Khuli Chhatri
(0)
Author:
Bhavana ShekharPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
200
160 (20% off)
Unavailable
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जीवन के विविध प्रसंगों में कई बार धारणाएँ ध्वस्त होती हैं, भ्रान्तियाँ भग्न होती हैं, नवीन अनुभव नवनिष्कर्षों को गढ़ते हुए कभी मनुष्य को सन्तप्त करते हैं तो कभी चमत्कृत। ऐसे में जीवन-सरणि पर विचरते कुछ किरदारों की केंचुल उतरने लगती है—उनकी विद्रूपता झलकने लगती है तो कुछ किरदार साँचा तोड़ नवरूप धरते दिखाई देते हैं। नवरूपता ही नहीं, अपरूपता भी जीने का सलीक़ा सिखाती है।</p> <p>पुस्तक की प्रायः सभी कहानियाँ द्रष्टा को ‘नॉन जजमेंटल’ होने और पूर्वग्रहों से मुक्त होकर जीवन को परखने को कहती हैं।</p> <p>नारी है तो अभिशप्त है, पुरुष है तो परुष है, दलित है तो पीड़ित है, वेश्या है तो चरित्रहीन है, गुंडा है तो भ्रष्ट है—ये पूर्वग्रह बहुत बार भ्रम साबित होते हैं। ‘निरापद’, ‘वो युधिष्ठिर’, ‘गणिका’, ‘कबूतरी’, ‘दबंग’, ‘देवभूमि’ आदि पुस्तक की अधिकांश कहानियाँ इस बात को प्रतिबिम्बित करती हैं। सफ़ेदपोशी में कालिख की डुगडुगी तो सभी बजाते हैं पर कालिमा का भी उजास है—इसे स्वीकारना और तलाशना ही जीवन का मर्म है।</p> <p>पर कुछ अनुभूतियाँ कालनिरपेक्ष सत्य की तरह अकाट्य होती हैं। सूरज-चाँद-सितारों की तरह सनातन प्रतीत होती हैं, जैसे अपनी माँ सबसे सुन्दर और अपना घर सबसे बड़ा स्वर्ग है। संवेदना ने जिस कुरूप चेहरे को सदा हिकारत से देखा, वही एक दिन सुन्दरता की मिसाल बन गया।</p> <p>परदेस गए बेटे का वियोग बूढ़े माँ-बाप को कैसे सालता है—‘अपना घर अपना आसमान’ इस पीड़ा का आईना है, ‘खुली छतरी’ बाल मनोविज्ञान का चित्रण करती है तो ‘सज़ा’ आदर्श नारी के मिथक को तोड़कर उसके सहज रूप में संवेग और आवेग, प्यार और प्रतिकार की सृष्टि करती है।</p> <p>अनब्याही माँ बनना, बलात्कार को मात्र दुर्घटना मानना, स्त्री द्वारा लीक तोड़कर शठे शाठ्यं समाचरेत् की परिपालना—समाज के ये नए मूल्य कहानियों में उजागर हुए हैं।
Read moreAbout the Book
जीवन के विविध प्रसंगों में कई बार धारणाएँ ध्वस्त होती हैं, भ्रान्तियाँ भग्न होती हैं, नवीन अनुभव नवनिष्कर्षों को गढ़ते हुए कभी मनुष्य को सन्तप्त करते हैं तो कभी चमत्कृत। ऐसे में जीवन-सरणि पर विचरते कुछ किरदारों की केंचुल उतरने लगती है—उनकी विद्रूपता झलकने लगती है तो कुछ किरदार साँचा तोड़ नवरूप धरते दिखाई देते हैं। नवरूपता ही नहीं, अपरूपता भी जीने का सलीक़ा सिखाती है।</p>
<p>पुस्तक की प्रायः सभी कहानियाँ द्रष्टा को ‘नॉन जजमेंटल’ होने और पूर्वग्रहों से मुक्त होकर जीवन को परखने को कहती हैं।</p>
<p>नारी है तो अभिशप्त है, पुरुष है तो परुष है, दलित है तो पीड़ित है, वेश्या है तो चरित्रहीन है, गुंडा है तो भ्रष्ट है—ये पूर्वग्रह बहुत बार भ्रम साबित होते हैं। ‘निरापद’, ‘वो युधिष्ठिर’, ‘गणिका’, ‘कबूतरी’, ‘दबंग’, ‘देवभूमि’ आदि पुस्तक की अधिकांश कहानियाँ इस बात को प्रतिबिम्बित करती हैं। सफ़ेदपोशी में कालिख की डुगडुगी तो सभी बजाते हैं पर कालिमा का भी उजास है—इसे स्वीकारना और तलाशना ही जीवन का मर्म है।</p>
<p>पर कुछ अनुभूतियाँ कालनिरपेक्ष सत्य की तरह अकाट्य होती हैं। सूरज-चाँद-सितारों की तरह सनातन प्रतीत होती हैं, जैसे अपनी माँ सबसे सुन्दर और अपना घर सबसे बड़ा स्वर्ग है। संवेदना ने जिस कुरूप चेहरे को सदा हिकारत से देखा, वही एक दिन सुन्दरता की मिसाल बन गया।</p>
<p>परदेस गए बेटे का वियोग बूढ़े माँ-बाप को कैसे सालता है—‘अपना घर अपना आसमान’ इस पीड़ा का आईना है, ‘खुली छतरी’ बाल मनोविज्ञान का चित्रण करती है तो ‘सज़ा’ आदर्श नारी के मिथक को तोड़कर उसके सहज रूप में संवेग और आवेग, प्यार और प्रतिकार की सृष्टि करती है।</p>
