Nirvasan Aur Aadhipatya
(0)
Author:
Albert CamusPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
299
₹ 239.2 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
अल्बैर कामू की छह कहानियों का संग्रह है ‘निर्वासन और आधिपत्य’। ये कहानियाँ कामू की रचनाओं में बहुत महत्त्वपूर्ण स्थान रखती हैं क्योंकि इन छोटे वृत्तान्तों में उनकी महान विचारधारा के सभी मूल तत्त्व निहित हैं। वस्तुतः यह संग्रह उनके चिन्तन को समझने के लिए आदर्श स्रोत है।</p> <p>तकनीक की दृष्टि से इन कहानियों की शैली उनके उपन्यासों से एकदम विपरीत है। एक कहानी को छोड़कर कामू ने इनमें सीधे, निरपेक्ष कथन का प्रयोग किया है। दृश्य-सज्जा किसी विशेष गरिमा का प्रतीक होने का कोई संकेत नहीं देती। ‘वर्द्धमान पत्थर’ के अलावा बाकी सभी कहानियों का कथानक करीब-करीब रूढ़िगत है। प्रत्येक कहानी बिना कोई गूढ़ अभिप्राय छिपाए हुए, तेज़ और सरल गति से अपने चरम बिन्दु तक निपुणतापूर्वक विकसित होती है।</p> <p>‘जोनास’ में कलाकारों के जीवन पर हल्का-सा व्यंग्य किया गया है। बाकी चार कहानियाँ, ‘व्यभिचारिणी पत्नी’, ‘मौन रोष’, ‘अतिथि’ और ‘वर्द्धमान पत्थर’, ‘धर्म परिवर्तक’ के कटु आक्षेप को प्रति-संतुलित करती हैं। सभी कहानियों की थीम करीब-करीब एक ही है : मनुष्य का किसी भी कारणवश अपनी सामंजस्यपूर्ण स्थिति से निर्वासन और फिर ज्ञान-प्रदायक अनुभव के बाद, उसी में पुनः संघटन। प्रत्येक कहानी एक तथ्योद्घाटन प्रस्तुत करती है।
Read moreAbout the Book
अल्बैर कामू की छह कहानियों का संग्रह है ‘निर्वासन और आधिपत्य’। ये कहानियाँ कामू की रचनाओं में बहुत महत्त्वपूर्ण स्थान रखती हैं क्योंकि इन छोटे वृत्तान्तों में उनकी महान विचारधारा के सभी मूल तत्त्व निहित हैं। वस्तुतः यह संग्रह उनके चिन्तन को समझने के लिए आदर्श स्रोत है।</p>
<p>तकनीक की दृष्टि से इन कहानियों की शैली उनके उपन्यासों से एकदम विपरीत है। एक कहानी को छोड़कर कामू ने इनमें सीधे, निरपेक्ष कथन का प्रयोग किया है। दृश्य-सज्जा किसी विशेष गरिमा का प्रतीक होने का कोई संकेत नहीं देती। ‘वर्द्धमान पत्थर’ के अलावा बाकी सभी कहानियों का कथानक करीब-करीब रूढ़िगत है। प्रत्येक कहानी बिना कोई गूढ़ अभिप्राय छिपाए हुए, तेज़ और सरल गति से अपने चरम बिन्दु तक निपुणतापूर्वक विकसित होती है।</p>
<p>‘जोनास’ में कलाकारों के जीवन पर हल्का-सा व्यंग्य किया गया है। बाकी चार कहानियाँ, ‘व्यभिचारिणी पत्नी’, ‘मौन रोष’, ‘अतिथि’ और ‘वर्द्धमान पत्थर’, ‘धर्म परिवर्तक’ के कटु आक्षेप को प्रति-संतुलित करती हैं। सभी कहानियों की थीम करीब-करीब एक ही है : मनुष्य का किसी भी कारणवश अपनी सामंजस्यपूर्ण स्थिति से निर्वासन और फिर ज्ञान-प्रदायक अनुभव के बाद, उसी में पुनः संघटन। प्रत्येक कहानी एक तथ्योद्घाटन प्रस्तुत करती है।
Book Details
-
ISBN9788119835041
-
Pages208
-
Avg Reading Time7 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Ajnabi
- Author Name:
Albert Camus
- Book Type:

