Ujali Aag
(0)
Author:
Ramdhari Singh DinkarPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
495
396 (20% off)
Available
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अनादि काल से ही बोधकथाओं की अपनी महत्ता रही है। इनका मुख्य उद्देश्य यही रहा है कि प्रेरक और गूढ़ प्रसंगों को रोचक शैली में जनमानस तक पहुँचाया जाए ताकि इनमें निहित नीतियों एवं उपदेशों से वे अपने जीवन में सृजनात्मक चेतना विकसित कर सकें। रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की इस पुस्तक ‘उजली आग’ में इस तथ्य को सहज ही जाना-समझा जा सकता है। ‘उजली आग’ बच्चों और किशोरों से लेकर प्रौढ़ पाठकों तक की जीवन-शैली को कुतूहल, मनोरंजन, शिक्षा, मार्गदर्शन आदि के ज़रिए गहरे प्रभावित करनेवाली पुस्तक है। दिनकर की इस अनुपम कृति में जो भी बोधकथाएँ शामिल हैं, जैसे—आदमी का देवत्व, बीज बनने की राह, धर्म लोगे, धर्म? गुफावासी, अफ़सर और पैग़म्बर, उजला हाथी और गेहूँ के खेत, जीवन का बोझ, नर-नारी, माया की रचना, नारी की रुचि, अर्धनारीश्वर, नदी के पार की आग, कलाकार, बनिया और किसान, संसार का इतिहास, पत्थर के दूसरी ओर, पराजय, फूल की आरी, निर्माता और विजेता, सपनों का सपना, सुकरात का मकान, साहसी माता, घोड़ा और ऊँट, ऊँचाई के गीत, शासन और राजनीति आदि, वे सब पढ़ने वाले की जीवन-दृष्टि को गहरे प्रभावित करती है। राष्ट्रकवि की इस पुस्तक से आशा है कि यह जीवन और समाज में अपनी नवीनता से नए परिवेश के निर्माण में अवश्य सहायक सिद्ध होगी।
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अनादि काल से ही बोधकथाओं की अपनी महत्ता रही है। इनका मुख्य उद्देश्य यही रहा है कि प्रेरक और गूढ़ प्रसंगों को रोचक शैली में जनमानस तक पहुँचाया जाए ताकि इनमें निहित नीतियों एवं उपदेशों से वे अपने जीवन में सृजनात्मक चेतना विकसित कर सकें। रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की इस पुस्तक ‘उजली आग’ में इस तथ्य को सहज ही जाना-समझा जा सकता है।
