Dola Bibi Ka Mazaar
(0)
Author:
Jabir HusainPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
195
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मैंने कब कहा कि मैं कहानियाँ लिखता हूँ। मैं तो बस अपने आसपास जो कुछ देखता हूँ, महसूस करता हूँ, वही लिखता हूँ। मेरे किरदार मेरी उन अनगिनत लड़ाइयों की खोज और उपज हैं, जो दशकों बिहार के गाँवों में लड़ी गई हैं, बल्कि आज भी लड़ी जा रही हैं। मैंने ये भी कब कहा कि मेरे पास गाँवों के दु:खों का इलाज हैं। मैं तो बस अपने किरदारों के यातनापूर्ण सफ़रनामे का एक अदना साक्ष्य हूँ। एक साक्ष्य, जो कभी अपने किरदारों की रूह में उतर जाता है, और कभी किरदार ही जिसके वजूद का हिस्सा बन जाते हैं। मैं तटस्थ नहीं हूँ। मैं तटस्थ कभी नहीं रहा। आगे भी मेरे तटस्थ होने की कोई गुंजाइश नहीं है। मैं ख़ुद अपनी लड़ाइयों का एक अहम हिस्सा रहा हूँ, आज भी हूँ। मेरी नज़र में, तटस्थता किसी भी संवेदनशील आदमी या समाज के लिए आत्मघाती होती है। मैंने झंडे उठाए हैं, परचम लहराए हैं, नारे बुलन्द किए हैं। जो ताक़तें सदियों राज और समाज को अपनी मर्ज़ी से चलाती रही हैं, उनकी बख़्शी हुई यातनाएँ झेली हैं। लेकिन अपनी डायरी के पन्ने स्याह करते वक़्त मैंने, कभी भी, इन यातनाओं को बैसाखी की तरह इस्तेमाल नहीं किया है। न ही मैंने इन्हें अपने डायरी-शिल्प का माध्यम ही बनने दिया है। अतः मैं आप से कैसे कहूँ कि इस पुस्तक में शामिल तहरीरों को आप कहानी के रूप में स्वीकारें।
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मैंने कब कहा कि मैं कहानियाँ लिखता हूँ। मैं तो बस अपने आसपास जो कुछ देखता हूँ, महसूस करता हूँ, वही लिखता हूँ। मेरे किरदार मेरी उन अनगिनत लड़ाइयों की खोज और उपज हैं, जो दशकों बिहार के गाँवों में लड़ी गई हैं, बल्कि आज भी लड़ी जा रही हैं। मैंने ये भी कब कहा कि मेरे पास गाँवों के दु:खों का इलाज हैं। मैं तो बस अपने किरदारों के यातनापूर्ण सफ़रनामे का
एक अदना साक्ष्य हूँ। एक साक्ष्य, जो कभी अपने किरदारों की रूह में उतर जाता है, और कभी किरदार ही जिसके वजूद का हिस्सा बन जाते हैं। मैं तटस्थ नहीं हूँ। मैं तटस्थ कभी नहीं रहा। आगे भी मेरे तटस्थ होने की कोई गुंजाइश नहीं है। मैं ख़ुद अपनी लड़ाइयों का एक अहम हिस्सा रहा हूँ, आज भी हूँ। मेरी नज़र में, तटस्थता किसी भी संवेदनशील आदमी या समाज के लिए आत्मघाती होती है। मैंने झंडे उठाए हैं, परचम लहराए हैं, नारे बुलन्द किए हैं। जो ताक़तें