Doosari Kahani

(0)

Author:

Alka Saraogi

Language:

Hindi

495

396 (20% off)

Available

Ships within 48 Hours

Free Shipping in India on orders above Rs. 1100


कलि-कथा: वाया बाइपास (1998) उपन्यास के लिए विशेष रूप से चर्चित तथा साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित युवा कथाकार अलका सरावगी की कहानियों का दूसरा संग्रह दूसरी कहानी समकालीन कहानी के प्रचलित ढर्रे से अलग जाकर कहानी के लिए एक नई संभावना का संकेत है। जिस तरह कहानी की तलाश में (1996) शीर्षक से प्रकाशित पहले कहानी-संग्रह में शामिल इसी नाम की कहानी कहानी को तलाश भी बनाती थी और इकहरे से अधिक गहरे गुमनाम प्रसंगों में जाने की हिकमतों का आभास कराती थी, उसी तरह दूसरी कहानी संग्रह की इसी नाम की कहानी कहानी को एक और तरह की कहानी बनाने की कोशिश है।</p> <p>दूसरी कहानी संग्रह की कहानियाँ यथार्थ को तथ्य-सीमित करने की रूढ़ि को ध्वस्त करती हैं। घटनाओं का बोझिल आडंबर छोड़कर वे कहानी विधा की नई मुक्ति का ऐसा संकेत देती हैं कि हम कहानी को गद्य-कथा या कथा-निबंध की तरह पढ़ सकें। वे तथाकथित यथार्थवादी कहानी के ढाँचे को विचलित कर मानव- व्यवहार और प्रकृति के आधे-अधूरे प्रारूप या पाठ की तरह दिख सकती हैं। इसी अधूरेपन, इसी अनहोनी में अलका सरावगी की कहानियों का अर्थ छिपा है।</p> <p>दूसरी कहानी संग्रह की कहानियाँ (‘पार्टनर’, ‘एक पेड़ की मौत’, ‘दूसरे किष्ले में औरत’, ‘यह रहगुज़र न होती’, ‘रिपन स्ट्रीटेर परवीन अख्तर’, ‘कनफ़ेशन’) संकेत हैं कि शायद जीवन-पूर्णता या सार्थकता की संभावना इसी अपूर्णता या अधूरेपन में है। देखने की चीज़ यह है कि इस कथा-कल्पना में क्रीड़ा-वृत्ति या विनोद-वृत्ति स्थगित नहीं है, पर वह प्रायः एक तरह के जीवन विषाद या अवसाद का ही मार्मिक प्रत्यक्ष है। इस अवसाद को महान बनाने की भावुकता से मुक्त अलका सरावगी का कथा-मार्ग साधारण या मामूली पर भरोसा टिकाता है जो फिर इस ओर इशारा है कि साधारण में ही छिपा है ग़ैर-साधारण या असाधारण का मर्म।</p> <p>–परमानंद श्रीवास्तव

Read more

ISBN
9788126706778
Pages
176
Avg Reading Time
6 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

Format:

Piracy Free

Express Delivery

Secure Payment

About the Book

कलि-कथा: वाया बाइपास (1998) उपन्यास के लिए विशेष रूप से चर्चित तथा साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित युवा कथाकार अलका सरावगी की कहानियों का दूसरा संग्रह दूसरी कहानी समकालीन कहानी के प्रचलित ढर्रे से अलग जाकर कहानी के लिए एक नई संभावना का संकेत है। जिस तरह कहानी की तलाश में (1996) शीर्षक से प्रकाशित पहले कहानी-संग्रह में शामिल इसी नाम की कहानी कहानी को तलाश भी बनाती थी और इकहरे से अधिक गहरे गुमनाम प्रसंगों में जाने की हिकमतों का आभास कराती थी, उसी तरह दूसरी कहानी संग्रह की इसी नाम की कहानी कहानी को एक और तरह की कहानी बनाने की कोशिश है।</p>
<p>दूसरी कहानी संग्रह की कहानियाँ यथार्थ को तथ्य-सीमित करने की रूढ़ि को ध्वस्त करती हैं। घटनाओं का बोझिल आडंबर छोड़कर वे कहानी विधा की नई मुक्ति का ऐसा संकेत देती हैं कि हम कहानी को गद्य-कथा या कथा-निबंध की तरह पढ़ सकें। वे तथाकथित यथार्थवादी कहानी के ढाँचे को विचलित कर मानव- व्यवहार और प्रकृति के आधे-अधूरे प्रारूप या पाठ की तरह दिख सकती हैं। इसी अधूरेपन, इसी अनहोनी में अलका सरावगी की कहानियों का अर्थ छिपा है।</p>
<p>दूसरी कहानी संग्रह की कहानियाँ (‘पार्टनर’, ‘एक पेड़ की मौत’, ‘दूसरे किष्ले में औरत’, ‘यह रहगुज़र न होती’, ‘रिपन स्ट्रीटेर परवीन अख्तर’, ‘कनफ़ेशन’) संकेत हैं कि शायद जीवन-पूर्णता या सार्थकता की संभावना इसी अपूर्णता या अधूरेपन में है। देखने की चीज़ यह है कि इस कथा-कल्पना में क्रीड़ा-वृत्ति या विनोद-वृत्ति स्थगित नहीं है, पर वह प्रायः एक तरह के जीवन विषाद या अवसाद का ही मार्मिक प्रत्यक्ष है। इस अवसाद को महान बनाने की भावुकता से मुक्त अलका सरावगी का कथा-मार्ग साधारण या मामूली पर भरोसा टिकाता है जो फिर इस ओर इशारा है कि साधारण में ही छिपा है ग़ैर-साधारण या असाधारण का मर्म।</p>
<p>–परमानंद श्रीवास्तव

Book Details

  • ISBN
    9788126706778
  • Pages
    176
  • Avg Reading Time
    6 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

Recommended For You

Customer Reviews

Be the first to write a review...

0 out of 5

Book

Hurry! Limited-Time Coupon Code

WORDPOWER
* Terms and Conditions applied.

Offers

Best Deal

Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit, sed do eiusmod tempor incididunt ut labore et dolore magna aliqua

Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit, sed do eiusmod tempor incididunt ut labore et dolore magna aliqua. Ut enim ad minim veniam, quis nostrud exercitation ullamco laboris nisi ut aliquip ex ea commodo consequat.

whatsapp