Kali Billiyon Ke Saaye Mein Chatori Chudail
About the book
उज़्मा कलाम की कहानियाँ इतनी सहज और अनायास हैं कि एकदम पड़ोस की लगने के बावजूद उनका जादुई सम्मोहन देर तक अपनी गिरफ्त में लिए रहता है। ये कहानियाँ अक्सर दो विपरीत छोरों पर एक साथ चलती हैं इसलिए समय के मारक विरोधाभास इनमें ठोस और साकार होकर उपस्थित होते हैं। यहाँ एक तरफ एक क्रूर और निस्संग दुनिया है तो दूसरी तरफ फूलों से भी कोमल मन और उनके रंग और खूशबू। एक तरफ दारुण अभाव हैं तो दूसरी तरफ इतनी सघन भाव भरी स्मृतियाँ हैं कि वे एकदम मूर्तिमान होकर बारम्बार लौट आती हैं। विश्वसनीय जीवन यथार्थ और उसकी बन्दिशें हैं तो उनके जाल से बाहर निकलने को बेताब फन्तासियाँ और कल्पनाएँ भी हैं। यह कहानियाँ जीवन की धूप-छाँही निरन्तरता से अपना ताना-बाना लेती हैं। यहाँ अल्पसंख्यकों और हाशिए के जीवन की रोजमर्रा की जद्दोजहद के बीच, अतीत और वर्तमान, धर्म और आधुनिकता की तमाम बहसों और रिश्तों के दरमियाँ जीवन के अनेक संस्तरों से गुजरते हुए यह बार-बार जानना होता है कि चीजें इतनी इकहरी नहीं हैं जितनी बनाकर वह पेश की जाती हैं। इन कहानियों में एक जिद्दी दुनिया है जो हार भले जाती है पर जूझना नहीं छोड़ती। एक निहत्थी, पर मारक मासूमियत है जो संवेदना की सबसे भीतरी तहों में धँस-सी जाती है। स्त्रियाँ और बच्चे इन कहानियों के पर्यावरण का अनिवार्य हिस्सा हैं जो इन्हें देखने के एक अलग तर्क और तरीके की तरफ ले जाते हैं। अनेक यादगार स्त्री चरित्रों की उपस्थिति इन कहानियों को कभी न भूलनेवाली बना देती है। ‘काली बिल्लियों के साये में चटोरी चुड़ैल’ बेहतरीन कहानियों का एक ऐसा संग्रह है, जिसे हास्य और विडम्बना के अद्भुत ताने-बाने से बुना गया है। —कुणाल सिंह
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About the Book
उज़्मा कलाम की कहानियाँ इतनी सहज और अनायास हैं कि एकदम पड़ोस की लगने के बावजूद उनका जादुई सम्मोहन देर तक अपनी गिरफ्त में लिए रहता है। ये कहानियाँ अक्सर दो विपरीत छोरों पर एक साथ चलती हैं इसलिए समय के मारक विरोधाभास इनमें ठोस और साकार होकर उपस्थित होते हैं। यहाँ एक तरफ एक क्रूर और निस्संग दुनिया है तो दूसरी तरफ फूलों से भी कोमल मन और उनके रंग और खूशबू। एक तरफ दारुण अभाव हैं तो दूसरी तरफ इतनी सघन भाव भरी स्मृतियाँ हैं कि वे एकदम मूर्तिमान होकर बारम्बार लौट आती हैं। विश्वसनीय जीवन यथार्थ और उसकी बन्दिशें हैं तो उनके जाल से बाहर निकलने को बेताब फन्तासियाँ और कल्पनाएँ भी हैं।
यह कहानियाँ जीवन की धूप-छाँही निरन्तरता से अपना ताना-बाना लेती हैं। यहाँ अल्पसंख्यकों और हाशिए के जीवन की रोजमर्रा की जद्दोजहद के बीच, अतीत और वर्तमान, धर्म और आधुनिकता की तमाम बहसों और रिश्तों के दरमियाँ जीवन के अनेक संस्तरों से गुजरते हुए यह बार-बार जानना होता है कि चीजें इतनी इकहरी नहीं हैं जितनी बनाकर वह पेश की जाती हैं। इन कहानियों में एक जिद्दी दुनिया है जो हार भले जाती है पर जूझना नहीं छोड़ती। एक निहत्थी, पर मारक मासूमियत है जो संवेदना की सबसे भीतरी तहों में धँस-सी जाती है। स्त्रियाँ और बच्चे इन कहानियों के पर्यावरण का अनिवार्य हिस्सा हैं जो इन्हें देखने के एक अलग तर्क और तरीके की तरफ ले जाते हैं। अनेक यादगार स्त्री चरित्रों की उपस्थिति इन कहानियों को कभी न भूलनेवाली बना देती है। ‘काली बिल्लियों के साये में चटोरी चुड़ैल’ बेहतरीन कहानियों का एक ऐसा संग्रह है, जिसे हास्य और विडम्बना के अद्भुत ताने-बाने से बुना गया है।
—कुणाल सिंह
Book details
- Format
- Paperback
- Publisher
- Rajkamal Prakashan Samuh
- Edition
- 1st
- Publication year
- 2026
- Weight
- 170 grams
- ISBN-13
- 9789347043239
- Pages
- 152
- Reading time
- ~5 hrs
- Age
- 18+
- Country of origin
- India
- Dimensions
- 13 × 20 cm
- Language
- Hindi
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