Door Se Dekha Hua
(0)
Author:
Sunil GangopadhyayPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
650
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सामाजिक विडम्बनाओं, विसंगतियों, आर्थिक विषमताओं से उपजी भयावह स्थितियों का संवेदनशील अवलोकन करती कहानियाँ।</p> <p>अन्याय, शोषण और ग़रीबी के साथ हो रहे ज़ुल्मों को रेखांकित कर ये कहानियाँ यह भी सोचने पर विवश करती हैं कि आज़ाद मुल्क में अन्तिम आदमी के लिए संविधान द्वारा किए गए वादों को कितना पूरा किया गया है? समतामूलक समाज का सपना आज किस दशा में है और ग़रीबी उन्मूलन की कल्पना कहाँ धराशायी हो गई है?</p> <p>सदियों से नारी पूजनीय तो है पर उसे पुरुष समाज ने अपेक्षित आदर नहीं दिया, बल्कि अपनी जिस्मानी आग में उसकी आहुति देता रहा। ग़रीब समाज की लड़कियों के पेट की भूख तो तन ही बेच कर बुझती है! ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण नारकीय जीवन स्थितियों के मार्मिक दस्तावेज़ भी इन कहानियों में मिलेंगे।</p> <p>लेखक ने अपनी इन कहानियों के माध्यम से समाज के साथ उस संस्कृति का भी परिचय कराया है जो आज विलुप्त होने की स्थिति में है, अतीत का हिस्सा बनती जा रही है।</p> <p>संग्रह की कुछ कहानियों में देशज और लोक-प्रचलित शब्दों का प्रयोग विशेष ध्यान खींचता है।</p> <p>बहुरंगी और विविध भावना-संसार की सर्जना करनेवाली पठनीय कहानियों का एक सम्पूर्ण और संग्रहणीय संकलन।
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सामाजिक विडम्बनाओं, विसंगतियों, आर्थिक विषमताओं से उपजी भयावह स्थितियों का संवेदनशील अवलोकन करती कहानियाँ।</p>
<p>अन्याय, शोषण और ग़रीबी के साथ हो रहे ज़ुल्मों को रेखांकित कर ये कहानियाँ यह भी सोचने पर विवश करती हैं कि आज़ाद मुल्क में अन्तिम आदमी के लिए संविधान द्वारा किए गए वादों को कितना पूरा किया गया है? समतामूलक समाज का सपना आज किस दशा में है और ग़रीबी उन्मूलन की कल्पना कहाँ धराशायी हो गई है?</p>
<p>सदियों से नारी पूजनीय तो है पर उसे पुरुष समाज ने अपेक्षित आदर नहीं दिया, बल्कि अपनी जिस्मानी आग में उसकी आहुति देता रहा। ग़रीब समाज की लड़कियों के पेट की भूख तो तन ही बेच कर बुझती है! ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण नारकीय जीवन स्थितियों के मार्मिक दस्तावेज़ भी इन कहानियों में मिलेंगे।</p>
<p>लेखक ने अपनी इन कहानियों के माध्यम से समाज के साथ उस संस्कृति का भी परिचय कराया है जो आज विलुप्त होने की स्थिति में है, अतीत का हिस्सा बनती जा रही है।</p>
<p>संग्रह की कुछ कहानियों में देशज और लोक-प्रचलित शब्दों का प्रयोग विशेष ध्यान खींचता है।</p>
<p>बहुरंगी और विविध भावना-संसार की सर्जना करनेवाली पठनीय कहानियों का एक सम्पूर्ण और संग्रहणीय संकलन।
Book Details
-
ISBN9788183614139
-
Pages268
-
Avg Reading Time9 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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