Naach Gaan
(0)
Author:
Dr. Urmila ShirishPublisher:
Shivna PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
160
₹ 128 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
Book
Read moreAbout the Book
Book
Book Details
-
ISBN9789387310810
-
Pages120
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Ek Bataa Ek
- Author Name:
Shankar
- Book Type:

- Description: Collection of Short Stories
Gulmohar Gar Tumhara Naam Hota!
- Author Name:
Husn Tabssum Nihan
- Book Type:

-
Description:
‘गुलमोहर ग़र तुम्हारा नाम होता’ में संकलित कहानियाँ सायास रचे गए किसी भाषिक चमत्कार या शिल्प-सज्जा के बग़ैर जीवन के विराट और दैनिक वृत्तान्त को अलग-अलग कोनों से छूती-पकड़ती हैं। इसलिए बेहद नज़दीक से गुज़री किसी घटना की तरह याद रह जाती हैं।
आधुनिक स्त्री की स्वातंत्र्य-कामना और उसके सामने खड़ी समाज की सामन्ती जड़ताएँ, घरों-परिवारों की जकड़बन्दियाँ, ऊपरी तौर पर सहजीवी दिखनेवाले समाज के अन्तर्विरोध और इन सबके साथ भारतीय मुस्लिम समाज की कुछ प्रामाणिक छवियाँ इन कहानियों की अपनी विशेषताएँ हैं।
सीधी और सरल-सी दिखनेवाली इन कहानियों में कई दृश्य ऐसे भी हैं जो रचनाकार की अत्यन्त सूक्ष्म दृष्टि का पता देते हैं। मसलन ‘हुए तुम दोस्त जिसके’ कहानी की सविता ताई का सिर्फ़ एक स्पर्श-सुख पाने के लिए आते-जाते युवकों से नाला पार कराने का आग्रह करना—जीवन के स्वर्णिम दिन वेश्यावृत्ति में गुज़ारने और मन-भाए एकमात्र प्रेमी को खो देने के बाद अकेली खटतीं सविता ताई जो अब 88 वर्ष की हैं। भीख माँगकर पेट के लिए रोटी जुटातीं और बहाना बनाकर देह के लिए स्पर्श ढूँढ़तीं सविता ताई!
‘एक निकाह ऐसा भी’ में आब्ज़र्वेशन की यह बारीकी एक अलग ही स्तर पर नज़र आती है जहाँ कौन सा मौलवी निकाह पढ़ाएगा, इस सवाल से उठा विवाद वर-वधू पक्ष में ख़ून-ख़राबा तक करा देता है, लेकिन दूल्हा-दुल्हन की आपसी सहमति निकाह को स्थगित नहीं होने देती।
जीवन में जहाँ-तहाँ फैली नाटकीयता को ये कहानियाँ उसी कौशल से पकड़ती हैं जैसे सरल-सपाट साधारणता को। और पठनीयता इनका वह गुण है जो इस पूरे संग्रह को विशेष बनाता है।
Nagarvadhuyen Akhardboundar Nahi Padhtin
- Author Name:
Anil Yadav
- Book Type:

- Description: Hindi Short Story by Anil Yadav
Sampoorn Kahaniyan : Gyanranjan
- Author Name:
Gyanranjan
- Book Type:

-
Description:
ऐसे लेखक विरले ही होते हैं जिनकी रचनाएँ अपनी विद्या को भी बदलती हों और उस विधा के इतिहास को भी ज्ञानरंजन के बारे में यह बात निर्विवाद कही जा सकती है कि उनकी कहानियों के बाद हिन्दी कहानी वैसी नहीं रही जैसी कि उनसे पहले थी। उनके साथ हिन्दी गद्य का एक नया, आधुनिक, सघन और समर्थ व्यक्तित्व सामने आया जो उस दौर की भाषा में व्याप्त काव्यात्मक रूमान के बजाय काव्यात्मक सचाई से निर्मित हुआ था। ज्ञानरंजन की भाषा में उस पीढ़ी की भाषा थी जो भारतीय समाज में आजादी महास्वप्नों के टूटने, परिवारों के बिखरने, मनुष्य के अकेला होते जाने और जीवन में अर्थहीनता के प्रवेश जैसे हादसों के बीच अपने विक्षोभ, अपनी हताशा और अपनी उम्मीद को पहचानने की बेचैन कोशिश कर रही थी। युवा होते समाज की इस आन्तरिक उथल-पुथल का इतना गहरा साक्षात्कार ज्ञानरंजन की कहानियों में मिलता है। कि उनके अनेक चरित्र प्रेमचन्द के कई चरित्रों की तरह हमारी स्मृति में अभिन्न रूप से शामिल हो गए। सन् साठ के बाद की हिन्दी कहानी एक महत्त्वपूर्ण प्रस्थान बिन्दु या कहानी का दूसरा इतिहास मानी गई और ज्ञानरंजन सामाजिक रूप से उसके सबसे बड़े रचनाकार कहे गए। लेकिन हर बड़े लेखक की तरह ज्ञानरंजन की कहानियाँ अपने दौर या समय को लाँघती गईं और इसीलिए आज भी पढ़ने पर उनकी प्रायः सभी कहानियाँ उतनी ही जीवन्त, प्रासंगिक और प्रामाणिक महसूस होती हैं। ‘क्षणजीवी’ जैसी कहानी लिखने और जीवन के निरर्थक क्षणों में अर्थ की खोज करनेवाले ज्ञानरंजन दरअसल हमारे समय के सबसे ‘दीर्घजीवी’ लेखकों में से हैं।
‘फेंस के इधर और उधर’, ‘पिता’, ‘शेष होते हुए’, ‘सम्बन्ध’, ‘यात्रा’, ‘घंटा’ और ‘बहिर्गमन’ आदि कहानियाँ जिस निम्न-मध्यवर्गीय यथार्थ से मुठभेड़ के कारण प्रसिद्ध हुई, वह भले ही बदल गया हो, लेकिन उस पर लिखी गई ये कहानियाँ कभी पुरानी या बासी नहीं हुईं। ज्ञानरंजन सरीखे कृती लेखक की ही यह सामर्थ्य है कि यथार्थ के पुराने पड़ जाने पर भी उसका अनुभव पुराना या समय सापेक्ष नहीं हो जाता। बल्कि इन कहानियों में अभिव्यक्त विराट हलचल के बीच आनेवाले यथार्थ की अनेक आहटें भी हम सुन सकते हैं। ‘अनुभव’ में तथाकथित उच्चवर्ग की विकृति और अश्लीलता के विवरणों में उस अपसंस्कृति का पूर्वाभास है जो आज हमारे समाज में चौतरफ बजबजा रही है। वह एक स्वस्थ समाज की मृत्यु पर हिला देनेवाला शोकगीत है।
ज्ञानरंजन की सभी कहानियों का यह संग्रह हमारे समय का एक साहित्यिक दस्तावेज़ भी है और हमारे यथार्थ का साफ आईना भी है, जिसमें दिखते जीवन के बिम्ब पाठक को हमेशा उद्वेलित करते रहेंगे।
Dharohar Kahaniyaan : Chandradhar Sharma ‘Guleri’
- Author Name:
Chandradhar Sharma 'Guleri'
- Book Type:

- Description: संस्कृत कविता में एक शब्द चलता है—भाव सबलता। दो भावों में विरोधी चीजों का मिश्रण। संस्कृत काव्यशास्त्र के आचार्य गुलेरी जी हास्य और करुणा का मेल करते हैं, क्योंकि इस मेल का मुख्य उद्देश्य है करुण रस उत्पन्न करना और करुण रस को थीम में बनाने के ठीक उसके उलटा हास्य को मिलाया जाएगा तो करुणा और भी गहरी और तीव्र होगी। हिन्दी कहानी की दुनिया में किस ऊँचे शिखर से हमने शुरू किया है, ‘उसने कहा था’ उसका सबसे शानदार नमूना है। —नामवर सिंह
Wah Zindagi
- Author Name:
Ramesh Pokhriyal 'Nishank'
- Book Type:

- Description: ‘तुम यहाँ हो! मैं तो तुम्हें अंदर ढूँढ़ रही थी।’ इतने में कृतिका मुझे ढूँढ़ती बाहर चली आई। ‘यह क्या हाल बना रखा है तुमने अपना?’ और वह खिलखिलाकर हँस दी। तभी दोनों बच्चे भी स्कूल जाने के लिए बाहर आए और कृतिका को हँसते देख वे भी मुझे देख हँसने लगे। ‘मजा आ गया आज तो?’ ‘अरे पिताजी! रोज ऐसा किया करिए, छुट्टी के दिन हम भी आपके साथ भीगेंगे...।’ कहकर वे हाथ हिलाते हुए स्कूल निकल पड़े। कुहासा छँट रहा था। मैं अपने आपको बेहद हल्का महसूस कर रहा था। ऐसा लग रहा था, जैसे मैं आकाश में उड़ रहा हूँ। जिंदगी बहुत खूबसूरत है, बस जरूरत है तो उसे इस नजरिए से देखने की। ‘वाह जिंदगी!।’ मैंने मन ही मन उस जिंदगी को धन्यवाद दिया, जो कल ही मेरे पास कुछ समय के लिए आकर मुझे जीना सिखा गई थी। —इसी पुस्तक से साहित्य-सृजन के प्रति सचेत राजनीतिज्ञ एवं लेखक रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ की कलम से निकला कहानी-संग्रह ‘वाह जिंदगी!’ जीवटता एवं जीवंतता का अद्भुत उदाहरण है। जीवन के विविध रंग उकेरता मनोरंजक और प्रेरणाप्रद कहानी-संग्रह।
Maxim Gorki Ki Lokpriya Kahaniyan
- Author Name:
Maxim Gorki
- Book Type:

-
Description:
मैक्सिम गोर्की की गणना विश्व के श्रेष्ठ साहित्यकारों में की जाती है। उन्होंने साहित्य की सभी विधाओं—नाटक, कविता, निबन्ध, कहानी आदि—में योगदान दिया, किन्तु वे विशेष रूप से अपने उपन्यास ‘माँ’ एवं अन्य उपन्यासों एवं कहानियों के लिए जाने जाते हैं।
गोर्की की प्रारम्भिक कहानियाँ दो भिन्न-भिन्न शैलियों—रोमांटिक (स्वच्छन्दतावादी) और यथार्थवादी—में लिखी गई हैं। अपनी रोमांटिक कहानियों में उन्होंने जीवन के प्रेरणादायक और उदात्त चित्र प्रस्तुत कर अपने अभावों और दरिद्रता से भरे जीवन की परिस्थितियों को भूलने का प्रयत्न किया है। इसलिए उन्होंने अपनी कल्पना की रंगीनियों से उन्हें सजाया है। ये कहानियाँ मनुष्य के शौर्य, साहस और स्वतंत्रता की भावनाओं से अनुप्राणित हैं और इनमें ऐसे स्वप्नों की अभिव्यक्ति है जो आज की यथार्थता को बेधकर आगामी कल की यथार्थता को देखते हैं। यथार्थवादी कहानियों के कथानक, घटनाएँ और पात्र वास्तविक जीवन से लिए गए हैं। ऐसी समस्याएँ प्रस्तुत की गई हैं, जो हर दिन के जीवन में सामने आ रही थीं, जिनका लेखक को अपने इर्द-गिर्द के जीवन में अनुभव हुआ था और जो तत्कालीन रूस के पुराने सामन्तवादी-पितृसत्तात्मक ढाँचे के टूटने और पूँजीवाद की ओर तीव्र संक्रमण के फलस्वरूप जन्म लेते हुए नए सामाजिक सम्बन्धों, नए रिश्तों का परिणाम था। इनमें जहाँ मध्यम वर्ग के लोगों की कूपमंडूकता, उनके बौद्धिक दैन्य, उनकी उदासीनता, उनकी क्रूरता और संकीर्णता पर ज़ोरदार चोट की गई है, वहीं बुद्धिजीवियों तथा साहित्यकारों पर भी प्रहार किया गया है।
गोर्की ने जीवन के स्वामियों अर्थात् साधन-सम्पन्न शोषक वर्ग के लालच, स्वार्थपरता और उसके मुक़ाबले में ऐसे पात्रों को भी प्रस्तुत किया है जो क्रूर परिस्थितियों के परिणामस्वरूप जीवन के गर्त या तल में पहुँच गए थे। उनमें से कुछ अपने मानवीय लक्षणों को भी खो बैठे थे, किन्तु अधिकांश की आत्मा में उनका मानव जीवित रहा था। गोर्की ने उन सामाजिक परिस्थितियों पर प्रकाश डाला है, उनका विश्लेषण किया है, जो लोगों को पतन की ओर ले जाती हैं, किसी नारी को वेश्या बनने के लिए विवश करती हैं, बच्चों से भीख मँगवाती हैं।
Gyangarh ki Ladai
- Author Name:
Balraj Pandey
- Book Type:

- Description: s 'ज्ञानगढ़ की लड़ाई' ग्यारह कहानियों का संग्रह है। 20-25 वर्षों का लेखन—ग्यारह कहानियाँ। लिखने के सम्मोहन और कहानीकार कहलाने की कामना से कोसों दूर। लेकिन जब लिखा तो उस मेहतर की तरह लिखा जो साफ-सुथरेपन को कर्तव्य की तरह पूरा करता हो, दिनचर्या की तरह निभाता-भर नहीं हो। बलराज पांडेय आदर्शवादी, साफ-सुथरी कहानियों वाली लेखन-परंपरा के कहानीकार नहीं हैं। प्रतीकवादी कहन भी इन कहानियों की विशेषता नहीं। ये कहानियाँ प्रगतिशील परंपरा में, यथार्थवादी धारा की कहानियाँ हैं। यथार्थवादी धारा में भी, विरूपण (डिस्टार्शन) की कला के सहारे विद्रूपता का चित्रण इन कहानियों का शिल्प है। विद्रूपता के इस चित्रण में उपहास नहीं, बल्कि विडम्बना को उजागर करने वाली वह ट्रैजिक स्थितियाँ हैं, जिनमें पाखंड, भ्रष्टाचार, निकृष्टताएँ, दुरभिसंधियाँ, छल-प्रपंच, रीढ़हीनता, चाटुकारिता, पीठ-पीछे वार करने वाली निरीहता को जीने और पोषित करने वाले लोग हैं। धिक्कार, ज़ाहिर हो जा, है तू जैसा, प्रोन्नति का फेर, इंटरव्यू, तस्मै श्री गुरवे नम:, अध्यक्ष जी का वसंतोत्सव, ज्ञानगढ़ की लड़ाई आदि कहानियों को इन किरदारों के साथ पढ़ा जा सकता है। ये सभी किरदार जाने-पहचाने वास्तविक किरदार हैं। यह संग्रह शिक्षण-संस्थानों, उनके विभागों, उन विभागों में पदासीन आचार्यों की कार्य-संस्कृति, उनके बीच की अंदरूनी ख्वाहिशात, चालबाजि़यों और धूर्तताओं का रंगीन हलफनामा है। नैतिकता और मूल्यों के क्षरण-मरण का कथात्मक मर्सिया। इन कहानियों के बहाने आप देश के सभी विश्वविद्यालयों के हिन्दी-विभागों के खद्दो-खाल को पढ़ सकते हैं, देख सकते हैं।
Contemporary Kashmiri Short Stories
- Author Name:
Hriday Kaul Bharati +1
- Rating:
- Book Type:

- Description: The Kashmiri short story was born with the progressive movement in Kashmir and its acceptted the standards and values dictated by the movement unquesioningly. Nationalism and the desire for reaching out to people inspired most of the writers to switch over to Kashmiri, even though they had strated writing in Urdu. Dinanath Nadim's Javabi Card (Reply-Card) and Somnath Zutshi's Yell Phol Gash (when there was light) are the first two short stories written in Kashmiri
Shabdon Ka Khakrob
- Author Name:
Raju Sharma
- Book Type:

-
Description:
यह पहला प्रकाशित संकलन है राजू शर्मा की कहानियों का। इसमें जो कहानियाँ
संगृहीत हैं, वे एक लम्बे समयान्तर के बीच लिखी गई हैं। मसलन ‘चिट्ठी के मार्फ़त’ और ‘मुक़दमा’
अस्सी के मध्य की कहानियाँ हैं। इसके बाद ‘रिवर्स स्वीप’, ‘कूड़े का ढेर' और ‘मोटी बातें' 1993 के
आसपास की हैं। लम्बी कहानी ‘शब्दों का ख़ाकरोब’ 1995 के बाद की कहानी है और तभी के समय
को रेखांकित करती है।
लगभग सभी कहानियाँ एक विशेष ढंग से अपने समय और समस्या का अंकन और आकलन करती
हैं। कहानियों का ज़ोर उन सामाजिक और आर्थिक संरचनाओं पर है जो इंसान की मजबूरी, उसकी
स्वायत्तता का सिकुड़ता दायरा और उसकी देर-सवेर की विकृतियों और विषमताओं को जन्म देती हैं।
और उसे एक अजनबी पहचान प्रदान करती हैं। ‘मोटी बातें’ का लगातार फूलता मन्नीलाल और ‘रिवर्स
स्वीप’ के उलटी दृष्टि प्राप्त ओझा जी ऐसे दो उदाहरण हैं।
‘शब्दों का ख़ाकरोब’ एक लम्बी, पूर्णत: राजनैतिक व नायाब कहानी है। यह एक रचनात्मक रूपक की
तरह उद्घाटित होता एक घटना-निबन्ध है। वर्तमान बल्कि ताज़ा राजनीति के नाटकीय मोड़, साझा
राजनीति के नए अनुभव, राजनीति की अनिवार्यता व उसकी मजबूरी, राजनैतिक दुराचरण की
अभिशप्तता व उसके गहरे, दूसरे अर्थ—इस तरह के बहुत से सवालों, भव्यताओं, अजूबियत व
चमत्कारी प्रभावों को समेकित करती है यह लम्बी कहानी। यह एक ऐसी कृति है जो राजनीति की
आन्तरिक जटिलता को बड़ी सूक्ष्मता से पकड़ती है।
इस संग्रह की हर कहानी सामाजिक यथार्थ का कोई न कोई पक्ष नए तरीक़ों से प्रस्तुत करती है।
परन्तु ‘शब्दों का ख़ाकरोब’ एक ऐसी कहानी है जिस पर विशेष रूप से चर्चा होगी व होनी चाहिए।
DALDAL
- Author Name:
Sushant Supriy
- Book Type:

- Description: Stories
Jugani
- Author Name:
Bhavana Shekhar
- Book Type:

-
Description:
अपनी दूसरी पुस्तक ‘जुगनी’ में पन्द्रह कहानियों के माध्यम से भावना शेखर ने आसपास घटती साधारण घटनाओं को भी असाधारण बनाने की अपनी संवेदनशीलता का परिचय दिया है। सरल भाषा में परिपक्व भावनाओं को गूँथा गया है। अधिकांश कहानियाँ नारी पात्रों के इर्द-गिर्द घूमती हैं और सफलतापूर्वक उनके अन्तर्मन में झाँकने का प्रयास करती हैं। भावना शेखर नारी-मन की कुशल चितेरी हैं—कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी।
सदियों से दमित-कुंठित और शोषित नारी का चित्रण करना लेखिका का अभीष्ट नहीं वरन् अन्याय से लोहा लेती नारी को अन्ततः विजयी दर्शाना इन्हें अवश्य प्रिय लगता है। प्रायः हर कहानी एक ‘पॉजिटिव नोट’ पर समाप्त होती है।
वृन्दा हो या नीलांजना, देव या जुगनी—पात्रों का चरित्र-चित्रण तो प्रभावशाली है ही, पुरुष और नारी पात्रों की देहयष्टि का वर्णन भी लेखिका बेबाकी से कर जाती हैं—चाहे वह ‘त्रिकोण’ का हेमन्त हो या ‘वन्ध्या’ की अम्बिका या गोगो या ‘मलेच्छन’ की नैन्सी।
भावना शेखर के लेखन में प्रकृति के साथ पात्रों का सहज ही साहचर्य स्थापित हो जाता है। पहाड़ों से अपने जुड़ाव के कारण वे पाठकों को भी प्रकृति-भ्रमण की ओर बरबस खींच लेती हैं। अपनी कहानियों के माध्यम से न केवल बचपन में बार-बार लौटती हैं, अपितु सम्पूर्ण मानव जीवन की गतिविधियों पर एक दर्शनशास्त्री की तरह अपनी निश्छल टिप्पणी भी देती हैं।
संक्षेप में, पुस्तक की सभी कहानियाँ धारदार और असरदार हैं। अतः निस्सन्देह पठनीय और संग्रहणीय हैं।
—डॉ. नरेन्द्रनाथ पांडेय
Kashmir Ek Prem Katha
- Author Name:
Maharaj Krishna Santoshi
- Book Type:

- Description: 'कश्मीर एक प्रेम कथा' महाराज कृष्ण संतोषी का एक ऐसा कहानी-संग्रह है जिसमें अपने जड़ से कटने के दर्द विभिन्न रूपों और संदर्भों में अभिव्यक्त होता है। विस्थापन का दर्द छिन्नमूल होने का दर्द है जिससे वह आदमी प्राय: नहीं समझ सकता जिसके जीवन में इस तरह की पीड़ा का प्रत्यक्ष अनुभव न जुड़ा हो। चिनार के पेड़ और पत्ते किन-किन क्षणों और कितने संदर्भों में कश्मीर छोड़ चुके एक इंसान के स्वप्न में आते और वर्तमान परिवेश की विडंबनाओं के चलते ठहर भी न पाते यह एक प्रवासी कश्मीरी का कभी न समाप्त होने वाला दर्द है। इस संग्रह की तमाम कहानियों में मानवीय संवेदनाओं के सघन रेशों के साथ जड़ से जुड़ी हुई स्मृति के तार रह-रहकर झंकृत होते रहते हैं। यहाँ किसी बूढ़े का दर्द हो या किसी अल्पसंख्यक या इतिहास में विस्मृत पात्रों के दंश—सबकुछ कहानी में बेहद सहज ढंग से आते हैं और कहानी-कला का निर्वाह करते हुए पाठक मन में देर तक बसे रहने की कुव्वत रखते हैं।
Muthbher
- Author Name:
Dhruv Gupt
- Book Type:

-
Description:
सुपरिचित कवि, ग़ज़लगो तथा सम्पादक ध्रुव गुप्त का कहानी के क्षेत्र में आगमन एक सुखद घटना है। ‘मित्र’ में प्रकाशित उनकी कहानी ‘नाच’ ने विषय के चयन, कथा गठन के कौशल, कथा की ज़मीनी पकड़ और भाषा की जीवन्तता के कारण मुझे आश्चर्यचकित किया था। इस दौरान कुछ अन्य पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित उनकी कहानियाँ भी नई ज़मीन तोड़ती हुई प्रतीत हुईं।
‘मुठभेड़’ ध्रुव गुप्त का पहला कहानी-संग्रह है, लेकिन हाथ के नएपन का एहसास इन कहानियों में कहीं नहीं। पेशे से पुलिस अधिकारी ध्रुव गुप्त ने अपने अनुभव संसार की प्रखरता को अपने कवि मन की संवेदनशीलता और काव्यात्मक भाषा में ढालकर अपनी कहानियों को निखारा और एक नया स्वाद प्रदान किया है। इन कहानियों में हमारे समय का यथार्थ पूरे तीखेपन के साथ व्यक्त हुआ है। संग्रह की प्रायः सभी कहानियाँ हमारे मन में एक टीस पैदा करती हैं। व्यवस्था की बदतरी और सामाजिक विकृतियों के प्रति हमें सजग बनाती हैं। हमें सोचने को बाध्य करती हैं।
इस संग्रह की पाँच कहानियाँ पुलिस ज़मीन की कहानियाँ हैं जो कथाकार का अनुभव जगत भी है। ‘मुठभेड़’ में जब माहौल की विसंगतियाँ एक संवेदनशील पुलिस अधिकारी को अमानवीय बनाती हैं तो सचमुच मन कचोट कर रह जाता है। यह बाहरी संघर्ष की ही नहीं, आन्तरिक संघर्ष की भी कथा है। इसी तरह ‘हत्यारा’ और ‘कांड’ कानूनी दाव-पेच के कारण न्याय न दिला पाने की एक संवेदनशील पुलिस अधिकारी की आन्तरिक पीड़ा को बेहद मर्मस्पर्शी तरीक़े से व्यक्त करती हैं।
‘समय और समाज का सच तथा संवेदना का नया आख्यान’ मेरी समझ से कहानियों की कसौटी है। ध्रुव गुप्त की कहानियाँ निःसन्देह इस कसौटी पर खरी उतरती हैं।
—मिथिलेश्वर
Anubhooti
- Author Name:
Panna Jha
- Book Type:

- Description: Collection of Maithili Short Stories
Mubarak Pahla Kadam
- Author Name:
Sanjeev +1
- Book Type:

- Description: पहली नज़र, पहली प्रीति, पहली कृति...ग़रज़ कि किसी भी चीज़ का पहला होना। कितना आह्लादकारी होता है, इस पहले का अनुभव करना। यह अहसास अपने लिए तो रोमांचक होता ही है, औरों के लिए भी कम रोमांचक नहीं होता। कथा साहित्य में पहली कहानी अपने आप में सृजन-संभार के टटकेपन के इसी सुखद अहसास को समोए रहती है। आगे चलकर उस कथाकार के विकास के ग्राफ़ को जानने के लिए भी परिमापन इसी बिन्दु से होता है। इसीलिए कथाकारों के बारे में अक्सर पूछा जाता है कि कौन थी उनकी पहली कहानी, कहाँ प्रकाशित हुई थी और कब? ‘हंस’ में प्रकाशित कथाकारों की पहली कहानियों का यह संचयन इन प्रश्नों का एक विनम्र उत्तर है। यह संचयन इस लिहाज़ से भी महत्त्वपूर्ण है कि इसमें जिन कहानीकारों की कहानियाँ संकलित हैं, उनमें से अधिसंख्य ने बाद में अपनी बुलन्दी के झंडे गाड़े।
Volga Se Ganga
- Author Name:
Rahul Sankrityayan
- Rating:
- Book Type:

- Description: राहुल सांकृत्यायन की अत्यन्त चर्चित कृति ‘वोल्गा से गंगा’ ऐसी बीस ऐतिहासिक कहानियों का संकलन है जिनमें उन्होंने आर्यों के आठ हजार साल के इतिहास को कालानुक्रम से अंकित किया है। इन कहानियों में मातृसत्तात्मक समाज-व्यवस्था को पितृसत्तात्मक व्यवस्था में बदलने की प्रक्रिया भी दृष्टिगोचर होती है और आर्यों की यूरेशिया से वोल्गा तथा उसके बाद गंगा तक की यात्रा की रूपरेखा भी पता चलती है। ई.पू. 6000 से लेकर 1942 ई. तक के कालखंड को कड़ी-दर-कड़ी प्रस्तुत करनेवाली ये कहानियाँ एक तरफ जहाँ राहुल सांकृत्यायन के असीम अध्ययन का पता देती हैं, वहीं भारोपीय मानव-इतिहास के प्रति हमें एक व्यापक समझ भी देती हैं। इन कहानियों में इतिहास भी है, और कथा भी। सम्बन्धित काल खंडों की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों की स्पष्ट रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए ये कहानियाँ कथा-रस को भी कहीं भंग नहीं होने देतीं। भारतीय साहित्य में एक क्लासिक का दर्जा हासिल कर चुकी इस पुस्तक का अनुवाद असमिया, मराठी, बांग्ला, कन्नड़, तमिल, मलयालय, तेलुगु, पंजाबी आदि भारतीय भाषाओं के अलावा अंग्रेजी, चेक तथा पोलिश भाषाओं में भी हो चुका है।
Paanch Kahaniyan : Stree-Drishti
- Author Name:
Anamika
- Book Type:

- Description: किताब यूपीपीएससी के नवीन पाठ्यक्रम पर आधारित पहली किताब है। हिन्दी साहित्य, वैकल्पिक विषय में लगाई गईं 5 कहानियाँ (‘माँ’, ‘आकाशदीप’, ‘रोज़’, ‘वापसी’, ‘जहाँ लक्ष्मी क़ैद है’) प्रत्येक छात्र को अनिवार्य रूप से पढ़नी हैं। पुस्तक में पाँचों कहानियों का मूल पाठ लेखक परिचय के साथ संकलित है। साथ ही प्रख्यात लेखिका डॉ. अनामिका द्वारा प्रत्येक कहानी पर लिखा गया व्याख्यात्मक आलेख प्रश्नों को हल करने में सहायक होगा। लेख पढ़कर छात्र न केवल कहानी की व्याख्या कर सकेंगे, बल्कि कहानी आधारित प्रश्नों को आसानी से हल भी कर सकेंग
Khel-Khel Mein
- Author Name:
Nirmal Verma
- Book Type:

- Description: पहले विश्वयुद्ध के बाद जब पूर्वी एशिया के अनेक देश स्वतंत्र होने के बावजूद प्रतिगामी रास्तों पर मुड़ गए, उस समय भी चेकोस्लोवाकिया ने अपनी लोकतांत्रिक और मानववादी मनोभूमि को सुरक्षित बनाए रखा। बीसवीं सदी के पूर्वार्द्ध में चेकोस्लोवाकिया की राजधानी प्राग यहूदी विद्वानों, जर्मन लेखकों और रूसी क्रान्तिकारियों की शरण-स्थली बन गई थी। प्राग की अनूठी गरिमा और संवेदनशीलता ने वहाँ बसने वाले जर्मन और यहूदी लेखकों की मनीषा को एक बिरले रंग और लय में ढाला था। निर्मल वर्मा ने अपने युवा वर्ष प्राग में गुज़ारे थे। उन्होंने इंस्टीट्यूट ऑफ़ ओरिएंटल स्टडीज के निमन्त्रण पर वहाँ रहकर न केवल चेक भाषा सीखी, बल्कि तत्कालीन चेक साहित्य से हिन्दी जगत को सीधे परिचित करवाया। उन्हीं की पहल पर चेक साहित्य के मूर्धन्य लेखकों—कारेल चापेक, बोहुमिल हराबाल—के अलावा तब के युवा लेखकों, मिलान कुन्देरा और जोसेफ़ श्कवोरस्की की रचनाएँ हिन्दी में आईं, वह भी उस समय जब यूरोप में भी वे अभी अल्पज्ञात ही थे। यही इस संग्रह की ऐतिहासिक भूमिका है।
Kathavaachak
- Author Name:
Susmita Pathak
- Book Type:

- Description: स्त्रियाँ परिवार और समाज की धुरी होती हैं लेकिन उन स्त्रियों का जीवन कितना कठिन, विपत्तियों से भरा और त्रासद होता है, कितनी अपमानजनक और विकट स्थितियों-परिस्थितियों से वे जूझती और संघर्ष करती हैं, उसका सटीक और सम्यक चित्रण सुस्मिता पाठक की कहानियों में गुम्फित है। अपनी कहानियों में वह स्त्री की दारुण गाथा मात्र नहीं कहती अपितु स्त्री के सपने और संघर्ष को मजबूत स्वर भी देती हैं। इक्कीसवीं सदी में स्त्री-संघर्ष और विमर्श की एक सुपरिचित व्याख्याकार के रूप में मैथिली साहित्य में इनका स्थान सुरक्षित है। अपनी कहानियों में व्यापक जीवनानुभव, नव्यतर कथ्य, उपस्थापन शैली, स्त्री जीवन की विडम्बनाओं को महीनी से उकेरती, उद्घाटित-उद्भेदित करती सुस्मिता अपने पाठकों को कहानियों से विलग नहीं होने देती हैं। इनकी कहानियों से गुजरते हुए मिथिला के सामाजिक जीवन, रीति-रिवाज, सुख-दुख, राग-विराग और नेह-छोह का विरल अनुभव मिलता है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book