा देने के बाद विवाह जैसे मांगलिक अवसर पर नाचने की पात्रता खो देती है, लेकिन इसे अपनी नियति मानने से इनकार कर देती है। शुभ और अशुभ में यक़ीन करनेवाला मानव समुदाय और उसे बेहद प्यार करनेवाला उसका मालिक जहीर जो ख़ुद भी उसी दुर्घटना में एक आँख गँवा बैठा है, अपनी व्यावहारिकता के चलते उसके हठ का कारण नहीं समझ पाता, लेकिन जहीर के बच्चे अपनी अन्तश्चेतना में सुन्दरी के निकट होने के कारण इसे समझ जाते हैं। अनेक स्तरों पर बुनी गई यह कहानी सहज ही पशु-पक्षियों पर लिखी गई, विश्व साहित्य की अविस्मरणीय कहानियों में रखी जा सकती है।
एक और कहानी ‘गौरैया’ है जो कथाकार के सहज मानवीय राग-विराग से गुज़रती हुई अचानक हमारे दौर की साम्प्रदायिक कुटिलता का पर्दाफ़ाश करनेवाली सशक्त कहानी बन जाती है। ‘बोगेनविलिया’ शीर्षक कहानी का नन्हा सा पौधा आज़ाद हिन्दुस्तान के अमानवीय विकास के शिकार करोड़ों लोगों की पीड़ा को हमारी संवेदना तक पहुँचाने का माध्यम बनता है। दूसरी तरफ़ ‘एक होम्योपैथी कहानी', ‘बुढ़वा मंगल' और ‘रूप की रानी चोरों का राजा’ जैसी कहानियाँ हैं। इनमें पहली कहानी एक उपभोक्तावादी समाज में ठीक-ठाक कमाई कर रहे एक युवक और युवती की है जो परिस्थितिवश अपने स्वाभाविक आवेगों का गला घोंटने पर विवश हैं। ‘डाक्टर और मरीज़’ की भूमिका को अनेक कोणों में दिखानेवाली इस कहानी को हमारे दौर की एक यथार्थवादी प्रेम कहानी भी कहा जा सकता है। ‘बुढ़वा मंगल’ सिर्फ़ एक साधारण बूढ़े की असाधारण जीवनाकांक्षा की कहानी नहीं है, बल्कि इसमें स्वाधीनता पूर्व की तथाकथित त्यागी और बलिदानी पीढ़ी का रहस्य भी उजागर हुआ है। जबकि ‘रूप की रानी चोरों का राजा' में बिलकुल ताज़ा सामाजिक-राजनीतिक हालात का जायजा लिया गया
है।रवीन्द्र कालिया की ये कहानियाँ साधारण स्थितियों, घटनाओं और चरित्रों की असाधारणता को रेखांकित करती हैं और हमारी संवेदना पर दस्तक देने के साथ हमारी विचार शक्ति और कल्पना को उकसाकर उन्हें हल्की सी चुनौती भी देती हैं। इसी प्रक्रिया में ये हमें संस्कारित करती हैं और मनुष्य की ताक़त पर हमारे विश्वास को और मज़बूत करती हैं।
—कृष्णा मोहन
Sapna Nahi
- Author Name:
Gyanranjan
- Book Type:

