Kahaniyan Rishton Ki : Parivar
Author:
AkhileshPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections0 Ratings
Price: ₹ 120
₹
150
Unavailable
भारतीय जीवन में परिवार का वही है, जो किसी भी धर्म या सम्प्रदाय में पूजागृह का होता है। परिवार नामक संस्था ही भारतीय जीवन और समाज-व्यवस्था का मूल है। पिछले सौ सालों में चौतरफ़ा बदलाव के बीच भारतीय समाज में परिवार की संरचना, उसमें अन्तर्निहित तरलता और सम्बन्धों की तीव्रता में क्या और कैसे बदलाव आए हैं, इस संकलन की कहानियों में साफ़-साफ़ दीखता है। संयुक्त परिवार से एकल परिवार और फिर लिव-इन रिलेशनशिप का चलन, इनके भाव-दुष्प्रभाव सबकी पड़ताल इस संकलन की कहानियों में है और अन्त में एक छुपा सन्देश भी कि यहाँ रिश्ते जीवन से बड़े और ज़्यादा मूल्यवान हैं।</p>
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ISBN: 9788126725571
Pages: 184
Avg Reading Time: 6 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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कुछ रचनाएँ ऐसी भी होती हैं, जो बच्चों के लिए लिखी जाती हैं, लेकिन उनकी शिक्षा या सीख सार्वभौमिक और सार्वकालिक होती है। ‘कछुआ और ख़रगोश’ डॉ. जाकिर हुसैन की ऐसी ही ज्ञानवर्द्धक कहानियों का संकलन है, जिसमें पशु-पक्षियों के बहाने मनुष्य के जीवन के विभिन्न पक्षों को उकेरा गया है।
‘कछुआ और ख़रगोश’ कहानी में विद्वानों और शिक्षकों पर तीखा व्यंग्य किया गया है जो अपने ज्ञान के जाल में मकड़ी की तरह स्वयं उलझ जाते हैं। वास्तविकता और वास्तविक तथ्यों की ओर ध्यान न देकर इधर-उधर भटकते हैं और दूसरों को भटकाते हैं। विद्वान अपनी विद्वत्ता का प्रदर्शन करने के लिए ऐसी भाषा का प्रयोग करते हैं जो बहुत ही कठिन और गूढ़ होती है। वे यह भूल जाते हैं कि बात जिससे की जा रही है, वह उसे समझ भी रहा है या नहीं। इस कहानी में प्रो. कपचाक़, प्रो. फ़िलकौर और अलफ़लसेफुलहिन्दी ने कहीं-कहीं ऐसी ही भाषा का प्रयोग किया है जो पढ़नेवालों के छक्के छुड़ा देती है।
क़ैद का जीवन जब एक बकरी के लिए इतना कष्टदायक हो सकता है, तो मनुष्य के लिए कितना होगा—यह जानकारी हमें ‘अब्बू ख़ाँ की बकरी’ से मिलती है जिसे आज़ादी के लिए अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है। इसी तरह ‘मुर्गी चली अजमेर’, ‘उसी से ठंडा उसी से गरम’, ‘जुलाहा और बनिया’, ‘सच्ची मुहब्बत’, ‘सईदा की अम्मा’ आदि ऐसी कहानियाँ हैं, जो जीवन के विभिन्न पक्षों को अपनी मनोरंजक शैली में प्रस्तुत करती हैं। बच्चों के लिए लिखी गई ये कहानियाँ बड़ों के लिए भी उपयोगी और मनोरंजक हैं।
Pratinidhi Kahaniyan : Rajendra Yadav
- Author Name:
Rajendra Yadav
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समकलीन हिन्दी कहानी के विकास में राजेंद्र यादव एक अपरिहार्य और महत्त्वपूर्ण नाम है। हिन्दी कहानी की रूढ़ रूपात्मकता को तोड़ते हुए नई कहानी के क्षेत्र में जितने और जैसे कथा-प्रयोग उन्होंने किए हैं, उतने किसी और ने नहीं। राजेन्द्र यादव की कहानियाँ स्वाधीनता-बाद के विघटित हो रहे मानव-मूल्यों, स्त्री-पुरुष सम्बन्धों, बदलती हुई सामाजिक और नैतिक परिस्थितियों तथा पैदा हो रही एक नई विचार दृष्टि को रेखांकित करती हैं। उनकी कहानियों की व्यक्ति-चेतना सामाजिक चेतना से निरपेक्ष नहीं है; क्योंकि एक अनुभूत सामाजिक यथार्थ ही उनका यथार्थ है। यथार्थबोध के सम्बन्ध में उनकी अपनी मान्यता है कि ‘जो कुछ हमारे संवेदन के वृत्त में आ गया है, वही हमारा यथार्थ है...लेकिन इस यथार्थ को कलात्मक और प्रामाणिक रूप से सम्प्रेषणीय बनने के लिए ज़रूरी है कि हम इसे अपने से हटकर या उठकर देख सकें, उसे माध्यम की तरह इस्तेमाल कर सकें।’
इस संकलन में लेखक की कई महत्त्वपूर्ण कहानियाँ शामिल हैं, जिनमें नए मानव-मूल्यों और युगीन यथार्थ की मार्मिक अभिव्यक्ति हुई है। अपनी शिल्प-संरचना में ये इतनी सहज और विश्वसनीय हैं कि पाठक-मन परत-दर-परत उनमें उतरता चला जाता है।
Mystery of the Missing Cap and Others - Award Winning Stories
- Author Name:
Manoj Das
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- Book Type:

- Description: Mystery of the Missing Cap and Others Stories, originally published as Manoj Dasanka Katha O Kahini was the first collection of short stories in Odia to receive the Sahitya Akademi Award (1972). The collection spans twenty-two years of the writer's contribution to Odia short story. While Sri Das has won wider recognitions through his subsequently written stories, roping into the circle of his admires writers like Graham Greene and H.R.F. Keating, this collection marks a mile stone in the evolution of Odia fiction, infusing into the genre of short stories a neew vitality through a combination of deep psychological insight into characters and situations and a remarkable precision in sytle. The translation is by the author himself whoalso occupies a special places in Indian writing in English.
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