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Author:
Mamta KaliyaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
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प्रस्तुत कहानी-संग्रह ‘जाँच अभी जारी है’ में मशहूर कहानीकार ममता कालिया की 16 अनुपम कहानियाँ संगृहीत हैं जो वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों को उजागर करती हैं। इस कहानी-संग्रह में ‘सेमिनार’, ‘उमस’, ‘जाँच अभी जारी है’, ‘रजत जयन्ती’, ‘इक्कीसवीं सदी’, ‘दाम्पत्य’, ‘नया त्रिकोण’, ‘प्रिया पाक्षिक’, ‘अनुभव’, ‘पहली’, ‘नायक’, ‘वर्दी’, ‘चोट्टिन’, ‘झूठ’, ‘शॉल’ तथा ‘इरादा’ आदि कहानियाँ संगृहीत हैं। नए कलेवर में सजाया-सँवारा गया ममता जी का प्रस्तुत कहानी-संग्रह पाठकों को अवश्य पसन्द आएगा।
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प्रस्तुत कहानी-संग्रह ‘जाँच अभी जारी है’ में मशहूर कहानीकार ममता कालिया की 16 अनुपम कहानियाँ संगृहीत हैं जो वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों को उजागर करती हैं। इस कहानी-संग्रह में ‘सेमिनार’, ‘उमस’, ‘जाँच अभी जारी है’, ‘रजत जयन्ती’, ‘इक्कीसवीं सदी’, ‘दाम्पत्य’, ‘नया त्रिकोण’, ‘प्रिया पाक्षिक’, ‘अनुभव’, ‘पहली’, ‘नायक’, ‘वर्दी’, ‘चोट्टिन’, ‘झूठ’, ‘शॉल’ तथा ‘इरादा’ आदि कहानियाँ संगृहीत हैं। नए कलेवर में सजाया-सँवारा गया ममता जी का प्रस्तुत कहानी-संग्रह पाठकों को अवश्य पसन्द आएगा।
Book Details
-
ISBN9788180315374
-
Pages160
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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राजी के कथा-संसार में आदमी के अस्तित्व के सांस्कृतिक आयामों और मूल्यात्मक विरोधाभासों की पड़ताल के ज़्यादा बड़े सवालों से जूझने के लिए परिवार भारतीय समाज की केन्द्रीय इकाई की हैसियत से प्रतिष्ठित है। राजी की कहानियों के सन्दर्भ में यह सामाजिक-सांस्कृतिक मूल्य संवेदना का पारिवारिक देहान्तर है। कभी इस बदलाव के पीछे इतिहास या रणनीति या अर्थ की तत्काल अनुपस्थित और अदृश्य व्यवस्थाएँ हैं तो कभी सम्बन्धों में शक्ति के सन्तुलन का बदला हुआ समीकरण। लेकिन इस सुबकते संसार में मौजूद आदमी की सोच और संवेदना के बहाव और मोड़ में इतिहास, राजनीति या अर्थ के हस्तक्षेप को पहचान लेना भर इन कहानियों के लिए काफ़ी नहीं है। इस हस्तक्षेप के साथ जूझते हुए आदमी का लहूलुहान मर्म और फिर भी किसी मूल्य को खोजने, खोदने या दुह लेने की ज़िद और जूझ इन कहानियों को वहाँ तक ले जाना चाहती है, जहाँ परिवर्तन की प्रक्रिया वैचारिक मीमांसाओं और बौद्धिक विश्लेषणों की पकड़ और पहुँच से बाहर रह जाया करती है।
देखने में ये बहुत शान्त और स्थिर कहानियाँ हैं। फेन और फिचकुर उगलती, मुट्ठियाँ लहराती, उगते हुए सूरज के साथ समापन की ओर जानेवाली प्रसिद्ध रूप में जुझारू कहानियों के विपरीत यहाँ संरचना की सुस्पष्ट चौहद्दियों के बीच एक सुपरिभाषित भाव-संसार है जिसे किसी परिचित मिथक मूल्य से विचलन के क्षण में पकड़ा गया है। सधे हाथों की तराश के अधीन संरचना एक संयत, सन्तुलित सुसम्बद्ध आकार बनकर उभरती है। अहसास के फैलाव को एक बिन्दु पर केन्द्रित और सघन करते जाने की घोर तन्मयता कथा को उद्घाटित करती है। ऊपर से राजी का अनूठा शब्दशिल्प। शब्द को जो एक विशिष्ट विलक्षण अस्तित्व राजी दे पाती हैं, उसके प्रति एक सजग विस्मय का भाव पैदा होता है। कथा यही प्राय: कथ्य का एक रूपकीय समतोल होती है। कथा की मूल्य-चेतना इस परिष्कार को अनिवार्य कर देती है क्योंकि वह राजी के लिए शायद सृजनकर्म की सार्थकता से जुड़ी हुई बात है।
—अर्चना वर्मा
Pratinidhi Kahaniyan : Hrishikesh Sulabh
- Author Name:
Hrishikesh Sulabh
- Book Type:

- Description: “अपनी कहानियों पर बात करना मेरे लिए कठिन काम है। बहुत हद तक अप्रिय भी। लिखी जा चुकी और प्रकाशित हो चुकी कहानियों से अक्सरहाँ मैं पीछा छुड़ाकर भाग निकलता हूँ, पर मुझे लगता है कि यह मेरा भ्रम ही है। मेरी कहानियों के कुछ पात्र लगातार मेरा पीछा करते हैं और अपनी छवि बदलकर, किसी लिखी जा रही नई कहानी में घुसने की बार-बार कोशिशें करते हैं। कई बार तो घुस भी आते हैं और मैं उन्हें न रोक पाने की अपनी विवशता पर हाथ मलते रह जाता हूँ। जैसे, ‘वधस्थल से छलाँग’ का रामप्रकाश तिवारी, जो ‘यह ग़म विरले बूझे’ या ‘काबर झील का पाखी’ जैसी कहानियों में घुस आया। मैंने अपनी कहानियों में प्रवेश के लिए किसी एक रास्ते का चुनाव नहीं किया। हर कहानी में प्रवेश के लिए मेरी राह बदल जाती है। कभी किसी पात्र की बाँह पकड़कर प्रवेश करता हूँ, तो कभी कोई घटना या व्यवहार या स्मृति या विचार कहानी के भीतर पैठने के लिए मेरी राहों की निर्मिति करते हैं। हमेशा एक अनिश्चय और अनिर्णय की स्थिति बनी रहती है। हर बार नई कहानी शुरू करने से पहले मेरा मन थरथर काँपता है। शायद यही कारण है कि बहुत कम कहानियाँ लिख सका हूँ। मेरे कुछ मित्रों का मानना है कि कहानी और नाटक लिखने के बीच आवाजाही के कारण मेरी कहानियों पर आलोचकों की नज़र नहीं पड़ी। पर यह सच है कि नाटक और कहानी के बीच मेरी यह आवाजाही मुझे बहुत प्रिय है। हर बार नौसिखुए की तरह अथ से आरम्भ करना मुझे पुनर्नवा करता है। मैं यह करते रहना चाहता हूँ।” —भूमिका से
Glimpses of Glory
- Author Name:
Santosh Shailja
- Book Type:

- Description: These short stories are about those great women (some girls too) who believed in great ideals of love, sacrifice, patriotism etc. and had the courage to live those ideals in their lives. They belong to different periods of history (some pre-historic) as well as different places and positions in society. I have not written their life history—it is just a glimpse into their life which shows their quality that proved them great and extraordinary. I do not present them as being super-human or heavenly bodies. They are just like any ordinary women but they achieved greatness by their commitment to their ideals. Therefore, readers will be surprised to read a new version of the story of Savitri or Parvati. But I believe that these great women need to be understood and emulated as our ideals. The new generation needs to know them in their true logical perspective. Otherwise we might forget them and their ideals in this age of materialism.
jadoo : Ek Hansi, Ek Heroine
- Author Name:
Ravindra Arohi
- Book Type:

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Description:
जीवन की उदासियों के रंग इतने गाढ़े और प्रबल हैं कि वे असहनीय हैं। अकसर फ़िक्शन जीवन से अधिक दुर्दान्त रूप में उपस्थित होता है। उपस्थित होकर वह क्या करता है? ‘यह क्या’ रवीन्द्र आरोही की कहानियों का मूल सत्त्व है। इन कहानियों में उदासी, पीड़ा, छल और प्रेम यानी जीवन का सब कुछ है। पर वह इन रूपों में है कि सहनीय है और सहने का साहस भी देता है।
रवीन्द्र की कहानियाँ उदासियों से जीवन का सौन्दर्य शिल्प रचती हैं। इनमें एक नदी है जो लोक चेतना की ठसक के साथ क़स्बों, गाँवों और नगरों के बीच डोलती है और पिछले वक़्तों से किन्हीं अनाम बिन्दु तक की कथा यात्रा करती है। जिस प्रकार आँसू वेदना के अणुसूत्र हैं वैसे ही इन कहानियों में स्मृति के अणुसूत्र हैं। स्मृतिविहीन निचाट संसार के समानान्तर स्मृतिलोक रचती इन कहानियों में वैसा कोई पात्र नहीं है जिसके प्रेम में आप न पड़ जाएँ।
—उपासना
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