-
Description:
ऐसे लेखक विरले ही होते हैं जिनकी रचनाएँ अपनी विधा को भी बदलती हों और उस विधा के इतिहास को भी। ज्ञानरंजन के बारे में यह बात निर्विवाद कही जा सकती है कि उनकी कहानियों के बाद हिन्दी कहानी वैसी नहीं रही जैसी कि उनसे पहले थी। उनके साथ हिन्दी गद्य का एक नया, आधुनिक, सघन और समर्थ व्यक्तित्व सामने आया जो उस दौर की भाषा में व्याप्त काव्यात्मक रूमान के बजाय काव्यात्मक सच्चाई से निर्मित हुआ था। ज्ञान की भाषा में उस पीढ़ी की भाषा थी जो भारतीय समाज में आज़ादी के महास्वप्नों के टूटने, परिवारों के बिखरने, मनुष्य के अकेला होते जाने और जीवन में अर्थहीनता के प्रवेश जैसे हादसों के बीच अपने विक्षोभ, अपनी हताशा और अपनी उम्मीद को पहचानने की बेचैन कोशिश कर रही थी। युवा होते समाज की इस आन्तरिक उथल-पुथल का इतना गहरा साक्षात्कार ज्ञानरंजन की कहानियों में मिलता है कि उनके अनेक चरित्र प्रेमचंद के कई चरित्रों की तरह हमारी स्मृति में अभिन्न रूप से शामिल हो गए। सन् साठ के बाद की हिन्दी कहानी एक महत्त्वपूर्ण प्रस्थान-बिन्दु या ‘कहानी का दूसरा इतिहास’ मानी गई और ज्ञानरंजन सामाजिक रूप से उसके सबसे बड़े रचनाकार कहे गए। लेकिन हर बड़े लेखक की तरह ज्ञानरंजन की कहानियाँ अपने दौर या समय को लाँघती गईं और इसीलिए आज भी पढ़ने पर उनकी प्राय: सभी कहानियाँ उतनी ही जीवन्त, प्रासंगिक और प्रामाणिक महसूस होती हैं। ‘क्षणजीवी’ जैसी कहानी लिखने और जीवन के निरर्थक क्षणों में अर्थ की खोज करनेवाले ज्ञानरंजन दरअसल हमारे समय के सबसे ‘दीर्घजीवी’ लेखकों में से हैं।
‘फेंस के इधर और उधर’, ‘पिता’, ‘शेष होते हुए’, ‘सम्बन्ध’, ‘यात्रा’, ‘घंटा’ और ‘बहिर्गमन’ आदि कहानियाँ जिस निम्न मध्यवर्गीय यथार्थ से मुठभेड़ के कारण प्रसिद्ध हुईं, वह भले ही बदल गया हो, लेकिन उस पर लिखी गई ये कहानियाँ कभी ‘पुरानी’ या ‘बासी’ नहीं हुईं। ज्ञानरंजन सरीखे कृती लेखक की ही यह सामर्थ्य है कि यथार्थ के पुराने पड़ जाने पर भी उसका अनुभव पुराना या समय-सापेक्ष नहीं हो जाता। बल्कि इन बहुचर्चित कहानियों में अभिव्यक्त विराट हलचल के बीच आनेवाले यथार्थ की अनेक आहटें भी हम सुन सकते हैं। संग्रह की अन्तिम और अद्भुत कहानी ‘अनुभव’ में तथाकथित उच्चवर्ग की विकृति और अश्लीलता के विवरणों में उस अपसंस्कृति का पूर्वाभास है जो आज हमारे समाज में चौतरफ़ा बजबजा रही है। वह एक स्वस्थ समाज की मृत्यु पर हिला देनेवाला शोकगीत है।
‘सपना नहीं’ ज्ञानरंजन की कालजयी कहानियों का संग्रह-भर नहीं है, यह हमारे समय का एक साहित्यिक दस्तावेज़ भी है और हमारे यथार्थ का साफ़ आईना भी है, जिसमें दिखते जीवन के बिम्ब पाठक को हमेशा उद्वेलित करते रहेंगे।
Dharmayudh
- Author Name:
Yashpal
- Book Type:

