Zindagi Se Pyar Aur Anya Kahaniyan
(0)
Author:
Satyam, R. K. Pandey, Jack LondonPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
200
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ज़िन्दगी से प्यार और अन्य कहानियाँ जैक लण्डन की कुछ चुनी हुई कहानियों का यह संकलन हिन्दी पाठकों के समक्ष उनकी मौलिक और प्रयोगशील सर्जनात्मकता की एक बानगी पेश करेगा।</p> <p>उत्तरी इलाक़ों की अपनी कहानियों में जैक लण्डन ने बुर्जुआ सभ्यता को अनछुई प्रकृति के सामने खड़ा करने की कोशिश की। अनछुई, शुद्ध बना देनेवाली प्रकृति के प्रति सम्मोहन और बुर्जुआ सभ्यता की तकनीकी-सांस्कृतिक उपलब्धियों के प्रति आस्था के बीच सतत द्वन्द्व उसकी कहानियों में आद्यन्त एक क़िस्म के तनाव का निर्माण करता रहा।</p> <p>प्रकृति के साथ जैक लण्डन ने अपनी प्रारम्भिक रचनाओं से ही जो जटिल द्वन्द्वात्मक रिश्ता क़ायम करना शुरू किया था, वह अन्त तक बना रहा। एक धरातल पर वे मनुष्य और प्रकृति के इस शाश्वत द्वन्द्व को दिखलाते हैं, जहाँ प्रकृति का अंग होने के साथ ही उत्पादक शक्तियों को अपने विकास के लिए उससे जूझना भी होता है। दूसरे धरातल पर, भीषण प्रकृति से ज़िन्दगी की हिफ़ाज़त के लिए इनसान की लड़ाई में वे सामाजिक संघर्ष में जूझ रहे नर्क़ की ज़िन्दगी बितानेवाले लोगों की जिजीविषा और युयुत्सा का रूपक तलाशते और गढ़ते दिखाई देते हैं। एक तीसरे धरातल पर उनकी रचनाओं में प्रकृति हमें घोर मानवद्रोही बुर्जुआ समाज से दूर एक आत्मीय-आदिम शरण्य के रूप में दिखती है और अलगाव के निषेध का समग्र प्रभाव उत्पन्न होता है।
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ज़िन्दगी से प्यार और अन्य कहानियाँ जैक लण्डन की कुछ चुनी हुई कहानियों का यह संकलन हिन्दी पाठकों के समक्ष उनकी मौलिक और प्रयोगशील सर्जनात्मकता की एक बानगी पेश करेगा।</p>
<p>उत्तरी इलाक़ों की अपनी कहानियों में जैक लण्डन ने बुर्जुआ सभ्यता को अनछुई प्रकृति के सामने खड़ा करने की कोशिश की। अनछुई, शुद्ध बना देनेवाली प्रकृति के प्रति सम्मोहन और बुर्जुआ सभ्यता की तकनीकी-सांस्कृतिक उपलब्धियों के प्रति आस्था के बीच सतत द्वन्द्व उसकी कहानियों में आद्यन्त एक क़िस्म के तनाव का निर्माण करता रहा।</p>
<p>प्रकृति के साथ जैक लण्डन ने अपनी प्रारम्भिक रचनाओं से ही जो जटिल द्वन्द्वात्मक रिश्ता क़ायम करना शुरू किया था, वह अन्त तक बना रहा। एक धरातल पर वे मनुष्य और प्रकृति के इस शाश्वत द्वन्द्व को दिखलाते हैं, जहाँ प्रकृति का अंग होने के साथ ही उत्पादक शक्तियों को अपने विकास के लिए उससे जूझना भी होता है। दूसरे धरातल पर, भीषण प्रकृति से ज़िन्दगी की हिफ़ाज़त के लिए इनसान की लड़ाई में वे सामाजिक संघर्ष में जूझ रहे नर्क़ की ज़िन्दगी बितानेवाले लोगों की जिजीविषा और युयुत्सा का रूपक तलाशते और गढ़ते दिखाई देते हैं। एक तीसरे धरातल पर उनकी रचनाओं में प्रकृति हमें घोर मानवद्रोही बुर्जुआ समाज से दूर एक आत्मीय-आदिम शरण्य के रूप में दिखती है और अलगाव के निषेध का समग्र प्रभाव उत्पन्न होता है।
Book Details
-
ISBN9788126707164
-
Pages132
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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