‘उजली आग’ बच्चों और किशोरों से लेकर प्रौढ़ पाठकों तक की जीवन-शैली को कुतूहल, मनोरंजन, शिक्षा, मार्गदर्शन आदि के ज़रिए गहरे प्रभावित करनेवाली पुस्तक है। दिनकर की इस अनुपम कृति में जो भी बोधकथाएँ शामिल हैं, जैसे—आदमी का देवत्व, बीज बनने की राह, धर्म लोगे, धर्म? गुफावासी, अफ़सर और पैग़म्बर, उजला हाथी और गेहूँ के खेत, जीवन का बोझ, नर-नारी, माया की रचना, नारी की रुचि, अर्धनारीश्वर, नदी के पार की आग, कलाकार, बनिया और किसान, संसार का इतिहास, पत्थर के दूसरी ओर, पराजय, फूल की आरी, निर्माता और विजेता, सपनों का सपना, सुकरात का मकान, साहसी माता, घोड़ा और ऊँट, ऊँचाई के गीत, शासन और राजनीति आदि, वे सब पढ़ने वाले की जीवन-दृष्टि को गहरे प्रभावित करती है।
राष्ट्रकवि की इस पुस्तक से आशा है कि यह जीवन और समाज में अपनी नवीनता से नए परिवेश के निर्माण में अवश्य सहायक सिद्ध होगी।
Book Details
-
ISBN9788180314162
-
Pages124
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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इससे यह नहीं समझ लिया जाना चाहिए कि इस्मत अपनी कहानी में कोई कलात्मक चमत्कार करती हैं, वह ज़िन्दगी से अपने सच्चे लगाव को कहानी का ज़रिया बनाती हैं और जिस शब्दावली का चयन उनकी ज़बान करती है, वह ख़ुद भी ज़िन्दगी से उनके इसी शदीद इश्क़ से तय होती है। सिर्फ़ कोई एक शब्द या कोई एक पद, और आपको अपनी आँखों के सामने पूरा एक दृश्य घटित होता दिखता है। ‘यह इतना बड़ा चीख़ता-चिंघाड़ता बम्बई’ —इस संग्रह की पहली ही कहानी में यह एक वाक्य आता है, और सच में बम्बई को किसी और तरह से चित्रित करने की ज़रूरत नहीं रह जाती। इसी बम्बई में सरला बेन हैं। ‘कभी किसी ने उन्हें हटकर रास्ता देने की ज़रूरत तक न महसूस की। लोग दनदनाते निकल जाते और वह आड़ी होकर दीवार से लग जातीं।’ एक कहानी का यह एक वाक्य क्या एक मानव जाति के एक प्रतिनिधि के बरसों का ख़ाका नहीं खींच देता।