- Description:
फ्रांस के अमर लेखक, नोबेल पुरस्कार-विजेता अल्बैर कामू मानव-अन्तर्मन के संवेगों और कुंठाओं को अनावृत करने में पटु हैं। नियति में उनका विश्वास है और कृत्य की स्वतंत्रता एक निर्दिष्ट परिधि में ही वह मानते हैं। आरम्भ से अन्त तक पाठक की रुचि को साधे रखनेवाले इस उपन्यास में नायक के समस्त क्रिया-कलाप और उसके साथ घटी घटनाओं में उनका यही जीवन-दर्शन व्यक्त हुआ है।
विश्व के विशिष्ट उपन्यास-साहित्य में स्थान पानेवाले उपन्यास ‘अजनबी’ की कथा-वस्तु न केवल हमारे मर्म को मथ देने में सफल होती है, वरन् हमें जीवन और कर्म, और इन दोनों के उद्देश्यों के सम्बन्ध में भी सोचने पर विवश करती है।
सन् 1942 में प्रकाशित इस उपन्यास को द्वितीय विश्वयुद्ध से उत्पन्न हताशा और विसंगतियों को अभिव्यक्त करनेवाली कृति माना जाता है। उपन्यास के नायक से कामू यहाँ जीवन की निरुद्देश्यता और मृत्यु की अनिवार्यता को रेखांकित करते हैं; नायक की समाज से विरक्ति और उदासीनता का जैसा मार्मिक चित्रण कामू ने इस उपन्यास में किया है, वह आज भी स्तब्ध कर देता है।
Arthdosh
- Author Name:
Albert Camus
- Book Type:

- Description:
विश्वविख्यात फ्रेंच लेखक अल्बैर कामू की यह नाट्यकृति मनुष्य की अछोर, लेकिन अपूर्ण सुखाकांक्षाओं से उपजी क्रूरता का ऐसा दृश्यालेख है, जो हमें हतप्रभ कर देता है।
नाटक की नायिका मार्था अपनी बूढ़ी माँ के साथ एक सराय में एक छोटा होटल चलाती है। लेकिन उस स्थान की अनाकर्षक और असुविधाजनक स्थिति उसे पसन्द नहीं। वह कहीं सुदूर समुद्र तट पर जाकर रहना और जीवन के तमाम सुख पाना चाहती है—उबरना चाहती है अपने चुकते हुए उबाऊ और नीरस जीवन से। किन्तु इसके लिए बहुत-सा धन चाहिए, इसलिए वह अपने यहाँ कभी-कभार ठहरनेवाले मुसाफिरों को जहर देकर मार डालती है। इस काम में वह अपनी बूढ़ी माँ को भी साथ रखती है। एक दिन जब बीस साल पहले घर से गया उसका भाई, जॉन, एक मुसाफिर की ही तरह आकर वहाँ ठहरता है, तो माँ के साथ मिलकर वह उसकी भी हत्या कर देती है। सचाई सामने आने पर माँ की व्यथा, विलाप और पश्चात्ताप का उसे कोई मूल्य नहीं दिखता, क्योंकि सिर्फ अपने बेटे की हत्या पर सदय और मानवीय हो उठना दूसरी तमाम हत्याओं के अपराध को कम नहीं कर सकता।
यही वह कठोर जीवन-यथार्थ है, जिसे झेलने के लिए वह जॉन की पत्नी मारिया को पत्थर हो जाने की सलाह देती है, ताकि इस अमानवीय समाज का सामना किया जा सके।
कहने की जरूरत नहीं कि अपने ही सुख की तलाश और परिस्थितिवश उसमें असफल रहने के कारण हद दर्जे तक क्रूर हो चुकी मार्था जैसी स्त्री भी अर्थदोष से ग्रस्त इस पत्थरदिल समाज पर एक तीखा व्यंग्य बनकर उभरती है।
Pehla Aadmi
- Author Name:
Albert Camus
- Book Type:

- Description:
पहला आदमी कामू का अन्तिम उपन्यास है। एक प्रकार से यह उनकी आत्मकथात्मक कृति है।
1960 में हुई एक कार दुर्घटना में जब कामू की मृत्यु हुई तो उनके हाथ में थमे ब्रीफकेस में इस उपन्यास की पांडुलिपि थी; काफी कुछ अधूरी और असंशोधित।
कामू की पत्नी ने इसे प्रकाशित नहीं होने दिया था। कई वर्ष बाद 1993 में अपनी माँ के निधन के बाद कामू की पुत्री कैथरीन ने ‘पहला आदमी’ बिना किसी संशोधन के प्रकाशित करने का निर्णय लिया। चूँकि लिखने के दौरान कामू द्वारा पांडुलिपि पर अंकित टिप्पणियाँ और परिवर्तन के लिए स्वयं को दी गई हिदायतें भी प्रकाशित की गईं इसलिए यह उपन्यास कामू के शोधार्थियों के लिए अमूल्य दस्तावेज़ और विश्व साहित्य की एक महत्त्वपूर्ण घटना साबित हुआ। ‘पहला आदमी’ ने कामू के उन आलोचकों को भी शान्त कर दिया जो कहते थे कि ‘प्लेग’ के बाद कामू की सर्जनात्मक क्षमता चुक गई थी। ‘पहला आदमी’ में अपने पिता की खोज करता हुआ चालीस वर्षीय नायक जाक कारमॅरी अपने अतीत पर एक गहरी निगाह डालता है और अपनी अभाव से भरी ज़िन्दगी में भी जीवित रहने की गहरी इच्छा का परिचय देता है। कामू इस कृति में आत्मकथ्य के ज़रिए ग़रीबी का सामाजिक इतिहास रचते चले जाते हैं।
उपन्यास दो भागों में विभक्त है : ‘पिता की खोज’, और ‘पुत्र’। वह पिता जिसकी खोज नायक कर रहा है, कामू के पिता की तरह ही पहले विश्वयुद्ध में मारा जा चुका है। कारमॅरी की माँ का अनपढ़, बहरा, मितभाषी होना और चुपचाप यातनाएँ झेलते रहना पिता की खोज में उसी तरह बाधा डालता है जैसे कामू की माँ के स्वभाव ने उनके वास्तविक जीवन में बाधा डाली थी।
इस उपन्यास का शीर्षक ‘पहला आदमी’—चर्चा का विषय रहा है। कौन है यह पहला आदमी—पिता, पुत्र या वह अल्जीरिया निवासी, फ्रांसीसी या अरब या कोई भी वह निर्धन आदमी जिसकी मृत्यु के साथ उसका नाम-निशान तक मिट जाता है, कुछ शेष नहीं रहता? यह उपन्यास आपको भी यह उत्तर ढूँढ़ने के लिए प्रेरित करेगा।
दुनिया की लगभग सभी भाषाओं में अनूदित इस उपन्यास को सीधे फ्रेंच से हिन्दी में भाषान्तरित किया है डॉ. शरद चन्द्रा ने।
Plague
- Author Name:
Albert Camus
- Book Type:

- Description:
‘प्लेग’ में एक जनसमूह पर महामारी के रूप में आई भीषण विपत्ति का और उससे आक्रान्त लोगों की वैयक्तिक और सामूहिक प्रतिक्रियाओं का चरम यथार्थवादी अंकन किया गया है, साथ ही सर्वग्रासी भय, आतंक, मृत्यु और तबाही के बीच अजेय मानवीय साहस की मार्मिक संघर्षगाथा भी प्रस्तुत की गई है।
Nyayapriya
- Author Name:
Albert Camus
- Book Type:

- Description:
सुविख्यात फ्रेंच लेखक अल्बैर कामू का यह ऐतिहासिक नाटक सन् 1903 के क्रान्तिकालीन रूस में आतंकवादियों के एक गुट द्वारा आयोजित एक बम कांड का यथातथ्य चित्रण करता है। जैसा कि लेखक ने स्वयं कहा है कि ‘इस नाटक की कुछ स्थितियाँ यथार्थतः ऐतिहासिक हैं। इसके सभी पात्र वास्तविक हैं और उन्होंने उसी तरह का आचरण किया था, जैसा कि मैंने बताया है।’ यहाँ तक कि ‘न्यायप्रिय’ के नायक का नाम कलियायेव भी वास्तविक है।
अतिवादियों के इस गुट ने, जो क्रान्तिकारी समाजवादी पार्टी का ही हिस्सा था, रूसी सम्राट के चाचा प्रधान ड्यूक सार्ज की हत्या की योजना बनाई थी, जिसे कलियायेव ने पूरा किया। लेकिन लेखक के लिए इस समूचे घटनाक्रम में ड्यूक की हत्या के बजाय वह महान उद्देश्य और उसे पूरा करते हुए बचाए गए वे मानवीय मूल्य महत्त्वपूर्ण हैं, जो आतंकवाद को क्रान्तिकारिता के उच्चादर्श तक ले जाते हैं। कामू ने इस मुद्दे पर कलियायेव और दूसरे साथियों के बीच होनेवाली बहस को सर्वाधिक महत्त्व और विस्तार दिया है। सामाजिक अन्याय पर खड़ी एक दमनकारी राज्य-व्यवस्था से नाभिनालबद्ध दोषी व्यक्ति को खत्म करते हुए भी मानवीय करुणा, न्याय-भावना और आत्म-गौरव को बचाये रखने का संकल्प एक सच्चा क्रान्तिकारी ही साध सकता है। कलियायेव इन्हीं मूल्यों के लिए अपना बलिदान देता है और संसार के क्रान्तिकारी इतिहास में एक और अविस्मरणीय अध्याय जोड़ जाता है।
Patan (Raj)
- Author Name:
Albert Camus
- Book Type:

- Description:
अल्बैर कामू का ‘पतन’ उपन्यास उनकी अन्य कृतियों से कुछ भिन्न है। वह इसलिए कि इसमें घटनाओं के वे घात-प्रतिघात देखने को नहीं मिलते जो कथा को नाटकीय अन्त प्रदान करते हैं।
इस उपन्यास का नायक एक सैलानी है जो न सिर्फ़ दो-दो विश्वयुद्धों के विश्वव्यापी प्रभावों के दौर से गुज़र चुका है, बल्कि वर्तमान सभ्यता के भविष्य को लेकर भी वह आशंकित है। वह देखता है कि अन्तहीन विसंगतियों और जड़ताओं ने मनुष्य को मनुष्य नहीं रहने दिया है और मानवीय मूल्यों का खोखलापन जीवन के हर क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है।
पतन के कगार पर पहुँची हुई इस सभ्यता के एक प्रेक्षक, भोक्ता और प्रवक्ता के रूप में वह घटना-स्थितियों और मनःस्थितियों को आँकता है और उन्हें जिस तीखेपन के साथ सामने रखता है उससे पाठक के मन में बहुत कुछ जागने लगता है।
नायक की आशंकाएँ और चिन्ताएँ उपन्यास में इतनी प्रामाणिक हैं कि इससे गुज़रते हुए हम महसूस करने लगते हैं कि कथानायक कहीं स्वयं लेखक ही तो नहीं!
Sukhi Mrityu
- Author Name:
Albert Camus
- Book Type:

- Description:
एक लोकप्रिय लेखक होने के साथ-साथ कामू एक महान चिन्तक भी थे। जीवन-भर वे अपनी आत्मा और प्रतिभा की पूरी शक्ति से, विचार के पूर्ण प्रयास तथा अन्तरात्मा की वेदना से अपने समय की जटिल व यातनाप्रद समस्याओं में उलझे रहे। उनकी रचनाओं में मानव की आत्मा के विद्रोह, सच्चे सुख के रहस्य की खोज और सत्य का मूल रूप जानने की चिर-अतृप्त जिज्ञासा बहुत गम्भीरता से व्यक्त हुई है। ‘सुखी मृत्यु’ उपन्यास भी जीवन-सुख और उसी में निहित मृत्यु-सुख को समझने के प्रयास का विवरण है।
जीवन में सुख प्राप्त करना जिससे कि मृत्यु भी एक सुखद अनुभव रहे; ऐसा सम्पूर्ण सुख कैसे मिले? यही इस उपन्यास की केन्द्रीय समस्या है। उपन्यास का पहला भाग जीवन की इस समस्या का अदीप्त, अस्पष्ट पहलू हमारे सामने रखता है जब नायक के पास न तो मानसिक परिपक्वता है, न आर्थिक क्षमता और न ही समय। दूसरा भाग उसके मन के सुख, शान्ति और आन्तरिक आनन्द को प्रस्तुत करता है।
कहा जाता है कि कामू के अत्यन्त चर्चित उपन्यास ‘अजनबी’ का अंकुर ‘सुखी मृत्यु’ उपन्यास में ही संहत है।
Caligula
- Author Name:
Albert Camus
- Book Type:

- Description:
‘कालिगुला’ रोमन साम्राज्य के निरंकुश तानाशाह की मर्मांतक कहानी है जो अपने मारे जाने के षड्यंत्रों के बीच भी 'निर्भय' है। उसकी तानाशाही ने सदाचार को, ईमानदार आदमी को चाबुक पर नचाया है। उसे उन लोगों के चेहरों की मलिनता और गंध बड़ी निकृष्ट लगती है, जिन्होंने न दुःख भोगे न जोखिम उठाए, जो सद्गुणों की जैसे दुकान लगाते हैं, सुरक्षा का स्वप्न ऐसे देखते हैं जैसे कोई युवती प्रेम का। शायद ये इसी भय में अन्ततः मर भी जाएँगे बिना यह जाने कि उन्होंने जिन्दगी भर झूठ बोला है। ये लोग न्यायकर्ता कैसे हो सकते हैं?
ऐसी तमाम बातें, तमाम चीजें बेबाकी से सोचनेवाले निरंकुश, क्रूर और अनिष्टकारी कालिगुला को सारी वर्जनाओं के बावजूद किसी महानायक की तरह स्थापित करती चली जाती हैं। कालिगुला की मुक्ति की छटपटाहट और मनुष्य के मनोभावों पर निरपेक्ष पकड़ से ही उसके लिए चाँद जरूरी हो जाता है।
वह खुद से कहता है, ‘कालिगुला, तुम भी, तुम भी दंड के भागी हो। किसी से कुछ कम, किसी से कुछ ज्यादा लेकिन इस न्यायाधीशविहीन संसार में जहाँ कोई भी निर्दोष नहीं, कौन हिम्मत करेगा कि मुझे दोषी ठहराए?’
Prem Ke Pahle Basant Me
- Author Name:
Rashmi Bhardwaj
- Book Type:


- Description:
ख़ुसरो दरिया प्रेम का, उल्टी वा की धार। जो उतरा सो डूब गया, जो डूबा सो पार।।
Mansarovar Vol. 2 : Lottery Aur Anya kahaniyan
- Author Name:
Premchand
- Book Type:

- Description:
प्रेमचन्द की रचनाएँ आधुनिक भारत को समझने का एक महत्त्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्हीं के समय से भारतीय पुनर्जागरण का प्रारम्भ होता है, जिसके पैरों की आहट उनकी रचनाओं में महसूस होती है। राष्ट्रीय जीवन की परिवर्तनशीलता, क्रिया-प्रतिक्रिया, प्रगति एवं प्रतिक्रियावादिता, धर्म की, मानवता की परछाइयाँ प्रेमचन्द की रचनाओं में झलकती हैं। —डॉ. जाफ़र रज़ा
Gyandan
- Author Name:
Yashpal
- Book Type:

- Description:
यशपाल के लेखकीय सरोकारों का उत्स सामाजिक परिवर्तन की उनकी आकांक्षा, वैचारिक प्रतिबद्धता और परिष्कृत न्याय-बुद्धि है। यह आधारभूत प्रस्थान बिन्दु उनके उपन्यासों में जितनी स्पष्टता के साथ व्यक्त हुए हैं, उनकी कहानियों में वह ज़्यादा तरल रूप में, ज़्यादा गहराई के साथ कथानक की शिल्प और शैली में न्यस्त होकर आते हैं। उनकी कहानियों का रचनाकाल चालीस वर्षों में फैला हुआ है। प्रेमचन्द के जीवनकाल में ही वे कथा-यात्रा आरम्भ कर चुके थे, यह अलग बात है कि उनकी कहानियों का प्रकाशन किंचित् विलम्ब से आरम्भ हुआ। कहानीकार के रूप में उनकी विशिष्टता यह है कि उन्होंने प्रेमचन्द के प्रभाव से मुक्त और अछूते रहते हुए अपनी कहानी-कला का विकास किया। उनकी कहानियों में संस्कारगत जड़ता और नए विचारों का द्वन्द्व जितनी प्रखरता के साथ उभरकर आता है, उसने भविष्य के कथाकारों के लिए एक नई लीक बनाई, जो आज तक चली आ रही है। वैचारिक निष्ठा, निषेधों और वर्जनाओं से मुक्त न्याय तथा तर्क की कसौटियों पर खरा जीवन—ये कुछ ऐसे मूल्य हैं जिनके लिए हिन्दी कहानी यशपाल की ऋणी है। ‘ज्ञानदान’ कहानी-संग्रह में उनकी ये कहानियाँ शामिल हैं : ‘ज्ञानदानֺ’, ‘एक राज़’, ‘गण्डेरी’, ‘कुछ समझ न सका’, ‘दु:ख का अधिकार’, ‘पराया सुख’, ‘80/100’, या ‘सांई सच्चे!’, ‘ज़बरदस्ती’, ‘हलाल का टुकड़ा’, ‘मनुष्य’, ‘बदनाम’ और ‘अपनी चीज़’।
Mansarovar Vol. 7 : Jail Aur Anya Kahaniyan
- Author Name:
Premchand
- Book Type:

- Description:
प्रेमचन्द जहाँ भी समाज में अन्याय था, उसका प्रतिकार अपने ढंग से कर रहे थे। ईश्वर द्वारा मनुष्य के प्रति किया गया अन्याय ही नहीं, वे ग्रीक ट्रेजेडी नहीं लिख रहे थे, मनुष्य द्वारा मनुष्य के प्रति किया गया अन्याय, इसी समाज द्वारा इसी समाज में रहने वाले लोगों के प्रति किया गया अन्याय, उसे भी सतह पर लाकर दिखा रहे थे। जहाँ दमन और अन्याय था, उस अन्याय की व्यथा, पीड़ा सामने रख रहे थे और साथ ही उस व्यथा-पीड़ा का ऐसा चित्रण कर रहे थे, जो हमें आपको इस हद तक झकझोर दे कि हम स्वयं उस व्यवस्था के खिलाफ खड़े हो सकें, जो अमानवीय है ग़ैरबराबरी पर खड़ी है, जिसको हम अनजाने संस्कारवश ढोए चले जा रहे हैं और कभी-कभी परम्परा के प्रति श्रद्धा के नाम पर हम जिसका पोषण-समर्थन करते हैं। —नामवर सिंह
Anugoonj
- Author Name:
Geetanjali Shree
- Book Type:

