Huduklullu
(0)
Author:
Pankaj MitraPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
495
396 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
नब्बे के दशक में उभरनेवाली कथा–प्रतिभाओं में पंकज मित्र का नाम इसलिए ज़्यादा महत्त्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि इन्होंने एक दशक से कथा-क्षेत्र में अपनी उपस्थिति को बारम्बार महत्त्वपूर्ण साबित किया है।</p> <p>इस संग्रह की कहानियों में भी विद्रूपता एवं विडम्बना का एक खेल चलता रहता है और इस खेल में ख़ुद कथाकार भी खिलंदड़ा हो जाता है पर कथ्य के रचाव या चरित्रों के विकास में वह हस्तक्षेप कभी नहीं करता। चरित्र अपनी तमाम क्षुद्रताओं के साथ कथ्य में उतरते हैं और विडम्बना के सधे प्रयोग द्वारा पंकज उनके मानवीय बोध को सामने ले आते हैं। अपने चरित्रों के साथ वे निर्ममता की हद तक तटस्थता बरतते हैं चाहे वह ‘बैल का स्वप्न’ का जेम्स खाखा जैसा निरीह, पुराने नैतिकताबोध से ग्रस्त चरित्र हो या ‘बे ला का भू’ का तेजतर्रार बेचूलाल या ‘हुड़ुकलुल्लु’ का महाकाल—सब अपने स्वाभाविक रूप में स्थितियों की मार झेलते अपने समय से टकराकर लहूलुहान होते चरित्र हैं। उनको उदात्त रूप में प्रस्तुत करने की लेखक की कोई मंशा भी नहीं है, मगर सिर्फ़ विद्रूपता का चित्रण पंकज का उद्देश्य नहीं है, सोद्देश्यता की किसी परिपाटीबद्ध थ्योरी को ख़ारिज करते हुए पंकज इन्हें पूरे मानवीय रूप में प्रस्तुत करते हैं।</p> <p>बहुस्तरीय एवं वैविध्यपूर्ण भाषा में रची गई इन कहानियों में हिन्दी की विभिन्न बोलियों के टोन एवं मुहावरों के मारक प्रयोग ज़रूरत के अनुसार अपनी पूरी शक्ति के साथ उपस्थित</p> <p>होते हैं और इस प्रक्रिया में भाषा अद्भुत रूप से ऐश्वर्यशाली हो जाती है।</p> <p>दास्तानपरक शैली में लिखी इन कहानियों के ज़रिए पंकज मित्र ने यह साबित किया है कि अपने समय की नब्ज़ पर उनकी पकड़ ज़रा भी ढीली नहीं पड़ी है, बल्कि कसाव–लगाव और भी गहरा हुआ है और यह सचमुच आश्वस्ति देता है।
Read moreAbout the Book
नब्बे के दशक में उभरनेवाली कथा–प्रतिभाओं में पंकज मित्र का नाम इसलिए ज़्यादा महत्त्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि इन्होंने एक दशक से कथा-क्षेत्र में अपनी उपस्थिति को बारम्बार महत्त्वपूर्ण साबित किया है।</p>
<p>इस संग्रह की कहानियों में भी विद्रूपता एवं विडम्बना का एक खेल चलता रहता है और इस खेल में ख़ुद कथाकार भी खिलंदड़ा हो जाता है पर कथ्य के रचाव या चरित्रों के विकास में वह हस्तक्षेप कभी नहीं करता। चरित्र अपनी तमाम क्षुद्रताओं के साथ कथ्य में उतरते हैं और विडम्बना के सधे प्रयोग द्वारा पंकज उनके मानवीय बोध को सामने ले आते हैं। अपने चरित्रों के साथ वे निर्ममता की हद तक तटस्थता बरतते हैं चाहे वह ‘बैल का स्वप्न’ का जेम्स खाखा जैसा निरीह, पुराने नैतिकताबोध से ग्रस्त चरित्र हो या ‘बे ला का भू’ का तेजतर्रार बेचूलाल या ‘हुड़ुकलुल्लु’ का महाकाल—सब अपने स्वाभाविक रूप में स्थितियों की मार झेलते अपने समय से टकराकर लहूलुहान होते चरित्र हैं। उनको उदात्त रूप में प्रस्तुत करने की लेखक की कोई मंशा भी नहीं है, मगर सिर्फ़ विद्रूपता का चित्रण पंकज का उद्देश्य नहीं है, सोद्देश्यता की किसी परिपाटीबद्ध थ्योरी को ख़ारिज करते हुए पंकज इन्हें पूरे मानवीय रूप में प्रस्तुत करते हैं।</p>
<p>बहुस्तरीय एवं वैविध्यपूर्ण भाषा में रची गई इन कहानियों में हिन्दी की विभिन्न बोलियों के टोन एवं मुहावरों के मारक प्रयोग ज़रूरत के अनुसार अपनी पूरी शक्ति के साथ उपस्थित</p>
<p>होते हैं और इस प्रक्रिया में भाषा अद्भुत रूप से ऐश्वर्यशाली हो जाती है।</p>
<p>दास्तानपरक शैली में लिखी इन कहानियों के ज़रिए पंकज मित्र ने यह साबित किया है कि अपने समय की नब्ज़ पर उनकी पकड़ ज़रा भी ढीली नहीं पड़ी है, बल्कि कसाव–लगाव और भी गहरा हुआ है और यह सचमुच आश्वस्ति देता है।
Book Details
-
ISBN9788126715534
-
Pages128
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Makadjaal
- Author Name:
Rajendra Shrivastava
- Book Type:

