Whispers of Wisdom
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Author:
Radhika NagrathPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
EnglishCategory:
Short-story-collections₹
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It is modern wisdom for modern problems, packed into this book. If one has clarity of concept, the age-old truths and scientific principles apply to modern-age problems in a fitting manner. Each chapter is drawn from a different domain of life. There are tips for becoming a successful manager, leading a happy married life, health benefits of fasting, the role of the mind in curing diseases and the like. Besides, the challenges facing all-inclusive Hindu Dharma, the needs of a healthy society, and the power of the feminine divine make it a universal handbook. It explains why faith is not merely a material emotion or an illogical argument, but has a reason and a revelation attached to it. This book asks us to wake up for the sake of our own happiness. So, come and know yourself, thus recreating happiness for yourself. Goodness is all-inclusive, and it needs to be spread. Why does a worker bee work tirelessly with no individual benefit of its own? Its behaviour is for the greater being of the whole colony, similar to the behaviour of wasps and other such social insects. They inspire the bigger social animal, man, to keep spreading goodness. And this ‘WOW’ (Whispers of Wisdom) goads us to do good, be good and speak good. Scattered here and there are power-packed energy whispers with the power to blast dormant minds and uplift the depressed spirits Forgive, forget and move on. Many such mantras help us move forward in life and break our karmic cycle—liberating us from the knots, making us free. Contents A Word to The fellow seekers... —7 1. Making or Marring our Image——15 2. Life of Values and Virtues——35 3. Stirring a Spoonful of Happiness in Your Life—52 4. Mother Mine — Mother Divine——68 5. Love is the Only Way—86 6. Needs of a Healthy Society——98 7. Education for Enablement and Liberation——115 8. Life of Fulfilment——132 9. Path to Reality——145 10. Steps to the Ultimate Journey of Death——159
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It is modern wisdom for modern problems, packed into this book. If one has clarity of concept, the age-old truths and scientific principles apply to modern-age problems in a fitting manner. Each chapter is drawn from a different domain of life. There are tips for becoming a successful manager, leading a happy married life, health benefits of fasting, the role of the mind in curing diseases and the like. Besides, the challenges facing all-inclusive Hindu Dharma, the needs of a healthy society, and the power of the feminine divine make it a universal handbook.
It explains why faith is not merely a material emotion or an illogical argument, but has a reason and a revelation attached to it. This book asks us to wake up for the sake of our own happiness. So, come and know yourself, thus recreating happiness for yourself.
Goodness is all-inclusive, and it needs to be spread. Why does a worker bee work tirelessly with no individual benefit of its own? Its behaviour is for the greater being of the whole colony, similar to the behaviour of wasps and other such social insects. They inspire the bigger social animal, man, to keep spreading goodness. And this ‘WOW’ (Whispers of Wisdom) goads us to do good, be good and speak good. Scattered here and there are power-packed energy whispers with the power to blast dormant minds and uplift the depressed spirits
Forgive, forget and move on. Many such mantras help us move forward in life and break our karmic cycle—liberating us from the knots, making us free.
Contents
A Word to The fellow seekers... —7
1. Making or Marring our Image——15
2. Life of Values and Virtues——35
3. Stirring a Spoonful of Happiness in Your Life—52
4. Mother Mine — Mother Divine——68
5. Love is the Only Way—86
6. Needs of a Healthy Society——98
7. Education for Enablement and Liberation——115
8. Life of Fulfilment——132
9. Path to Reality——145
10. Steps to the Ultimate Journey of Death——159
Book Details
-
ISBN9788184305272
-
Pages162
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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“...खेतों की मुँडेरों पर से दीखते बबूल, कीकर, कच्चे घरों से उठता धुआँ, रात के सुनसान में सरपट भागते घोड़े, छवियाँ लशकाते डाकू, घरों से पेटियाँ धकेलते चोर, कनखियों से एक-दूसरे को रिझाते जवान मर्द और औरतें, भोले-भाले बच्चे, लम्बे सफ़र समेटते डाची सवार—समय और स्थितियों से सीनाज़ोरी करते बलवन्त सिंह के पात्र पाठक को देसी दिलचस्पियों से घेरे रहते हैं। कुछ कर गुज़रने के लिए जिस साहस की ज़रूरत इन्हें है, उसे कलात्मक उर्जा से मंज़िल तक पहुँचाने का फ़न लेखक के पास मौजूद है। बलवन्त सिंह के यहाँ धुँधलके और ऊहापोह की झुरमुरी कहानियाँ नहीं, दिन के उजाले में, रात के एकान्त में स्थितियों को चुनौती देते साधारण जन और उनका असाधारण पुरुषार्थ है। बलवन्त सिंह सिर्फ़ आदमी को ही नहीं रचते, कहानी की शर्त पर उसके खेल और कर्म को भी तरतीब देते हैं। वे शोषण और संघर्ष का नाम नहीं लेते, इसे केन्द्र में लाते हैं। यही कारण है कि उनके यहाँ नुमाइशी-पात्र नहीं, जीते-जागते हाड़-मांस के साधारण खुरदरे लोग मिलते हैं। वह अपनी कोशिशों की कामयाबी और बड़ी नाकामयाबी को भी जिए जाते हैं किसी अगले मौक़े की उम्मीद में...” —कृष्णा सोबती (भूमिका से)
Shankh-Nad
- Author Name:
Jagdish Prasad Singh
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‘शंख-नाद’ संग्रह की कहानियों की रचना किसी एक काल-खंड में नहीं हुई। लेकिन कतिपय विशेषताएँ इनमें समान रूप से विद्यमान हैं, और ये विशेषताएँ इन्हें हिन्दी के अन्य कथाकारों की कहानियों से अलग करती हैं। इनकी एक विशेषता यह है कि यद्यपि इनमें भारतीय समाज के एक युग की तसवीर है, यह तसवीर देश और काल की सीमाओं को पार कर सार्वभौमिक और सर्वयुगीन हो जाती है। हर कहानी का एक अलग कथ्य है, जो पूरी तरह से भारतीय समाज के यथार्थ को प्रतिच्छवित करता है; लेकिन पात्रों का जो व्यक्तित्व उभरता है, वह मानव-चरित्र के उस यथार्थ को प्रतिच्छवित करता है जो हर भूमि और हर काल में अपरिवर्तित रहता है।
इन पात्रों के चित्रण में कहानीकार उतना ही तथ्यपरक है जितना ईश्वर अपनी सृष्टि में है। इससे पाठक पर स्वयमेव एक दायित्व आ जाता है; वह अपने-आपको आनन्द की तलाश करने वाले एक दर्शक के साथ-साथ उचित-अनुचित में भेद करने वाले न्यायाधीश की भूमिका में पाता है। हिन्दी में ऐसी कहानियाँ कम हैं, और यह संग्रह कहानीकारों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
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