Rakshas Phoot Phoot Kar Roya
(0)
Author:
Unita SachchidanandPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
495
396 (20% off)
Available
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लोमड़ी और राक्षस को हर समाज में चालाक, क्रूर और मनुष्य के दुश्मन के रूप में ही सर्वथा चित्रित किया गया है लेकिन जापानी जीवन–शैली में प्रकृति और अन्य जीवों के प्रति जो लगाव रहा है, उसका प्रभावशाली दिग्दर्शन जापान के अग्रणी साहित्यकारों के प्रस्तुत संग्रह में देखने को मिलता है।</p> <p>‘राक्षस फूट–फूटकर रोया’ में जहाँ राक्षस को नेक और मिलनसार दर्शाया गया है, वहीं ‘एक द्वीप की लोमड़ी’ में लोमड़ी की मासूमियत झलकती है।
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लोमड़ी और राक्षस को हर समाज में चालाक, क्रूर और मनुष्य के दुश्मन के रूप में ही सर्वथा चित्रित किया गया है लेकिन जापानी जीवन–शैली में प्रकृति और अन्य जीवों के प्रति जो लगाव रहा है, उसका प्रभावशाली दिग्दर्शन जापान के अग्रणी साहित्यकारों के प्रस्तुत संग्रह में देखने को मिलता है।</p>
<p>‘राक्षस फूट–फूटकर रोया’ में जहाँ राक्षस को नेक और मिलनसार दर्शाया गया है, वहीं ‘एक द्वीप की लोमड़ी’ में लोमड़ी की मासूमियत झलकती है।
Book Details
-
ISBN9788126706150
-
Pages68
-
Avg Reading Time2 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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- Description: मुकेश का सगा भाई जिंदा है क्या ? अगर है तो कहाँ है? उसे ढूँढना चाहिए । अपने जीवन की गाथा उसे सुनानी है । इस विशाल संसार में सिर्फ वे ही दोनों एक-दूसरे से रक्त से जुड़े हैं । जीवन की घटनाएँ विचित्र रूप ले रही थीं । तीन दिन पहले वह रूपिंदर-सुरिंदर का पंजाबी मुंडा था । बीस दिन पहले वह त्रिवेदीजी -सुमन का इकलौता बेटा था । लक्ष्मीपुत्र था । भारतीय था । आज वह भारत का भी नहीं है । इस भूमि का, इस देश का, इस संस्कृति का नहीं है । अब वह अमेरिकी है! - द्वंद्व' से '' मुझे आपसे कुछ पूछना है । अच्छा, पहले यह बताइए कि शंकर मेरा कुछ नहीं लगता, फिर हम दोनों हमशक्ल कैसे हैं ? '' माँजी, एक सवाल पूछूँ? बुरा तो नहीं मानेंगी? शंकर के पिता का देहांत हुआ कैसे? उनके मरण में बहुत राज छिपे हैं । जहाँ तक मेरी समझ है, मेरे पिताजी का कोई रिश्तेदार इस इलाके में नहीं रहा । न पहले थे, न अब हैं । हम लोग शुरू से ही दिल्ली में रहे ।.. ' तर्पण ' से सुप्रसिद्ध कन्नड़ लेखिका श्रीमती सुधा मूर्ति के ये दोनों पठनीय सामाजिक उपन्यास पाठकों की संवेदनशीलता और मर्म को भीतर तक छू जाएँगे ।
Hisare Zaat Se Pare
- Author Name:
Nusrat Mehdi
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