Grimm Bandhuon Ki Parikathayen
Author:
J.L.C. Grimm, W.C. GrimmPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections0 Ratings
Price: ₹ 316
₹
395
Unavailable
मोहक, रोचक और विचित्र घटनाओं से भरी परीकथाएँ विश्व की हर भाषा में कही-सुनी जाती हैं। किसी भी आयु का व्यक्ति इन्हें पढ़कर-सुनकर आनन्दित होता है। बचपन तो इन्हीं कथाओं के सहारे कल्पना की रंग-बिरंगी दुनिया में विचरण करता आया है। पशु, पक्षी, राक्षस, परी, जंगल, नदी, पुराना क़िला, जादू, शाप, वरदान, रहस्य, रोमांच, अत्याचार, न्याय, वशीकरण, साहस, चतुराई...आदि को समेटे ये परीकथाएँ आज भी बेमिसाल मनोरंजन का ख़ज़ाना हैं। ‘ग्रिम बन्धुओं की परीकथाएँ’ पुस्तक में ऐसी ही बेहद पठनीय कथाएँ संकलित हैं। ‘खरगोश की दुल्हन', ‘मेढक राजकुमार’, ‘जंगल में तीन बौने’, ‘सफ़ेद साँप’, ‘करामाती टेबिल’, ‘गधा तथा छड़’, ‘स्नोव्हाइट’, ‘कुत्ता और गौरैया’ व ‘सोने का हंस’ आदि सभी परीकथाएँ पाठक को आनन्द से भर देती हैं। इन कथाओं का अनुवाद विश्व की अनेक भाषाओं में किया जा चुका है। पाठकों के बीच इनकी अपार लोकप्रियता का कारण है मानव मन में उत्सुकता की भावना।</p>
<p>ग्रिम बन्धुओं ने संकलन और पुनर्लेखन करते हुए उत्सुकता तथा रोचकता को और बढ़ा दिया है। मनोरंजन करने के साथ ये कथाएँ किसी न किसी रूप में लोक-व्यवहार या नीति की शिक्षा भी देती हैं। सीधी और सरल भाषा में जीवन के जाने कितने रूप यहाँ व्यक्त हुए हैं। यह पुस्तक पाठकों के लिए मनोरंजन का अनूठा उपहार है।
ISBN: 9789381863282
Pages: 304
Avg Reading Time: 10 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
The Best Stories of Mohapatra Nilamani Sahoo
- Author Name:
Guruprasad Mohapatra +1
- Book Type:

- Description: The Best Stories of Mohapatra Nilamani Sahoo: This book is a translation of Mohapatra Nilamani Sahoo's short stories, written in his inimitable style. The stories, originally written in Odia, were truly representative of Odia culture and traditions; the narrative is unique and deeply emotional and carries the readers with the flow. This volume is a specimen of Mohapatra Nilamani Sahoo's short stories for the wider readership
Gyarah Rupye Ka Fountain Pen
- Author Name:
Amit Dutta +1
- Rating:
- Book Type:

- Description: अमित दत्ता की कहानियों का संग्रह सभी पाठकों को पसंद आएगा। ये कहानियां हैं बचपन की, प्यार की, फिल्मों की. इनमें से प्रत्येक कहानी पाठक को बांधे रखती है। तपोशी घोषाल के चित्र इस पुस्तक को एक आकर्षक दृश्य बनाते हैं। चित्रों में रंगों और विवरणों का प्रयोग समृद्ध है। Age 12+
Bete Ko Kya Batlaoge
- Author Name:
Ramakant Shrivastava
- Book Type:

-
Description:
प्रिय रमाकांत,
बहुत दिनों से तुम्हारी कोई कहानी नहीं पढ़ी। क्या बात है? खैरागढ़ जैसी दूर-दराज़ जगह पर बैठकर तुमने ‘मध्यान्तर’, ‘बेटे को क्या बतलाओगे’, ‘राजा जनक’ जैसी शानदार कहानियाँ लिखकर सभी का ध्यान आकृष्ट किया था। कम लिखकर भी आज के मनुष्य की पीड़ा और उसके विरोधाभासों को तुमने अपनी कहानियों में व्यक्त किया।
तुम्हारा अगला कहानी संकलन कब आ रहा है? नए संकलन में ‘राजा जनक’, ‘प्रेतबाधा’ और ‘उस्ताद के सुर’ कहानियों को ज़रूर शामिल करना। ‘उस्ताद के सुर’ तो हिन्दी की अपने क़िस्म की अलग कहानी है। उसे पढ़कर मुझे लगा था कि उस्ताद सितार बजा रहे हैं और मैं अपना कलैरेनट बग़ल में रखकर सामने दरी पर पालथी मारकर बैठा हुआ रस की फुहार में भीग रहा हूँ। ‘चुप साले’ कहानी में मैं कीचड़-भरी सड़क पर गाड़ी को धक्का लगा रहा हूँ। तुम्हारी चरित्र-सृष्टि में अक्सर मैं अपने को पाता रहा हूँ।
नए साल की शुभकामनाओं के साथ—
तुम्हारा
काशीनाथ सिंह
30 दिसम्बर, 1998
Gaind Aur Goal
- Author Name:
Radhakrishna
- Book Type:

-
Description:
राधाकृष्ण की पहचान प्रेमचन्द-धारा के लेखक के रूप में प्रेमचन्द के जीवनकाल में ही बन चुकी थी। ‘गेंद और गोल’ उनकी सहज कहानियों का संकलन है। आम लोगों के आम दिनों की कुछ ख़ास बातें इन कहानियों में सहज ही दर्ज हो गई हैं।
ये कहानियाँ ‘फ़ॉर्मूला’ कहानी नहीं हैं, जिन्हें एक सुनिश्चित प्लॉट के तहत गढ़ा गया हो। ये बहते जीवन से कुछ पल सँजोकर पेश की गई हैं। इनमें आर्थिक तंगी है तो व्यावहारिकता भी। उद्दंडता है तो आदर्श भी। फ़रेब है, तो सच्चा प्रेम भी। शीर्षक कहानी 'गेंद और गोल’ बहुत कम शब्दों में ज़िन्दगी के लक्ष्य को बयाँ कर देती है।
‘गठरी का भेद’ पंचतंत्र की कहानी की तरह सहज सीख देते हुए तीव्र प्रहार करती है।
'कोयले की ज़िन्दगी’, 'कलाकार का मास्टरपीस’, 'मूल्य’, 'रसायन की पुड़िया’ हर रंग की कहानी इस संकलन में आपको मिल जाएगी।
70 के दशक में लिखी गई ये कहानियाँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक और हृदयस्पर्शी हैं।
Shobha Yatra
- Author Name:
Bhisham Sahni
- Book Type:

- Description: सीधी सरल शब्दावली और सहज बिम्बों में सामाजिक यथार्थ की जटिल विडम्बनाओं को अभिव्यक्त करनेवाली भीष्म साहनी की कहानियाँ आज क्लासिक रचनाओं की श्रेणी में आती हैं। 1981 में पहली बार प्रकाशित उनका यह कहानी-संग्रह अपनी मूल्यपरक अर्थवत्ता और वैचारिक निष्ठा के चलते विशेष तौर पर सराहा गया था। ‘शोभायात्रा’ की इन कहानियों में 'फ़ैसला' के जज शुक्ला जी हों या 'रामचन्दानी' के रिटायर्ड अफ़सर रामचन्दानी—सही आदमी इस व्यवस्था में बराबर अव्यावहारिक और उपहास का विषय है। 'निमित्त' में यदि भाग्य और भगवान को ही कारण माननेवाले 'निमित्त मात्रों' की क्रूरता और चालाकी का कलात्मक खुलासा हुआ है तो 'शोभायात्रा' सत्ता के 'अहिंसा परमो धर्म' रूपी ढोंग को उघाड़ती है। दूसरी ओर 'खिलौने' जैसी कहानी है, जिसमें बच्चे और खिलौने के माध्यम से आधुनिक जीवन की भयावह कैरियरिस्ट संवेदनहीनता का मार्मिक चित्रण हुआ है। वस्तुगत यथार्थ और उसका दृष्टि-सम्पन्न चित्रण, यही इस संग्रह की कहानियों की विशेषता है जिसके कारण इन्हें दशकों से एक ही लगाव के साथ पढ़ा जाता रहा है।
Pratinidhi Kahaniyan : Akhilesh
- Author Name:
Akhilesh
- Book Type:

- Description: अखिलेश की कहानियाँ बातूनी कहानियाँ हैं...ग़ज़ब का बतरस है उनमें। वे अपने पाठकों से जमकर बातें करती हैं। अपने सबसे प्यारे दोस्त की तरह गलबहियाँ लेकर वे आपको आगे और आगे ले जाती हैं और उनमें उस तरह की सभी बातें होती हैं जो दो दोस्तों के बीच घट सकती हैं (कोई चाहे तो इसे कहानीपन भी कह सकता है)। यही वजह है कि बेहद गम्भीर विषयों पर लिखते हुए भी अखिलेश की कहानियाँ ज़बर्दस्ती की गम्भीरता कभी नहीं ओढ़ती हैं। पढ़ते हुए कई बार एक मुस्कान-सी होंठों पर आने को होती है। क्योंकि उनके यहाँ कोई बौद्धिक आतंक, सूचना का कोई घटाटोप या किसी और तरह का बेमतलब का जंजाल चक्कर नहीं काटता कि पाठक कहीं और ही फँसकर रह जाए...। इन कहानियों की एक और ख़ूबी यह भी है कि ये कहानियाँ पाठक से ही नहीं बात करती चलतीं, बल्कि ख़ुद उनके भीतर भी कई तरह के समानान्तर संवाद चलते रहते हैं। वे ख़ुद भी अपने चरित्रों से बतियाते चलते हैं, उनके भीतर चल रही उठा-पटक को अपने अखिलेशियन अन्दाज़ में सामने लाते हुए। क्या है ये अखिलेशियन अन्दाज़! उसकी पहली पहचान यह है कि वह बिना मतलब गम्भीरता का ढोंग नहीं करते, बल्कि उनकी कहानियाँ अपने पाठकों को भी थोपी हुई गम्भीरता से दूर ले जानेवाली कहानियाँ हैं। उनकी कहानियों का गद्य मासूमियत वाले अर्थों में हँसमुख नहीं है, बल्कि चुहल-भरा, शरारती पर साथ ही बेधनेवाला गद्य है।
Keshar Kasturi
- Author Name:
Shivmurti
- Book Type:

-
Description:
शिवमूर्ति को पढ़ने का अर्थ है—उत्तर भारत के गाँवों को समग्रता में जानना। गाँव
ही शिवमूर्ति की प्रकृत लीला-भूमि है। इसी पर केन्द्रित होकर उनका कथाकार दूर-दूर तक मँडराता है।
गाँव के रीति-रिवाज, ईर्ष्या-द्वेष, राग-विराग, जड़ों में धँसे संस्कार, प्रकृत यौन-बुभुक्षा, परत-दर-परत
उजागर होता वर्णवादी-वर्गवादी शोषण, मूल्यहीन राजनीति और उनके बीच भटकती लाचार
ज़िन्दगियाँ...
प्रकृतिवाद में शिवमूर्ति जोला के आस-पास दीखते हैं तो पात्रों के जीवन्त चित्रण में गोर्की के समीप।
संवादों की ध्वन्यात्मकता से वे सतीनाथ भादुड़ी और रेणु की याद दिलाते हैं तो बिम्ब-विधान में जैक
लंडन की। पर इन सबके बावजूद शिवमूर्ति का जो ‘अपना’ है, वह कहीं और नहीं।
लोग हैरान रह जाते हैं यह देखकर कि जब स्वयं जनवादियों की कहानियों से ‘जन’ दिनों-दिन दूर
होते जा रहे हैं, बिना घोषित जनवादी हुए शिवमूर्ति की कहानियाँ जन के इतने क़रीब कैसे हैं?
शिवमूर्ति के साथ ही हिन्दी कहानी में पुनः कथारस की वापसी हुई है। आज जब कहानी में
पठनीयता के संकट का सवाल उठा हुआ है, शिवमूर्ति इस सवाल का मुकम्मल जवाब हैं।0.
Jaanch Abhi Jari Hai
- Author Name:
Mamta Kaliya
- Book Type:

- Description: प्रस्तुत कहानी-संग्रह ‘जाँच अभी जारी है’ में मशहूर कहानीकार ममता कालिया की 16 अनुपम कहानियाँ संगृहीत हैं जो वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों को उजागर करती हैं। इस कहानी-संग्रह में ‘सेमिनार’, ‘उमस’, ‘जाँच अभी जारी है’, ‘रजत जयन्ती’, ‘इक्कीसवीं सदी’, ‘दाम्पत्य’, ‘नया त्रिकोण’, ‘प्रिया पाक्षिक’, ‘अनुभव’, ‘पहली’, ‘नायक’, ‘वर्दी’, ‘चोट्टिन’, ‘झूठ’, ‘शॉल’ तथा ‘इरादा’ आदि कहानियाँ संगृहीत हैं। नए कलेवर में सजाया-सँवारा गया ममता जी का प्रस्तुत कहानी-संग्रह पाठकों को अवश्य पसन्द आएगा।
Interval Ke Baad
- Author Name:
Vidyabhooshan
- Book Type:

-
Description:
‘इंटरवल के बाद’ में संकलित कहानियों के केन्द्र में मुख्यतः छोटे शहरों का मध्यवर्गीय जीवन और उसकी विभिन्न स्थितियाँ हैं। सामाजिक जवाबदेही के प्रति गहरी सजगता इन कहानियों को एक अलग रंग देती है, और हमें सचेत करती है कि सामाजिक और नैतिक मूल्यों में किसी भी बदलाव को सावधानीपूर्वक अपनाना चाहिए।
उदाहरण के लिए संग्रह में शामिल ‘सरे-राह चलते-चलते’ की कमला और विजय एक क्षणिक बौखलाहट के चलते शुरू हुए अपने भावनात्मक विचलन को समय रहते इसलिए सँभाल लेते हैं कि उन्हें उसका कोई भविष्य नहीं दिखता, और न ही वे उसके लिए कोई बड़ा जोखिम उठाने की स्थिति में है।
‘एक पिता का जन्म’ शीर्षक कहानी भी एक भविष्यहीन रिश्ते के पनपने से पहले ही अपने सामाजिक दायित्व की ओर लौट जाती है। ‘गली के मोड़ पर दोराहा है’ की नायिका भी सामाजिक सीमाओं को बहुत गहराई से महसूस करती है, लेकिन उसके बरक्स अपने मन में उठते सवाल की अनसुनी भी वह नहीं करती। वह पाठक से ही प्रश्न करती है कि दाएँ मुड़ूँ या बाएँ!
पात्रों की मनोवैज्ञानिक पड़ताल इन कहानियों की विशेषता है, और कथा-प्रवाह इन्हें खासतौर पर पठनीय बनाता है। पारिवारिक और भावनात्मक रिश्तों के अलावा इस संग्रह में ‘पत्थरों की दास्तान’ जैसी कहानी भी है जिसमें शिल्प, विवरण और कथ्य एक अलग ही स्तर पर पाठक के सामने खुलते हैं।
Name Plate
- Author Name:
Kshama Sharma
- Book Type:

-
Description:
क्षमा शर्मा की 28 कहानियों का यह संग्रह स्त्री की दुनिया के जितने आयामों को खोलता है, उसके जितने सम्भवतम रूपों को दिखाता है, स्त्री के बारे में जितने मिथों और धारणाओं को तोड़ता है, ऐसा कम ही कहानीकारों के कहानी-संग्रहों में देखने को मिलता है।
क्षमा शर्मा हिन्दी लेखकों की आम आदत के विपरीत अपेक्षया छोटी कहानियाँ लिखती हैं जो अपने आप में सुखद हैं। उनकी लगभग हर कहानी स्त्री-पात्र के आसपास घूमती ज़रूर है मगर क्षमा शर्मा उस किस्म के स्त्रीवाद का शिकार नहीं हैं जिसमें स्त्री की समस्याओं के सारे हल सरलतापूर्वक पुरुष को गाली देकर ढूँढ़ लिए जाते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि वह पुरुषों या पुरुष वर्चस्ववाद को बख़्शती हैं, उसकी मलामत वे ज़रूर करती हैं और ख़ूब करती हैं, मगर उनकी तमाम कहानियों से यह स्पष्ट है कि उनके एजेंडे में स्त्री की तकलीफ़ें, उसके संघर्ष और हिम्मत से स्थितियों का मुक़ाबला करने की उसकी ताक़त को उभारना ज़्यादा महत्त्वपूर्ण है।
वह इस मिथ को तोड़ती हैं कि सौतेली माँ, असली माँ से हर हालत में कम होती है या एक विधुर बूढ़े के साथ एक युवा स्त्री के सम्बन्धों में वह प्यार और चिन्ता नहीं हो सकती, जो कि समान वय के पुरुष के साथ होती है। वह देह पर स्त्री के अधिकार की वकालत करती हैं और किसी विशेष परिस्थिति में उसे बेचकर कमाने के विरुद्ध कोई नैतिकतावादी रवैया नहीं अपनातीं। उनकी कहानियों में लड़कियाँ हैं तो बूढ़ी औरतें भी हैं, दमन की शिकार वे औरतें हैं जो एक दिन चुपचाप मर जाती हैं तो वे भी हैं जो कि लगातार संघर्ष करती हैं लेकिन स्त्री की दुनिया के अनेक रूपों को हमारे सामने रखनेवाली ये कहानियाँ किसी और दुनिया की कहानियाँ नहीं लगतीं, हमारी अपनी इसी दुनिया की लगती हैं बल्कि लगती ही नहीं, हैं
भी।इनके पात्र हमारे आसपास, हमारे अपने घरों में मिलते हैं। बस हमारी कठिनाई यह है कि हम उन्हें इस तरह देखना नहीं चाहते, देख नहीं पाते, जिस प्रकार क्षमा शर्मा हमें दिखाती हैं और एक बार जब हम उन्हें इस तरह देखना सीख जाते हैं तो फिर वे एक अलग व्यक्ति, एक अलग शख़्सियत नज़र आती हैं और हम स्त्री के बारे में सामान्य क़िस्म की उन सरल अवधारणाओं से जूझने लगते हैं जिन्हें हमने बचपन से अब तक प्रयत्नपूर्वक पाला है, संस्कारित किया है। क्षमा शर्मा की कहानियों की यह सबसे बड़ी ताक़त है, उनकी भाषा और शैली की पुख़्तगी के अलावा।
Gange bare gauri bare
- Author Name:
Dr. Mirza Basheer
- Rating:
- Book Type:

- Description: ಪ್ರಾಣಿಗಳ ಜಗತ್ತಿನಲ್ಲಿ ಪಶುವೈದ್ಯರ ಜಿಜ್ಞಾಸೆಯ ಪ್ರಯಾಣ A veterinary doctor’s intriguing journey in the world of animals
Trishanku
- Author Name:
Mannu Bhandari
- Book Type:

-
Description:
साठोत्तरी महिला कथाकारों में मन्नू भंडारी का विशिष्ट स्थान है। मन्नू भंडारी की कथा-यात्रा लगभग चार दशकों में फैली हुई है। 1960 के आसपास ‘नई कहानी’ आन्दोलन से नौवें दशक तक वे लगातार कहानियाँ लिखती रहीं। हिन्दी कहानी के विविध पड़ाव और आन्दोलन उनकी रचनाशीलता को अवरुद्ध नहीं कर पाए। मन्नू जी की कहानियाँ सामाजिक सन्दर्भों में स्त्री-पुरुष सम्बन्धों को व्याख्यायित ही नहीं करतीं, बल्कि मध्यवर्गीय जीवन यथार्थ के विविध पक्षों को शिद्दत से व्यक्त करती हैं।
एक निश्चित कालखंड की कहानियों का प्रतिनिधित्व करती ‘त्रिशंकु’ की इन कहानियों के पात्र जीवन के सिमटते-फैलते दायरों में सम्बन्धों के नकार और नए सिरे से अपने-अपने व्यक्तित्वों को स्वीकारने की ऊहापोह में जीते हैं। इन कहानियों में स्त्री-पुरुष सम्बन्धों के बनने-बिगड़ने की तफ़सीलें ही नहीं, मध्यवर्गीय समाज के मनोलोक की जटिलताएँ भी हैं। स्त्री-पुरुष सम्बन्धों के विविध पक्षों के साथ इस संग्रह की कहानियों में समय-सापेक्ष पारदर्शिता है। सम्बन्धों को ढोते रहने की थकन और प्रेम की प्रवहमान ऊष्मा है। ‘त्रिशंकु’, ‘आते-जाते यायावर’ और ‘दरार भरने की दरार’ जैसी चर्चित कहानियाँ नारी-पुरुष सम्बन्धों को कई कोणों से परिभाषित करती हैं। सहज कथा-विन्यास और शिल्प के संयोजन की दृष्टि से ‘त्रिशंकु’ की कहानियों का हिन्दी कथा साहित्य में स्थायी महत्त्व है।
Ek Zindagi...Ek Script Bhar!
- Author Name:
Upasana
- Book Type:

-
Description:
उपासना ने अपनी शुरुआती कहानी ‘एक ज़िन्दगी... एक स्क्रिप्ट भर!’ से विस्मित किया था। कहानी इस कदर सुगठित और मँजी हुई थी कि हम कुछ लोगों ने उन्हें एक कल्पित नाम मानकर उसे किसी सधे हाथ वाले वरिष्ठ लेखक की कहानी माना था। उपासना ने अपनी अगली कहानी ‘एगही सजनवा बिनु ए राम!’ में इन सारे भ्रमों को तोड़ दिया। इसी के साथ यह तय हो गया कि उत्तर प्रदेश के एक कस्बेनुमा शहर में एक विलक्षण लेखिका का जन्म हो चुका है। तरल भाषा, सन्तुलित गठन और विवेकपूर्ण सूक्ष्मता के साथ गुँथी-बुनी उनकी कहानियाँ पढ़ने वाले पर गहरा प्रभाव छोड़ती हैं। वे कम लिखती हैं, लेकिन जब लिखती हैं, एक अच्छी कहानी पढ़ने के सुख के प्रति आश्वस्त करती हैं। अनुभव की खराद पर तराशे जाने के बाद, जीवन और समाज के अँधेरे-उजालों को ये कहानियाँ बहुत बारीकी से पकड़ती हैं। वे मायावी महत्त्वाकांक्षाओं की दौड़ से दूर रहते हुए एकाग्रता, गम्भीरता और निष्ठा के साथ कहानियाँ लिखने पर विश्वास करती हैं। उनका यह विश्वास लम्बे समय तक उनसे श्रेष्ठ कहानियाँ लिखवाएगा, यह विश्वास हमारा भी है।
—प्रियंवद
लोक के आलोक में रचा हुआ उपासना का यह सम्मोहक गद्य। उदासी के ऐसे वर्णन और ऐसे शेड्स, जैसे लेखक उदासी की नई परिभाषा गढ़ रही हो। गद्य का मन्थर प्रवाह अपने प्रभाव में अनेक भावावेगों के उत्कर्ष पर पहुँचाता हुआ। गीता और शंकर के दरमियान घट रहा जीवन निम्न मध्यवर्ग के शोकगीत सरीखा है जिसकी उदास धुन पर ‘एक ज़िन्दगी... एक स्क्रिप्ट भर!’ रची गई है। वर्णन इतना मार्मिक और अथाह विस्तार लिए कि लगता है एक नई पृथ्वी है जिस पर गीता और शंकर अपनी विह्वलताओं को जी रहे हैं। ‘एगही सजनवा बिनु ए राम’ में गाँव तक पहुँची अधकचरी आधुनिकता और ठंढी क्रूरता को हथियार बनाए सामन्ती मूल्यों का टकराव है। और उस टकराव में सिलिंडर भइया तथा रतनी दीदी का निस्सार होता जीवन। लेखक की सर्वथा नई दृष्टि का परिचय ‘अनभ्यास का नियम’ में भी मिलता है। सूक्ष्मातिसूक्ष्म वर्णन पर लेखक का यक़ीन नितान्त नए संसार से परिचय कराता है। नहीं याद पड़ता कि किसी रचनाकार का ऐसा शानदार लेकिन एकदम पहला संग्रह आखिरी बार कब पढ़ा था। शायद ‘दरियाई घोड़ा’ या फिर शायद ‘अँधेरे में हँसी’।
—चन्दन पाण्डेय
Sherpur 15 Meel
- Author Name:
Vijay Mohan Singh
- Book Type:

-
Description:
हिन्दी कहानी और मुख्यत: साठोत्तरी कहानी के प्रमुख प्रवक्ता तथा उसके प्रवर्तकों में एक थे विजयमोहन सिंह। उनके पहले कहानी-संग्रह ‘टट्टू सवार’ से ‘शेरपुर 15 मील’ की कथायात्रा बहुत लम्बी है—वह महज़ 15 मील नहीं है। एक कहानीकार के रूप में विजयमोहन सिंह किसी मुख्य धारा में शामिल नहीं रहे—न नई कहानी की, न साठोत्तरी कहानी की। वे किसी विचारधारा विशेष के जयघोषों के अश्वारोही भी नहीं रहे और न आधुनिकता से आक्रान्त, प्राय: उसकी प्रतिकृतियाँ रचनेवाले कथाकारों से प्रभावित। उन्होंने प्रारम्भ से ही अपना निजी शिल्प तथा कथा-भाषा निर्मित की। लेकिन अपने विकासक्रम में वह कभी शिलीभूत या जड़ीभूत न होकर निरन्तर अपनी ऊर्जा के स्रोतों तथा शिल्प की छवियों का विविध दिशाओं में अन्वेषण करते रहे।
संग्रह की अधिकांश कहानियाँ स्वतंत्रता के बाद के पतनशील सामन्त वर्ग की क्रमिक मृत्यु का प्राय: अनुक्षण साक्षी बनकर उसे अंकित करती गई हैं किन्तु यह ‘सामन्त वर्ग’ रूढ़ अर्थ में एक परिभाषित सामन्तवर्ग ही नहीं है : वह नवधनाढ्य सपनों का सामन्त वर्ग भी है और अपनी विरूपता में भी अपने को सहेजने में सचेष्ट, कभी हास्यास्पद परिणतियों में बिखरता हुआ और कभी त्रासदीय विडम्बनाओं में विलीन होता हुआ वर्ग विशेष भी।
इन कहानियों में सामान्यीकृत तथा सरलीकृत स्थितियों तथा निष्कर्षों से भरसक बचा गया है, क्योंकि इधर की हिन्दी की अधिसंख्य कहानियाँ उसी का शिकार होती गई हैं। इसलिए यह? एक वर्ग ऐसा भी है जो उपनिवेशी अवशेषों को ढोता हुआ, अपनी सलवटों को सहेजता हुआ ‘डॉनस्कघेंटिक’ लीलाओं में लिप्त है। वह दूसरों की पू्रनिंग करता हुआ इस तथ्य से अनभिज्ञ रहता है कि वह इस क्रम में निरन्तर अपनी ही पू्रनिंग करता हुआ अस्तित्वहीन हुआ जा रहा है। इन कहानियों में मृत्यु एक केन्द्रीय विषय है, लेकिन हमेशा वह अभिधा में नहीं है, कभी वह रूपक, कभी प्रतीक और कभी केवल एक बुनियादी तथा अन्तिम सत्य का अहसास-भर है। ये कहानियाँ आधुनिकता से ग्रस्त नहीं हैं, न शीत-युद्धकालीन ‘रेटारिक’ आक्रमण-प्रत्याक्रमण से। ये महज़ आज के मानवीय परिदृश्य की रचनात्मक अंकितियाँ हैं।
RahmanKhera Ka Bagh
- Author Name:
Utkarsh Shukla
- Book Type:

- Description: ‘रहमान खेड़ा का बाघ’ संग्रह की कहानियाँ और संस्मरण उन वन्य जीवों के हैं जो किसी-न-किसी कारण अपने परिवेश, अपने जंगलों से बिछड़ गए हैं और जंगल से दूर शहरों, गाँवों और कस्बों में भटक गए हैं। यह वन्य जीव सिर्फ अपना खोया हुआ घर ढूँढ़ रहे हैं। जहाँ उन्हें खाने के लिए भोजन, पीने के लिए पानी और सिर छुपाने को जगह मिल जाए। भटकते हुए वन्य जीव, भटक जाने पर अजीब-सा व्यवहार करते हैं हमने इनके बारे में अब तक जो भी सुना, पढ़ा और देखा होता है वो सब बेकार हो जाता है। हर भटका हुआ वन्य जीव एक नई किताब होता है, जिसका अन्त आपको किताब के आखिरी पन्ने पर मालूम होता है। ये कहानियाँ अनुभवों का एक प्रवाह हैं जिसमें कई वर्षों की धारा को एक दिशा देने का प्रयास किया गया है।
Vasant Ke Hatyare
- Author Name:
Hrishikesh Sulabh
- Book Type:

-
Description:
हृषीकेश सुलभ के कथा-संकलन ‘वसंत के हत्यारे’ की कहानियाँ हिन्दी की यथार्थवादी कथा-परम्परा का विकास प्रस्तुत करती हैं। इन कहानियों में भारतीय समाज की परम्परा, जीवन-दृष्टि, समसामयिक यथार्थ और चिन्ताओं की अभिव्यक्ति के साथ-साथ विकृतियों और विसंगतियों का भी चित्रण है। मनुष्य की सत्ता और प्रवृत्ति की भीतरी दुर्गम राहों से गुज़रते हुए भविष्य के पूर्वाभासों और संकेतों को रेखांकित करने की कलात्मक कोशिश इन कहानियों की अलग पहचान बनाती है। यथार्थ के अन्तःस्तरों के बीच से ढेरों ऐसे प्रसंग स्वतःस्फूर्त उगते चलते हैं, जो हमारे जीवन की मार्मिकता को विस्तार देते हैं। संचित अतीत की ध्वनियाँ यहाँ संवेदन का विस्तार करती हैं और इसी अतीत की समयबद्धता लाँघकर यथार्थ जीवन की विराटता को रचता है।
हृषीकेश सुलभ की कहानियाँ भाषा और शिल्प के स्तर पर नए भावबोधों के सम्प्रेषण की नई प्रविधि विकसित करती हैं। नई अर्थच्छवियों को उकेरने के क्रम में इन कहानियों का शिल्प पाठको को कहीं आलाप की गहराई में उतारता है, तो कहीं लोकलय की मार्मिकता से सहज ही जड़ देता है। जीवन के स्पन्दन को कथा-प्रसंगों में ढालती और जीवन की संवेदना को विस्तारित करती ये कहानियाँ पाठकों से आत्मीय और सघन रिश्ता बनाती हैं।
हृषीकेश सुलभ के कथा-संसार में एकान्त के साथ-साथ भीड़ की हलचल भी है। सपनों की कोमल छवियों के साथ चिलचिलाती धूप का सफ़र है। पसीजती हथेलियों की थरथराहट है, तो विश्वास से लहराते हाथों की भव्यता भी है। भावनाओं और संवेदनाओं के माध्यम से अपना आत्यन्तिक अर्थ अर्जित करती इन कहानियों में क्रूरता और प्रपंच के बीच भी जीवन का बिरवा उग आता है, जो मनुष्य की संवेदना के उत्कर्ष और जिजीविषा की उत्कटता को रेखांकित करता है।
Kannad Ki Shresth Kahaniyan
- Author Name:
Tippeswami
- Book Type:

-
Description:
कन्नड़ के सात लेखक ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ से सम्मानित हुए हैं। इनमें मास्ती और अनन्तमूर्ति तो इस विद्या के सर्वाधिक चर्चित ही नहीं, अपितु इस विद्या को गति देनेवाले कथाकारों में गिने जाते हैं। कन्नड़ कहानियों के पीछे एक सौ वर्षों का इतिहास है। इस कालखंड में हज़ारों कहानियाँ अपने समय और समाज के साथ संवाद करने में सक्षम रही हैं और दुर्लभ मिसालें रची हैं।
प्रस्तुत पुस्तक में चौबीस कन्नड़ कथाकारों की एक-एक कहानी को चुना गया है। चयन को लेकर यह दावा नहीं है कि इन कथाकारों की यही सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ हैं। बावजूद इसके इतना तो कहा ही जा सकता है कि शामिल कथाकारों की उन कहानियों को पुस्तक में संगृहीत करने की कोशिश की गई है, जो अपनी भाषा में पाठकों द्वारा सराही गई और काफ़ी चर्चित रही हैं। उम्मीद है कि ये कहानियाँ हिन्दी पाठकों को भी पसन्द आएँगी।
Katha Saptak - Anju Sharma
- Author Name:
Anju Sharma
- Book Type:

- Description: Description Awaited
Sach Kahati Kahaniyan
- Author Name:
Kusum Khemani
- Book Type:

-
Description:
कुसुम खेमानी की कहानियों का यह पहला संग्रह हिन्दी कथा-संसार के लिए एक घटना से कम नहीं। सम्भवतः पहली बार इतनी मार्मिक कौटुम्बिक कहानियाँ हिन्दी पाठकों को उपलब्ध हो रही हैं। यह सच कहती कहानियाँ नहीं; बल्कि स्वयं सच हैं; सच का तना रूप। भिन्न-भिन्न सामाजिक स्तरों के प्रसंगों एवं अनुभवों से बुनी गई ये कहानियाँ समकालीन जीवन का एक अद्भुत कसीदा जड़ती हैं। चाहे ‘लावण्यदेवी’ हो या ‘रश्मिरथी माँ’ या ‘एक माँ धरती-सी’, इन सबमें सूक्ष्मता और अन्तरंगता से घर-परिवार के भीतर के जीवन को यथार्थ के साथ अंकित किया गया है।
कुसुम खेमानी भाव से कथा कहती हैं, लोक कथा की तरह। उनकी कहन शैली से पाठक इतना बँध जाता है कि हुंकारी भरे बिना नहीं रह पाता। इन कहानियों की सबसे बड़ी ख़ूबी है इनकी भाषा और शैली। हिन्दी में होते हुए भी ये कहानियाँ एक ही साथ बांग्ला, राजस्थानी और उर्दू का भी विपुल व्यवहार करती हैं जो इन्हें एक महानगरीय संस्कार प्रदान करता है। कुसुम खेमानी के पहले ऐसा प्रयोग शायद कभी नहीं हुआ। इन कहानियों की बुनावट और अन्त भी सहज, किन्तु अप्रत्याशित होता है। हर कहानी अपने आपमें एक स्वतंत्र लोक है।
इस संग्रह के साथ कुसुम खेमानी के रूप में हिन्दी को एक अत्यन्त सशक्त शैलीकार एवं संवेदनशील क़िस्सागो मिला है। निश्चय ही यह संग्रह सहृदय पाठकों एवं साहित्य के अध्येताओं द्वारा अंगीकार किया जाएगा।
—अरुण कमल
Gaudi’s Ocean (Japanese Children’s Classic)
- Author Name:
M. Hoffman +1
- Rating:
- Book Type:

- Description: This is a story of a Great Sea Turtle. After forty years in captivity, Gaudi, a sea turtle, escapes from his aquarium only to discover that his once beautiful home is now a foul ocean. Instead of happy healthy sea creatures he meets hundreads of sick animals who have been maimed by underwater nuclear experiments. Meeting other creature who share his anguish and then finding a mate with special needs, he eventually resolves to save the giant 'Tree of life' that represents the one source of hope for the world of Nature.
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book