Sapanon Ka Ganit
Author:
Rajendra ShrivastavaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections0 Ratings
Price: ₹ 316
₹
395
Available
सभ्यता, संस्कृति और शुचिता की बदलती हुई परिभाषाओं के इस दौर में अपने समय को दर्ज करना बेहद चुनौतीपूर्ण है। ‘सपनों का गणित’ की कहानियाँ अपने समय के इस द्वन्द्व को रेखांकित करती हैं और आत्मचिन्तन तथा आत्मविश्लेषण के लिए हमें प्रवृत्त करती हैं। निर्भीक होना हर दौर में लेखन की बुनियादी शर्त रही है। यह सुखद है कि लेखक अपनी पूरी ताक़त से इन स्थितियों से मुठभेड़ करता है और समस्याओं से कन्नी काटकर निकलने का कोई प्रयास इन कहानियों में नहीं है। इन कहानियों के माध्यम से हम सच...और परोसे जा रहे सच...के अन्तर को भी समझ सकेंगे। </p>
<p>अपेक्षाओं का भंग होना आज एक गम्भीर समस्या है और आम जन हर मोर्चे पर ख़ुद को छला हुआ महसूस कर रहा है। लेखक ने इस पीड़ा को समझा है और अपनी कहानियों के माध्यम से अभिव्यक्ति दी है।</p>
<p>पाठकों और आलोचकों—दोनों की पसंद की कसौटी पर खरा उतरना लेखक के लिए कठिन हो सकता है, लेकिन अपनी कहानियों के माध्यम से राजेन्द्र श्रीवास्तव इस सन्तुलन को साधते हैं। पठनीयता और गुणवत्ता दोनों के मेल से ही यह सम्भव हो सकता है।
ISBN: 9788183619721
Pages: 130
Avg Reading Time: 4 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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अधिकतर कहानियों के कथा-कलन में बया के घोंसले जैसी संकुल और कलापूर्ण बुनावट है, जिसमें लेखिका इशारतन एक साथ कई बातें कह देती है। मानो इसकी कहानी उस चाकू या क़लमतराश की तरह है, जिसमें कई छुरियाँ एक साथ रहती हैं। ख़ासकर स्त्री-विमर्श से जुड़ी हुई कहानियाँ पठनीय हैं, जो मुनिया और अंजू जैसे चरित्रों के पक्ष में खुलकर खड़ी हैं और पुंप्रभुत्व से पीड़ित इस अलील समाज को दवा की कड़ी खुराक ही नहीं देना चाहती हैं, बल्कि उसे बेहोश किए बिना नश्तर भी लगा देना चाहती हैं। यह दूसरी बात है कि इस तासीर की कहानियों में भी कहीं-कहीं पुराने समाज के ‘सेंसर-मोरोंस’ के भय के साथ-साथ ‘प्यूडेंडा’—केन्द्रिक शब्दों व क्रियाओं के कथन से परहेज़ की झलक मिल जाती है।
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