Dogri Kathavan

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Author:

Shyam Jangid

Language:

Rajasthani

180

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भारतीय भासावां मांय डोगरी कहाणियां आपरी अळगी मठोठ राखै। डीगा डूंगर, चीड़-देवदार रा जंगल अर लोक-संस्क्रति डोगरी कहाणियां में गमकै। केंद्रीय साहित्य अकादेमी कांनी सू प्रकासित राजस्थानी में उल्थासुदा औ डोगरी कथावां रौ संकलण निश्चै ई एक महताऊ ग्रंथ है। क्यूंकै इण पोथी में डोगरी रा सबळ अर नांमी रचनाकारां री कहाणियां भेली है।

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ISBN
9788126033867
Pages
152
Avg Reading Time
5 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

Format:

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About the Book

भारतीय भासावां मांय डोगरी कहाणियां आपरी अळगी मठोठ राखै। डीगा डूंगर, चीड़-देवदार रा जंगल अर लोक-संस्क्रति डोगरी कहाणियां में गमकै। केंद्रीय साहित्य अकादेमी कांनी सू प्रकासित राजस्थानी में उल्थासुदा औ डोगरी कथावां रौ संकलण निश्चै ई एक महताऊ ग्रंथ है। क्यूंकै इण पोथी में डोगरी रा सबळ अर नांमी रचनाकारां री कहाणियां भेली है।

Book Details

  • ISBN
    9788126033867
  • Pages
    152
  • Avg Reading Time
    5 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

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Dogri Kathavan brings the literary voices of India's Himalayan north to Rajasthani readers, translating short stories rooted in the Dogri language and culture. These are not tales of distant mountains alone — they carry the weight of cedar forests, stone villages, seasonal migrations, and the social textures of communities living between peaks and plains. Published by the Sahitya Akademi, this collection gathers work by established and powerful Dogri writers whose names carry critical weight in regional Indian literature. The stories reflect a world shaped by altitude, weather, and the intimacy of small societies, yet they speak to emotional terrains recognisable across Indian languages. For Rajasthani readers, this volume is a rare window into a literary tradition that has developed its own idiom for loneliness, belonging, and change — distinct from both Hindi metropolitan fiction and rural Rajasthani narrative.

इण पोथी नै पढ़तां कांईं अनुभव मिलसी?

औ पोथी थनै डूंगरां री दुनिया में लेय जासी — ठंडी हवा, देवदार रा जंगल अर पहाड़ां माथै बसोड़ा री जिनगाणी रै बिम्ब। कहाणियां सीधी-साफ भासा में लिखीजी है, पण उणां में भावना री गहराई है। थनै अठै अकेलापणौ, समाज री बंदिस अर बदळाव रा प्रसंग मिलसी। पाठ गति सू चालै, पण हरेक कहाणी पाछै एक सूनौ छोड़ै — जियां थे कोई दूजै संसार सूं बोलिया हो।

औ किण पाठकां सारू सगळौ बेस्ट है अर इणसूं कांई अपेक्षा राखणी चाईजै?

  • जिकौ पाठक भारतीय भासावां री विविधता नै जाणणौ चावै अर दूजी भासा री कहाणियां रौ स्वाद लेवणौ चावै।
  • जिकौ राजस्थानी पढै पण हिमालय री संस्कृति अर पहाड़ी जिनगाणी रै बारै में जाणणौ चावै।
  • जिकौ लोक-परम्परा, भूगोल अर समाज री सूक्ष्मता नै कहाणियां में देखणौ चावै।

इण पोथी रै विसै री सांस्कृतिक मठोठ आजकाल रै भारतीय पाठकां सारू कांई है?

डोगरी साहित्य जम्मू-कश्मीर अर हिमाचल प्रदेश री आवाज राखै, जठै राजनीतिक बदळाव, भासा री सिनांख अर लोक-परम्परा रा सवाल आज बी जिंवता है। इण पोथी री कहाणियां हिंदी साहित्य रै मुख्यधारा सूं बारै रै समाज नै दिखावै, अर उणां री भासा अर अनुभव नै मान्यता देवै। आज रै भारत में, जठै क्षेत्रीय भासावां री जगह घटती जावै, औ संकलण एक याद दिलावै कै साहित्य री असली ताकत अनुवाद अर आदान-प्रदान में है।

इण लेखकां रौ इण विसै नै संभाळण रौ तरीकौ कांई खास है?

डोगरी रा रचनाकार डूंगरां री दुनिया नै भावुकता बिना दिखावै — उणां री कहाणियां सुंदरता री बजाय कठोरता, अकेलापण अर रोजमर्रा री मुसकळां माथै केंद्रित है। उणां री भासा सरल है पण मजबूत, अर हरेक कहाणी एक सांस्कृतिक सच नै पकड़ै। साहित्य अकादेमी रै चयन सूं इण संकलण में मान्य अर ताकतवर आवाजां भेली है, जिकी डोगरी साहित्य नै ठीक तरै सूं प्रतिनिधित्व करै।

औ पोथी पाठक नै बां पढ़ लेवण रै पाछै कांई देवै — भावना, विचार या संस्कृति री समझ में?

  • भारत रै दूजै कोनै री जिनगाणी री सूक्ष्म समझ — भासा, भूगोल अर समाज रै आधार माथै।
  • अनुवाद री ताकत री पिछाण कै कियां एक भासा री कहाणी दूजै भासा रै पाठक नै छू सकै।
  • पहाड़ां री दुनिया री एक याद — सूनी, कठोर, पण गहरी भावनावां सूं भरियोड़ी।

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