Astittva Ki Khoj : Bhartiya Itihas Ki Mahattvapurn Striyan
(0)
Author:
Rekha ModiPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
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स्त्रियों के योगदान का जश्न मनानेवाले पुरुष-विमर्श में आमतौर पर यह कहने का चलन रहा है कि स्त्रियाँ कोमल लताओं-सी हैं जो अपनी नाज़ुक पत्तियाँ किसी ऐसे विशाल वृक्ष के तने के गिर्द लपेटती ऊपर चढ़ती हैं, जो उनके जीवन का पुरुष हो, चाहे वह पुरुष पिता हो, पति हो या फिर मार्गदर्शक। पर हमने पाया कि इस बिम्ब के ठीक उलट, कुछ स्त्रियाँ स्वतंत्र रूप से ‘वृक्षों’ में विकसित हुईं। इस पुस्तक की सभी स्त्रियाँ यहाँ इसीलिए मौजूद हैं। इन स्त्रियों ने कुछ ऐसा रचा-गढ़ा जो उनके बाद भी ज़िन्दा है, फिर चाहे वह रचना कोई संस्था हो, कला विधा या उसका रचना-संकलन हो, या कोई ढाँचा, कोई दर्शन, कोई तकनीक या कोई सामाजिक आन्दोलन हो। अपने जीवन के एकान्त स्थलों को छोड़ व्यापक दुनिया से जुड़ने की चेष्टा में उन्होंने तमाम विरोधों व निषेधों का सामना किया। गायिकाओं और सक्रिय कर्मियों ने मूक कर देने की धमकियों के बावजूद, नतीजों की परवाह किए बिना बेधड़क अपनी बात कही। राजनीतिज्ञों और अभिनेत्रियों ने घर के बाहर मुँह उघाड़ने पर निन्दा झेली, पर फिर भी जुटी रहीं। उनकी कथाओं का संकलन कर हम एक परम्परा रच रहे हैं, रिवायतें स्थापित कर रहे हैं जिनसे आज की नारियाँ प्रेरणा ले सकती हैं और अपना जीवन सुधार सकती हैं। समृद्ध वैविध्य के ताने-बानों से बुनी उनकी इन कथाओं को एक ही वृहत् पाठ के रूप में पढ़ा जाना चाहिए। —भूमिका से।
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स्त्रियों के योगदान का जश्न मनानेवाले पुरुष-विमर्श में आमतौर पर यह कहने का चलन रहा है कि स्त्रियाँ कोमल लताओं-सी हैं जो अपनी नाज़ुक पत्तियाँ किसी ऐसे विशाल वृक्ष के तने के गिर्द लपेटती ऊपर चढ़ती हैं, जो उनके जीवन का पुरुष हो, चाहे वह पुरुष पिता हो, पति हो या फिर मार्गदर्शक। पर हमने पाया कि इस बिम्ब के ठीक उलट, कुछ स्त्रियाँ स्वतंत्र रूप से ‘वृक्षों’ में विकसित हुईं।
इस पुस्तक की सभी स्त्रियाँ यहाँ इसीलिए मौजूद हैं। इन स्त्रियों ने कुछ ऐसा रचा-गढ़ा जो उनके बाद भी ज़िन्दा है, फिर चाहे वह रचना कोई संस्था हो, कला विधा या उसका रचना-संकलन हो, या कोई ढाँचा, कोई दर्शन, कोई तकनीक या कोई सामाजिक आन्दोलन हो। अपने जीवन के एकान्त स्थलों को छोड़ व्यापक दुनिया से जुड़ने की चेष्टा में उन्होंने तमाम विरोधों व निषेधों का सामना किया। गायिकाओं और सक्रिय कर्मियों ने मूक कर देने की धमकियों के बावजूद, नतीजों की परवाह किए बिना बेधड़क अपनी बात कही। राजनीतिज्ञों और अभिनेत्रियों ने घर के बाहर मुँह उघाड़ने पर निन्दा झेली, पर फिर भी जुटी रहीं।
उनकी कथाओं का संकलन कर हम एक परम्परा रच रहे हैं, रिवायतें स्थापित कर रहे हैं जिनसे आज की नारियाँ प्रेरणा ले सकती हैं और अपना जीवन सुधार सकती हैं। समृद्ध वैविध्य के ताने-बानों से बुनी उनकी इन कथाओं को एक ही वृहत् पाठ के रूप में पढ़ा जाना चाहिए।
—भूमिका से।
Book Details
-
ISBN9789388183277
-
Pages320
-
Avg Reading Time11 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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गीत चतुर्वेदी समकालीन रचनाशीलता के विरल उदाहरण हैं। कविता, कहानी व अनुवाद में उन्होंने कई यादगार काम किए हैं। ‘साहिब है रंगरेज़’ उनके कथाकार की उपलब्धि है।
