Pratinidhi kahaniyan : Ramdarash Mishra
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Author:
Om Nischal, Ramdarash MishraPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
199
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रामदरश मिश्र की कहानियों का व्यास चौड़ा है। उनकी चिन्ताओं का छोर व्यापक है। किन्तु जिस एक बात को उन्होंने आज तक सर्वाधिक तरजीह दी है, वह है कहानियों की पठनीयता। वे प्रेमचन्द और रेणु के बाद की पीढ़ी के ग्रामीण रचनाकार हैं सो वे ग्रामीण भारत की समस्याओं को नहीं भूलते, अपने इलाके का दर्द नहीं भूलते। वहाँ का सामन्ती आचरण, दरिद्रता, गरीबी, मान-अपमान, अहं में जी रहा सवर्ण समुदाय, भूखे रहने पर विवश दलित और वंचित—सब उनकी निगाह में हैं। उनकी कहानियाँ इन सभी मुद्दों को उठाती हैं। जिस लहज़े में ‘राग दरबारी’ में श्रीलाल शुक्ल ने लिखा है, यहाँ से भारतीय देहात का महासागर शुरू होता है, वह महासागर रामदरश जी के कथा संसार में लहराता मिलता है। कितने आन्दोलन उनके सामने से होकर गुजरे, पर वे उस शोर-शराबे के बीच भी अनुभव, बोध और रूपबन्ध के स्तर पर वैविध्यपूर्ण कहानियाँ लिखते रहे और आज भी उसी त्वरा के साथ विभिन्न विधाओं को अपनी रचनात्मकता से समृद्ध कर रहे हैं। प्रतिनिधि कहानियाँ में सम्मिलित कथा संसार उनकी इसी बहुवस्तुस्पर्शिता का परिचायक है।<br>—ओम निश्चल
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रामदरश मिश्र की कहानियों का व्यास चौड़ा है। उनकी चिन्ताओं का छोर व्यापक है। किन्तु जिस एक बात को उन्होंने आज तक सर्वाधिक तरजीह दी है, वह है कहानियों की पठनीयता। वे प्रेमचन्द और रेणु के बाद की पीढ़ी के ग्रामीण रचनाकार हैं सो वे ग्रामीण भारत की समस्याओं को नहीं भूलते, अपने इलाके का दर्द नहीं भूलते। वहाँ का सामन्ती आचरण, दरिद्रता, गरीबी, मान-अपमान, अहं में जी रहा सवर्ण समुदाय, भूखे रहने पर विवश दलित और वंचित—सब उनकी निगाह में हैं। उनकी कहानियाँ इन सभी मुद्दों को उठाती हैं। जिस लहज़े में ‘राग दरबारी’ में श्रीलाल शुक्ल ने लिखा है, यहाँ से भारतीय देहात का महासागर शुरू होता है, वह महासागर रामदरश जी के कथा संसार में लहराता मिलता है। कितने आन्दोलन उनके सामने से होकर गुजरे, पर वे उस शोर-शराबे के बीच भी अनुभव, बोध और रूपबन्ध के स्तर पर वैविध्यपूर्ण कहानियाँ लिखते रहे और आज भी उसी त्वरा के साथ विभिन्न विधाओं को अपनी रचनात्मकता से समृद्ध कर रहे हैं। प्रतिनिधि कहानियाँ में सम्मिलित कथा संसार उनकी इसी बहुवस्तुस्पर्शिता का परिचायक है।<br>—ओम निश्चल
Book Details
-
ISBN9789394902381
-
Pages143
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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स्पष्टता के मैदान में प्रेमचन्द बड़ी-से-बड़ी बात को बड़े उलझन के अवसर पर कुछ इस तरह सुलझा कर कह जाते हैं कि मुश्किल-से-मुश्किल बात हमारे रोजमर्रा के, घरेलू जीवन की जानी-पहचानी चीज हो जाती है। उनकी बातों में कुछ ऐसा अनुभव का मर्म भरा होता है कि आदमी उसे कंठस्थ कर लेना चाहता है। उनकी बात स्पष्ट, दो टूक निर्णय होती है। और उनकी कलम सब जगह पहुँचती है, अँधेरे में भी धोखा नहीं देती। —जैनेन्द्र कुमार
Mansarovar Vol. 2 : Lottery Aur Anya kahaniyan
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Premchand
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प्रेमचन्द की रचनाएँ आधुनिक भारत को समझने का एक महत्त्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्हीं के समय से भारतीय पुनर्जागरण का प्रारम्भ होता है, जिसके पैरों की आहट उनकी रचनाओं में महसूस होती है। राष्ट्रीय जीवन की परिवर्तनशीलता, क्रिया-प्रतिक्रिया, प्रगति एवं प्रतिक्रियावादिता, धर्म की, मानवता की परछाइयाँ प्रेमचन्द की रचनाओं में झलकती हैं। —डॉ. जाफ़र रज़ा
Katha Saptak - Mamta Kalia
- Author Name:
Mamta Kalia
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7 Short Stories
Prawas Men Aaspaas
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Hansa Deep
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Book
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