Tukdon Tukdon Mein Aurat
(0)
Author:
Mamta MehrotraPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
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‘‘हाँ! क्या मामला है? न्याय की प्रक्रिया शुरू की जाए।’’ ‘‘जी, ये इस शहर के एक युवक के साथ शहर की सीमा पार कर रही थी। यह जुर्म किया है इसने।’’ ‘‘नहीं! मैंने जुर्म नहीं किया है। इस युवक ने मेरे आगे पेशकश की थी कि यह मुझे गाँव छोड़ आएगा। वहाँ मेरे बच्चे भूखे हैं। मैं उनके लिए रोटी लेकर जा रही थी।’’ ‘‘पाप! अब तो तुमने महापाप किया है। शहर की रोटी गाँव लेकर जा रही थी। तुमको दंड मिलेगा और युवक की गलती भी नहीं है। जरूर एक स्त्री होकर तुमने उसको पथभ्रमित किया होगा। कोई पुरुष इतना साहसिक कदम उठा ही नहीं सकता है, अगर स्त्री उसको न उकसाए।’’ —इसी संग्रह से प्रस्तुत संग्रह की अधिकांश कहानियाँ नारी के अस्तित्व की लड़ाई को दरशानेवाली हैं। कैसे एक महिला समाज में हर स्तर पर प्रताड़ना और अवहेलना झेलती है। उसका किस प्रकार शोषण होता है। नारी के जीवन जीने की जद्दोजहद को लेखिका ने इन कहानियों में बड़ी सूक्ष्मता और सहजता से अभिव्यक्त किया है। समस्त कहानियाँ कहीं-न-कहीं हमारे अंदर की दोयम सोच एवं खोखलेपन को बखूबी दरशाती हैं। पठनीयता से भरपूर, मन को उद्वेलित करनेवाली कहानियाँ।
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‘‘हाँ! क्या मामला है? न्याय की प्रक्रिया शुरू की जाए।’’
‘‘जी, ये इस शहर के एक युवक के साथ शहर की सीमा पार कर रही थी। यह जुर्म किया है इसने।’’
‘‘नहीं! मैंने जुर्म नहीं किया है। इस युवक ने मेरे आगे पेशकश की थी कि यह मुझे गाँव छोड़ आएगा। वहाँ मेरे बच्चे भूखे हैं। मैं उनके लिए रोटी लेकर जा रही थी।’’
‘‘पाप! अब तो तुमने महापाप किया है। शहर की रोटी गाँव लेकर जा रही थी। तुमको दंड मिलेगा और युवक की गलती भी नहीं है। जरूर एक स्त्री होकर तुमने उसको पथभ्रमित किया होगा। कोई पुरुष इतना साहसिक कदम उठा ही नहीं सकता है, अगर स्त्री उसको न उकसाए।’’
—इसी संग्रह से
प्रस्तुत संग्रह की अधिकांश कहानियाँ नारी के अस्तित्व की लड़ाई को दरशानेवाली हैं। कैसे एक महिला समाज में हर स्तर पर प्रताड़ना और अवहेलना झेलती है। उसका किस प्रकार शोषण होता है। नारी के जीवन जीने की जद्दोजहद को लेखिका ने इन कहानियों में बड़ी सूक्ष्मता और सहजता से अभिव्यक्त किया है। समस्त कहानियाँ कहीं-न-कहीं हमारे अंदर की दोयम सोच एवं खोखलेपन को बखूबी दरशाती हैं। पठनीयता से भरपूर, मन को उद्वेलित करनेवाली कहानियाँ।
Book Details
-
ISBN9789350487730
-
Pages112
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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