Ek Koi Dooshra
Author:
Usha PriyamvadaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections0 Ratings
Price: ₹ 159.2
₹
199
Available
एक कोई दूसरा उषा प्रियंवदा की इन कहानियों को पढ़ना भाषा की एक समतल, शान्त और काँच-सी पारदर्शी सतह पर चलना है। यह सतह अपनी स्वच्छता से हमें आश्वस्ति देती है। लेकिन यह सब भाषा तक ही सीमित है; भाषा के भीतर जो कहानी होती है, वह बेहद बेचैन कर देने वाली है। इन कहानियों को पढ़ते हुए हम एक ऐसे पाठ से गुज़रते हैं जो हमें लगातार सम्पूर्ण का आभास कराता हुआ, एक अधूरी, अतृप्त ज़िन्दगी की कसक साथ-साथ देता चलता है। एक कोई दूसरा की नीलांजना, झूठा दर्पण की अमृता कोई नहीं की नमिता, सागर पार का संगीत की देवयानी, पिघलती हुई बर्फ़ के अक्षय और छवि, चाँदनी में बर्फ़ पर के हेम और मीरा (मेरी) और टूटे हुए की तंत्री त्रिपाठी उर्फ़ टीटी - ये सब पात्र इस भाषा की बर्फ़ की-सी चमकती सतह के नीचे एक अधूरा और यातनाप्रद जीवन जी रहे हैं। अपने देश की मिट्टी से उखड़कर बाहर किसी सम्पन्न और पराए मुल्क में ‘अकेला’ और ‘अलग होकर’ रहना इस यंत्रणा का एक विशिष्ट पहलू है जिसको ये कहानियाँ लगातार रेखांकित करती हैं।
ISBN: 9788126728794
Pages: 112
Avg Reading Time: 4 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Description: फटिकचन्द महान फिल्मकार और बांग्ला साहित्य के अप्रतिम लेखक सत्यजित राय का अत्यन्त लोकप्रिय उपन्यास है। बांग्ला भाषा-भाषी समाज का शायद ही कोई व्यक्ति होगा, जो अपने किशोरवय में इस उपन्यास से न गुजरा हो। कोलकाता के एक सम्पन्न परिवार के लड़के के अपहरण की कहानी उस वक्त नया मोड़ ले लेती जब अपहर्ताओं की कार दुर्घटनाग्रस्त हो जाती है और वे लड़के को सड़क किनारे बेहोश छोड़कर भाग जाते हैं। बाद में, होश में आने पर लड़के को कुछ याद नहीं आता—न घर का पता, न माता-पिता का नाम। दरअसल दुर्घटना में चोट लगने से उसकी याददाश्त चली जाती है। फिर तो अपने आसपास के हरेक शख्स से एकदम नए सिरे से परिचित होने वाले उस किशोर के सामने एक बिलकुल नई दुनिया खुलती है, जिसमें कोलकाता महानगर की झुग्गी बस्ती का अनदेखा संसार भी शामिल है। अन्तत: याददाश्त बहाल होने और सकुशल घर लौटने तक फटिकचन्द जो कुछ देखता-जानता है, वह उसको ही नहीं, इस उपन्यास के पाठक को भी हमेशा के याद रह जाता है।
Aaj Nahi Padhunga
- Author Name:
Krishna Kumar
- Book Type:

- Description: ‘आज नहीं पढ़ूँगा’ कृष्ण कुमार की बाल कहानियों का संकलन है। घर, पड़ोस और स्कूल के आसपास घूमती बच्चों की रोज़मर्रा की ज़िन्दगी से जुड़ी यह रोमांचक कथा-शृंखला दो दशकों से चर्चा का विषय बनी हुई है। इसकी दो कहानियाँ पहली बार अज्ञेय के ‘नया प्रतीक’ में छपी थीं। बच्चों को उनके अपने मनोलोक की गहराइयों में ले जाने वाली यह किताब मामूली बातों में कौतूहल जगाती है और बार-बार पढ़ने की इच्छा पैदा करती है।
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