Contemporary Indian Short Stories Series IV
(1)
Author:
Shantinath K DesaiPublisher:
Sahitya AkademiLanguage:
EnglishCategory:
Short-story-collections₹
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This collection of twenty-one short stories, written by different authors, represents a cross-section of contemporary Indian short fiction. Twenty short stories are translations from twenty languages of Indian creative writing in English and edited by Shantinath K. Desai. This is the fourth volume of Sahitya Akademi's series of such representative anthologies in English of contemporary Indian short stories.
Read moreAbout the Book
This collection of twenty-one short stories, written by different authors, represents a cross-section of contemporary Indian short fiction. Twenty short stories are translations from twenty languages of Indian creative writing in English and edited by Shantinath K. Desai.
This is the fourth volume of Sahitya Akademi's series of such representative anthologies in English of contemporary Indian short stories.
Book Details
-
ISBN9788126046935
-
Pages310
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Avg Reading Time10 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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अनीता ने कहानी-लेखन की शुरुआत उन दिनों की थी, जब कहानी अनुभव की प्रामाणिकता को अपना अभीष्ट मानती थी, लेकिन इसे अनीता की जागरूकता ही माना जाएगा कि आज, जबकि कहानी अनुभव की प्रामाणिकता नहीं, अनुभव के अर्थों को विश्लेषित करती है, वह समय-सापेक्ष कहानियाँ लिख रही हैं। उनकी पहले की कहानियों—‘लाल परांदा’, ‘न जाने क्यों’, ‘चरागाहों के बाद’ आदि में ‘नई कहानी’ का हैंग-ओवर ज़रूर मौजूद है, लेकिन इन्हीं के समानान्तर ‘दिन से दिन’ और ‘बेग़ज़ल’ जैसी कहानियों में वह निजी शिनाख़्त भी मौजूद है, जो उन्हें आज के समान्तर लेखन से जोड़ देती है।
अनीता की इधर की कहानियों में व्यक्ति के अकेले पड़ जाने का एहसास तीव्र हुआ है, लेकिन इसके साथ ही हमारे आसपास जो ग़लत और गलित है, जो कुछ रुग्ण और रूढ़िगत है, उसके प्रति नकार का स्वर भी उभरा है। इस नकार के स्वर ने अनीता की कहानियों को संश्लिष्टता तो दी ही है, एहसास की तल्ख़ी भी दी है। अब वह पात्रों और उनकी स्थितियों पर चुटकी लेने के बजाय उनकी मानसिकता में गहरे उतरने का प्रयास करती हैं। अनीता की कहानियों की सबसे बड़ी सफलता यही है कि वे इस मानसिकता को समय-सापेक्ष सत्य की कसौटी पर लगातार कसती हैं और आज के आदमी को उसकी अन्दरूनी और बाहरी शक्ल का सही साक्षात्कार कराती हैं।
—कमलेश्वर
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Book
What is Contemporary Indian Short Stories in English about?
This anthology, edited by Bhabani Bhattacharya, brings together 22 short stories written between 1930 and 1950 — a formative period in modern Indian literature. Twenty of these works are translations from fourteen Indian languages, while two are original English stories. Together, they offer a powerful cross-section of India’s literary imagination, proving that Indian literature is unified not by sameness but by its vibrant diversity.
Why should readers pick up this book?
It’s a doorway into India’s linguistic and cultural richness. The stories capture social change, everyday struggles, humour, hope, and the emotional pulse of pre- and post-Independence India. The mix of languages, voices, and narrative styles makes the book engaging for both young readers and adults looking to understand India’s literary roots.
Who is this book ideal for?
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Students and readers exploring Indian literature in translation
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Young readers stepping into serious short fiction
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Book clubs wanting layered, discussion-worthy stories
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Libraries offering multicultural and multilingual collections
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Anyone curious about India’s literary evolution across regions
Key Themes
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Unity across Indian languages
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Social and cultural shifts (1930–1950)
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Everyday lives and moral choices
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Regional voices and diversity
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Identity, resilience, and community
Where to read or buy Contemporary Indian Short Stories in English?
Here’s the link: https://rachnaye.com/books/short-story-collections/contemporary-indian-short-stories-english-by-sahitya-akademi