Bete Ko Kya Batlaoge
Author:
Ramakant ShrivastavaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections0 Ratings
Price: ₹ 100
₹
125
Unavailable
प्रिय रमाकांत,</p>
<p>बहुत दिनों से तुम्हारी कोई कहानी नहीं पढ़ी। क्या बात है? खैरागढ़ जैसी दूर-दराज़ जगह पर बैठकर तुमने ‘मध्यान्तर’, ‘बेटे को क्या बतलाओगे’, ‘राजा जनक’ जैसी शानदार कहानियाँ लिखकर सभी का ध्यान आकृष्ट किया था। कम लिखकर भी आज के मनुष्य की पीड़ा और उसके विरोधाभासों को तुमने अपनी कहानियों में व्यक्त किया।</p>
<p>तुम्हारा अगला कहानी संकलन कब आ रहा है? नए संकलन में ‘राजा जनक’, ‘प्रेतबाधा’ और ‘उस्ताद के सुर’ कहानियों को ज़रूर शामिल करना। ‘उस्ताद के सुर’ तो हिन्दी की अपने क़िस्म की अलग कहानी है। उसे पढ़कर मुझे लगा था कि उस्ताद सितार बजा रहे हैं और मैं अपना कलैरेनट बग़ल में रखकर सामने दरी पर पालथी मारकर बैठा हुआ रस की फुहार में भीग रहा हूँ। ‘चुप साले’ कहानी में मैं कीचड़-भरी सड़क पर गाड़ी को धक्का लगा रहा हूँ। तुम्हारी चरित्र-सृष्टि में अक्सर मैं अपने को पाता रहा हूँ।</p>
<p>नए साल की शुभकामनाओं के साथ—</p>
<p>तुम्हारा</p>
<p>काशीनाथ सिंह</p>
<p>30 दिसम्बर, 1998
ISBN: 9788171194452
Pages: 139
Avg Reading Time: 5 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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Description:
प्रस्तुत संग्रह में निराला की चार कहानियाँ संगृहीत हैं और चारों का रंग अलग-अलग है। ‘क्या देखा’ में अगर हीरा नामक महिला की व्यथा-कथा है, तो ‘कला की रूपरेखा’ में एक सत्य घटना के माध्यम से यह प्रतिपादित किया गया है कि कला जीवन से निरपेक्ष नहीं हो सकती, पहचाननेवाली आँख हो तो जीवन में ही कला का अस्तित्व दिखाई देगा। ‘सुकुल की बीवी’ निराला के विद्रोही तेवर की कहानी है। एक मुसलमान पिता और हिन्दू माँ की सन्तान पुरखराज का विवाह सुकुल जी से कराने में निराला सहायक बनते हैं। उस समय के समाज में यह अकल्पनीय था। चौथी कहानी ‘श्रीमती गजानंद शास्त्रिणी’ में व्यंग्य का स्वर है। श्रीमती गजानंद शास्त्रिणी छायावाद के विरोध में उपदेशात्मक लेख लिखकर लोकप्रियता अर्जित करती हैं। उनकी सफलता अवसरवाद की सफलता है।
कुल मिलाकर यह छोटा-सा संग्रह कहानी के क्षेत्र में निराला की विशेषताओं का प्रतिनिधित्व करता है, और आशा है कि नए रूप-रंग में प्रकाशित यह संस्करण पाठकों को प्रीतिकर लगेगा।
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