Nirvasan Aur Aadhipatya

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Author:

Albert Camus

Language:

Hindi

299

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अल्बैर कामू की छह कहानियों का संग्रह है ‘निर्वासन और आधिपत्य’। ये कहानियाँ कामू की रचनाओं में बहुत महत्त्वपूर्ण स्थान रखती हैं क्योंकि इन छोटे वृत्तान्तों में उनकी महान विचारधारा के सभी मूल तत्त्व निहित हैं। वस्तुतः यह संग्रह उनके चिन्तन को समझने के लिए आदर्श स्रोत है।</p> <p>तकनीक की दृष्टि से इन कहानियों की शैली उनके उपन्यासों से एकदम विपरीत है। एक कहानी को छोड़कर कामू ने इनमें सीधे, निरपेक्ष कथन का प्रयोग किया है। दृश्य-सज्जा किसी विशेष गरिमा का प्रतीक होने का कोई संकेत नहीं देती। ‘वर्द्धमान पत्थर’ के अलावा बाकी सभी कहानियों का कथानक करीब-करीब रूढ़िगत है। प्रत्येक कहानी बिना कोई गूढ़ अभिप्राय छिपाए हुए, तेज़ और सरल गति से अपने चरम बिन्दु तक निपुणतापूर्वक विकसित होती है।</p> <p>‘जोनास’ में कलाकारों के जीवन पर हल्का-सा व्यंग्य किया गया है। बाकी चार कहानियाँ, ‘व्यभिचारिणी पत्नी’, ‘मौन रोष’, ‘अतिथि’ और ‘वर्द्धमान पत्थर’, ‘धर्म परिवर्तक’ के कटु आक्षेप को प्रति-संतुलित करती हैं। सभी कहानियों की थीम करीब-करीब एक ही है : मनुष्य का किसी भी कारणवश अपनी सामंजस्यपूर्ण स्थिति से निर्वासन और फिर ज्ञान-प्रदायक अनुभव के बाद, उसी में पुनः संघटन। प्रत्येक कहानी एक तथ्योद्घाटन प्रस्तुत करती है।

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ISBN
9788119835041
Pages
208
Avg Reading Time
7 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

Format:

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About the Book

अल्बैर कामू की छह कहानियों का संग्रह है ‘निर्वासन और आधिपत्य’। ये कहानियाँ कामू की रचनाओं में बहुत महत्त्वपूर्ण स्थान रखती हैं क्योंकि इन छोटे वृत्तान्तों में उनकी महान विचारधारा के सभी मूल तत्त्व निहित हैं। वस्तुतः यह संग्रह उनके चिन्तन को समझने के लिए आदर्श स्रोत है।</p>
<p>तकनीक की दृष्टि से इन कहानियों की शैली उनके उपन्यासों से एकदम विपरीत है। एक कहानी को छोड़कर कामू ने इनमें सीधे, निरपेक्ष कथन का प्रयोग किया है। दृश्य-सज्जा किसी विशेष गरिमा का प्रतीक होने का कोई संकेत नहीं देती। ‘वर्द्धमान पत्थर’ के अलावा बाकी सभी कहानियों का कथानक करीब-करीब रूढ़िगत है। प्रत्येक कहानी बिना कोई गूढ़ अभिप्राय छिपाए हुए, तेज़ और सरल गति से अपने चरम बिन्दु तक निपुणतापूर्वक विकसित होती है।</p>
<p>‘जोनास’ में कलाकारों के जीवन पर हल्का-सा व्यंग्य किया गया है। बाकी चार कहानियाँ, ‘व्यभिचारिणी पत्नी’, ‘मौन रोष’, ‘अतिथि’ और ‘वर्द्धमान पत्थर’, ‘धर्म परिवर्तक’ के कटु आक्षेप को प्रति-संतुलित करती हैं। सभी कहानियों की थीम करीब-करीब एक ही है : मनुष्य का किसी भी कारणवश अपनी सामंजस्यपूर्ण स्थिति से निर्वासन और फिर ज्ञान-प्रदायक अनुभव के बाद, उसी में पुनः संघटन। प्रत्येक कहानी एक तथ्योद्घाटन प्रस्तुत करती है।

Book Details

  • ISBN
    9788119835041
  • Pages
    208
  • Avg Reading Time
    7 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

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