NoMan's Land
Author:
Salam AzadPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections0 Ratings
Price: ₹ 40
₹
50
Unavailable
बांग्लादेश के चर्चित लेखक सलाम आज़ाद की क़लम शासन-व्यवस्था के लिए चुनौती की तरह है, क्योंकि इनकी रचनाएँ शासकों की क्षुद्र व छद्म नीति की पोल खोल देती हैं। धर्म व राजनीति के कारण जब भी किसी देश का बँटवारा होता है तो लकीरें सरहद पर ही नहीं पड़तीं, लोगों के दिलों में भी खरोंचें लगती हैं। आम इनसानों की ज़िन्दगी पर बँटवारे का दूरगामी और विडम्बनापूर्ण प्रभाव पड़ता है तथा इनसानियत धार-धार रोती रह जाती है। सलाम आज़ाद की कहानियों को पढ़ते हुए शिद्दत के साथ यह अहसास होता है।</p>
<p>सलाम आज़ाद साम्प्रदायिक सौहार्द एवं धर्मनिरपेक्ष विकास के पक्षधर हैं। लिहाज़ा उनकी क़लम फासिस्ट शक्तियों के निशाने पर रहती है। इसलिए आश्चर्य नहीं कि उनकी कुछ रचनाओं को बांग्लादेश में प्रतिबन्धित कर दिया गया है।</p>
<p>इस संग्रह में लेखक की कुछ अन्य विषयों से सम्बन्धित कहानियाँ भी संकलित हैं जो उनके गहरे मानवीय सरोकारों को रेखांकित करती हैं। ‘जनक’ और ‘मानवाधिकार’ ऐसी ही मर्मस्पर्शी कहानियाँ हैं जो पाठकों के मन में रचनात्मक बेचैनी पैदा करती हैं। इन कहानियों का प्रवाहपूर्ण भाषा में सर्जनात्मक अनुवाद हुआ है जो पाठकों को अपनी रौ में बहा ले जाता है।
ISBN: 9788126710232
Pages: 99
Avg Reading Time: 3 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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ज़िन्दगी से प्यार और अन्य कहानियाँ जैक लण्डन की कुछ चुनी हुई कहानियों का यह संकलन हिन्दी पाठकों के समक्ष उनकी मौलिक और प्रयोगशील सर्जनात्मकता की एक बानगी पेश करेगा।
उत्तरी इलाक़ों की अपनी कहानियों में जैक लण्डन ने बुर्जुआ सभ्यता को अनछुई प्रकृति के सामने खड़ा करने की कोशिश की। अनछुई, शुद्ध बना देनेवाली प्रकृति के प्रति सम्मोहन और बुर्जुआ सभ्यता की तकनीकी-सांस्कृतिक उपलब्धियों के प्रति आस्था के बीच सतत द्वन्द्व उसकी कहानियों में आद्यन्त एक क़िस्म के तनाव का निर्माण करता रहा।
प्रकृति के साथ जैक लण्डन ने अपनी प्रारम्भिक रचनाओं से ही जो जटिल द्वन्द्वात्मक रिश्ता क़ायम करना शुरू किया था, वह अन्त तक बना रहा। एक धरातल पर वे मनुष्य और प्रकृति के इस शाश्वत द्वन्द्व को दिखलाते हैं, जहाँ प्रकृति का अंग होने के साथ ही उत्पादक शक्तियों को अपने विकास के लिए उससे जूझना भी होता है। दूसरे धरातल पर, भीषण प्रकृति से ज़िन्दगी की हिफ़ाज़त के लिए इनसान की लड़ाई में वे सामाजिक संघर्ष में जूझ रहे नर्क़ की ज़िन्दगी बितानेवाले लोगों की जिजीविषा और युयुत्सा का रूपक तलाशते और गढ़ते दिखाई देते हैं। एक तीसरे धरातल पर उनकी रचनाओं में प्रकृति हमें घोर मानवद्रोही बुर्जुआ समाज से दूर एक आत्मीय-आदिम शरण्य के रूप में दिखती है और अलगाव के निषेध का समग्र प्रभाव उत्पन्न होता है।
Metoo
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Akash Mathur
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Mini Aur Anya Kahaniyan
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Avadhesh Preet
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- Description: मिनी और अन्य कहानियाँ अवधेश प्रीत की नई कहानियों का संग्रह है। एक कथाकार के रूप में उन्होंने समाज, राजनीति और निरन्तर बदलते भारतीय यथार्थ को व्यावहारिक भाषा और शिल्प के साथ अंकित किया है। इस संग्रह में शामिल कहानियाँ मौजूदा समय के कई सवालों से रू-ब-रू होते हुए उन्हें हमारे विचार के दायरे में लाती हैं। संग्रह की शीर्षक कथा ‘मिनी’ का फलक इतना व्यापक है जिसमें नए रूप में ढलती स्त्री-चेतना से लेकर समकालीन पत्रकारिता तक कई मुद्दों की तरफ़ हमारा ध्यान जाता है। इसी प्रकार दूसरी कहानी ‘नग्न’ में पुलिस तंत्र में व्याप्त ग़ैर-ज़िम्मेदारी को बहुत कौशल के साथ रेखांकित किया गया है। यह कहानी बताती है कि न्याय की प्रक्रिया में पुलिस की अरुचि के चलते कैसे एक युवती को न सिर्फ़ इंसाफ नहीं मिलता, बल्कि वह अपने जीवन से भी हाथ धो बैठती है। भाषा में स्थानीय लहजे और शब्दों का प्रयोग अवधेश प्रीत की कहानियों को उसी तरह बेहद पठनीय और यथार्थवादी बनाता है, जैसे कहानी से सम्बन्धित सामाजिक, प्रशासनिक और राजनीतिक मुद्दों का ज्ञान उन्हें प्रामाणिक बनाता है। ‘मिनी और अन्य कहानियाँ’ संग्रह में उनकी बारह कहानियाँ संकलित हैं जिनमें व्यापक सामाजिक सरोकारों को चिन्हित करने वाली कहानियों के साथ-साथ ‘कॉफ़ी’ जैसी कहानियाँ भी हैं जहाँ दो बुज़ुर्ग पति-पत्नी पुराने दिनों की याद करते हुए एक भाव-भीगी शाम बिता रहे हैं।
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