Titli Dhoop
About the book
‘तितली धूप’ संग्रह की कहानियों में ऐसी स्मृतियाँ और अनभिव विन्यस्त हैं जिनमें खिले हुए रंगीन फूलों की खुशबू और उन्माद है तो खुले घाव से रिसते दर्द की कसक भी है। एक सघन-समृद्ध भाषा जीवन यथार्थ की तमाम संश्लिष्टता और सिलवटों से अविच्छिन्न नाता बनाए रखती है। अमूर्तन और यथार्थ का दुर्लभ संतुलन इन कहानियों में ऐसे दृश्य रचता है जो पाठक को सुखद विस्मय से भर देता है। इस संग्रह में ग्रामीण और आदिवासी जीवन की कहानियाँ भी हैं जिनमें दुख, शोषण, गरीबी और बर्बर होते समय की यथार्थ और पारदर्शी छवियाँ हैं। साथ ही भूमंडलीकरण के उत्तर समय के आतंक और सूचना-तकनीक की धूर्त प्रविधियों को कहानी की घटनात्मकता में जीवन मूल्यों की चुनौती की तरह प्रस्तुत किया गया है। इन कहानियों में मनुष्य की गरिमा और उसकी करुणा का संसार है जो इसके विनाश में लाभ का अवसर देखने वाले कारक आशयों तक ले जाकर उनके लिए घृणा का प्रति संसार भी रचती हैं। बाजार की बदनीयती को समझने के बावजूद व्यक्ति अपने ज्ञान के अकेलेपन के साथ रहने को अभिशप्त है। इन कहानियों में लोभ-मग्न होते जा रहे इस उत्तर आधुनिक समय में व्यक्ति की जकड़न की यंत्रणा और मुक्ति की इच्छा, दोनों मौजूद हैं। यहाँ मनुष्य के गरिमापूर्ण सुखद जीवन की दृढ़ लेकिन सरल माँग है। ये कहानियाँ संघर्ष और आवेश को उस संयम और धैर्य के साथ प्रस्तुत करती हैं जो आशयों और सरोकारों के लिए जरूरी है।
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About the Book
‘तितली धूप’ संग्रह की कहानियों में ऐसी स्मृतियाँ और अनभिव विन्यस्त हैं जिनमें खिले हुए रंगीन फूलों की खुशबू और उन्माद है तो खुले घाव से रिसते दर्द की कसक भी है।
एक सघन-समृद्ध भाषा जीवन यथार्थ की तमाम संश्लिष्टता और सिलवटों से अविच्छिन्न नाता बनाए रखती है। अमूर्तन और यथार्थ का दुर्लभ संतुलन इन कहानियों में ऐसे दृश्य रचता है जो पाठक को सुखद विस्मय से भर देता है।
इस संग्रह में ग्रामीण और आदिवासी जीवन की कहानियाँ भी हैं जिनमें दुख, शोषण, गरीबी और बर्बर होते समय की यथार्थ और पारदर्शी छवियाँ हैं। साथ ही भूमंडलीकरण के उत्तर समय के आतंक और सूचना-तकनीक की धूर्त प्रविधियों को कहानी की घटनात्मकता में जीवन मूल्यों की चुनौती की तरह प्रस्तुत किया गया है।
इन कहानियों में मनुष्य की गरिमा और उसकी करुणा का संसार है जो इसके विनाश में लाभ का अवसर देखने वाले कारक आशयों तक ले जाकर उनके लिए घृणा का प्रति संसार भी रचती हैं। बाजार की बदनीयती को समझने के बावजूद व्यक्ति अपने ज्ञान के अकेलेपन के साथ रहने को अभिशप्त है। इन कहानियों में लोभ-मग्न होते जा रहे इस उत्तर आधुनिक समय में व्यक्ति की जकड़न की यंत्रणा और मुक्ति की इच्छा, दोनों मौजूद हैं। यहाँ मनुष्य के गरिमापूर्ण सुखद जीवन की दृढ़ लेकिन सरल माँग है।
ये कहानियाँ संघर्ष और आवेश को उस संयम और धैर्य के साथ प्रस्तुत करती हैं जो आशयों और सरोकारों के लिए जरूरी है।
Book details
- Format
- Paperback
- Publisher
- Rajkamal Prakashan Samuh
- Edition
- 2nd
- Publication year
- 2022
- Weight
- 210 grams
- ISBN-13
- 9789393768087
- Pages
- 176
- Reading time
- ~6 hrs
- Age
- 18+
- Country of origin
- India
- Dimensions
- 14 × 21.5 cm
- Language
- Hindi
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