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- Description: 1886ರಿಂದ 1937 ರವರೆಗೂ ಬ್ರಿಟಿಷ್ ವಸಾಹತುಶಾಹಿಯ ಭಾಗವೇ ಆಗಿ ಭಾರತದೊಂದಿಗೆ ಸೇರ್ಪಡೆಯಾಗಿದ್ದ ಬರ್ಮಾ ಆ ನಂತರ ಬೇರ್ಪಟ್ಟು 1948ರಲ್ಲಿ ಸ್ವತಂತ್ರ ದೇಶವಾಯಿತೆಂಬುದು ಈಗ ಇತಿಹಾಸ. ಇದು ರಾಜಕೀಯ ಇತಿಹಾಸವಾದರೆ ಸಾಂಸ್ಕೃತಿಕವಾಗಿ ಮತ್ತು ಸಾಮಾಜಿಕವಾಗಿ ಬರ್ಮಾಕ್ಕೂ ಭಾರತಕ್ಕೂ ಅತಿನಿಕಟ ಸಂಬಂಧವಿದೆ. ಬರ್ಮಾದ ಬಹುಸಂಖ್ಯಾತ ಜನ ನಿಷ್ಠೆಯಿಂದ ಅನುಸರಿಸಿ ಆಚರಿಸುತ್ತಿರುವ ಧರ್ಮವೆಂದರೆ ಭಾರತದಲ್ಲಿಯೇ ಹುಟ್ಟಿ ಬೆಳೆದ ಬೌದ್ಧ ಧರ್ಮವೇ. ಬುದ್ಧನ ನಾಡಾದ ಭಾರತಕ್ಕೆ ಲಾಗಾಯ್ತಿನಿಂದಲೂ ಬರ್ಮೀಯರು ಯಾತ್ರೆ ಬರುವುದು ನಡೆದೇ ಇದೆ. ಇನ್ನು ಭಾರತದಂತೆಯೇ ಬರ್ಮಾ ಕೂಡ ವ್ಯವಸಾಯ ಪ್ರಧಾನವಾದ ದೇಶವಾಗಿದ್ದು ರೈತಾಪಿ ಜನರ ನಾಡಾಗಿದೆ. ಭಾರತದಂತೆಯೇ ಮಧ್ಯಮ ಮತ್ತು ಕೆಳಮಧ್ಯಮ ವರ್ಗದ ಜನರೇ ಹೆಚ್ಚಾಗಿರುವ ಬರ್ಮಾದ ಶ್ರೀ ಸಾಮಾನ್ಯರ ಬದುಕು ಭಾರತದ ಬಡ ಜನತೆಯ ಬದುಕನ್ನು ಅತ್ಯಂತ ನಿಕಟವಾಗಿ ಹೋಲುತ್ತದೆ. ಪ್ರಭುತ್ವದ ಮೌಲ್ಯಗಳ ಅಡಿಯಲ್ಲಿ ಬದುಕು ಸಾಗಿಸುತ್ತಿರುವವರ ಅಸಹಾಯಕತೆ, ಎರಡನೇ ಮಹಾಯುದ್ಧ ಜನರ ಬದುಕನ್ನು ಅತಂತ್ರಗೊಳಿಸಿದ್ದರ ಬಡ ಬರ್ಮೀಯರ ಚಿತ್ರ ನಮ್ಮ ದೇಶದ ಜನರ ಬದುಕಿಗಿಂತ ಬೇರೆಯೇನಲ್ಲ ಎಂದು ಅನಿಸುತ್ತದೆ. ಮೂಲ ಅನುವಾದಕರಾದ ಚಂದ್ರಪ್ರಕಾಶ್ ಪ್ರಭಾಕರ್ 'ಮೌತೀರಿ' ಅವರು ಮೂಲತಃ ಬರ್ಮೀಯರಾಗಿದ್ದು ಬರ್ಮೀ ಹಿಂದೀ ಭಾಷೆಗಳಲ್ಲಿ ಅತ್ಯಂತ ನಿಷ್ಣಾತರಾಗಿದ್ದು ಅಲ್ಲಿಯ ಸಾಹಿತ್ಯ ಮತ್ತು ಸಾಹಿತಿಗಳ ನಿಕಟ ಪರಿಚಯವಿದ್ದವರಾದ ಕಾರಣ ಈ ಕಥೆಗಳ ಹಿಂದೀ ಅವತರಣಿಕೆ ಮೂಲವನ್ನು ಯಥಾವತ್ತಾಗಿ ಹೋಲುತ್ತವೆ. ಹಾಗಾಗಿ ಕನ್ನಡದಲ್ಲಿ ರೂಪು ತಾಳಿರುವ ಈ ಕಥೆಗಳು ಮೂಲಕ್ಕೆ ತೀರ ಹತ್ತಿರವಾಗಿವೆ. ಮೂಲತಃ ತುಮಕೂರಿನವರಾದ ಡಾ. ಆರ್. ಲಕ್ಷ್ಮೀನಾರಾಯಣ(1949) ಅವರು ಕಾಲೇಜು ಶಿಕ್ಷಣ ಇಲಾಖೆಯ ವಿವಿಧ ಸರ್ಕಾರಿ ಕಾಲೇಜುಗಳಲ್ಲಿ ಅಧ್ಯಾಪಕ, ಪ್ರಾಧ್ಯಾಪಕ ಮತ್ತು ಪ್ರಿನ್ಸಿಪಾಲ್ ಆಗಿ ಕೊನೆಯಲ್ಲಿ ಜಂಟಿ ನಿರ್ದೇಶಕರಾಗಿ 37 ವರ್ಷಗಳ ಸೇವೆ ಸಲ್ಲಿಸಿ ನಿವೃತ್ತರಾಗಿದ್ದು ಸದ್ಯ ಪ್ರತಿಷ್ಠಿತ ಬಿ.ಎಂ.ಶ್ರೀ. ಪ್ರತಿಷ್ಠಾನದ ಅಧ್ಯಕ್ಷರಾಗಿದ್ದಾರೆ. ಮೂರು ದಶಕಗಳಿಂದ ಅನುವಾದ ಕ್ಷೇತ್ರದಲ್ಲಿ ಸಕ್ರಿಯರಾಗಿರುವ ಇವರು ಇಂಗ್ಲಿಷ್ ಮತ್ತು ಹಿಂದಿಯಿಂದ ಅನೇಕ ಕೃತಿಗಳನ್ನು ಅನುವಾದಿಸಿದ್ದಾರೆ. ಸಂಸ್ಕೃತದಿಂದ ಅನುವಾದಿಸಿದ 'ಕನ್ನಡ ವಕ್ರೋಕ್ತಿ ಜೀವಿತ' ಎಂಬ ಇವರ ಕೃತಿಗೆ 2004ರಲ್ಲಿ ಕರ್ನಾಟಕ ಸಾಹಿತ್ಯ ಅಕಾಡೆಮಿಯ ಪುಸ್ತಕ ಬಹುಮಾನ ಹಾಗೂ 2007ರಲ್ಲಿ ಕೇಂದ್ರ ಸಾಹಿತ್ಯ ಅಕಾಡೆಮಿಯ ಅನುವಾದ ಪುರಸ್ಕಾರ ದೊರೆತಿವೆ. ಕಿರಣ್ ನಗರ್ಕರ್ ಅವರ ಸಾಹಿತ್ಯ ಅಕಾಡೆಮಿ ಪ್ರಶಸ್ತಿ ಪುರಸ್ಕೃತ ಇಂಗ್ಲಿಷ್ ಕಾದಂಬರಿ 'ಕಕೋಲ್ಡ್' ನ ಕನ್ನಡ ರೂಪ 'ಬೇಗುದಿ'ಯನ್ನು ಕೇಂದ್ರ ಸಾಹಿತ್ಯ ಅಕಾಡೆಮಿ ಪ್ರಕಟಿಸಿದ್ದು ಅದಕ್ಕೆ 2013ರ ಕರ್ನಾಟಕ ಸಾಹಿತ್ಯ ಅಕಾಡೆಮಿಯ ಪುಸ್ತಕ ಬಹುಮಾನ ಬಂದಿದೆ.