—अखिलेश
गीत चतुर्वेदी विरल रचनाकारों में से एक हैं। ‘साहिब है रंगरेज़’ निश्चित ही एक बेहतरीन रचना है। हमारे समय की जीवित मन:स्थितियों का एक पाठ।
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- Description: अम्लघात या एसिड अटैक शब्द सुनते ही रूह काँप जाती है। भीतर दर्द की एक लहर लहरा जाती है। पीड़िता से उसका चेहरा और अंग ही नहीं उसका आत्मसम्मान, इंसान और नागरिक होने का मूल अधिकार, ईश्वर प्रदत्त उसका स्वरूप छीन लिया जाता है, जिसे छीनने का हक़ 'किसी को' भी नहीं है। कानून भी अपराध पर दंड देता है। अम्लघात के शिकार तो अक्सर निरपराधी होते हैं, फिर उन्हें किस अपराध की सज़ा दी जाती है और क्यों ? कौन दोषी है इसके लिए.... परिवार, समाज या कानून? एसिड अटैक पर कहानियाँ भेजने की सूचना मैंने अपनी फ़ेसबुक वॉल की एक पोस्ट में पोस्ट की थी, जिसे पढ़कर अनगिनत कहानियाँ आईं। शिवना प्रकाशन की टीम ने उनमें से बीस कहानियाँ चुनी। मैं उषाकिरण खान जी, कादम्बरी मेहरा जी, गीताश्री जी, आकांक्षा पारे काविश जी, रजनी मोरवाल जी, विकेश निझावन जी, अरुण अर्णव खरे जी, ज्योति जैन जी, आनंदकृष्ण जी, हर्षबाला शर्मा जी, रेनू यादव जी, डॉ. ऋतु भनोट जी, डॉ. निरुपमा राय जी, राधेश्याम भारतीय जी, रोचिका अरुण शर्मा जी , प्रबोध कुमार गोविल जी, पूनम मनु जी, सत्य शर्मा 'कीर्ति' जी, रेणु वर्मा जी, डॉ. लता अग्रवाल जी की आभारी हूँ, जिन्होंने इस हवन में खूबसूरत कहानियों की सामग्री डाली। इस पुस्तक का संपादन करते समय मैं बहुत तनाव से गुज़री हूँ, अम्लघात से पीड़ित स्त्री-पुरुषों का दर्द महसूस किय
Pratinidhi Kahaniyan : Premchand
- Author Name:
Premchand
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- Description: भारतीय ग्रामीण जीवन और जनमानस की विभिन्न स्थितियों के अप्रतिम चितेरे मुंशी प्रेमचन्द विश्वविख्यात साहित्यकारों की पंक्ति में आते हैं। उनकी ये प्रतिनिधि कहानियाँ प्रायः पूरी दुनिया की पाठकीय चेतना का हिस्सा बन चुकी हैं। सुप्रसिद्ध प्रगतिशील कथाकार भीष्म साहनी द्वारा चयनित ये कहानियाँ भारतीय समाज और उसके स्वभाव के जिन विभिन्न मसलों को उठाती हैं, ‘आज़ादी’ के बावजूद वे आज और भी विकराल हो उठे हैं, और जैसा कि भीष्म जी ने संकलन की भूमिका में कहा है कि प्रेमचन्द की मृत्यु के पचास साल बाद आज उनका साहित्य हमारे लिए एक चेतावनी के रूप में उपस्थित है। जिन विषमताओं से प्रेमचन्द अपने साहित्य में जूझते रहे, उनमें से केवल ब्रिटिश शासन हमारे बीच मौजूद नहीं है, शेष सब तो किसी-न-किसी रूप में वैसी-की-वैसी मौजूद हैं! वस्तुतः प्रेमचन्द ने हमारे साहित्य में जिस नए युग का सूत्रपात किया था, साहित्य को वे जिस तरह जीवन के निकट अथवा जीवन को साहित्य के केन्द्र में ले आए थे, वह हमारे लिए आज भी प्रासंगिक है।
Naye Daur Ki Prerak Kahaniyan
- Author Name:
Jps Jolly
