Madhyakaleen Bharat Ka Aarthik Ithihas : Ek Servekshan
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Author:
Naresh 'Nadeem', S. Irfan HabibPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
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इस पुस्तिका में सम्मिलित आलेख बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय को दिए गए शारदा स्मृति व्याख्यान का परिवर्द्धित रूप हैं।</p> <p>पहले आलेख में देहली सल्तनत के आर्थिक महत्त्व सम्बन्धी सिद्धान्तों, नगरों, दस्तकारियों और वाणिज्य के विकास की प्रक्रिया, खेतिहर परिवर्तनों और भारत की मध्यकालीन अर्थव्यवस्था की मुख्य विशेषताओं पर प्रकाश डाला गया है।</p> <p>दूसरा अध्याय विजयनगर साम्राज्य की अर्थव्यवस्था पर एक सारगर्भित टिप्पणी के रूप में है।</p> <p>तीसरे अध्याय में मुग़ल भारत की अर्थव्यवस्था पर ‘कृषि और कृषि-क्षेत्र’; ‘राज्य और व्यवस्था’; ‘नगर और दस्तकारियाँ’; ‘आन्तरिक और विदेश व्यापार’ आदि शीर्षकों के तहत प्रकाश डाला गया है।
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इस पुस्तिका में सम्मिलित आलेख बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय को दिए गए शारदा स्मृति व्याख्यान का परिवर्द्धित रूप हैं।</p>
<p>पहले आलेख में देहली सल्तनत के आर्थिक महत्त्व सम्बन्धी सिद्धान्तों, नगरों, दस्तकारियों और वाणिज्य के विकास की प्रक्रिया, खेतिहर परिवर्तनों और भारत की मध्यकालीन अर्थव्यवस्था की मुख्य विशेषताओं पर प्रकाश डाला गया है।</p>
<p>दूसरा अध्याय विजयनगर साम्राज्य की अर्थव्यवस्था पर एक सारगर्भित टिप्पणी के रूप में है।</p>
<p>तीसरे अध्याय में मुग़ल भारत की अर्थव्यवस्था पर ‘कृषि और कृषि-क्षेत्र’; ‘राज्य और व्यवस्था’; ‘नगर और दस्तकारियाँ’; ‘आन्तरिक और विदेश व्यापार’ आदि शीर्षकों के तहत प्रकाश डाला गया है।
Book Details
-
ISBN9788126715251
-
Pages67
-
Avg Reading Time2 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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इतिहास-पुस्तकों की चर्चित शृंखला ‘भारत का लोक-इतिहास’ की यह कड़ी ईसा पू. 350 से लेकर ईसा पू. तक के कालखंड पर केन्द्रित है। भारतीय और यूनानी स्रोतों से प्राप्त जानकारी और अद्यतन विश्लेषणों को आधार बनाकर लिखी गई पुस्तक ‘मौर्यकालीन भारत’ में सिकंदर के भारत पर आक्रमण और मौर्य साम्राज्य के इतिहास को समेटा गया है। सन्दर्भ सामग्री के रूप में अशोक के शिलालेखों के विश्लेषण के साथ उनकी अहमियत को भी रेखांकित किया गया है, साथ ही तत्कालीन अर्थव्यवस्था, समाज और संस्कृति का विस्तृत विवरण भी उपलब्ध कराया गया है ताकि पाठक को हाल की खोजों से अवगत कराया जा सके। मौर्यशासन के कालक्रम, अर्थशास्त्र, अभिलेख विज्ञान और अशोककालीन प्राकृत की बोलियों पर विशेष टिप्पणियाँ भी इस अध्ययन का हिस्सा है, अशोक के दस पूर्ण शिलालेखों और भारत तथा यूनान के कुछ महत्त्वपूर्ण स्रोतों के अंश भी इसमें शामिल हैं। सामान्य पाठकों और छात्रों के पाठ्यक्रम को ध्यान में रखकर तैयार की गई यह पुस्तक मौर्य साम्राज्य विषयक अध्ययन के लिए विशेष महत्त्व रखती है।
Madhyakaleen Bharat : Naye Aayam
- Author Name:
Harbans Mukhia +1
- Book Type:

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क्या भारतीय इतिहास में फ़्यूडलिज़्म था? इस सवाल पर विचार करने से पहले कुछ ख़ास शब्दों की परिभाषा तय कर लेना उचित होगा। दूसरे शब्दों में फ़्यूडलिज़्म क्या है, इसे साफ़ कर लेना चाहिए। बदक़िस्मती से इस आसान सवाल का जवाब भी इतिहासकारों ने अलग-अलग ढंग से दिया है। अगर फ़्यूडलिज़्म की कोई ऐसी परिभाषा नहीं मिलती जिसे समान रूप से पूरी दुनिया पर लागू किया जा सके, तो इसका वस्तुगत कारण है और उसका हमारी बात के लिए ख़ास महत्त्व है : फ़्यूडलिज़्म कोई विश्व-व्यवस्था नहीं था, पूँजीवाद ही सबसे पहली विश्व-व्यवस्था बना। इसका मतलब यह हुआ कि फ़्यूडलिज़्म का कोई ऐसा सारतत्त्व नहीं रहा है जो पूरी दुनिया पर लागू हो सके, जैसा कि पूँजीवाद का है। जब हम पूँजीवाद की चर्चा अमूर्त रूप में, सार रूप में, माल की सामान्यीकृत उत्पादन प्रणाली के रूप में करते हैं जिसमें श्रमशक्ति ख़ुद भी एक माल होती है, तो हमें इसका एहसास रहता है कि पूरा मानव समाज अपने विकास के किसी न किसी स्तर पर इस उत्पादन प्रणाली की गिरफ़्त में आ चुका है। दूसरी ओर, फ़्यूडलिज़्म पूरे इतिहास के दौरान पूरी दुनिया पर एक साथ कभी भी काबिज़ नहीं रहा। यह किसी ख़ास काल और ख़ास इलाक़ों में, जहाँ उत्पादन के ख़ास तरीक़े और संगठन मौजूद थे, सामाजिक-आर्थिक संगठन का एक ख़ास रूप था।
—इसी पुस्तक से
Uttar-Mauryakaleen Bharat 200 Bc- Ad 300
- Author Name:
S. Irfan Habib
- Book Type:

- Description:
‘भारत का लोक इतिहास’ शृंखला की इस पुस्तक ‘उत्तर-मौर्यकालीन भारत’ का ताल्लुक़ उन पाँच सौ वर्षों से है जब भारत के राजनीतिक नक्शे पर इंडो-यूनानी, शकों, कुषाणों और सातवाहन वंशों का प्रभुत्व था। राजनीतिक घटनाक्रम के साथ-साथ इसमें उस अवधि की अर्थव्यवस्था का भी विवरण प्रस्तुत किया गया है। शिल्प-उत्पादन और विदेश-व्यापार के लिहाज़ से इस दौर में कई अहम परिवर्तन देखे गए थे। ‘उत्तर-मौर्यकालीन भारत’ में दी गई सभी सूचनाएँ और जानकारियाँ अद्यतन इतिहास-सामग्री पर आधारित हैं। शृंखला की अन्य पुस्तकों के अनुरूप ही इसमें भी चुनिन्दा शिलालेखों के अनुवाद तथा प्राचीन ग्रन्थों के अंश जोड़े गए हैं। पुराणों, संगम ग्रन्थों और कुषाण कालक्रम पर विशेष टिप्पणियाँ भी इसमें शामिल हैं जो पुस्तक को और भी प्रामाणिक बनाती है। कुछ टिप्पणियाँ मुद्राशास्त्र और अर्थशास्त्र की प्राथमिक अवधारणाओं पर भी जोड़ी गई हैं। सहायक नक्शों और चित्रों से सुसज्जित यह पुस्तक इतिहास में रुचि रखनेवाले पाठकों, छात्रों और अध्येताओं के लिए समान रूप से उपयोगी है। पुस्तक में प्रस्तुत सामग्री में उन विधियों को विशेष रूप में रेखांकित किया गया है जो आम जन-जीवन को प्रभावित करते हैं; और जो आज भी हमें एक विश्व-दृष्टि विकसित करने में सहायक हो सकते हैं।
Uttar-Mauryakaleen Bharat 200 BC - Ad 300
- Author Name:
S. Irfan Habib +2
- Book Type:

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‘भारत का लोक इतिहास’ शृंखला की इस पुस्तक ‘उत्तर-मौर्यकालीन भारत’ का ताल्लुक़ उन पाँच सौ वर्षों से है जब भारत के राजनीतिक नक्शे पर इंडो-यूनानी, शकों, कुषाणों और सातवाहन वंशों का प्रभुत्व था। राजनीतिक घटनाक्रम के साथ-साथ इसमें उस अवधि की अर्थव्यवस्था का भी विवरण प्रस्तुत किया गया है। शिल्प-उत्पादन और विदेश-व्यापार के लिहाज़ से इस दौर में कई अहम परिवर्तन देखे गए थे। ‘उत्तर-मौर्यकालीन भारत’ में दी गई सभी सूचनाएँ और जानकारियाँ अद्यतन इतिहास-सामग्री पर आधारित हैं। शृंखला की अन्य पुस्तकों के अनुरूप ही इसमें भी चुनिन्दा शिलालेखों के अनुवाद तथा प्राचीन ग्रन्थों के अंश जोड़े गए हैं। पुराणों, संगम ग्रन्थों और कुषाण कालक्रम पर विशेष टिप्पणियाँ भी इसमें शामिल हैं जो पुस्तक को और भी प्रामाणिक बनाती है। कुछ टिप्पणियाँ मुद्राशास्त्र और अर्थशास्त्र की प्राथमिक अवधारणाओं पर भी जोड़ी गई हैं। सहायक नक्शों और चित्रों से सुसज्जित यह पुस्तक इतिहास में रुचि रखनेवाले पाठकों, छात्रों और अध्येताओं के लिए समान रूप से उपयोगी है। पुस्तक में प्रस्तुत सामग्री में उन विधियों को विशेष रूप में रेखांकित किया गया है जो आम जन-जीवन को प्रभावित करते हैं; और जो आज भी हमें एक विश्व-दृष्टि विकसित करने में सहायक हो सकते हैं।
Aadhunik Kaal : Paryavaran, Arthvyavstha, Sanskriti (Bharat 1880 to 1950)
- Author Name:
Sumit Sarkar +1
- Book Type:

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Awating description for this book
Prem Ke Pahle Basant Me
- Author Name:
Rashmi Bhardwaj
- Book Type:


- Description:
ख़ुसरो दरिया प्रेम का, उल्टी वा की धार। जो उतरा सो डूब गया, जो डूबा सो पार।।
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