-
Description:
यशपाल के लेखकीय सरोकारों का उत्स सामाजिक परिवर्तन की उनकी आकांक्षा, वैचारिक प्रतिबद्धता और परिष्कृत न्याय-बुद्धि है। यह आधारभूत प्रस्थान बिन्दु उनके उपन्यासों में जितनी स्पष्टता के साथ व्यक्त हुए हैं, उनकी कहानियों में वह ज़्यादा तरल रूप में, ज़्यादा गहराई के साथ कथानक की शिल्प और शैली में न्यस्त होकर आते हैं। उनकी कहानियों का रचनाकाल चालीस वर्षों में फैला हुआ है। प्रेमचन्द के जीवनकाल में ही वे कथा-यात्रा आरम्भ कर चुके थे, यह अलग बात है कि उनकी कहानियों का प्रकाशन किंचित् विलम्ब से आरम्भ हुआ। कहानीकार के रूप में उनकी विशिष्टता यह है कि उन्होंने प्रेमचन्द के प्रभाव से मुक्त और अछूते रहते हुए अपनी कहानी-कला का विकास किया। उनकी कहानियों में संस्कारगत जड़ता और नए विचारों का द्वन्द्व जितनी प्रखरता के साथ उभरकर आता है, उसने भविष्य के कथाकारों के लिए एक नई लीक बनाई, जो आज तक चली आ रही है। वैचारिक निष्ठा, निषेधों और वर्जनाओं से मुक्त न्याय तथा तर्क की कसौटियों पर खरा जीवन—ये कुछ ऐसे मूल्य हैं जिनके लिए हिन्दी कहानी यशपाल की ऋणी है।
‘धर्मयुद्ध’ कहानी-संग्रह में उनकी ये कहानियाँ शामिल हैं : ‘धर्मयुद्ध’, ‘मनु की लगाम’, ‘विश्वास की बात’, ‘जनगणमन अधिनायक जय हे...’, ‘खतडुआ’, ‘मतिराम की बहादुरी’, ‘420’, ‘आत्मिक प्रेम’, ‘मंगला और डॉक्टर’।
Kathgodam
- Author Name:
Krishna Kumar
- Book Type:

-
Description:
कृष्ण कुमार सिर्फ़ पेशे से नहीं, पैशन से भी शिक्षाशास्त्री हैं और अपने गहरे मानव-बोध के चलते समाजशास्त्री। उनके लेखन में कहीं भी, कभी भी यह नहीं लगता कि यह उन्होंने किसी व्यावसायिक तक़ाज़े पर लिखा है। उनकी चिन्ताओं की वास्तविकता को उनके गद्य की संरचना स्वयं बयान कर देती है।
इस पुस्तक में उनकी कहानियाँ हैं। कहने की आवश्यकता नहीं कि जिस तरह उनका वैचारिक लेखन अपने सरोकारों और चिन्ताओं को स्पष्ट ढंग से रेखांकित करते हुए हमें एक समर्थ गद्य भी उपलब्ध कराता है जिससे हिन्दी के लिक्खाड़ भी कुछ सीख सकते हैं, उसी तरह उनकी ये कहानियाँ कहानी के मौजूदा बाज़ार में एक अलग कोने से किया गया हस्तक्षेप हैं। ये एक समाजशास्त्री द्वारा लिखी हुई कहानियाँ हैं जिनमें वह कहानी विधा के प्रचलित पैमानों से ज़्यादा फ़िक्र इस बात की करता है कि उसके देखे-जाने सुख-दु:ख अपनी पूरी गहराई और फैलाव के साथ भाषा में अंकित हो सकें।
वे अपनी बात को पहुँचाना चाहते हैं, सिर्फ़ 'रच' देना भर उनका उद्देश्य नहीं है, और पहुँचाने की यह इच्छा भी उनकी भाषा की शिराओं में बिंधी मिलती है। वे भाषा को वह पूरा का पूरा दे देना चाहते हैं जो उनकी संवेदना ने अपने परिवेश से पाया, महसूस करने की अपनी क्षमता के चलते जो उन्होंने जाना, और जिसने उन्हें व्यथित किया। और इसके लिए वे भाषा को इतना समर्थ बनाने का प्रयास करते हैं जितनी वह अपने देश और काल की सीमाओं के भीतर हो सकती है। हर बड़ा लेखक यही करता है। वह अभिव्यक्ति के उपलब्ध और प्रचलित भाषिक उपकरणों में अपनी बात कहकर सन्तुष्ट नहीं होता। वह जान रहा होता है कि उसे अपने शब्दों को उस तरह प्रशिक्षित करके बाहर भेजना है कि वे अपनी पूरी बात कहकर ही रहें।
इन कहानियों के विषय विविध हैं। हिन्दी में और भी कहानियाँ इन्हीं विषयों पर या इन जैसे विषयों पर लिखी गई हैं, लिखी जाएँगी, लेकिन जिस तरह कृष्ण कुमार उन्हें लिखते हैं, वह अपनी एक अलग श्रेणी बनाता है।
Lihaaf
- Author Name:
Ismat Chugtai
- Book Type:

-
Description:
बहैसियत अदबी भाषा उर्दू की ताक़त जिन कुछ लेखकों को पढ़ते हुए एक ठोस आकार की शक्ल में नमूदार होती है, उनमें इस्मत चुग़ताई को चोटी के कुछ नामों में शुमार किया जा सकता है। जहाँ तक ज़बान को इस्तेमाल करने के हुनर का सवाल है, बेदी और मंटो में भी वह महारत दिखाई नहीं देती जो उनमें दिखती है। बेदी कहानी को मूर्तिकार की सी सजगता से गढ़ते थे और मंटो की कहानी अपने समय के कैनवस पर अपना आकार ख़ुद लेती थी। लेकिन इस्मत की कहानी भाषा और भाषा में बिंधी हुई सदियों की मानव-संवेदना की चाशनी से इस तरह उठती है जैसे किसी खौलती हुई कड़ाही में, भाप को चीरकर कोई मुजस्समा उठ रहा हो।
इससे यह नहीं समझ लिया जाना चाहिए कि इस्मत अपनी कहानी में कोई कलात्मक चमत्कार करती हैं, वह ज़िन्दगी से अपने सच्चे लगाव को कहानी का ज़रिया बनाती हैं और जिस शब्दावली का चयन उनकी ज़बान करती है, वह ख़ुद भी ज़िन्दगी से उनके इसी शदीद इश्क़ से तय होती है। सिर्फ़ कोई एक शब्द या कोई एक पद, और आपको अपनी आँखों के सामने पूरा एक दृश्य घटित होता दिखता है। ‘यह इतना बड़ा चीख़ता-चिंघाड़ता बम्बई’ —इस संग्रह की पहली ही कहानी में यह एक वाक्य आता है, और सच में बम्बई को किसी और तरह से चित्रित करने की ज़रूरत नहीं रह जाती। इसी बम्बई में सरला बेन हैं। ‘कभी किसी ने उन्हें हटकर रास्ता देने की ज़रूरत तक न महसूस की। लोग दनदनाते निकल जाते और वह आड़ी होकर दीवार से लग जातीं।’ एक कहानी का यह एक वाक्य क्या एक मानव जाति के एक प्रतिनिधि के बरसों का ख़ाका नहीं खींच देता।
यही हैं इस्मत चुग़ताई, जिन्हें यूँ ही लोग प्यार से आपा नहीं कहा करते थे। जिस मुहब्बत से वे अपने किरदारों और उनके दु:ख-सुख को पकड़ती थीं, वही उनके आपा बन जाने का सर्वमान्य आधार था। इस किताब में उनकी सत्रह एक से एक कहानियाँ शामिल हैं जिनमें प्रसिद्ध 'लिहाफ़' भी है। इसमें उन्होंने समलैंगिकता को उस वक़्त अपना विषय बनाया था जब समलैंगिकता के आज जवान हो चुके पैरोकार गर्भ में भी नहीं आए थे। और इतनी ख़ूबसूरती से इस विषय को पकड़ना तो शायद आज भी हमारे लिए मुमकिन नहीं है। उनकी सोच की ऊँचाई के बारे में जानने के लिए सिर्फ़ इसी को पढ़ लेना काफ़ी है।
Uf! Ye Student Life
- Author Name:
Harminder Singh
- Book Type:

- Description: "जब दसवीं पास की, उस वक्त मेरे पास अनगिनत किस्से और कहानियों का खजाना था। करीब दो साल बाद उन्हें सहेजना शुरू किया। गरमी की एक दोपहर को पहली कहानी लिखी। फिर रोज लिखने का सिलसिला शुरू हो गया। एक महीने बाद करीब 17 कहानियाँ थीं। उसके बाद जिंदगी बहुत तेज भागी। मैंने उन पन्नों को भुला दिया, जो कभी लिखे गए थे। जब उनका ध्यान आया तो आज-कल चलता रहा। फिर आया 2020, जिसमें कोरोना की एंट्री हुई। यह वक्त मुश्किल था, जब लॉकडाउन ने जिंदगी को थाम दिया। वक्त मानो ठहर गया। मैंने दशकों पुराने पन्नों को निकाला। उन्हें पढ़ा, फिर पढ़ा, दोबारा लिखा, पढ़वाया, किस्सों को नया फ्लेवर दिया। इस तरह ‘उफ! ये स्टूडेंट लाइफ’ ने एक किताब की शक्ल ली। छात्र जीवन की अनेक रोचक-रोमांचक किस्सों व घटनाओं का ऐसा संकलन, जो पाठकों को आकर्षित करेगा, प्रेरित करेगा और वे उनसे अपनी निकटता अनुभव करेंगे। "
Mithuna
- Author Name:
Vasudhendra
- Book Type:

- Description: ತೆಲುಗುನಲ್ಲಿ ಶ್ರೀರಮಣ ಬರೆದ ಈ ಕಥಾಸಂಕಲನ ಬಹಳ ಪ್ರಸಿದ್ಧಿಯನ್ನು ಪಡೆದಿದೆ. ಸುಮಾರು ಮೂರು ಲಕ್ಷಕ್ಕೂ ಹೆಚ್ಚು ಪ್ರತಿಗಳು ಆಂಧ್ರದಲ್ಲಿ ಮಾರಾಟವಾಗಿವೆ. ’ಮಿಥುನ’ ಕತೆಯನ್ನು ಆಧರಿಸಿ ಹಲವಾರು ಭಾಷೆಗಳಲ್ಲಿ ಸಿನಿಮಾ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ. ಕನ್ನಡದ ಓದುಗರು ಇದನ್ನು ಅತ್ಯಂತ ಪ್ರೀತಿಯಿಂದ ತಮ್ಮ ನಾಡಿನ ಕತೆಗಳೆನ್ನುವಂತೆ ಸ್ವೀಕರಿಸಿದ್ದಾರೆ. ಸುಮಾರು ನಾಲ್ಕು ತಂಡಗಳು ಈ ಕತೆಗಳನ್ನು ಆಧರಿಸಿ ನಾಟಕವನ್ನು ರಂಗಭೂಮಿಗೆ ತಂದಿವೆ. ಕೊಡವ ಭಾಷೆಯಲ್ಲಿಯೂ ’ಮಿಥುನ’ ಕತೆಯನ್ನು ಆಧರಿಸಿ ನಾಟಕ ಮಾಡಿಸಿದ್ದು ಈ ಕತೆಯ ಹೆಗ್ಗಳಿಕೆ ಮತ್ತು ಜನಪ್ರೀತಿಗೆ ಧ್ಯೋತಕವಾಗಿದೆ.
Mutton Dilruba
- Author Name:
Shubham Upadhyay
- Book Type:

