Katha Saptak Geetashree
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"नजरा गईली गुईंयां" एक मौन प्रतिरोध की कहानी है। एक स्त्री जो अपना प्रतिरोध मौन रहकर जताती है, लेकिन वो अपना प्रतिरोध स्थानांतरित कर देती है। अपनी बेटी में जो पितृसत्ता पर वार कर देती है। कहानी में वही बेटी अपनी माँ से सवाल करती है कि माँ क्या तुम्हारा सपना भी मेरी शादी है तो वो जवाब देती हैं। "भक्क... हम ऐसा सपना देखते तो तुम आज वहाँ से हमसे मज़ाक कर रही होती का... दो तीन बच्चा-खच्चा लेकर किचकिचा रही होती... हम वैसी माँ नहीं, हम तो तुमको पैर पर खड़ा होते देखने का सपना देखते रहे, खुदमुख्तार बनने का सपना... मेरी तरह नहीं बनाना चाहती थी कि दिन भर टेटियाती रहो- "ऐ जी... सुनते हैं, हमको सौ रुपया दीजिए... हमको चूड़ी खरीदना है..." इसके साथ ही जो गीताश्री जी की कहानियों की ख़ासियत है कि वे उनकी हर कहानी के माध्यम से संस्कृति से परिचय कराती हैं। रुदाली तो जानते थे, एक विलुप्त परंपरा हंकपड़वा से उन्होंने परिचय कराया। 'ट्राम नंबर 5 और बोहेमियन धुन' को पढ़ते हुए याद आते हैं निर्मल वर्मा। कहानी प्रेम की उदास कहानी है। प्रेम के होते हुए जो उदासी होती है, यह कहानी उसी उदासी को रचती है। यह हिज्र वाली उदासी नहीं है, यह तो प्रेम के होने की उदासी है। इस कहानी की भाषा सप्तक की सारी कहानियों से एकदम अलग है। कहानी अपने पीछे एक गहरा सन्नाटा छोड़ जाती है। मैगनोलिया का फूल हमारी स्मृति बसा रह जाता है। उनकी सभी कहानियाँ पाठक को बांध देती हैं। जिनके ख़त्म होने तक उनके पाश से मुक्त होना संभव नहीं होता। कथा सप्तक में सभी कहानियाँ इसी तरह की हैं। -आकाश माथुर
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"नजरा गईली गुईंयां" एक मौन प्रतिरोध की कहानी है। एक स्त्री जो अपना प्रतिरोध मौन रहकर जताती है, लेकिन वो अपना प्रतिरोध स्थानांतरित कर देती है। अपनी बेटी में जो पितृसत्ता पर वार कर देती है। कहानी में वही बेटी अपनी माँ से सवाल करती है कि माँ क्या तुम्हारा सपना भी मेरी शादी है तो वो जवाब देती हैं। "भक्क... हम ऐसा सपना देखते तो तुम आज वहाँ से हमसे मज़ाक कर रही होती का... दो तीन बच्चा-खच्चा लेकर किचकिचा रही होती... हम वैसी माँ नहीं, हम तो तुमको पैर पर खड़ा होते देखने का सपना देखते रहे, खुदमुख्तार बनने का सपना... मेरी तरह नहीं बनाना चाहती थी कि दिन भर टेटियाती रहो- "ऐ जी... सुनते हैं, हमको सौ रुपया दीजिए... हमको चूड़ी खरीदना है..." इसके साथ ही जो गीताश्री जी की कहानियों की ख़ासियत है कि वे उनकी हर कहानी के माध्यम से संस्कृति से परिचय कराती हैं। रुदाली तो जानते थे, एक विलुप्त परंपरा हंकपड़वा से उन्होंने परिचय कराया। 'ट्राम नंबर 5 और बोहेमियन धुन' को पढ़ते हुए याद आते हैं निर्मल वर्मा। कहानी प्रेम की उदास कहानी है। प्रेम के होते हुए जो उदासी होती है, यह कहानी उसी उदासी को रचती है। यह हिज्र वाली उदासी नहीं है, यह तो प्रेम के होने की उदासी है। इस कहानी की भाषा सप्तक की सारी कहानियों से एकदम अलग है। कहानी अपने पीछे एक गहरा सन्नाटा छोड़ जाती है। मैगनोलिया का फूल हमारी स्मृति बसा रह जाता है। उनकी सभी कहानियाँ पाठक को बांध देती हैं। जिनके ख़त्म होने तक उनके पाश से मुक्त होना संभव नहीं होता। कथा सप्तक में सभी कहानियाँ इसी तरह की हैं। -आकाश माथुर
Book Details
-
ISBN9789390593941
-
Pages120
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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