-
Description:
राजेन्द्र श्रीवास्तव की कहानियाँ उम्मीद का नया पर्यावरण सृजित करती हैं। ऐसे कथाकार विश्वसनीयता का एक नया विश्व बनाते हैं। यह अकारण नहीं है कि उनकी कहानियाँ पढ़ते हुए पाठक का मन सिर्फ व्यथित नहीं होता बल्कि लंबे समय तक भीगा रहता है। उसे ऐसा लगता है जैसे यह कहानियाँ उसी के जीवन या उस जैसों के जीवन का वृत्तान्त हैं। कथाकार जानता है कि जीवन की सच्चाइयों से अधिक जादू किसी और मसाले में नहीं हो सकता। इसीलिए वह बहुत मद्धिम स्वर में अपने समय की सार्थक समीक्षा प्रस्तुत करता है।
राजेन्द्र की कहानियों में प्रेम, विश्वास और जिम्मेदारी का जीवनधर्मी रसायन है, वहाँ प्रेम एक जिम्मेदारी भी है। एक ऐसे समय में जब लोग हर प्रकार की जिम्मेदारी से मुक्त हो जाना चाहते हैं तब कहानियों में ऐसे भावों को विन्यस्त करना लेखकीय उत्तरदायित्व का श्लाघ्य उदाहरण है। वे जानते हैं कि कहानी में क्या और कितना कहना है। शायद यही कारण है कि उनकी कहानियाँ अपने पाठकों को उबाती नहीं हैं। विषय चयन के साथ ही वे कहानी कला के प्रति भी सजग हैं। उनकी भाषा सादगी का सौंदर्यशास्त्र रचती है। बिल्कुल कबीर की भाषा की तरह। कहानियों में विन्यस्त दाहकता और शीतलता–पाठकों के अंतःकरण की सहचर बन जाती हैं।
—जितेन्द्र श्रीवास्तव
Chandausi Junction
- Author Name:
Shankar Sahay
- Rating:
- Book Type:


- Description: A collection of short-stories set in the 20th Century India for the 21st Century kids & a nostalgic walk, for their parents & grandparents. Although this book has been named after the city of Chandausi, it contains stories from various places like Rishikesh, Agra, Champaran, Tilhar, Sambhal, Kanpur, Banaras, Lucknow and many others. These are the short stories of a bygone era-a period when India had either not gained independence or had been independent for not more than 35 years. These are the tales of journeys-taken up from the early 20th century to the end of a millennium, from Shahjahanpur to Delhi, from Bijnor to Hyderabad, from Hathras to Sweden & Norway, from Lakshmi Talkies, Allahabad to Night Watchman, Bangalore, from Panki to USA, from Dehradun to Canada, from Chandausi to Australia and many others. We are sure in all these stories, you will be able to find at least one character, which reminds you of your own self-of what you are, were or always wanted to be. Let us know the character with whom you have been able to relate to the most. Happy reading. “Genius is one percent inspiration and 99 percent perspiration,”-Thomas A. Edison. -Here’s a collection of short stories to inspire the readers.
Kathantar Vol. 1 and 2
- Author Name:
Editor Mrityunjay Singh
- Book Type:

- Description: 1975-2000 कथांतर 'कथांत'र दरअसल सन् 1975 और उसके आस-पास के काल से लेकर सन् 2000 तक के पच्चीस वर्षों में उभरे कथा-लेखकों की कहानियों का संग्रह होने के साथ-साथ इस काल खंड के कथा-कर्म की ऐतिहासिकता के दस्तावेज़ीकरण की भी एक कोशिश है। कहानी की दुनिया की सम्यक जानकारी रखने वाले इस तथ्य से परिचित हैं कि यह दौर स्वयं प्रकाश, रमेश उपाध्याय, असगर वजाहत, पंकज बिष्ट, नमिता सिंह, इसरायल, कामतानाथ, रमाकांत, सतीश जमाली, सुभाष पंत, मधुकर सिंह जैसे समर्थ कथा-लेखकों के दौर के तुरंत बाद शुरू हुआ है। यह दौर सामाजिक-राजनीतिक चेतना से सम्पन्न व्यापक सामाजिक बोध और गहरी अंतर्दष्टि रखने वाले कथा लेखकों का दौर रहा है। अगर वस्तुपरक दष्टि से देखा जाये तो विपुलता और गुणवत्ता की दष्टि से यह दौर पूर्ववर्ती और परवर्ती दौरों से बहुत विशिष्ट है। यह नई अंतर्वस्तु के संधान और अंतर्वस्तु और शिल्प की अन्विति के नये दष्टांतों का दौर भी है। इस पीढ़ी की रचनाशीलता इतनी प्रखर रही है कि इसने इक्कीसवीं शताब्दी में भी अपने लेखन से सतत मौजूदगी बनाये रखी है और कई अविस्मरणीय कहानियाँ रचकर कहानी के परिदश्य को समृद्ध किया है। हिन्दी कथा आलोचना में इस दौर का सम्यक मूल्यांकन नि:संदेह पूर्ववर्ती दौरों के मूल्यांकन सरीखा नहीं हुआ है और अभी इस दौर का मूल्यांकन होना बाकी है। 'कथांतर' के ये दोनों खंड पाठकों को हिन्दी कहानी के इस दौर की पूरी जानकारी देते हैं और कुछ उत्कृष्ट कहानियों से रूबरू कराते हैं। ये दोनों खंड हिन्दी कहानी में रुचि रखने वाले कथा-लेखकों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए अनिवार्य आधार-पुस्तकें हैं।
Gaudi’s Ocean (Japanese Children’s Classic)
- Author Name:
M. Hoffman +1
- Rating:
- Book Type:

- Description: This is a story of a Great Sea Turtle. After forty years in captivity, Gaudi, a sea turtle, escapes from his aquarium only to discover that his once beautiful home is now a foul ocean. Instead of happy healthy sea creatures he meets hundreads of sick animals who have been maimed by underwater nuclear experiments. Meeting other creature who share his anguish and then finding a mate with special needs, he eventually resolves to save the giant 'Tree of life' that represents the one source of hope for the world of Nature.
Wise & Otherwise
- Author Name:
Smt. Sudha Murty
- Rating:
- Book Type:

- Description: Fifty vignettes showcase the myriad shades of human nature A man dumps his aged father in an old-age home after declaring him to be a homeless stranger, a tribal chief in the Sahyadri hills teaches the author that there is humility in receiving too, and a sick woman remembers to thank her benefactor even from her deathbed. These are just some of the poignant and eye-opening stories about people from all over the country that Sudha Murty recounts in this book. From incredible examples of generosity to the meanest acts one can expect from men and women, she records everything with wry humour and a directness that touches the heart. First published in 2002, Wise and Otherwise has sold over 30,000 copies in English and has been translated into all the major Indian languages. This revised new edition is sure to charm many more readers and encourage them to explore their inner selves and the PBI – World around us with new eyes.
Contemporary Indian Short Stories Series III
- Author Name:
Sahitya Akademi
- Rating:
- Book Type:

- Description: This sheaf of nineteen short stories, written by different authors, represents a cross-section of contemporary Indian short fiction. Eighteen stories are translations from eighteen modern Indian languages, and one is a specimen of Indian creative writing in English. Selected by the Sahitya Akademi's Advisory Boards of various languages, these stories, provide fascinating glimpses into the panorama of Indian life, with its baffling variety, its rich contrasts of the simple and the sophisticated, the ancient and the modern. Here is evidence, if such were needed that Indian literature is one though written in many languages its oneness consisting not of a stale uniformity but of a rich variety. This is the third volume of Sahitya Akademi series of such representative anthologies in English of contemporary Indian short story.
Chhachhiya Bhar Chhachh
- Author Name:
Mahesh Katare
- Book Type:

- Description: Short Stories
Democresiya
- Author Name:
Asghar Wajahat
- Book Type:

- Description: ‘डेमोक्रेसिया’ प्रतिष्ठित कथाकार असग़र वजाहत की विशिष्ट कहानियों का संग्रह है। संग्रह की भूमिका में वे लिखते हैं : ‘जीवन इतना नंगा हो गया है कि अब लेखक उसकी परतें उखाड़ेगा? रोज़ अख़बारों में जो छपता है, वह पूरे समाज को नंगा करने के लिए काफ़ी है। मूल्यहीनता की जो स्थिति है, स्वार्थ साधने की जो पराकाष्ठा है, हिंसा और अपराध का जो बोलबाला है, सत्ता और धन के लिए कुछ भी कर देने की होड़, असहिष्णुता और दूसरे को अपमानित करने का भाव जो आज हमारे समाज में है, वह पहले नहीं था आज हम अजीब मोड़ पर खड़े हैं। रचनाकार के लिए यह चुनौतियों से भरा समय है। और इन हालात में लगता है, क्या लिखा जाए?’ लेखन, सम्प्रेषण, हस्तक्षेप और सार्थकता से जुड़े सवालों का सामना असग़र वजाहत ने अपनी कहानियों में बख़ूबी किया है। भाषा की व्यंजनाशक्ति का ऐसा विलक्षण प्रयोग बहुत कम रचनाकारों में दिखता है। ‘देखन में छोटे लगें घाव करें गम्भीर’ के अर्थ को इन कहानियों में सोदाहरण पढ़ा जा सकता है। प्रखर राजनीतिक-सामाजिक विवेक असग़र वजाहत की रचनाओं में प्राणशक्ति है।
ADBHUTA GALPA
- Author Name:
Dr.Sanjay Rout
- Book Type:

- Description: In this book, Dr.Sanjay Rout tells his wonderful stories. The book is filled with many inspiring and heart touching experiences that makes you feel like you are there witnessing them in real life.
Katha Saptak - Akansha Pare Kashiv
- Author Name:
Akansha Pare Kashiv
- Book Type:

