Char Din Ki Jawani Teri

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Author:

Mrinal Pande

Language:

Hindi

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तेजी से सिकुड़ती इस दुनिया में पिछड़ा भारत ‘नएपन’ के ओले सह रहा है। नयापन का दायरा तकनीक, पद्धति, वस्तु से लेकर विचार तक फैला है। नए वाद के आगमन के साथ पुराने वादों के अन्त की घोषणाओं में कथा के अन्त की घोषणा शामिल है। साहित्य अकबकाया दीखता है।</p> <p>लेकिन इस संकलन की कहानियाँ अपनी ज़मीन में जड़ों को पसारती, तने को ठसके से खड़ा रखे हुए दीखती हैं क्योंकि उन्हें भरोसा है अपनी कथा में सिक्त पूर्वी तर्ज का। उनमें पहाड़ का दरकता जीवन अपने रूढ़ विश्वासों और गतिशीलता, दोनों के साथ दीखता है। कहानियों में जीवन की स्थितियाँ और चरित्र दोनों महत्त्व पाते हैं। इनमें हिर्दा मेयो जैसा अनूठा चरित्र भी है। उसकी हँसी में ऐसा रुदन छिपा है जो सीधे पहाड़ की दरकती छाती से फूटता रहता है, फिर भी अपनी अस्मिता पहाड़ में ही तलाशता है। मंत्र से बवासीर ठीक कर लेने का भ्रम पालने वाले हरूचा के साथ विदेश में जा बसे मुन्‍नू चा जैसे चरित्र भी हैं। विकास के नाम पर पहाड़ की संजीवनी सोख लेनेवाली शक्तियाँ हैं। प्रकृति के आदिम प्रजनन कृषि पर पड़ती परायी छाया की दारुण कथा ‘बीज’ में है। जहाँ हिर्दा मेयो में पहाड़ का धीरज है, वहीं उसके मंझले बेटे में पहाड़ का ग़ुस्सा भी है।</p> <p>इन कहानियों में आत्मविश्वास से भरा खुलापन है जो परम्परा की मिट्टी पर प्रयोग करता चलता है।</p> <p>कथा-रस से भरपूर इन कहानियों में विवरण की भव्यता के साथ-साथ चरित्र-चित्रण की विरल कुशलता भी लक्षित होती है। भाषा में लचीलापन के साथ कविता-सी ख़ुशबू भी है। परम्परा के संग चलती प्रयोगशीलता भी है। देशज मिट्टी से फूटी आधुनिकता प्रयोग के लिए परायों का मुँह नहीं जोहती, बल्कि स्वयं नया रूप रचती है।</p> <p>यह मृणाल पाण्डे का चौथा संकलन है जो नया तो है ही, प्रौढ़ भी है। इसीलिए इसकी रचनात्मकता की प्रतिध्वनियाँ भविष्य में भी सुनी जाएँगी।</p> <p>— अरुण प्रकाश

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ISBN
9788171197187
Pages
108
Avg Reading Time
4 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

Format:

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About the Book

तेजी से सिकुड़ती इस दुनिया में पिछड़ा भारत ‘नएपन’ के ओले सह रहा है। नयापन का दायरा तकनीक, पद्धति, वस्तु से लेकर विचार तक फैला है। नए वाद के आगमन के साथ पुराने वादों के अन्त की घोषणाओं में कथा के अन्त की घोषणा शामिल है। साहित्य अकबकाया दीखता है।</p>
<p>लेकिन इस संकलन की कहानियाँ अपनी ज़मीन में जड़ों को पसारती, तने को ठसके से खड़ा रखे हुए दीखती हैं क्योंकि उन्हें भरोसा है अपनी कथा में सिक्त पूर्वी तर्ज का। उनमें पहाड़ का दरकता जीवन अपने रूढ़ विश्वासों और गतिशीलता, दोनों के साथ दीखता है। कहानियों में जीवन की स्थितियाँ और चरित्र दोनों महत्त्व पाते हैं। इनमें हिर्दा मेयो जैसा अनूठा चरित्र भी है। उसकी हँसी में ऐसा रुदन छिपा है जो सीधे पहाड़ की दरकती छाती से फूटता रहता है, फिर भी अपनी अस्मिता पहाड़ में ही तलाशता है। मंत्र से बवासीर ठीक कर लेने का भ्रम पालने वाले हरूचा के साथ विदेश में जा बसे मुन्‍नू चा जैसे चरित्र भी हैं। विकास के नाम पर पहाड़ की संजीवनी सोख लेनेवाली शक्तियाँ हैं। प्रकृति के आदिम प्रजनन कृषि पर पड़ती परायी छाया की दारुण कथा ‘बीज’ में है। जहाँ हिर्दा मेयो में पहाड़ का धीरज है, वहीं उसके मंझले बेटे में पहाड़ का ग़ुस्सा भी है।</p>
<p>इन कहानियों में आत्मविश्वास से भरा खुलापन है जो परम्परा की मिट्टी पर प्रयोग करता चलता है।</p>
<p>कथा-रस से भरपूर इन कहानियों में विवरण की भव्यता के साथ-साथ चरित्र-चित्रण की विरल कुशलता भी लक्षित होती है। भाषा में लचीलापन के साथ कविता-सी ख़ुशबू भी है। परम्परा के संग चलती प्रयोगशीलता भी है। देशज मिट्टी से फूटी आधुनिकता प्रयोग के लिए परायों का मुँह नहीं जोहती, बल्कि स्वयं नया रूप रचती है।</p>
<p>यह मृणाल पाण्डे का चौथा संकलन है जो नया तो है ही, प्रौढ़ भी है। इसीलिए इसकी रचनात्मकता की प्रतिध्वनियाँ भविष्य में भी सुनी जाएँगी।</p>
<p>— अरुण प्रकाश

Book Details

  • ISBN
    9788171197187
  • Pages
    108
  • Avg Reading Time
    4 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

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