<p>अनब्याही माँ बनना, बलात्कार को मात्र दुर्घटना मानना, स्त्री द्वारा लीक तोड़कर शठे शाठ्यं समाचरेत् की परिपालना—समाज के ये नए मूल्य कहानियों में उजागर हुए हैं।
Book Details
-
ISBN9788126722662
-
Pages120
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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- Description: A collection of short-stories set in the 20th Century India for the 21st Century kids & a nostalgic walk, for their parents & grandparents. Although this book has been named after the city of Chandausi, it contains stories from various places like Rishikesh, Agra, Champaran, Tilhar, Sambhal, Kanpur, Banaras, Lucknow and many others. These are the short stories of a bygone era-a period when India had either not gained independence or had been independent for not more than 35 years. These are the tales of journeys-taken up from the early 20th century to the end of a millennium, from Shahjahanpur to Delhi, from Bijnor to Hyderabad, from Hathras to Sweden & Norway, from Lakshmi Talkies, Allahabad to Night Watchman, Bangalore, from Panki to USA, from Dehradun to Canada, from Chandausi to Australia and many others. We are sure in all these stories, you will be able to find at least one character, which reminds you of your own self-of what you are, were or always wanted to be. Let us know the character with whom you have been able to relate to the most. Happy reading. “Genius is one percent inspiration and 99 percent perspiration,”-Thomas A. Edison. -Here’s a collection of short stories to inspire the readers.
Pratinidhi Kahaniyan : Qurratul Ain Haider
- Author Name:
Qurratul Ain Haider
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- Description: क़ुर्रतुल ऐन हैदर उर्दू भाषा के सशक्त और चर्चित कथाकारों में हैं। मंटो, कृष्णचन्दर, बेदी और इस्मत चुग़ताई के बाद उभरनेवाली नस्ल में उनका महत्त्वपूर्ण स्थान है। क़ुर्रतुल ऐन हैदर की कहानियाँ प्रचलित प्रगतिशील कहानियों के मुक़ाबले नई शैली, नए माहौल और नई दुनिया को सामने लाती हैं। इनकी कहानियों में उच्च वर्ग, ग्लैमर भरा जीवन, अतीत की स्वप्नीली ख़ूबसूरत यादें, रिश्तों के टूटने, ख़ानदानों के बिखरने और अतीत के उत्कृष्ट मानवीय मूल्यों के चूर-चूर हो जाने की त्रासदी का बेहद सूक्ष्म चित्रण मिलता है। क़ुर्रतुल ऐन हैदर समाज में औरत की कमज़ोरी और बेबसी को उसकी पूरी सच्चाई के साथ स्वीकारने का हौसला रखती हैं। उन्होंने इसी सच्चाई को अपने कथा साहित्य में ईमानदारी से प्रस्तुत करने का भरसक प्रयत्न किया है। यहाँ संकलित ‘कोहरे के पीछे’, ‘जिन बोलो तारा-तारा’, ‘हसब-नसब’, ‘आवारागर्द’ जैसी यथार्थवादी कहानियों के साथ ‘मलफ़ूज़ते हाजी गुलाबाना बेकताशी’ और ‘रौशनी की रफ़्तार’ शीर्षक कहानियाँ भी शामिल हैं जो उनकी सृजनशक्ति के नए आयामों को उद्घाटित करती हैं। क़ुर्रतुल ऐन हैदर की कहानियाँ अपनी विषयवस्तु, चरित्र-सृष्टि, तकनीक, भाषा और शैली हर लिहाज़ से उर्दू कहानी साहित्य में उल्लेखनीय ‘इज़ाफा’ मानी जा सकती हैं। इनसान और इनसानियत पर गहरा विश्वास उनकी कहानी-कला और चिन्तन का केन्द्र बिन्दु है। इनकी कहानियों में प्रेम और घृणा, ख़ुशियाँ और ग़म, सुन्दरता और कुरूपता एक साथ मौजूद हैं।
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