- Description: हिंदी साहित्य जगत में एक बिल्कुल भिन्न स्वर के कहानीकार हैं शुभम उपाध्याय। उनके इस कहानी संग्रह ‘मटन दिलरुबा’ में कुल 18 कहानियाँ हैं। पूरा संग्रह एक नयी तासीर और अनुभवबोध से पाठकों को परिचित कराता है। इनकी कहानियों का सम्बन्ध भारतीय मुस्लिम जीवन से है। हिंदी कहानियों पर होनेवाली तमाम चर्चाओं में यह बात अक्सर उठती रही है कि हिंदी साहित्य में रोजमर्रा के मुस्लिम जीवन और किरदारों पर बहुत कम लिखा गया है। यह सच भी है। ऐसे में शुभम उपाध्याय ने जो कर दिखाया है, वह पूरे साहित्य जगत के लिए शुभ है। 18 सितंबर 1989 को सागर,म.प्र. में जन्मे शुभम उपाध्याय ने इंदौर से बी.ई.(आई.टी.) की डिग्री प्राप्त की. संस्था श्यामलम् द्वारा ‘सर्वश्रेष्ठ युवा सम्मान 2015’ से सम्मानित शुभम ने अब तक अपनी साहित्य यात्रा में नाट्य लेखन, आदिकाव्य और शायरी जैसी विधाओं में प्रमुखता से हस्तक्षेप किया है. शुभम उपाध्याय की पुस्तक “मटन दिलरूबा” ,18 बेहतरीन कहानियों का एक लाजवाब संग्रह है, जो एक नयी तासीर और एक अलग क़िस्म के तिलिस्म से पाठकों का परिचय करवाता है।
Do Sakhiyan
- Author Name:
Shivani
- Book Type:

-
Description:
महिला कथाकारों में जितनी ख्याति और लोकप्रियता शिवानी ने प्राप्त की है, वह एक उदाहरण है श्रेष्ठ लेखन के लोकप्रिय होने का। शिवानी लोकप्रियता के शिखर को छू लेनेवाली ऐसी हस्ती हैं, जिनकी लेखनी से उपजी कहानियाँ कलात्मक भी होती हैं और मर्मस्पर्शी भी।
अन्तर्मन की गहरी पर्तें उघाड़नेवाली ये मार्मिक कहानियाँ शिवानी की अपनी मौलिक पहचान हैं जिनके कारण उनका अपना एक व्यापक पाठक वर्ग तैयार हुआ।
इनकी कहानियाँ न केवल श्रेष्ठ साहित्यिक उपलब्धियाँ हैं, बल्कि रोचक भी इतनी हैं कि आप एक बार शुरू करके पूरी पढ़े बिना छोड़ ही न सकेंगे।
प्रस्तुत संग्रह में ‘उपप्रेती’, ‘दो सखियाँ’, ‘चाँचरी’, ‘पाथेय’ एवं ‘बन्द घड़ी’ कहानियाँ संकलित हैं। हर कथा अपनी मोहक शैली में अभिभूत कर देने की अपार क्षमता रखती है।
कलात्मक कौशल के साथ रची गईं ये कहानियाँ हमारी धरोहर हैं जिन्हें आज की नई पीढ़ी अवश्य पढ़ना चाहेगी।
Riyaz Aur Anya Kahaniyan
- Author Name:
T. Janakiraman
- Book Type:

- Description: तमिल साहित्य के सुपरिचित हस्ताक्षर टी. जानकीरामन की ये कहानियाँ भारतीय समाज की उन विडम्बनाओं को गहरी समझदारी और बारीकी से अंकित करती हैं जिनसे हम आज भी जूझ रहे हैं। मिसाल के तौर पर संग्रह की पहली ही कहानी ‘रियाज़’। जाति की अमानवीय मौजूदगी इस कहानी में जिस तरह उभरकर आती है एकबारगी चौंका देती है। नीची मानी जाने वाली एक जाति के प्रतिभावान युवक को संगीत सिखाने की इच्छा के कारण मल्ली को जिस तरह गाँव में हर किसी के मज़ाक का पात्र बनना पड़ता है, उसकी नाटकीयता पाठक को हतप्रभ कर देती है। ‘निर्णय’ शीर्षक कहानी सिर्फ़ समाज की, परम्पराओं की और स्त्री की विवशता की नहीं, भावनाओं के एक अबूझ संजाल की कहानी भी है, जो हमें प्रश्नों के एक भाव-विगलित चक्र में छोड़ जाती है। छोटी-छोटी घटनाओं को लेकर लिखी गईं ये कहानियाँ अपने प्रवाह और सूक्ष्म पर्यवेक्षण के चलते अत्यन्त पठनीय बन पड़ी हैं; और कुछ देर के लिए आपको सिर्फ़ अपने दायरे में जैसे सम्मोहित कर लेती हैं। हिन्दी पाठकों के लिए नया आस्वाद और अलग भावभूमि पर रचीं गईं दिलचस्प कहानियाँ।
Qissa-Qissa Lucknowaa
- Author Name:
Zilani Bano
- Book Type:

- Description: ्सागोई उर्दू ज़बान का कदीमी फ़न है, जिसे वक़्त के साथ भुला दिया गया था, लेकिन इधर कुछ लोगों की कोशिशों के चलते यह कला वापस मुख्यधारा में आ रही है। हिमांशु बाजपेयी इन्हीं जियालों में एक हैं। इस किताब में उनके लखनऊ से मुतल्लिक क़िस्से हैं जिन्हें उन्होंने लोगों से, बड़े-बूढ़ों से, किताबों से, और कुछ ख़ुद के अपने तजुर्बों से हासिल करके क़लमबंद किया है। कुछ क़िस्से हो सकता है, पहले आपने सुने हों, लेकिन यहाँ हिमांशु ने उन्हें जिस तरह पेश किया है, वह उन्हें उनके क़िस्से बना देता है। एक बात और, लखनऊ के बारे में क़िस्सों की बात आती है तो ध्यान सीधे नवाबों के क़िस्सों की तरफ़ चला जाता है, लेकिन ये क़िस्से आमजन के हैं। लखनऊ की गलियों-मुहल्लों में रहने-सहनेवाले आम लोगों के क़िस्से। इनमें उनके दु:ख-दर्द भी हैं, उनकी शरारतें भी हैं, उनकी हिकमतें और हिमाकतें भी हैं, गरज़ कि वह सब है जो हर आम शख़्स इतिहास द्वारा गढ़े किसी भी नवाब या बादशाह से बड़ी और ज़्यादा काबिले-यक़ीन शय बनता है। बकौल हिमांशु वाजपेयी ‘‘ये क़िस्से लखनऊ की मशहूर तहज़ीब के ‘जनपक्ष’ को उभारते हैं...ज़्यादातर क़िस्से सच्चे हैं। कुछ एक सच्चे नहीं भी हैं...।’’ लेकिन इंसान के रुतबे को बतौर इंसान देखने की उनकी मंशा एकदम सच्ची है। लखनऊ के नवाबों के क़िस्से तमाम प्रचलित हैं, लेकिन अवाम के क़िस्से किताबों में बहुत कम मिलते हैं, जो उपलब्ध हैं, वह भी बिखरे हुए। यह किताब पहली बार उन तमाम बिखरे क़िस्सों को एक जगह बेहद ख़ूबसूरत भाषा में सामने ला रही है, जैसे एक सधा हुआ दास्तानगो सामने बैठा दास्तान सुना रहा हो
Ratna-Kangan Tatha Anya Kahaniyan
- Author Name:
Aleksandr Kuprin
- Book Type:

- Description: कुप्रिन के पास समाज के हर तबक़े के पात्र के लिए अचूक अन्तर्दृष्टि थी और था एक स्पष्ट उद्देश्य—यथार्थ का अविकल अंकन और अन्याय का प्रतिरोध। वे अपनी कहानियों में हर तरह की विषमता को बड़ी संवेदनशीलता से रेखांकित करते हैं। प्रस्तुत संग्रह की कहानियाँ इसका मुकम्मल उदाहरण है। इसकी शीर्षक-कथा ‘रत्न-कंगन’ एक क्लर्क के एक राजसी महिला से एकतरफा प्रेम की कहानी है जो धीरे-धीरे उदात्त प्रेम पर लम्बे चिन्तन के आख्यान में बदल जाती है।
Pathar Ke Neeche Dabe Hue Hath
- Author Name:
Rajkamal Chaudhary
- Book Type:

-
Description:
राजकमल चौधरी की कहानियाँ परमाणु में पर्वत के समावेश की कहानियाँ हैं, जो मानव-जीवन के अनछुए प्रसंगों से उठाकर लाई गई हैं, जिनमें राजकमल की सारी की सारी कहानी-कला मौजूद है और लगता ऐसा है कि इनमें कोई कला नहीं दिखाई गई है। जनजीवन का सत्य ज्यों का त्यों रख दिया गया है। सच्ची घटनाएँ तो अख़बारी रिपोर्टों में बयान होती हैं, कहानी में घटनाएँ सच की तरह आती हैं। घटनाएँ सच हों, इससे ज़्यादा ज़रूरी है कि वे सच लगें भी। राजकमल की कहानियों की यह ख़ास विशेषता है कि वे सारी घटनाएँ सच हों या न हों, सच लगती अवश्य हैं।
धर्म, साहित्य, नौकरी, व्यापार, फ़िल्म, सामाजिक जीवन-यापन...तमाम क्षेत्रों की विकृतियों का इतनी सूक्ष्मता से यहाँ पर्दाफ़ाश किया गया है कि वे अचानक तार-तार हो जाती हैं। छोटे-छोटे स्वार्थों की पूर्ति, क्षणिक मनोवेगों की पुष्टि के लिए मनुष्य किस सीमा तक गिर सकता है; संन्यासी और सिद्ध योगी और यहाँ तक कि देवता की छवि रखनेवाला भी पल-भर में कैसा जानवर हो जाता है; ख़ूँख़ार जानवर कैसा गऊ हो जाता है; शेर की दहाड़ और आतंक का मालिक पल-भर में कैसे गीदड़, चूहा, केंचुआ, चींटी हो जाता है और रेंगने लगता है—मानव-जीवन की इसी उठा-पटक का एलबम है—राजकमल की कहानियाँ।
Manto Kaha Hai
- Author Name:
Nazm Subhash
- Book Type:

- Description: This Books doesn’t have a description
Geeli Paank
- Author Name:
Ushakiran Khan
- Book Type:

- Description: This book has no description
Indian Short Stories 1900 To 2000
- Author Name:
E. V. Ramakrishnan
- Rating:
- Book Type:

- Description: This collection of 43 stories from 21 languages highlights India's diverse and intricate life. They depict everything from the chaos and mass hysteria of partition to the suppressed anger and self-pity of people trapped in broken homes. These narratives explore both outer experiences and internal struggles within Indian society. The stories emphasise the sacred and the profane, as well as the voices of the elite and the marginalised, serving as mirrors for self-reflection. Together, these tales trace a transformative century during which India emerged as a unified nation. The vivid imagery from the tumultuous 20th century is both disturbing and enlightening.
Adoration of the Ancients
- Author Name:
Ravichnadra P. Chittampalli +1
- Book Type:

- Description: Adorations of the Ancients offers a complete English translation of all 19 stories from Vaddaradhane in a single volume. These stories represent the earliest prose in 10th-century Halagannada. Initially, they seem to be highly religious, emphasising ethics and morality aligned with the Jain tradition. However, as creative works, they function on multiple levels: realistic, mythical, fantastic, quasi-historical, worldly, monarchical, economic, and socio-cultural. The characters are consistently portrayed within various economic classes and, interestingly, rarely within caste groups. Women characters are depicted as strong and decisive. This translation is based on R.L. Anantharamaiah’s edition of Shivakotyacharya’s Vaddaradhane. It aims to balance the limitations and scope of equivalents and approximations, making the reading experience enjoyable while maintaining scholarly interest.
Ek Kanika Ki Yatra
- Author Name:
Sitarani
- Book Type:

- Description: This book has no description
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book