Hoshiyari Khatak Rahi Hai
(0)
Author:
Subhash Chandra KushwahaPublisher:
Antika Prakashan Pvt. Ltd.Language:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
100
₹ 82 (18% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
Short Stories
Read moreAbout the Book
Short Stories
Book Details
-
ISBN9789380044507
-
Pages128
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Maai Ka Shokgeet
- Author Name:
Doodhnath Singh
- Book Type:

-
Description:
‘माई का शोकगीत’ समेत इस संग्रह की पाँचों कहानियाँ इसका प्रमाण हैं कि दूधनाथ सिंह अपनी गद्य-भाषा पर कविता की तरह काम करते थे। और इस भाषा के माध्यम से वे जिस कथा को पकड़ते थे, वह हमारे जीवन का एक प्रामाणिक चित्र होता है।
‘हुँड़ार’ का निर्लज्ज और लम्पट चरित्र रायसाहब हो या ‘गुप्तदान’ के पांडेजी—ये सब वे चरित्र हैं जो होते तो हमारे आसपास ही हैं, लेकिन उन पर अक्सर हमारी निगाह नहीं जाती। हमारे देखने की व्यवस्थासम्मत आदतों के चलते ये पात्र हमारी निगाह से छूटते रहते हैं, जब तक कि कोई हमारा ध्यान उधर न ले जाए। ‘हुँड़ार’ का ‘मैं’ रायसाहब के आगमन पर अपने ‘कई तरह के गुस्से’ का जिस प्रकार विवरण देता है, वह अनायास ही हमें कुछ ऐसी उपस्थितियों के प्रति सजग कर देता है, जो अन्यथा हमें नहीं दिखतीं।
संग्रह की शीर्षक कहानी ‘माई का शोकगीत’ स्त्रियों पर घरेलू हिंसा का रोमांचकारी दस्तावेज़ है। इसमें एक स्त्री की कथा राष्ट्रीय स्वतंत्रता आन्दोलन की कथा के समानान्तर चलती है और पाठक के सामने यह सवाल छोड़ती है कि राष्ट्रों के इतिहास के समक्ष क्या व्यक्ति का इतिहास कोई अहमियत नहीं रखता?
Hasil Aur Anya Kahaniyan
- Author Name:
Rajendra Yadav
- Book Type:

-
Description:
प्रख्यात कथाकार राजेन्द्र यादव की इन कहानियों के केन्द्र में है, स्त्री-पुरुष सम्बन्ध। सामन्ती मानदंडों और मूल्यों से ग्रस्त लोगों के लिए ये कहानियाँ ‘अश्लील, आपत्तिजनक, फूहड़ और कुंठित व्यक्ति की सेक्स-भड़ास’ हो सकती हैं। लेकिन नए मानवीय विवेक के आधार पर स्त्री-पुरुष सम्बन्धों को देखने-परखने वाले पाठक इन कहानियों में उस स्त्री की करुणा और प्रतिरोध को भी लक्षित कर सकते हैं जो उसी बिस्तर से मुक्ति का नया द्वार ढूँढ़ने की बेचैन कोशिश कर रही है जहाँ वह अब तक पुरुष की हवस और क्रूरता की शिकार होती रही है। कथाकार ने खलनायकत्व का ख़तरा उठाकर भी इन कहानियों के माध्यम से पुरुष वर्ग की हिंस्र लम्पटता को परत-दर-परत उघाड़ कर रख दिया है।
कई दशकों के बाद राजेन्द्र यादव की कहानियों का यह नया संग्रह सामने आ रहा है। अपने शैली लाघव और जीवन की जटिलताओं को भीतर तक उकेरनेवाली ये कहानियाँ परिपक्व कथाभाषा के कारण भी पाठकों का ध्यान खींचेंगी। लेकिन बहुत सम्भव है कि इन कहानियों के विस्फोटक और विवादास्पद कथ्य ही चर्चा में रहे और बाक़ी बातों की ओर सुधी आलोचकों का ध्यान नहीं जाए। ये कहानियाँ मध्यवर्गीय पाठक ही नहीं, हिन्दी कथालोचना के सामने भी एक बड़ी चुनौती पेश करती हैं।
Beyond the Shores of the River Existentialism
- Author Name:
Munipalle B Raju +1
- Book Type:

- Description: English translation by Nidadavolu Malathi of Sahitya Akademi Award winning Telugu short stories Astitvanadam Aavali Teerana by Munipalle B Raju.
Teesari Hatheli
- Author Name:
Rajee Seth
- Book Type:

-
Description:
राजी के कथा-संसार में आदमी के अस्तित्व के सांस्कृतिक आयामों और मूल्यात्मक विरोधाभासों की पड़ताल के ज़्यादा बड़े सवालों से जूझने के लिए परिवार भारतीय समाज की केन्द्रीय इकाई की हैसियत से प्रतिष्ठित है। राजी की कहानियों के सन्दर्भ में यह सामाजिक-सांस्कृतिक मूल्य संवेदना का पारिवारिक देहान्तर है। कभी इस बदलाव के पीछे इतिहास या रणनीति या अर्थ की तत्काल अनुपस्थित और अदृश्य व्यवस्थाएँ हैं तो कभी सम्बन्धों में शक्ति के सन्तुलन का बदला हुआ समीकरण। लेकिन इस सुबकते संसार में मौजूद आदमी की सोच और संवेदना के बहाव और मोड़ में इतिहास, राजनीति या अर्थ के हस्तक्षेप को पहचान लेना भर इन कहानियों के लिए काफ़ी नहीं है। इस हस्तक्षेप के साथ जूझते हुए आदमी का लहूलुहान मर्म और फिर भी किसी मूल्य को खोजने, खोदने या दुह लेने की ज़िद और जूझ इन कहानियों को वहाँ तक ले जाना चाहती है, जहाँ परिवर्तन की प्रक्रिया वैचारिक मीमांसाओं और बौद्धिक विश्लेषणों की पकड़ और पहुँच से बाहर रह जाया करती है।
देखने में ये बहुत शान्त और स्थिर कहानियाँ हैं। फेन और फिचकुर उगलती, मुट्ठियाँ लहराती, उगते हुए सूरज के साथ समापन की ओर जानेवाली प्रसिद्ध रूप में जुझारू कहानियों के विपरीत यहाँ संरचना की सुस्पष्ट चौहद्दियों के बीच एक सुपरिभाषित भाव-संसार है जिसे किसी परिचित मिथक मूल्य से विचलन के क्षण में पकड़ा गया है। सधे हाथों की तराश के अधीन संरचना एक संयत, सन्तुलित सुसम्बद्ध आकार बनकर उभरती है। अहसास के फैलाव को एक बिन्दु पर केन्द्रित और सघन करते जाने की घोर तन्मयता कथा को उद्घाटित करती है। ऊपर से राजी का अनूठा शब्दशिल्प। शब्द को जो एक विशिष्ट विलक्षण अस्तित्व राजी दे पाती हैं, उसके प्रति एक सजग विस्मय का भाव पैदा होता है। कथा यही प्राय: कथ्य का एक रूपकीय समतोल होती है। कथा की मूल्य-चेतना इस परिष्कार को अनिवार्य कर देती है क्योंकि वह राजी के लिए शायद सृजनकर्म की सार्थकता से जुड़ी हुई बात है।
—अर्चना वर्मा
Na Bhoolanewali 100 Kahaniyan
- Author Name:
J.P. Vaswani
- Book Type:

- Description: दादा जे.पी. वासवानी हमेशा से उत्कृष्ट किस्सागो रहे हैं। उनकी अनौपचारिक वार्त्ताओं, प्रवचनों और पुस्तकों में भी पुराणों की कहानियाँ बहुतायत से बिखरी होती हैं, ताकि वे उन बातों को सुस्पष्ट कर सकें, जिन्हें वे चाहते हैं कि हम आत्मसात् कर लें। ये कहानियाँ इतनी यादगार हैं कि एक लंबे समय तक हमारे दिलों में बसी रहती हैं तथा उन संदेशों या जीवन-मूल्यों को हृदयंगम करने में हमारी मदद करती हैं, जिन्हें दादा ने इतने रचनात्मक रूप में हमारे सामने रखा है। इस पुस्तक में, पूज्य दादा की वार्त्ताओं और पुस्तकों से चुनी हुई एक सौ कहानियाँ संगृहीत हैं। प्रत्येक कहानी के साथ आपके द्वारा मनन करने के लिए आदरणीय दादा का या उनका पसंदीदा विचार तथा एक पुस्तक के रूप में व्यावहारिक अभ्यास भी दिया गया है, जो दादा की अपनी विशेषता है, जिसका अनुसरण करके आप लाभान्वित हो सकते हैं। न भूलनेवाली एक सौ रोचक-ज्ञानवर्धक कहानियों का प्रेरणादायक संग्रह।
Khachchar Aur Admi
- Author Name:
Yashpal
- Book Type:

-
Description:
यशपाल के लेखकीय सरोकारों का उत्स सामाजिक परिवर्तन की उनकी आकांक्षा, वैचारिक प्रतिबद्धता और परिष्कृत न्याय-बुद्धि है। यह आधारभूत प्रस्थान बिन्दु उनके उपन्यासों में जितनी स्पष्टता के साथ व्यक्त हुए हैं, उनकी कहानियों में वह ज़्यादा तरल रूप में ज़्यादा गहराई के साथ कथानक की शिल्प और शैली में न्यस्त होकर आते हैं। उनकी कहानियों का रचनाकाल चालीस वर्षों में फैला हुआ है। प्रेमचन्द के जीवनकाल में ही वे कथा-यात्रा आरम्भ कर चुके थे, यह अलग बात है कि उनकी कहानियों का प्रकाशन: किंचित् विलम्ब से आरम्भ हुआ। कहानीकार के रूप में उनकी विशिष्टता यह है कि उन्होंने प्रेमचन्द के प्रभाव से मुक्त और अछूते रहते हुए अपनी कहानी-कला का विकास किया। उनकी कहानियों में संस्कारगत जड़ता और नए विचारों का द्वन्द्व जितनी प्रखरता के साथ उभरकर आता है उसने भविष्य के कथाकारों के लिए एक नई लीक बनाई, जो आज तक चली आ रही है। वैचारिक निष्ठा, निषेधों और वर्जनाओं से मुक्त न्याय तथा तर्क की कसौटियों पर ख़रा जीवन—ये कुछ मूल्य हैं जिनके लिए हिन्दी कहानी यशपाल की ऋणी है।
‘खच्चर और आदमी’ कहानी-संग्रह में उनकी ये कहानियाँ शामिल हैं : ‘वैष्णवी’, ‘मक्खी या मकड़ी’, ‘उपदेश’, ‘कलाकार की आत्महत्या आदमी या पैसा?’ ‘जीव दया’, ‘चोरी और चोरी’, ‘अश्लील!’, ‘सत्य का द्वन्द्व तथा खच्चर और आदमी’।
Aate Rahna
- Author Name:
Dinesh Karnatak
- Book Type:

- Description: Hindi Short Story by Dinesh Karnatak
Mutton Dilruba
- Author Name:
Shubham Upadhyay
- Book Type:

- Description: हिंदी साहित्य जगत में एक बिल्कुल भिन्न स्वर के कहानीकार हैं शुभम उपाध्याय। उनके इस कहानी संग्रह ‘मटन दिलरुबा’ में कुल 18 कहानियाँ हैं। पूरा संग्रह एक नयी तासीर और अनुभवबोध से पाठकों को परिचित कराता है। इनकी कहानियों का सम्बन्ध भारतीय मुस्लिम जीवन से है। हिंदी कहानियों पर होनेवाली तमाम चर्चाओं में यह बात अक्सर उठती रही है कि हिंदी साहित्य में रोजमर्रा के मुस्लिम जीवन और किरदारों पर बहुत कम लिखा गया है। यह सच भी है। ऐसे में शुभम उपाध्याय ने जो कर दिखाया है, वह पूरे साहित्य जगत के लिए शुभ है। 18 सितंबर 1989 को सागर,म.प्र. में जन्मे शुभम उपाध्याय ने इंदौर से बी.ई.(आई.टी.) की डिग्री प्राप्त की. संस्था श्यामलम् द्वारा ‘सर्वश्रेष्ठ युवा सम्मान 2015’ से सम्मानित शुभम ने अब तक अपनी साहित्य यात्रा में नाट्य लेखन, आदिकाव्य और शायरी जैसी विधाओं में प्रमुखता से हस्तक्षेप किया है. शुभम उपाध्याय की पुस्तक “मटन दिलरूबा” ,18 बेहतरीन कहानियों का एक लाजवाब संग्रह है, जो एक नयी तासीर और एक अलग क़िस्म के तिलिस्म से पाठकों का परिचय करवाता है।
Lal Haveli
- Author Name:
Shivani
- Book Type:

-
Description:
महिला कथाकारों में जितनी ख्याति और लोकप्रियता शिवानी ने प्राप्त की है, वह एक उदाहरण है श्रेष्ठ लेखन के लोकप्रिय होने का। शिवानी लोकप्रियता के शिखर को छू लेनेवाली ऐसी हस्ती हैं, जिनकी लेखनी से उपजी कहानियाँ कलात्मक और मर्मस्पर्शी होती हैं।
अन्तर्मन की गहरी पर्तें उघाड़ने वाली ये मार्मिक कहानियाँ शिवानी की अपनी मौलिक पहचान हैं जिसके कारण उनका अपना एक व्यापक पाठक वर्ग तैयार हुआ।
इनकी कहानियाँ न केवल श्रेष्ठ साहित्यिक उपलब्धियाँ हैं, बल्कि रोचक भी इतनी अधिक हैं कि आप एक बार शुरू करके पूरी पढ़े बिना छोड़ ही न सकेंगे।
प्रस्तुत संग्रह में ‘गूँगा’, ‘लाल हवेली’, ‘शिबी’, ‘नथ’, ‘गहरी नींद’, ‘ख़ुदा हाफिज़’, ‘ठाकुर का बेटा’, ‘मणिमाला की हँसी’, ‘फिरबे की?’ ‘फिरबे?’, ‘मँझले दद्दा’ एवं ‘टोला’ कहानियाँ संकलित हैं। हर कथा अपनी मोहक शैली में अभिभूत कर देने की अपार क्षमता रखती है।
कलात्मक कौशल के साथ रची गईं ये कहानियाँ हमारी धरोहर हैं जिन्हें आज की नई पीढ़ी अवश्य पढ़ना चाहेगी।
The Best Stories of Mohapatra Nilamani Sahoo
- Author Name:
Guruprasad Mohapatra +1
- Book Type:

- Description: The Best Stories of Mohapatra Nilamani Sahoo: This book is a translation of Mohapatra Nilamani Sahoo's short stories, written in his inimitable style. The stories, originally written in Odia, were truly representative of Odia culture and traditions; the narrative is unique and deeply emotional and carries the readers with the flow. This volume is a specimen of Mohapatra Nilamani Sahoo's short stories for the wider readership
Halyog
- Author Name:
Markandey
- Book Type:

- Description: मार्कण्डेय की अब तक असंकलित कहानियों का संग्रह 'हलयोग' व्यवहार रूप में परिणत होकर अब आपके हाथ में है। इस संग्रह में कुल बीस कहानियाँ हैं। इन कहानियों का कोई क्रम नहीं है, कोशिश बस इतनी है कि ग्रामीण यथार्थ और संवेदना से जुड़ी कहानियाँ शुरू में एक साथ हों। ख़ास बात यह कि इसमें उनकी लिखी पहली कहानी ‘ग़रीबों की बस्ती' और अन्तिम, लिखी जा रही कहानी ‘खुशहाल ठाकुर’ संकलित है। कुल मिलाकर यह संग्रह भी बदलते समय, जीवन और उसके भीतर के प्रतिरोधी स्वर के बीच मार्कण्डेय की ख़ास राजनीतिक और वैचारिक सचेतनता लिए हुए है।
Gokharoo
- Author Name:
Pushpita Awasthi
- Book Type:

-
Description:
पुष्पिता की ये कहानियाँ बौद्धिक आडम्बर के बग़ैर एक मानवीय संसार का अन्वेषण करती हैं और बहुत सफलतापूर्वक अपने कथ्य और सहज गद्य के माध्यम से पढ़नेवाले के भीतर तक उतर जाती हैं। यह इनकी काव्यात्मकता ही है जो उन घटनाओं, परिस्थितियों से सवाल करती है जिन्हें ज़रूरी नहीं समझा जाता पर जिनके मानी बहुत बड़े होते हैं।
‘ठंडे बस्ते में पिघलता लावा’ में सुधा के कर्मठ जीवन के बावजूद उसकी हत्या, प्रशासनिक उदासीनता और सुधा के पी.एफ़. से अपनी जेबें भरने के बाद उसके पति की चुप्पी। प्रेम-विवाह की यह परिणति और व्याप्त भ्रष्टाचार का तांडव यदि इस कहानी में दिखता है तो दूसरी ओर ‘दो शब्द’ में अंकिता का प्रेम के अभाव में ठूँठ-सा व्यक्तित्व।
इस संग्रह की कहानियाँ उन चीज़ों की ज़रूरत की कहानियाँ हैं जो हवा, पानी, रोटी, कपड़े की तरह और उससे भी ज़्यादा ज़रूरी लगती हैं।
Katha Saptak Urmila Shirish
- Author Name:
Urmila Shirish
- Book Type:

- Description: Book
Katha Saptak Geetashree
- Author Name:
Geetashree
- Rating:
- Book Type:

- Description: "नजरा गईली गुईंयां" एक मौन प्रतिरोध की कहानी है। एक स्त्री जो अपना प्रतिरोध मौन रहकर जताती है, लेकिन वो अपना प्रतिरोध स्थानांतरित कर देती है। अपनी बेटी में जो पितृसत्ता पर वार कर देती है। कहानी में वही बेटी अपनी माँ से सवाल करती है कि माँ क्या तुम्हारा सपना भी मेरी शादी है तो वो जवाब देती हैं। "भक्क... हम ऐसा सपना देखते तो तुम आज वहाँ से हमसे मज़ाक कर रही होती का... दो तीन बच्चा-खच्चा लेकर किचकिचा रही होती... हम वैसी माँ नहीं, हम तो तुमको पैर पर खड़ा होते देखने का सपना देखते रहे, खुदमुख्तार बनने का सपना... मेरी तरह नहीं बनाना चाहती थी कि दिन भर टेटियाती रहो- "ऐ जी... सुनते हैं, हमको सौ रुपया दीजिए... हमको चूड़ी खरीदना है..." इसके साथ ही जो गीताश्री जी की कहानियों की ख़ासियत है कि वे उनकी हर कहानी के माध्यम से संस्कृति से परिचय कराती हैं। रुदाली तो जानते थे, एक विलुप्त परंपरा हंकपड़वा से उन्होंने परिचय कराया। 'ट्राम नंबर 5 और बोहेमियन धुन' को पढ़ते हुए याद आते हैं निर्मल वर्मा। कहानी प्रेम की उदास कहानी है। प्रेम के होते हुए जो उदासी होती है, यह कहानी उसी उदासी को रचती है। यह हिज्र वाली उदासी नहीं है, यह तो प्रेम के होने की उदासी है। इस कहानी की भाषा सप्तक की सारी कहानियों से एकदम अलग है। कहानी अपने पीछे एक गहरा सन्नाटा छोड़ जाती है। मैगनोलिया का फूल हमारी स्मृति बसा रह जाता है। उनकी सभी कहानियाँ पाठक को बांध देती हैं। जिनके ख़त्म होने तक उनके पाश से मुक्त होना संभव नहीं होता। कथा सप्तक में सभी कहानियाँ इसी तरह की हैं। -आकाश माथुर
Lawaris Nahi, Meri Maan Hai !
- Author Name:
Anil Kumar Pathak
- Book Type:

-
Description:
‘लावारिस नहीं, मेरी माँ हैं' यद्यपि लेखक का प्रथम कहानी-संग्रह है किन्तु कथ्य की इस विधा में लेखक लम्बे समय से सक्रिय हैं। इनकी कहानियाँ कई दशक पूर्व से आकाशवाणी के विभिन्न केन्द्रों से प्रसारित हो रही हैं। इन कहानियों में एक ओर जहाँ सहजता एवं सरसता है वहीं दूसरी ओर इनकी किस्सागोई पाठकों को आद्योपान्त बाँधकर रखने में भी सक्षम है।
प्रस्तुत संग्रह में कुल 11 कहानियाँ हैं। संग्रह की सभी कहानियों के कथानक नारी के विभिन्न स्वरूपों–माँ, मौसी, काकी, बुआ, सौतेली माँ आदि–के इर्द-गिर्द घूमते हैं जिनमें स्त्री के मूलभूत गुणों, यथा–प्रेम, दया, करुणा, सबको अपनाने की प्रवृत्ति एवं संघर्ष के बावजूद विपरीत परिस्थितियों में भी अपने अस्तित्व को बचाने के लिए अनवरत तत्पर रहना इत्यादि–का मर्मस्पर्शी चित्रण है। जहाँ ये कहानियाँ काव्य के विभिन्न गुणों को अपने अन्दर समाहित करते हुए विशेषतया नारी के दृष्टिगत समाज में व्याप्त प्रतिकूल परिस्थितियों को उजागर करती हैं, वहीं सुखद वातावरण का सृजन करते हुए आशा की उजली किरणों की ओर भी ले जाती हैं।
Panchvan Dasta Aur Saat Kahaniyan
- Author Name:
Amritlal Nagar
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Sampoorna Kahaniyan : Suryakant Tripathi Nirala
- Author Name:
Suryakant Tripathi 'Nirala'
- Book Type:

-
Description:
‘सम्पूर्ण कहानियाँ’—प्रखर जनवादी चेतना के लेखक निराला की 25 कहानियों का महत्त्वपूर्ण संग्रह है। इन कहानियों को रचना-क्रम और प्रकाशन-क्रम से यहाँ प्रस्तुत किया गया है।
निराला ने अपनी इन कहानियों में विषयवस्तु के अनुरूप ही कहानी का नया रूप गढ़ा है। वे कई बार संस्मरणात्मक ढंग से अपनी बात करते हैं, लेकिन अन्त तक आते-आते मामूली-से बदलाव से संस्मरण को कहानी में बदल देते हैं।
निराला के पहले चरण के उपन्यासों में जिस तरह कल्पना और यथार्थ के बीच अन्तर्विरोध दिखाई देता है, वह अन्तर्विरोध उपन्यास की अपेक्षा इन कहानियों में ज़्यादा तीखा है।
इन कहानियों में उनका गद्य हास्य का पुट लिये नई दीप्ति के साथ सामने आया है। जितना उसमें कसाव है, पैनापन भी उतना ही।
सुरुचिपूर्ण साज-सज्जा में प्रकाशित निराला की ये सम्पूर्ण कहानियाँ पाठकों को पहले की तरह ही अपनी ओर आकर्षित करेंगी।
Qissa-Qissa Lucknowaa
- Author Name:
Zilani Bano
- Book Type:

- Description: ्सागोई उर्दू ज़बान का कदीमी फ़न है, जिसे वक़्त के साथ भुला दिया गया था, लेकिन इधर कुछ लोगों की कोशिशों के चलते यह कला वापस मुख्यधारा में आ रही है। हिमांशु बाजपेयी इन्हीं जियालों में एक हैं। इस किताब में उनके लखनऊ से मुतल्लिक क़िस्से हैं जिन्हें उन्होंने लोगों से, बड़े-बूढ़ों से, किताबों से, और कुछ ख़ुद के अपने तजुर्बों से हासिल करके क़लमबंद किया है। कुछ क़िस्से हो सकता है, पहले आपने सुने हों, लेकिन यहाँ हिमांशु ने उन्हें जिस तरह पेश किया है, वह उन्हें उनके क़िस्से बना देता है। एक बात और, लखनऊ के बारे में क़िस्सों की बात आती है तो ध्यान सीधे नवाबों के क़िस्सों की तरफ़ चला जाता है, लेकिन ये क़िस्से आमजन के हैं। लखनऊ की गलियों-मुहल्लों में रहने-सहनेवाले आम लोगों के क़िस्से। इनमें उनके दु:ख-दर्द भी हैं, उनकी शरारतें भी हैं, उनकी हिकमतें और हिमाकतें भी हैं, गरज़ कि वह सब है जो हर आम शख़्स इतिहास द्वारा गढ़े किसी भी नवाब या बादशाह से बड़ी और ज़्यादा काबिले-यक़ीन शय बनता है। बकौल हिमांशु वाजपेयी ‘‘ये क़िस्से लखनऊ की मशहूर तहज़ीब के ‘जनपक्ष’ को उभारते हैं...ज़्यादातर क़िस्से सच्चे हैं। कुछ एक सच्चे नहीं भी हैं...।’’ लेकिन इंसान के रुतबे को बतौर इंसान देखने की उनकी मंशा एकदम सच्ची है। लखनऊ के नवाबों के क़िस्से तमाम प्रचलित हैं, लेकिन अवाम के क़िस्से किताबों में बहुत कम मिलते हैं, जो उपलब्ध हैं, वह भी बिखरे हुए। यह किताब पहली बार उन तमाम बिखरे क़िस्सों को एक जगह बेहद ख़ूबसूरत भाषा में सामने ला रही है, जैसे एक सधा हुआ दास्तानगो सामने बैठा दास्तान सुना रहा हो
Maati
- Author Name:
Shailendra Sagar
- Book Type:

-
Description:
शैलेन्द्र सागर का यह कहानी-संग्रह समय के अलक्षित किंतु असहनीय आतंक को अद्भुत रचनात्मक दक्षता के साथ अभिव्यक्त करता है। लेखक ने मानो यथार्थ की केंचुल उतार कर उसे और चमकदार बना दिया है। परिचित जीवन में अप्रत्याशित का अन्वेषण करते हुए शैलेन्द्र सागर ने संबंधों, आस्थाओं और मूल्यों के आत्मसंघर्ष को शब्दबद्ध किया है। समकालीन समाज का कलह एवं कोलाहल इन कहानियों में पार्श्व-संगीत की भाँति अनुभव किया जा सकता है। ये कहानियाँ जाने-अनजाने जीवन के शाश्वत प्रश्नों से टकराती हैं। कई बार चरित्रों के अंतर्द्वंद्व से छनती दार्शनिकता पाठक को मन के अगाध में उतरने का अवसर देती है।
इसे कहानीकार का कौशल कहा जाएगा कि कथा-रस का पूर्ण परिपाक तथा प्रतिबद्ध रचनाकर्म का अनुशासन यहाँ संभव हुआ है। मध्यवर्ग की विसंगतियाँ, राजनीति के दारुण सच, जीवन की अतृप्त कामनाएँ और रागरंजित संसार में रक्तरंजित संवेदनाएँ इन कहानियों की अंतर्वस्तु का हिस्सा हैं। शैलेन्द्र सागर
ने शिल्प की प्रयोगधर्मिता के स्थान पर ‘निरायास विन्यास’ को अंगीकार किया है।
यही ‘सहज शिल्प’ इन समस्त कहानियों का सौंदर्य है। ये कहानियाँ एक अर्थवान प्रतिवाद का पक्ष निर्मित करती हैं।
Rajdhani Kab Aayegi
- Author Name:
Martin John
- Book Type:

- Description: सामाजिक ताने-बाने में तेज़ी से हो रहे परिवर्तन, भगवान बनते जा रहे बाज़ार का दबाव, लगातार ज़्यादा ही मसरूफ होते जा रहे इन्सान की निरंतर भोथरी होती जा रहीं संवेदनाओं, हवस और रुतबे की अकड़ में अमानवीय होते जा रहे लोगों के अवैध नैक्सस जैसे मसलों को लेकर मार्टिन जॉन की चिंताएँ उनकी इस संग्रह की कहानियों में अलहदा ढंग से अभिव्यक्त हुई हैं। रेलकर्मी होने का उनका अनुभव और निजी जीवन-रुचियों के आत्मिक संस्पर्श इन चिंताओं को और ज़्यादा विश्वसनीय, ऐंद्रिक लगाव से भरपूर, जीवंत, चाक्षुष और विशिष्ट बनाकर परोसने में काफी मददगार साबित होते हैं। रेल-जीवन और रेलवे क्वार्टर हिंदी में कुछ ही कहानीकारों की रचनाओं में विश्वसनीय ढंग से आए हैं। इस रूप में रामदेव सिंह के बाद मार्टिन जॉन ही फिलहाल याद आ रहे हैं। 'राजधानी कब आएगी' की इंक्वायरी काउंटर पर काम कर रही तरुलता, उसके सीनियर सी.बी.एस. अंकल, मनचले पसेंजरों की बेहूदगी और रेलवे महकमे में व्याप्त अफसर-नेता नैक्सस आदि के चित्रण इतने विश्वसनीय और प्रभावशाली बन पड़े हैं कि यह कहानी लंबे समय तक पाठकों के जेहन में टिकी रहेगी। कहानीकार मार्टिन जॉन की कलम का कमाल है कि बाग-बागवानी और पक्षी-प्रेम यहाँ पर्यावरण चिंता मात्र न रहकर सामाजिक ताने-बाने के अंग बनकर सामने आते हैं। कोविड के दौर में गुलाब के फूल मात्र ही मज़हबी नफरतों के शिकार नहीं होते (रौंदे हुए फूल) मानवीय विश्वास भी दरकता है। 15 अगस्त के दिन शांतिदूत कबूतर के खून बहाने वाले और गांधी-नेहरू की तस्वीर पर पत्थर फेंकने वाले लोग हमारे समाज में किस तरह पैठ बना चुके हैं; बिना लाउड हुए लेखक बता देता है। —गौरीनाथ
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book