- Description: Description Awaited
Koi Khushboo Udas Karti Hai
- Author Name:
Neelima Sharma Nivia
- Book Type:

- Description: Book
SILAS MARNER (CLASS XII)
- Author Name:
George Eliot
- Book Type:

- Description: Silas Marner: the weaver of Raveloe is a novel by George Eliot, published in 1861. An outwardly simple tale of a linen weaver, it is notable for its strong realism and its sophisticated treatment of a variety of issues ranging from religion to industrialisation to community. The novel is set in the early years of the 19th century. Silas Marner, a weaver, is a member of a small calvinist congregation in lantern Yard, a slum street in an unnamed city in northern England. He is falsely accused of stealing the congregation's funds while watching over the very ill Deacon. Two clues are given against Silas: a pocket-knife and the discovery in his own house of the bag formerly containing the money. There is the strong suggestion that Silas' Best friend, William Dane, has framed him, since Silas had lent his pocket-knife to William shortly before the crime was committed. Silas is proclaimed guilty.
Hare Skirt Wale Ped Ke Tale
- Author Name:
Neelam Kulshreshtha
- Book Type:

- Description: Book
Adab Mein Baaeen Pasli : Bhartiya Urdu Kahaniyan : Vol. 5
- Author Name:
Nasera Sharma
- Book Type:

- Description: साहित्य की दुनिया में उत्कृष्ट रचनाओं की कमी नहीं है। उसमें से अनुवाद के लिए कुछ भी उठाना जितना सरल है, उतना ही कठिन भी! ख़ासकर तब जब योजना किसी एक देश तक सीमित न होकर कई देशों के बीच फैली हो। उपन्यास 'आधी रात का मुक़दमा’ का अनुवाद मैंने अंग्रेज़ी से किया। कहानी कहने का अन्दाज़ जटिल था। कुछ शब्द मैंने जानबूझकर उस परिवेश के रहने दिए ताकि वहाँ की हल्की महक पाठ में बसी रहे। उर्दू में उपन्यास का चयन करना मुश्किल था। अपनी पसंद के सारे महत्त्वपूर्ण उपन्यास हिन्दी में आ चुके थे। तब मेरी नज़र से 'निसाई आवाज़’ [ज़नानी आवाज़] गुज़री तो मैं असमंजस में पड़ गई। मेरी इस योजना में यह तय था कि देश तो बार बार दोहराए जाएँगे मगर लेखक नहीं। इसलिए ख़ुद से एक लम्बे संवाद के बाद आग़ा बाबर की कहानी 'गुलाबदीन चिट्ठीरसाँ’ को खंड तीन से हटाकर उनका उपन्यास ले लिया। मेरा अनुवाद किया उपन्यास 'बुफ़-ए-कूर’ [अंधा उल्लू] है, जो सादिक़ हिदायत की महत्त्वपूर्ण रचना है। यह तीनों उपन्यास लगभग साढ़े तीन वर्षों में, मैंने अनुवाद किए। लगातार तो काम नहीं किया, क्योंकि एक साथ मैं कई पुस्तकों पर काम कर रही थी। एक में अटकती तो दूसरे पर अपना ध्यान केन्द्रित कर देती। मुझे नहीं पता मेरे पाठकों को यह तीनों उपन्यास पसंद आते हैं या नहीं! मगर मुझे सिर्फ़ इतना पता है कि ये तीनों लेखक और तीनों उपन्यास अपने समय के चर्चित, महत्त्वपूर्ण उपन्यास हैं जिनकी गूँज उनके देश और विदेश में आज भी साहित्य-प्रेमियों के बीच में सुनाई पड़ती है।
Vahan tak pahuchane ki daur
- Author Name:
Rajendra Yadav
- Book Type:

-
Description:
राजेन्द्र यादव अपने दौर के विशिष्ट और महत्त्वपूर्ण रचनाकार ही नहीं, नई कहानी आन्दोलन के प्रतिनिधि लेखक भी हैं। विगत कुछ वर्षों में राजेन्द्र यादव का रचनात्मक लेखन बहुत ही सीमित रहा है, परन्तु उनकी सक्रियता सदा बनी रही है। अपने लेखों, बहसों व ‘हंस’ के माध्यम से वह एक रचनात्मक माहौल तैयार करने की दिशा में ही सक्रिय नहीं रहे हैं, बल्कि लगभग सभी सामयिक, राजनीतिक और सामाजिक समस्याओं में एक जीवन्त हस्तक्षेप करते रहे हैं।
वैसे भी किसी लेखक की सार्थकता अन्ततः इस बात में नहीं है कि उसने कितना लिखा, बल्कि इस बात में है कि उसने क्या लिखा और समाज तथा साहित्य विशेष के सन्दर्भ में उस लेखन का महत्त्व व भूमिका क्या रही। राजेन्द्र यादव की कहानियाँ बदलते सन्दर्भों में अपनी सार्थकता तथा ‘रिलीवेंस’ खोजते पात्रों के ऊहापोह, द्वन्द्व व आत्म-संघर्ष का लेखा-जोखा हैं। चूँकि राजेन्द्र यादव के पात्र अधिकांशतः मध्यवर्ग से सम्बन्धित हैं, सम्भवतः इसीलिए उनमें एक विशिष्ट क़िस्म की बौद्धिक ऊर्जा का भास है। यह वह वर्ग है, जो अपने कार्य-कलाप और मानसिकता से बदलते यथार्थ का गहरा अहसास ही नहीं कराता, बल्कि इस बात का भी संकेत देता है कि यह समाज आख़िर जानेवाला किस दिशा में है।
राजेन्द्र यादव की कहानियों को पढ़ना, नई कहानी की सामान्य प्रवृत्ति के अलावा कहीं आगे जाकर एक सजग और संवेदनशील रचनालोक से गुज़रना है, जिसमें भावुकता का अनियंत्रित व असन्तुलित प्रवाह न होकर (जो नई कहानी के रचनाकारों में दोष की हद तक है) एक सजग व नियंत्रित ‘इंटरप्ले’ देखने को मिलता है और यह किसी सिद्धहस्त रचनाकार की क़लम से ही सम्भव हो सकता है।
Kahaniyan Dusari Duniya Ki
- Author Name:
Gopikrishna Gopesh
- Book Type:

-
Description:
गोपीकृष्ण गोपेश ने नवम्बर 1956 से 1962 तक के अपने रूस प्रवास में रचनात्मक साहित्य (उपन्यास, कहानी, कविता आदि) ही नहीं बल्कि विज्ञान, शिक्षा व्यवस्था, ट्रेड यूनियन, श्रम और मजदूरी सम्बन्धी अनेक महत्त्वपूर्ण दस्तावे़ज़ों का भी रूसी से हिन्दी में अनुवाद किया। चूँकि वे स्वयं एक रचनाकार थे, उनके अनुवाद में भी एक रचनाकार के किए हुए अनुवाद हैं, जिसमें एक गहरी सांस्कृतिक सजगता है। उनके इन अनुवादों में वहाँ की सांस्कृतिक विविधता में एकता दर्शनीय है। अनूदित कथाकारों में शोलोखोव कज़ाक जीवन के रचनाकार हैं, तो फातिह निया़ज़ी, ताज़िक जीवन के और ओल्गा मार्कोवा यूराल क्षेत्र के जीवन को उकेरती हैं। लेकिन इन कथाकृतियों को एक में बाँधने वाला तत्व वह सोवियत संस्कृति है जो संघ के अनेक गणराज्यों में साथ-साथ आकार ले रही थीं, ठीक अपने देश की संस्कृति की तरह ये कहानियाँ उस अतीत हो गए सपने की याद दिलाती है जिसे मनुष्यता ने एक सदी पहले देखा था। एक अनुवादक के रूप में गोपेश जी ने दो महान संस्कृतियों के बीच संवाद की वह भूमिका निभाई जो किसी सांस्कृतिक राजदूत की ही हो सकती है। इन कहानियों की सार्थकता उन स्मृतियों को संजोने में भी है जिन्हें ये अनुवाद प्रक्षेपित करते हैं। आज के भूमंडलीय स्मृति-युद्धों की दुनिया में इन कहानियों में प्रक्षेपित स्मृतियाँ बेहद बहुमूल्य हैं।
—प्रो. प्रणय कृष्ण
Teesari Hatheli
- Author Name:
Rajee Seth
- Book Type:

-
Description:
राजी के कथा-संसार में आदमी के अस्तित्व के सांस्कृतिक आयामों और मूल्यात्मक विरोधाभासों की पड़ताल के ज़्यादा बड़े सवालों से जूझने के लिए परिवार भारतीय समाज की केन्द्रीय इकाई की हैसियत से प्रतिष्ठित है। राजी की कहानियों के सन्दर्भ में यह सामाजिक-सांस्कृतिक मूल्य संवेदना का पारिवारिक देहान्तर है। कभी इस बदलाव के पीछे इतिहास या रणनीति या अर्थ की तत्काल अनुपस्थित और अदृश्य व्यवस्थाएँ हैं तो कभी सम्बन्धों में शक्ति के सन्तुलन का बदला हुआ समीकरण। लेकिन इस सुबकते संसार में मौजूद आदमी की सोच और संवेदना के बहाव और मोड़ में इतिहास, राजनीति या अर्थ के हस्तक्षेप को पहचान लेना भर इन कहानियों के लिए काफ़ी नहीं है। इस हस्तक्षेप के साथ जूझते हुए आदमी का लहूलुहान मर्म और फिर भी किसी मूल्य को खोजने, खोदने या दुह लेने की ज़िद और जूझ इन कहानियों को वहाँ तक ले जाना चाहती है, जहाँ परिवर्तन की प्रक्रिया वैचारिक मीमांसाओं और बौद्धिक विश्लेषणों की पकड़ और पहुँच से बाहर रह जाया करती है।
देखने में ये बहुत शान्त और स्थिर कहानियाँ हैं। फेन और फिचकुर उगलती, मुट्ठियाँ लहराती, उगते हुए सूरज के साथ समापन की ओर जानेवाली प्रसिद्ध रूप में जुझारू कहानियों के विपरीत यहाँ संरचना की सुस्पष्ट चौहद्दियों के बीच एक सुपरिभाषित भाव-संसार है जिसे किसी परिचित मिथक मूल्य से विचलन के क्षण में पकड़ा गया है। सधे हाथों की तराश के अधीन संरचना एक संयत, सन्तुलित सुसम्बद्ध आकार बनकर उभरती है। अहसास के फैलाव को एक बिन्दु पर केन्द्रित और सघन करते जाने की घोर तन्मयता कथा को उद्घाटित करती है। ऊपर से राजी का अनूठा शब्दशिल्प। शब्द को जो एक विशिष्ट विलक्षण अस्तित्व राजी दे पाती हैं, उसके प्रति एक सजग विस्मय का भाव पैदा होता है। कथा यही प्राय: कथ्य का एक रूपकीय समतोल होती है। कथा की मूल्य-चेतना इस परिष्कार को अनिवार्य कर देती है क्योंकि वह राजी के लिए शायद सृजनकर्म की सार्थकता से जुड़ी हुई बात है।
—अर्चना वर्मा
Swayamsiddha
- Author Name:
Dr. Manjari Shukla
- Book Type:

- Description: स्वयंसिध्दा - समाज और स्त्री मन को टटोलती कहानियांधूप और छाँव-सी ज़िंदगी खेलती रहती है एक खेल। जब उजाला आता है तो चारो तरफ चकाचौंध सा हो जाता है और जब अँधेरा घिरता है तो मन का जैसे हर कोना रिसने लगता है। तमाम उम्र परछाइयों के पीछे भागती स्वयंसिद्धा, जिंदगी की अजीब सी पहेली को सुलझाने का लाख जतन करती है पर उसके बाद भी उस भीगे मन के कोने को खोलने के लिए कोई सिरा नहीं मिलता। स्वयंसिद्धा अपने विचारों के चक्रव्यूह से बाहर निकलने की जितनी कोशिश करती उसमें उतना ही गहराई तक चली जाती है। भला कोई कीट, मकड़ी के बेहद खूबसूरत और महीन जाले से क्या कभी बाहर आया है जो स्वयंसिद्धा आ जाती।स्त्री मन हर पल में ढेरों सपने बुनता है पर क्या कोई पुरुष उस मन के अंदर झाँककर उन भावों को पढ़ पाता है या सिर्फ देह से ही वापस लौटकर आ जाता है।
Pratinidhi Kahaniyan : Hrishikesh Sulabh
- Author Name:
Hrishikesh Sulabh
- Book Type:

- Description: “अपनी कहानियों पर बात करना मेरे लिए कठिन काम है। बहुत हद तक अप्रिय भी। लिखी जा चुकी और प्रकाशित हो चुकी कहानियों से अक्सरहाँ मैं पीछा छुड़ाकर भाग निकलता हूँ, पर मुझे लगता है कि यह मेरा भ्रम ही है। मेरी कहानियों के कुछ पात्र लगातार मेरा पीछा करते हैं और अपनी छवि बदलकर, किसी लिखी जा रही नई कहानी में घुसने की बार-बार कोशिशें करते हैं। कई बार तो घुस भी आते हैं और मैं उन्हें न रोक पाने की अपनी विवशता पर हाथ मलते रह जाता हूँ। जैसे, ‘वधस्थल से छलाँग’ का रामप्रकाश तिवारी, जो ‘यह ग़म विरले बूझे’ या ‘काबर झील का पाखी’ जैसी कहानियों में घुस आया। मैंने अपनी कहानियों में प्रवेश के लिए किसी एक रास्ते का चुनाव नहीं किया। हर कहानी में प्रवेश के लिए मेरी राह बदल जाती है। कभी किसी पात्र की बाँह पकड़कर प्रवेश करता हूँ, तो कभी कोई घटना या व्यवहार या स्मृति या विचार कहानी के भीतर पैठने के लिए मेरी राहों की निर्मिति करते हैं। हमेशा एक अनिश्चय और अनिर्णय की स्थिति बनी रहती है। हर बार नई कहानी शुरू करने से पहले मेरा मन थरथर काँपता है। शायद यही कारण है कि बहुत कम कहानियाँ लिख सका हूँ। मेरे कुछ मित्रों का मानना है कि कहानी और नाटक लिखने के बीच आवाजाही के कारण मेरी कहानियों पर आलोचकों की नज़र नहीं पड़ी। पर यह सच है कि नाटक और कहानी के बीच मेरी यह आवाजाही मुझे बहुत प्रिय है। हर बार नौसिखुए की तरह अथ से आरम्भ करना मुझे पुनर्नवा करता है। मैं यह करते रहना चाहता हूँ।” —भूमिका से
The Turning Point of Life
- Author Name:
Surbhi Sareen +1
- Book Type:

- Description: Life represents a roller coaster ride. It is thrilling and full of ups and downs. Life does not remain the same forever, and every day is a new story, but some changes are the ramifications of certain events that change lives for good. These might either build you or destroy you. This book has exciting and thrilling anecdotes of varied turning points in life and how they changed our lives for good. It has all the hues of life covered in its stories.
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book