Pataal Pani
- Author Name:
Madan Mohan
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- Description: Short Stories
Savant Aunty Ki Ladkiyan
- Author Name:
Geet Chaturvedi
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Description:
मिथकों और दंतकथाओं का आविष्कार गीत चतुर्वेदी की कहानियों की विशेषता है। हमारी इतिहास चेतना को तथ्यों के घटाटोप में मूँदकर तबाह करने के षड्यंत्र की मुख़ालफ़त करते हुए गीत की कहानियाँ व्यष्टि के बहाने समष्टि का भावात्मक इतिहास बनकर पाठकों के कलात्मक आस्वाद का विस्तार करती हैं। चाहे 'सौ किलो का साँप' हो, 'सावंत आंटी की लड़कियाँ' या फिर 'साहिब है रंगरेज' जैसी कहानी, गीत हमारे समाज के अवचेतन में दबी पड़ी उत्कंठाओं, आशाओं व दुराशाओं को एक गहन अन्तर्दृष्टि के साथ रचनात्मक लहज़े में ढालते हैं।...(उनकी कहानियों के) संसारों की बहुलता के मूल में है भाषा की बहुध्वन्यात्मकता। गीत भाषा के साथ बहुत सजग और रचनात्मक खिलवाड़ करते हैं।
—प्रियम अंकित; प्रगतिशील वसुधा।
इक्कीसवीं सदी के पहले दशक के मेरे प्रिय कवि व कथाकार हैं गीत चतुर्वेदी।
—नामवर सिंह
‘सावंत आंटी की लड़कियाँ’ जीवन को गहरी उथलपुथल में डालती हैं। कठोर इलाकों में प्रवेश करती हुई वे लगभग बेक़ाबू हैं, उनका जोखिम ज़बर्दस्त है, शास्त्रीयता का मुखौटा तोड़नेवाला। यह कहानी फ़तह नहीं, त्रासदी है।
—ज्ञानरंजन
गीत चतुर्वेदी ने अपने गल्प व कविताओं में अवां-गार्द भाव दिखाया है। उनका अध्ययन बेहद विस्तृत है जो कि उनकी पीढ़ी के लिए एक दुर्लभ बात है। यह पढ़ाई उनकी रचनाओं में अनायास व सहज रूप से गुँथी दिखती है। उनकी भाषा व शैली अभिनव है। उनके पास सुलझी हुई दृष्टि है जिसमें क्लीशे नहीं और जो कि वर्तमान विचारधारात्मक खेमों के शिकंजे में भी फँसी हुई नहीं है।
—अशोक वाजपेयी
गीत चतुर्वेदी समकालीन रचनाशीलता के विरल उदाहरण हैं। कविता, कहानी व अनुवाद में उन्होंने कई यादगार काम किए हैं। ‘साहिब है रंगरेज़’ उनके कथाकार की उपलब्धि है।
—अखिलेश
गीत चतुर्वेदी विरल रचनाकारों में से एक हैं। ‘साहिब है रंगरेज़’ निश्चित ही एक बेहतरीन रचना है। हमारे समय की जीवित मन:स्थितियों का एक पाठ।
—जीतेन्द्र गुप्ता
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