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- Description: आज की इस प्रतिस्पर्धात्मक जिंदगी में स्वयं को जमाने से आगे रखने के लिए ज्ञान के साथ-साथ मानसिक बदलाव की भी आवशकता होती है। जो व्यक्ति ऐसा नहीं कर पाते, वो हर क्षेत्र में धीरे-धीरे पिछड़ने लगते हैं। ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि जीवन में उत्साह बढ़ाने और जीत हासिल करने के लिए अपनी कार्यशैली में किस प्रकार से परिवर्तन लाया जाए, असल में हमारी जिंदगी की चाल भी नदी की तरह होती है। उसे भी कभी सीधा, कभी टेढ़ा, कभी ऊपर और कभी नीचे गिरना पड़ता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए इस पुस्तक में नए दौर की प्रेरक, ज्ञानवर्धक और मनोरंजक कहानियों का एक ऐसा सग्रंह तैयार किया गया है, जिससे आपको शानदार पैगाम मिलेंगे। साथ ही बदलाव की रौशन लौ आपके हौसलों को बुलंद करने के साथ लक्ष्य प्राप्ति में सहायक होगी। जैसे ही आप इस पुस्तक की कुछ कहानियाँ पढ़ना शुरू करेंगे आप को कुछ ही दिनों में यह अनुभव होने लगेगा कि आपके जीवन में जादुई करिश्मे होने लगे हैं। इतना सा प्रयोग करते ही आपको यह अनुभूति होने लगेगी कि आपके पास वो हुनर आ गया है, जिससे आप हर वो कार्य भी आसानी से कर सकते हैं, जो कल तक असभंव लगते थे। जौली अंकल द्वारा लिखी हुई नए दौर की प्रेरक कहानियों को करीब से समझते ही एक ओर जहाँ आपका हर ख्वाब हकीकत बनने लगेगा, वहीं आपका सारा जीवन उत्साह, उमंग और तरंग से भर जाएगा।
Ansuni Aawazen
- Author Name:
Harsh Mander
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- Book Type:

- Description: भोपाल का गैस कांड, 1984 में दिल्ली और 1989 में भागलपुर में हुए दंगे, ओड़िसा का चक्रवात—ये कुछ घटनाएँ हैं जो हमारी सामूहिक स्मृति का हिस्सा बन चुकी हैं। लेकिन उन लोगों को हम अक्सर भूल जाते हैं जिन्हें वास्तव में इनका शिकार होना पड़ा था। इनके अलावा अन्य लोग भी हैं, मसलन—यौनकर्मी, दलित, सड़कों पर ज़िन्दगी गुज़ारनेवाले बच्चे, एचआईवी और कोढ़ जैसे रोगों के मरीज़ तथा अकालपीड़ित लोग—ये सब भी हमारी स्मृति में अक्सर दाख़िल नहीं हो पाते। ये लोग उस जनसंख्या का हिस्सा हैं जिसे विकास और प्रगति के नाम पर समाज के सबसे बाहरी हाशिये पर धकेल दिया गया है। इस पुस्तक में सामाजिक कार्यकर्ता और प्रशासक हर्ष मन्दर अपने और अपने साथियों के अनुभवों के आधार पर ऐसे ही बीस लोगों की ज़िन्दगियों का लेखा–जोखा पेश करते हैं—उनके संघर्ष का जो उन्होंने जीवित रहने, अपनी जिजीविषा को बचाए रखने के लिए किया। मिसाल के तौर पर बंगलौर के फुटपाथों पर भटकनेवाला वह बच्चा जो अब अपने जैसे दूसरे बच्चों को शिक्षा और रोज़गार पाने के मामले में मार्गदर्शन देता है, या फिर भोपाल गैस कांड में अनाथ हुआ वह ग्यारह वर्षीय किशोर जिसने अपने से छोटे दो बच्चों को पाला, एक युवा यौनकर्मी जिसने हैदराबाद की एचआईवी–पोजिटिव यौनकर्मी महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष किया, या फिर वह कुष्ठरोगी जिसने आशाग्राम में कुष्ठ कालोनी की स्थापना में सहायता देकर कोढ़ के कलंक से मुक्ति पाई। ये कहानियाँ सिर्फ़ ज़िन्दा–भर रहने के बारे में नहीं हैं, बल्कि ये सबूत के साथ बताती हैं कि इन लोगों ने किस तरह अपने विनम्र साहस, सहनशीलता और मानवीयता के बल पर परिस्थितियों पर फ़तह हासिल की। अनुभव की उष्ण अन्तर्धारा से सम्पन्न ये कहानियाँ जनसाधारण में निहित रचनात्मकता और जीवट को उजागर करती हैं और उन लोगों को चुनौती देती हैं जो भारत के भविष्य को लेकर निराश हैं।
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