सदियों राज और समाज को अपनी मर्ज़ी से चलाती रही हैं, उनकी बख़्शी हुई यातनाएँ झेली हैं। लेकिन अपनी डायरी के पन्ने स्याह करते वक़्त मैंने, कभी भी, इन यातनाओं को बैसाखी की तरह इस्तेमाल नहीं किया है। न ही मैंने इन्हें अपने डायरी-शिल्प का माध्यम ही बनने दिया है। अतः मैं आप से कैसे कहूँ कि इस पुस्तक में शामिल तहरीरों को आप कहानी के रूप में स्वीकारें।
Book Details
-
ISBNDolaBibiKaMazaarHardCover
-
Pages210
-
Avg Reading Time7 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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- Description: എൻ്റെ തലയ്ക്കലെ കൊന്ന: ലെൻ്റിനയുടെ ശവകുടീരത്തിനു മീതേ മൃദുവായ മഞ്ഞ പൂത്തുലഞ്ഞു നിൽക്കുന്ന കൊന്നമരം. ഇംചാനോക്ക് എന്ന ധീരനായ വേട്ടക്കാരൻ തൻ്റെ ഇരയുടെ ആത്മാവ് വേട്ടയാടുന്നതിനു പരിഹാരമായി സ്വന്തം മുടിയിഴകൾ പറിച്ച് അർപ്പിച്ചു മാപ്പുപറയുന്നു. പോകെൻമോങ് എന്ന പയ്യൻ അവനെ വിശ്വസിച്ച നാട്ടുകാർക്ക് ഒരു വിമാനത്താവളം വിൽക്കുന്നു. കൊല്ലപ്പെട്ട ഒരു തീവ്രവാദിയുടെ എഴുത്തും പാവപ്പെട്ട ഗ്രാമീണരുടെ ദാരിദ്ര്യത്തിന്റെ അവസ്ഥയും. ഒരു സ്ത്രീയുടെ സ്വകാര്യരഹസ്യം അവരുടെയും മകളു ടെയും ചെറുമകളുടെയും ജീവിതത്തെ മാറ്റിമറിക്കുന്നു. നിരക്ഷരയായ ഒരു ഗ്രാമീണവനിതയുടെ ചെറുചോദ്യത്തിൽ സ്തംഭിച്ചുപോയ മിലിട്ടറി ഓഫീസർ അവളുടെ ഭർത്താവിനെ മോചിപ്പിക്കുന്നു. മാതൃഭൂ മിക്കുവേണ്ടി പ്രാണത്യാഗം നടത്തിയ ഒരു ചെറുപ്പക്കാരൻ അയാളുടെ കാമുകിയുടെ ജീവിതത്തിൽ അവശേഷിപ്പിക്കുന്ന നിഗൂഢതകൾ. പിന്നെ ഒരു പച്ചപ്പുഴുവിനു ചിറകു മുളക്കുന്നതും... മനുഷ്യാവസ്ഥയെപ്പറ്റി ആഴത്തിലുള്ള അവബോധം പ്രകടമാക്കുന്ന കഥകളുടെ സമാഹാരമാണ് "എൻ്റെ തലയ്ക്കലെ കൊന്ന'.
Dastangoi 2
- Author Name:
Mahmood Farooqui
- Book Type:

- Description: महमूद फ़ारूक़ी, अनुषा रिजवी और उनके मुटूठी-भर साथियों ने दुनिया को दिखा दिया कि दास्तान अब भी ज़िन्दा है, या ज़िन्दा की जा सकती है। लेकिन उसके लिए दो चीज़ों की ज़रूरत थी; एक तो कोई ऐसा शख़्स जो दास्तान को बख़ूबी जानता हो और उससे मोहब्बत करता हो। ऐसा शख़्स आज बिलकुल मादूम नहीं तो बहुत ही कामयाब ज़रूर है। दूसरी चीज़ जो अहिया-ए-दास्तान के लिए लाजिम थी, वह था ऐसा शख़्स जो उर्दू ख़ूब जानता हो, फ़ारसी बकदरे-ज़रूरत जानता हो, और उसे अदाकारी में भी ख़ूब दर्क हो, यानी उसे बयानिया और मकालमा को ड्रामाई तीर पर अदा करने पर कुदरत हो। उसे उर्दू अदब की, दास्तान की, और ख़ास कर के हमारी ख़ुशनसीबी तसव्वुर करना चाहिए कि