- Description:
‘माई’, ‘हमारा शहर उस बरस’, ‘तिरोहित’, ‘वैराग्य’ एवं ‘ख़ाली जगह’ जैसी विविध व सशक्त कृतियों की मार्फ़त पिछले पन्द्रह सालों में एक विशिष्ट पहचान बनी है गीतांजलि श्री की हिन्दी कथा-जगत में। ‘अनुगूँज’ में संकलित इन दस कहानियों से ही शुरू हुआ था इस पहचान का सिलसिला। एक नई संवेदना जो विद्रोह और प्रतिरोध को उजागर करते वक़्त भी उनको कमज़ोर बनाती हताशा को अनदेखा नहीं करती, इशारों और बिम्बों के सहारे चित्रण करनेवाला शिल्प, और शिक्षित वर्ग की आधुनिक मानसिकता को दिखाती उनकी बोलचाल की भाषा, ऐसे तत्त्वों से बनती है गीतांजलि श्री की लेखकीय पहचान।
यूँ तो इन कहानियों का केन्द्र लगभग हर बार—एक ‘दरार’ को छोड़कर—बनता है शिक्षित मध्यवर्गीय नारियों से, पर इनमें वर्णित होते हैं हमारे आधुनिक नागरिक जीवन के विभिन्न पक्ष। जैसे वैवाहिक तथा विवाहेतर स्त्री-पुरुष सम्बन्ध, पारिवारिक परिस्थितियाँ, सामाजिक रूढ़ियाँ, हिन्दू-मुस्लिम समस्या, स्त्रियों की पारस्परिक मैत्री इत्यादि। यहाँ सीधा, सपाट कुछ भी नहीं है। हर स्थिति, हर सम्बन्ध, हर संघर्ष में व्याप्त रहते हैं परस्पर विरोधी स्वर। यही विरोधी स्वर रचते हैं हरेक कहानी का एक अलग राग।
Sandigdh
- Author Name:
Tejendra Sharma
- Book Type:


- Description:
पंद्रह बेहतरीन कहानियों का संग्रह।
Prawas Men Aaspaas
- Author Name:
Hansa Deep
- Book Type:

- Description:
Book
The Last Rides
- Author Name:
Syed Muhammad Ashraf
- Book Type:

- Description:
The Last Rides is a haunting, beautiful journey through memory, loss, and the slow fading of a civilisation. Syed Muhammad Ashraf, one of Urdu’s most original modern voices creates a world where childhood innocence, ancestral wounds, and the weight of history intertwine. This English incarnation, masterfully translated by A. Naseeb Khan, retains the novel’s hypnotic atmosphere and its deep emotional undercurrents. A rare work that is at once intimate and epic, The Last Rides invites readers to inhabit a universe shaped by longing, faith, silence, and the fragile inheritance of the past. It is not just a story but an experience that lingers. Syed Muhammad Ashraf is widely regarded as a defining voice of the third generation of urdufiction. His writing blends psychological insight, cultural memory, and metaphysical depth with a rare lyricism. From his celebrated debut Daar Se Bichhre to his acclaimed novels and short stories, Ashraf has carved a distinctive literary space rooted in the Indian ethos while pushing the boundaries of narrative form. A recipient of the Sahitya Akademi Award, the Ghalib Award, the Iqbal Samman and several international honours, he stands today as one of urduliterature’s most powerful and enduring storytellers, part chronicler, part philosopher, part visionary. A. Naseeb Khan is a bilingual poet and one of the most respected contemporary translators of urduliterature. His translation of Aakhiri Sawariyaan into The Last Rides is the result of years of immersion, listening to its silences, preserving its emotional cadence and carefully carrying its cultural depth into English. His work spans translations of Ghalib, Premchand, Khalid Jawed and many major urduwriters, published by leading houses including Penguin, Rupa and Westland. Winner of the Delhi urduAcademy and UP urduAcademy awards, Naseeb Khan brings to this novel a rare combination of scholarship, sensitivity and artistic fidelity.
Dharohar Kahaniyaan : Suryakant Tripathi ‘Nirala’
- Author Name:
Suryakant Tripathi 'Nirala'
- Book Type:

- Description:
निराला के कथा-साहित्य में दो परस्पर विरोधी प्रवृत्तियाँ देखी जाती हैं। एक प्रवृत्ति काल्पनिक इच्छापूर्ति के सपने रचने की है, दूसरी वास्तविक जीवन-संघर्ष को चित्रित करने की। ‘देवी’ और ‘चतुरी चमार’ में कहानी का पुराना ढाँचा टूट गया है। कथानक लेकर चलने वाली, समस्या के समाधान, नायक-नायिका के विवाह से समाप्त होनेवाली कहानियाँ ये नहीं हैं। इनमें परिवेश, पात्र ज्यों के त्यों उठाकर कहानी में रख दिये गए हैं। उनकी कहानियाँ कथा-रचना में यथार्थवादी साहित्य के विकास में नया चरण हैं। —रामविलास शर्मा
Dharohar Kahaniyaan : Suryakant Tripathi ‘Nirala’
Suryakant Tripathi 'Nirala'
20% off₹ 250
₹ 200
Available
Mansarovar Vol. 3 : Uddhar Aur Anya Kahaniyan
- Author Name:
Premchand
- Book Type:

- Description:
स्पष्टता के मैदान में प्रेमचन्द बड़ी-से-बड़ी बात को बड़े उलझन के अवसर पर कुछ इस तरह सुलझा कर कह जाते हैं कि मुश्किल-से-मुश्किल बात हमारे रोजमर्रा के, घरेलू जीवन की जानी-पहचानी चीज हो जाती है। उनकी बातों में कुछ ऐसा अनुभव का मर्म भरा होता है कि आदमी उसे कंठस्थ कर लेना चाहता है। उनकी बात स्पष्ट, दो टूक निर्णय होती है। और उनकी कलम सब जगह पहुँचती है, अँधेरे में भी धोखा नहीं देती। —जैनेन्द्र कुमार
Ek Ladki, Paanch Deevane
- Author Name:
Harishankar Parsai
- Book Type:

- Description:
एक लड़की है जिसे उसके दीवानों ने और मुहल्ले-भर की भूखी नज़रों ने जवान और चतुर बना दिया; फिर एक चूहा है जो रोज़ रात में गृह-निवासी के सिरहाने तब तक सत्याग्रह करता रहा जब तक कि उसे नियमित खाना नहीं दिया जाने लगा; अकाल का उत्सव है जिसके लिए जमाखोर, मुनाफ़ाखोर और नौकरशाही सालभर अनुष्ठान कराते हैं कि कब अकाल पड़े, कब दिन फिरें...और फिर नाक है, एक नहीं कई-कई तरह की। कुछ कट जाती हैं, फिर बढ़ जाती हैं, कुछ ऐसी कि चाहे जो जतन करो, कटती ही नहीं; फिर एक आदमी है जिसके भीतर दो आदमी हैं; कभी एक ऊपर आ जाता है, कभी दूसरा हावी हो जाता है।
आगे सड़े हुए आलू प्रवेश करते हैं। वे सुबह से टोकरे में पड़े हैं, पर बिक नहीं पाए। उनसे पूछा गया कि अब तुम क्या करोगे तो बोले कि हम विद्रोह करेंगे। चाहे आधी रात तक टोकरे में पड़े रहें, बिकेंगे नहीं। हम भी आत्मसम्मान रखते हैं। देखने में वे कुछ बुद्धिजीवी मालूम पड़ रहे थे लेकिन एक सस्ते होटल वाला आया और उन्हें ख़रीद ले गया।
इनके अलावा भी इस किताब में कई पात्र और परिस्थितियाँ हैं जिन्हें परसाई जी की निर्मम लेखनी ने यहाँ संग्रहीत व्यंग्य-कथाओं में उनकी तमाम विडम्बनाओं और विकृतियों के साथ अंकित किया है।
Katha Saptak - Mamta Kalia
- Author Name:
Mamta Kalia
- Book Type:

- Description:
7 Short Stories
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book