दास्तानगोई के दुबारा जन्म की दास्तान के लिए नागुज़िर मोतज़क्किरह वाला किरदार एक वक़्त में और एक जगह जमा हो गए। महमूद फ़ारूक़ी और मोहम्मद काजिम अपनी कही हुई दास्तानों पर मुश्तमिल एक और किताब बाज़ार में ला रहे हैं तो दास्तानगोई का एक जदीद रूप भी सामने आ चुका है। –शम्मुर्रहमान फ़ारूकी वक़्त का तक़ाज़ा था कि अमीर हमज़ा के मिज़ाज के अलावा और भी तरह की दास्तानें लोगों को सुनाई जाएँ। इसकी शुरुआत तो 2007 में ही हो गई थी जब मैं और अनुषा ने मिलकर तक़सीम-ए-हिन्द पे एक दास्तान मुरत्तब की थी जो पहली जिल्द में शामिल है। अमीर हमज़ा की दास्तानों का जादू हमेशा सर चढ़कर बोला है और आगे भी बोलता रहेगा। मगर आज के ज़माने में उन दास्तानों के अलावा भी बहुत से ऐसे अफ़साने हैं जो सुनाए जाने का तक़ाज़ा करते हैं। इसलिए रवायती दास्तानों को इख़्तियार करने के साथ-साथ मैंने और ऐसी चीज़ें तशकील दी हैं जिन्हें दास्तानजादियाँ कहें तो नामुनासिब ना होगा। ये दास्तानजादियाँ बिलवासता हमारे अहद को और दीगर सच्चाइयों और पहलुओं पर रोशनी डालती हैं जिन्हें हमारे सामईन और नाज़िरीन बेतकल्लुफ़ समझ सकते हैं। –महमूद फ़ारूकी
Chaturi Chamar
- Author Name:
Suryakant Tripathi 'Nirala'
- Book Type:

- Description: चतुरी चमार में निराला ने विषयवस्तु के अनुरूप ही कहानी का नया रूप आविष्कृत किया है। वे कई बार संस्मरणात्मक ढंग से अपनी बात कहते हैं और अन्त में अपनी कूची के एक स्पर्श से संस्मरण को कहानी में बदल देते हैं। इन कहानियों में उनका गद्य अनावश्यक साज-सँवार से मुक्त होकर नई दीप्ति के साथ सामने आया है। इसमें जितना कसाव है, उतना ही पैनापन भी। इस कहानी-संग्रह में हास्य के कल-कल के नीचे प्राय: करुणा और आक्रोश की धारा बहती रहती है। संक्षेप में कहें तो निराला के विद्रोही तेवर और गलत सामाजिक मान्यताओं पर उनके तीखे प्रहारों ने इस छोटे से संग्रह को हिन्दी साहित्य में बेमिसाल बना दिया है।
Prapti
- Author Name:
Paramita Satpathy +1
- Book Type:

- Description: ಪ್ರಾಪ್ತಿ ಸಾಹಿತ್ಯ ಅಕಾದೆಮಿ ಪ್ರಶಸ್ತಿ ವಿಜೇತ ಒಡಿಯಾ ಕಥೆಗಳ ಸಂಗ್ರಹ. ಇದು ಮಾನವ ವಿಧಿಯ, ವಿಶೇಷವಾಗಿ ಮಹಿಳೆಯರ ಅದೃಷ್ಟದ ಘಟನೆಗಳನ್ನು ವ್ಯವಹರಿಸುತ್ತದೆ. ಈ ಸಂಗ್ರಹದಲ್ಲಿನ ಕಥೆಗಳು ಬಾಹ್ಯ ವಾಸ್ತವಗಳನ್ನು ಅಧೀನಗೊಳಿಸುವ ಮೂಲಕ ಜೀವನದ ಆಳವಾದ ಸತ್ಯಗಳನ್ನು ಪರೀಕ್ಷಿಸುವ ಪ್ರಯತ್ನಗಳಾಗಿವೆ. ಅನೇಕ ವಿಷಯಗಳು, ಅದ್ಭುತ ಕಲ್ಪನೆ, ಅಭಿವ್ಯಕ್ತಿಯಲ್ಲಿ ಸ್ಪಷ್ಟತೆ. ಭಾಷೆಯ ಚಾಣಾಕ್ಷ ಬಳಕೆ ಮತ್ತು ಕಾವ್ಯಾತ್ಮಕ ನಿರೂಪಣೆಯಂತಹ ಅಂಶಗಳು ಕೆಲಸವನ್ನು ವೇಗಗೊಳಿಸಲು ಸಹಾಯ ಮಾಡುತ್ತವೆ.
Master Shot
- Author Name:
Farid Khan
- Book Type:

-
Description:
हिन्दी कहानी का संसार इन दिनों नए कथाकारों की उपस्थिति से स्पन्दित है। नए जीवनानुभवों ने कथा-परिदृश्य को विविधवर्णी बनाया है। ‘मास्टर शॉट’ कथा-संकलन में शामिल फ़रीद ख़ाँ की कहानियाँ इसका साक्ष्य प्रस्तुत करती हैं। इन कहानियों में फ़िल्मों और मीडिया की चकाचौंध भरी दुनिया में ज़िन्दगी की लय तलाशते लोग शामिल हैं। कला और व्यवसाय के अन्तर्द्वंद्वों के अलावा तुरन्त सब कुछ पा लेने की आकुलता के बीच नष्ट होती मानवीय संवेदनाओं को बचाए रखने की अन्तिम कोशिशों के कई मार्मिक क्षण इन कहानियों में जीवन्तता के साथ दर्ज़ हैं।
फ़रीद ख़ाँ ने ‘आलता’ कहानी में बलात्कार पीड़िता इरावती की कथा कहते हुए बाज़ार का गुलाम बन चुके मीडिया और मनोरंजन-जगत की नृशंसता को कलात्मकता के साथ रचा है। ‘वीणा के तार’ के रामनरेश भइया गोरखपुर जैसे क़स्बाई शहर से हिन्दी में एम.ए. करके अपने मध्यवर्गीय प्रपंचों के साथ मुम्बई पहुँचते हैं और बार-बार चकित होते हैं। मीनाक्षी और श्रीपद की कथा ‘मास्टर शॉट’ मायानगरी मुम्बई के बहाने स्त्री के प्रति समाज के भीतर पलते अविश्वास की कथा है।
फ़रीद मूलतः कवि हैं। वे दृश्य माध्यमों के लिए भी कहानियाँ, पटकथा और संवाद लिखते रहे हैं। इस संकलन की कहानियों पर दृश्य माध्यमों के लिए लेखन के अनुभव का सकारात्मक प्रभाव देखा जा सकता है। अधिकांश यथार्थ दृश्यों में अभिव्यक्त होता है। संवाद भी अपना सघन प्रभाव रचते हैं। कविता और दृश्य रचने की कला से कथाकार ने इन कहानियों के लिए सान्द्रता अर्जित की है। मुझे उम्मीद है कि यथार्थ की अलग भूमि पर चित्रित ये कहानियाँ हिन्दी के विशाल पाठक-वर्ग का ध्यान आकर्षित करेंगी।
—हृषीकेश सुलभ
Stree Tatha Anya Kahaniyan
- Author Name:
S. K. Pottekat
- Book Type:

-
Description:
साहित्य अकादेमी’ और ‘ज्ञानपीठ’ सहित अनेक पुरस्कारों-सम्मानों से विभूषित मलयालम कथाकार एस.के. पोट्टेक्काट की यह पुस्तक ‘स्त्री तथा अन्य कहानियाँ’ उनकी कुछ चर्चित कहानियों का संकलन है। ‘स्त्री’ इनमें सर्वाधिक पढ़ी जानेवाली और प्रशंसित कहानियों में से एक है।
प्रेम, कामना, समर्पण और विश्वास जैसे मनोभावों को गहरे तक अनुभूत करानेवाली लम्बी कहानी ‘स्त्री’ प्रेम के साथ मानव व्यवहार की कई जटिल परतों को भी खोलती है। यह विशेषता पोट्टेक्काट की लगभग सभी रचनाओं में देखने को मिलती है। इसी संग्रह में शामिल कहानी ‘हमीद ख़ान’ दक्षिण भारत में साम्प्रदायिक सद्भाव और अविश्वास दोनों को बहुत छोटे कलेवर, लेकिन अत्यन्त प्रभावशाली ढंग से रेखांकित करती है।
इसी तरह ‘पदचाप’ शीर्षक कहानी पति-पत्नी के सम्बन्धों के साथ-साथ नियति की आकस्मिकता का वर्णन करती है। कहने की आवश्यकता नहीं कि पोट्टेक्काट का जीवन अनुभव अत्यन्त व्यापक है। वे यात्रा-प्रेमी भी थे जिसके चलते न सिर्फ़ उनकी अनुभूतियों का क्षेत्र बहुत व्यापक है, बल्कि उनकी कहन में भी कहीं दोहराव नहीं दिखाई देता।
मलयालम से यह अनुवाद भी कहीं कृत्रिमता का आभास नहीं देता है।
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