Bahadur Shah Zafar Aur Phool Walon Ki Sair
(0)
Author:
Mirza Farhatullah BegPublisher:
Rekhta FoundationLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
199
₹ 159.2 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
फूल वालों की सैर दिल्ली वालों के बीच हमेशा से लोकप्रिय रही है। अकबर शाह सानी के ज़माने में शुरू हुई ये सैर सांस्कृतिक एकता का परिचायक है। इस किताब में बहादुरशाह ज़फ़र के ज़माने की फूल वालों की सैर का नक़्शा खींचा गया है। इस के लेखक मिर्ज़ा फ़रहतउल्लाह बेग हैं, मूल रूप से उर्दू की इस किताब का हिंदी लिप्यंतरण ज़ुबैर सैफ़ी ने किया है। मिर्ज़ा फ़रहतउल्लाह बेग उर्दू के जाने-माने व्यंग्यकार थे। उनक जन्म सन् 1883 में दिल्ली में हुआ था। उनके पिता का नाम हशमत बेग था। उन्होंने शुरुआती शिक्षा-दीक्षा गर्वनमेंट हाई स्कूल दिल्ली में हासिल की। बी. ए. की डिग्री हासिल करने के बाद वे हैदराबाद में नौकरी करने लगे। वहाँ पर वे न्यायपालिका में अलग-अलग पदों पर रहे। अंत में होम सेक्रेटरी होकर सेवानिवृत्त हुए और पेंशन पाई। हैदराबाद के साहित्यिक माहौल ने मिर्ज़ा की साहित्यिक दृष्टि को ख़ूब निखारा और वो उच्च स्तर के व्यंग्यकार बने। फ़रहतउल्लाह बेग का सबसे पहला व्यंग्य आलेख 'इस्मत बेग' के छद्म नाम से रिसाले 'इफ़ादा' में छपा। उस आलेख का शीर्षक 'हम और हमारा इम्तिहान' था। 27 अप्रैल सन् 1947 को उनकी मृत्यु हो गई। 1993 में गुलावठी (बुलंदशहर) में जन्मे ज़ुबैर सैफ़ी नई पीढ़ी के कवि और गंभीर अध्येता हैं। उनकी कविताएँ सदानीरा, हिंदवी और अन्य पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। वर्तमान में वे रेख़्ता फ़ाउंडेशन के उपक्रम सूफ़ीनामा से सम्बद्ध हैं।
Read moreAbout the Book
फूल वालों की सैर दिल्ली वालों के बीच हमेशा से लोकप्रिय रही है। अकबर शाह सानी के ज़माने में शुरू हुई ये सैर सांस्कृतिक एकता का परिचायक है। इस किताब में बहादुरशाह ज़फ़र के ज़माने की फूल वालों की सैर का नक़्शा खींचा गया है। इस के लेखक मिर्ज़ा फ़रहतउल्लाह बेग हैं, मूल रूप से उर्दू की इस किताब का हिंदी लिप्यंतरण ज़ुबैर सैफ़ी ने किया है। मिर्ज़ा फ़रहतउल्लाह बेग उर्दू के जाने-माने व्यंग्यकार थे। उनक जन्म सन् 1883 में दिल्ली में हुआ था। उनके पिता का नाम हशमत बेग था। उन्होंने शुरुआती शिक्षा-दीक्षा गर्वनमेंट हाई स्कूल दिल्ली में हासिल की। बी. ए. की डिग्री हासिल करने के बाद वे हैदराबाद में नौकरी करने लगे। वहाँ पर वे न्यायपालिका में अलग-अलग पदों पर रहे। अंत में होम सेक्रेटरी होकर सेवानिवृत्त हुए और पेंशन पाई। हैदराबाद के साहित्यिक माहौल ने मिर्ज़ा की साहित्यिक दृष्टि को ख़ूब निखारा और वो उच्च स्तर के व्यंग्यकार बने। फ़रहतउल्लाह बेग का सबसे पहला व्यंग्य आलेख 'इस्मत बेग' के छद्म नाम से रिसाले 'इफ़ादा' में छपा। उस आलेख का शीर्षक 'हम और हमारा इम्तिहान' था। 27 अप्रैल सन् 1947 को उनकी मृत्यु हो गई। 1993 में गुलावठी (बुलंदशहर) में जन्मे ज़ुबैर सैफ़ी नई पीढ़ी के कवि और गंभीर अध्येता हैं। उनकी कविताएँ सदानीरा, हिंदवी और अन्य पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। वर्तमान में वे रेख़्ता फ़ाउंडेशन के उपक्रम सूफ़ीनामा से सम्बद्ध हैं।
Book Details
-
ISBN9789394494961
-
Pages71
-
Avg Reading Time2 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Bhoogol Ke Darwaje Par
- Author Name:
Tarun Bhatnagar
- Book Type:

- Description:
तरुण भटनागर हिन्दी के उन थोड़े से रचनाकारों में से हैं जिन्होंने पूर्वग्रहों को तोड़ने तथा नए क्षेत्रों में क़दम रखने का साहस किया, साथ ही अनूठी भाषा से और कहानी में प्रयोग के स्तर पर अपनी सशक्त पहचान बनाई। हिन्दी के समकालीन रचना-संसार में तरुण भटनागर की कहानियों की प्रभावी उपस्थिति की एक माकूल वजह यही है। इन कहानियों में एक तरह का वैविध्यपूर्ण रचना-संसार है जो थोड़ा अलग है और चौंकाता है। नए आस्वाद से भरी-पूरी ये कहानियाँ न सिर्फ़ रोचक हैं, बल्कि पाठक पर अपना सशक्त प्रभाव छोड़ती हैं। विदेशी और अछूती भूमि पर घटती कथाओं से लेकर लोक और मिथकों के गिर्द बुनी गई रचनाओं तक एक विस्तृत फलक इन कहानियों में दीखता है। यह संग्रह भी, जिसमें लेखक की आठ कहानियाँ हैं, इसी तरह से अपनी मुकम्मल जगह बना रहा लगता है। पर इसकी कई आन्तरिक परतें हैं। कुछ ऐसे प्रयोग भी लेखक ने इन कहानियों में किए हैं, जिनसे इनकी एक सुस्पष्ट पहचान बनती है।
ये कहानियाँ कई-कई बार उन जगहों पर पहुँचती हैं, दस्तक देती हैं जो हिन्दी कहानी लेखन में लगभग वर्जित रहे हैं। निश्चय ही यह सायास नहीं है। यह स्पष्टत: असहमति और प्रतिरोध का स्वर ही है जो अन्तत: मनुष्यता के पक्ष में है। ‘पतलून में जेब’, ‘द रॉयल घोस्ट’, ‘भूगोल के दरवाज़े पर’ तथा ‘चाँद चाहता था कि धरती रुक जाए’ इसी तरह की कहानियाँ हैं। इन कहानियों का हिन्दी साहित्य जगत में चर्चित होना भी इसी तरह से यानी लगभग वर्जित से क्षेत्र में सृजनात्मक दख़ल की प्रतिक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए। असहमति और प्रतिक्रिया का जो स्वरूप इन रचनाओं में है, वह एकदम से लाउड न होकर बेहद संवेदनात्मक है। यह बात ख़ासकर जंगलों पर लिखी गई कहानियों के साथ-साथ ‘सब्जेक्ट फ़्लैट नम्बर थर्टी वन’, ‘लॉर्ड इर्विन ने इग्नोर किया’ तथा ‘द रॉयल घोस्ट’ में दीखती है जहाँ अपने फ़ार्म और कंटेंट दोनों स्तरों पर ज़बरदस्त क़िस्म के प्रयोग किए गए हैं। इन प्रयोगों में इतिहास तथा समय के अतिक्रमण हैं तथा दो-तीन कथानकों को उनके धुर विरोधाभासी होने के बावजूद लम्बे क़िस्से में गूँथने की प्रभावकारी युक्ति भी। बावजूद इसके कहानियों की तरलता पर इसका प्रभाव नहीं है। ‘दादी, मुल्तान और टच एंड गो’ एक ऐसे विषय पर आख्यान के रूप में लिखी गई है जिस पर इधर कहानियाँ देखने को नहीं मिलीं।
इन कहानियों में कई तरह के मैटाफ़र हैं, कहने का अनोखापन है और एक भिन्न भाषा विन्यास है जो इकहरा न होकर कई-कई बार बदलता है। संवाद, वृत्तान्त, पात्र और घटनाओं की बेहद कल्पनात्मक और रोचक जुगलबन्दी से लबरेज ये कहानियाँ बेहद रोचक और पठनीय हैं। अपने कहन और असहमति के स्तर पर प्रगतिशील संवेदनात्मक चेतना की ये कहानियाँ जीवन और आम आदमी के संकटों का दस्तावेज़ हैं। काव्यात्मकता से युक्त अत्यन्त सुन्दर भाषा में लिखी गईं ये कहानियाँ हमारे समय के कई अनछुए पहलुओं को सामने लाती हैं। सुख, दु:ख, प्रेम, यातना, संकट, करुणा, त्रासदी, अकेलेपन और हास्य के जिन विविध रंगों को इसके पात्र जी रहे हैं, वे आधुनिक इनसान के अनुभवों और समय का जीवन्त चित्रण करते हैं। ये कहानियाँ अपने कथ्य की सार्थकता, वैविध्य, असहमतियाँ, सरल और प्रवाहपूर्ण भाषा तथा विस्तृत फलक पर मानवीय संवेदनाओं की पड़ताल की कहानियाँ हैं जो नि:सन्देह रोचक हैं और पाठक के अन्तर्मन में इन तमाम वजहों से गूँजती हैं। यह संग्रह निश्चय ही न सिर्फ़ पाठकों को पसन्द आएगा बल्कि अपनी एक प्रभावकारी उपस्थिति भी दर्ज करेगा।
Ghatshraadh
- Author Name:
U.R. Ananthamurthy
- Book Type:

- Description:
प्रसिद्ध उपन्यासकार यू.आर. अनन्तमूर्ति की ये कहानियाँ अपनी प्रयोगधर्मिता, बौद्धिक संयम, अनूठी कथा-शैली और बेबाक आधुनिक दृष्टि के कारण कन्नड़ कथा-साहित्य में विशेष स्थान बना चुकी हैं। ‘घटश्राद्ध’ कहानी पर कन्नड़ में फ़िल्म भी बन चुकी है, जो काफ़ी चर्चित और पुरस्कृत हुई। इन कहानियों में प्रचलित रूढ़ियों के अनूठे चित्र और दिलचस्प चरित्र हैं जो आधुनिकता की मार खा-खाकर चरमरा रहे हैं, टूट रहे हैं, बिखर रहे हैं। उनके इस विघटन में निहित अनिवार्य त्रासदी मन को आलोड़ित करती है। कुछ प्रयोगधर्मी कहानियों में अनूठी फैंटेसियों का आकलन हुआ है, जो किसी गहरे आन्तरिक यथार्थ की प्रतीति कराती हैं। नारी के शोषण के अनेक चित्र इन कहानियों में देखने को मिलते हैं। कंठ के भीतर घुटते उच्छ् वासों को रचनाकार ने अपनी विशेष सजीव और सहज शैली में उभारा है। भारतीय भाषाओं को ‘संस्कार’ जैसा आधुनिक क्लासिक उपन्यास देनेवाले रचनाकार का यह संकलन पढ़ना एक अनूठा अनुभव है।
Pratinidhi Kahaniyan : Gyanranjan
- Author Name:
Gyanranjan
- Book Type:

- Description:
साठोत्तरी प्रगतिशील कथा-साहित्य में ज्ञानरंजन की कहानियों का महत्त्वपूर्ण स्थान है। इस संग्रह में उनकी प्रायः सभी बहुचर्चित कहानियाँ शामिल हैं जो समकालीन सामाजिक जीवन की अनेकानेक विरूपताओं का खुलासा करती हैं। इस उद्देश्य तक पहुँचने के लिए ज्ञानरंजन ने अक्सर पारिवारिक कथा-फ़लक का चुनाव किया है, क्योंकि परिवार ही सामाजिक सम्बन्धों की प्राथमिक इकाई है। इसके माध्यम से वे उन प्रभावों और विकृतियों को सामने लाते हैं, जो हमारे बूर्ज्वा संस्कारों की देन हैं। ये बूर्ज्वा संस्कार ही हैं कि प्रेम-जैसा मनोभाव भी हमारे समाज में या तो रहस्यमूलक बना हुआ है या भोगवाचक। ऐसी कहानियों में किशोर प्रेम-सम्बन्धों से लेकर उनकी प्रौढ़ परिणति तक के चित्र उकेरते हुए ज्ञानरंजन अपने समय की प्रायः समूची दशा पर टिप्पणी करते हैं। मनुष्य के स्वातंत्र्य पर थोपा गया नैतिक जड़वाद या उसे अराजक बना देनेवाला आधुनिकतावाद मानव-समाज के लिए दोनों ही घातक और प्रतिगामी मूल्य हैं। वस्तुतः आर्थिक विडम्बनाओं से घिरा मध्यवर्ग सामान्य जन से न जुड़कर जिन बुराइयों और भटकावों का शिकार है, ये कहानियाँ उसके विविध पहलुओं का अविस्मरणीय साक्ष्य पेश करती हैं।
Sampoorana Kahaniyan : Mannu Bhandari
- Author Name:
Mannu Bhandari
- Book Type:

- Description:
कई बार ख़याल आता है कि यदि मेरी पहली कहानी बिना छपे ही लौट आती तो क्या लिखने का यह सिलसिला जारी रहता या वहीं समाप्त हो जाता...क्योंकि पीछे मुड़कर देखती हूँ तो याद नहीं आता कि उस समय लिखने को लेकर बहुत जोश, बेचैनी या बेताबी जैसा कुछ था। जोश का सिलसिला तो शुरू हुआ था कहानी के छपने, भैरव जी के प्रोत्साहन और पाठकों की प्रतिक्रिया से।
अपने भीतरी ‘मैं’ के अनेक-अनेक बाहरी ‘मैं’ के साथ जुड़ते चले जाने की चाहना में मुझे कुछ हद तक इस प्रश्न का उत्तर भी मिला कि मैं क्यों लिखती हूँ? जब से लिखना आरम्भ किया, तब से न जाने कितनी बार इस प्रश्न का सामना हुआ, पर कभी भी कोई सन्तोषजनक उत्तर मैं अपने को नहीं दे पाई तो दूसरों को क्या देती? इस सारी प्रक्रिया ने मुझे उत्तर के जिस सिरे पर ला खड़ा किया, वही एकमात्र या अन्तिम है, ऐसा दावा तो मैं आज भी नहीं कर सकती, लेकिन यह भी एक महत्त्वपूर्ण पहलू तो है ही। किसी भी रचना के छपते ही इस इच्छा का जगना कि अधिक से अधिक लोग इसे पढ़ें, केवल पढ़ें ही नहीं, बल्कि इससे जुड़ें भी—संवेदना के स्तर पर उसके भागीदार भी बनें यानी कि एक की कथा-व्यथा अनेक की बन सके, बने...केवल मेरे ही क्यों, अधिकांश लेखकों के लिखने के मूल में एक और अनेक के बीच सेतु बनने की यह कामना ही निहित नहीं रहती?
मैंने चाहे कहानियाँ लिखी हों या उपन्यास या नाटक—भाषा के मामले में शुरू से ही मेरा नज़रिया एक जैसा रहा है। शुरू से ही मैं पारदर्शिता को कथा-भाषा की अनिवार्यता मानती आई हूँ। भाषा ऐसी हो कि पाठक को सीधे कथा के साथ जोड़ दे...बीच में अवरोध या व्यवधान बनकर न खड़ी हो। कुछ लोगों की धारणा है कि ऐसी सहज-सरल, बकौल उनके सपाट भाषा, गहन संवेदना, गूढ़ अर्थ और भावना के महीन से महीन रेशों को उजागर करने में अक्षम होती है। पर क्या जैनेन्द्र जी की भाषा-शैली इस धारणा को ध्वस्त नहीं कर देती? हाँ, इतना ज़रूर कहूँगी कि सरल भाषा लिखना ही सबसे कठिन काम होता है। इस कठिन काम को मैं पूरी तरह साध पाई, ऐसा दावा करने का दुस्साहस तो मैं कर ही नहीं सकती, पर इतना ज़रूर कहूँगी कि प्रयत्न मेरा हमेशा इसी दिशा में रहा है।
—भूमिका से
Pratinidhi kahaniyan : Marathi
- Author Name:
Madhav Sontake
- Book Type:

- Description:
ग्रामीण, दलित तथा स्त्राी कहानियों के साथ-साथ साठोत्तरी कहानी साहित्य में व्यक्तिवादी चेतना की प्रयोगशील कहानियाँ भी लिखी जाती रही हैं। विलास, सारंग, श्याम मनोहर, एस.डी. इनामदार, दिलिप चित्रो, अनिरुद्ध बनहट्टी इस धारा के प्रमुख कथाकार रहे हैं। ये अतियथार्थवादी तथा अभिव्यंजनावादी विचारधारा की कहानियाँ हैं। कुल मिलाकर मराठी कहानी की जो अति मनोरंजकता से विकास-यात्राा शुरू हुई थी, वह विभिन्न मोड़ों से ग्रामीण, दलित तथा स्त्राी-जीवन के अन्तरंग तक पहुँच गई है। आज वैश्वीकरण-बाजारीकरण की नवपूँजीवादी-उपभोक्तावादी सभ्यता में वह अपनी ‘मनुष्यता’ की रक्षा के लिए भी सन्नद्ध हो रही है। —भूमिका से
Appigowdana Shankapushpa
- Author Name:
Anjana Hegde
- Book Type:

- Description:
DESCRIPTION AWAITED
Doosari Kahani
- Author Name:
Alka Saraogi
- Book Type:

- Description:
कलि-कथा: वाया बाइपास (1998) उपन्यास के लिए विशेष रूप से चर्चित तथा साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित युवा कथाकार अलका सरावगी की कहानियों का दूसरा संग्रह दूसरी कहानी समकालीन कहानी के प्रचलित ढर्रे से अलग जाकर कहानी के लिए एक नई संभावना का संकेत है। जिस तरह कहानी की तलाश में (1996) शीर्षक से प्रकाशित पहले कहानी-संग्रह में शामिल इसी नाम की कहानी कहानी को तलाश भी बनाती थी और इकहरे से अधिक गहरे गुमनाम प्रसंगों में जाने की हिकमतों का आभास कराती थी, उसी तरह दूसरी कहानी संग्रह की इसी नाम की कहानी कहानी को एक और तरह की कहानी बनाने की कोशिश है।
दूसरी कहानी संग्रह की कहानियाँ यथार्थ को तथ्य-सीमित करने की रूढ़ि को ध्वस्त करती हैं। घटनाओं का बोझिल आडंबर छोड़कर वे कहानी विधा की नई मुक्ति का ऐसा संकेत देती हैं कि हम कहानी को गद्य-कथा या कथा-निबंध की तरह पढ़ सकें। वे तथाकथित यथार्थवादी कहानी के ढाँचे को विचलित कर मानव- व्यवहार और प्रकृति के आधे-अधूरे प्रारूप या पाठ की तरह दिख सकती हैं। इसी अधूरेपन, इसी अनहोनी में अलका सरावगी की कहानियों का अर्थ छिपा है।
दूसरी कहानी संग्रह की कहानियाँ (‘पार्टनर’, ‘एक पेड़ की मौत’, ‘दूसरे किष्ले में औरत’, ‘यह रहगुज़र न होती’, ‘रिपन स्ट्रीटेर परवीन अख्तर’, ‘कनफ़ेशन’) संकेत हैं कि शायद जीवन-पूर्णता या सार्थकता की संभावना इसी अपूर्णता या अधूरेपन में है। देखने की चीज़ यह है कि इस कथा-कल्पना में क्रीड़ा-वृत्ति या विनोद-वृत्ति स्थगित नहीं है, पर वह प्रायः एक तरह के जीवन विषाद या अवसाद का ही मार्मिक प्रत्यक्ष है। इस अवसाद को महान बनाने की भावुकता से मुक्त अलका सरावगी का कथा-मार्ग साधारण या मामूली पर भरोसा टिकाता है जो फिर इस ओर इशारा है कि साधारण में ही छिपा है ग़ैर-साधारण या असाधारण का मर्म।
–परमानंद श्रीवास्तव
Whispers of Wisdom
- Author Name:
Radhika Nagrath
- Book Type:

- Description:
It is modern wisdom for modern problems, packed into this book. If one has clarity of concept, the age-old truths and scientific principles apply to modern-age problems in a fitting manner. Each chapter is drawn from a different domain of life. There are tips for becoming a successful manager, leading a happy married life, health benefits of fasting, the role of the mind in curing diseases and the like. Besides, the challenges facing all-inclusive Hindu Dharma, the needs of a healthy society, and the power of the feminine divine make it a universal handbook. It explains why faith is not merely a material emotion or an illogical argument, but has a reason and a revelation attached to it. This book asks us to wake up for the sake of our own happiness. So, come and know yourself, thus recreating happiness for yourself. Goodness is all-inclusive, and it needs to be spread. Why does a worker bee work tirelessly with no individual benefit of its own? Its behaviour is for the greater being of the whole colony, similar to the behaviour of wasps and other such social insects. They inspire the bigger social animal, man, to keep spreading goodness. And this ‘WOW’ (Whispers of Wisdom) goads us to do good, be good and speak good. Scattered here and there are power-packed energy whispers with the power to blast dormant minds and uplift the depressed spirits Forgive, forget and move on. Many such mantras help us move forward in life and break our karmic cycle—liberating us from the knots, making us free. Contents A Word to The fellow seekers... —7 1. Making or Marring our Image——15 2. Life of Values and Virtues——35 3. Stirring a Spoonful of Happiness in Your Life—52 4. Mother Mine — Mother Divine——68 5. Love is the Only Way—86 6. Needs of a Healthy Society——98 7. Education for Enablement and Liberation——115 8. Life of Fulfilment——132 9. Path to Reality——145 10. Steps to the Ultimate Journey of Death——159
Shoonya
- Author Name:
Chitra Mudgal
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Mansarovar Vol. 8 : Uddhar Aur Anya Kahaniyan
- Author Name:
Premchand
- Book Type:

- Description:
प्रेमचन्द मनुष्य और मानवीय स्थितियों में दिलचस्पी रखते थे।... प्रेमचन्द के लिए मनुष्य की स्थिति ही समाज की स्थिति थी। उनकी कहानियों में मनुष्य को स्वयं में सम्पूर्ण इकाई के रूप में शायद ही कहीं प्रस्तुत किया गया हो। मनुष्य के अन्तर्मन की उथल-पुथल और दुविधाएँ हमेशा समाज और
आस-पास के माहौल से जुड़ी
होती हैं। यहाँ तक कि पारिवारिक सम्बन्धों को भी सामाजिक तर्कों से प्रभावित होता दिखाया गया है। उनका गहरा सामाजिक निरीक्षण उनकी कहानियों में झलकता है जिनमें उन्होंने हर 'प्रकार' के इनसानों को और लगभग हर व्यवसाय को शामिल किया है।
—विश्वनाथ एस. नरवणे
Dogri Kathavan
- Author Name:
Shyam Jangid
- Book Type:

- Description:
भारतीय भासावां मांय डोगरी कहाणियां आपरी अळगी मठोठ राखै। डीगा डूंगर, चीड़-देवदार रा जंगल अर लोक-संस्क्रति डोगरी कहाणियां में गमकै। केंद्रीय साहित्य अकादेमी कांनी सू प्रकासित राजस्थानी में उल्थासुदा औ डोगरी कथावां रौ संकलण निश्चै ई एक महताऊ ग्रंथ है। क्यूंकै इण पोथी में डोगरी रा सबळ अर नांमी रचनाकारां री कहाणियां भेली है।
Prapti
- Author Name:
Paramita Satpathy +1
- Book Type:

- Description:
Hindi translation of award winning Odia short story collection Prapti of Paramita Satpathy by Rajendra prasad Mishra.
Boski Ka Panchtantra
- Author Name:
Gulzar
- Book Type:

- Description:
‘बोसकी का पंचतंत्र’ की पाँच किताबों में, नीति के पाँच हिसाबों में जो पंचतंत्र आरम्भ हुआ, उसे बच्चों के प्यारे फ़िल्मकार-शायर गुलज़ार ने बोसकी को सुनाया। दुनिया-भर के बच्चों के लिए सुनाया। ‘बोसकी का पंचतंत्र’ उसी की एक कड़ी है। इसकी पठनीयता भी पूर्व की तरह आकर्षित करती है। इसमें क़िस्सागोई की भारतीय परम्परा का ख़ास आकर्षण है। किताब के चित्र और रेखांकन बच्चों के लिए और अधिक रोचकता पैदा करते हैं।
Kailash Gautam Samagra : Vols. 1-3
- Author Name:
Kailash Gautam
- Book Type:

- Description:
‘कैलाश गौतम समग्र’ (तीन खंड) वस्तुतः समय के सच को रेखांकित करते हुए, चुनौतियों में जूझते हुए आम जनमानस की ही आवाज़ है। यह सहज साहित्यिक मौलिक अभिव्यक्ति का बोलता-बतियाता दस्तावेज़ है। सुव्यवस्थित दुर्व्यवस्था की विद्रूपताओं-विसंगतियों पर चोट के साथ-साथ, राग-अनुराग मिलन-मनुहार विछोह भी है। बदलते हुए गाँव और शहरीकरण का टूटता तिलस्म भी। ‘गंगा’, ‘झुनिया’, ‘अमावस्या का मेला’, ‘कचहरी’, ‘भाभी की चिट्ठी’, ‘कुर्सी’, ‘अन्हरे से लड़ाई’, ‘पप्पू की दुलहिन’, ‘रामलाल का फगुआ’, ‘धुरन्धर’, ‘मीराबाई’ जैसी अनेकानेक कालजयी रचनाएँ भी जो आम आदमी से लेकर शीर्षस्थ आलोचकों व समीक्षकों के भी ज़ुबान पर हैं। वे सारे पात्र और देसज मुहावरे सब सजीव हो उठते हैं, ऐसा लगता है। इसमें लोकबोली की मिठास के साथ ही तीज-त्योहारों, हँसी-ख़ुशी और पनप रहा फीकापन भी है। महँगाई की मार है तो रिश्तों की मिठास-खटास भी। तीन खंडों में प्रस्तुत यह समग्र कैलाश गौतम के गद्य-पद्य का समूचा रचना-संसार है। सुविख्यात सम्पादकों व आलोचकों की भूमिकाओं के साथ मनकवि-जनकवि कैलाश गौतम की रचनात्मक अभिव्यक्ति का एक निष्पक्ष, सच्चा और सारगर्भित लेखा-जोखा है।
Chaudah Left-Chaudah Right
- Author Name:
Chandra Shekhar Varma
- Book Type:

- Description:
‘चौदह लेफ़्ट-चौदह राइट’ रोचकता के ताने-बाने में बुनी गई 21 कहानियों का संग्रह है। इसकी हर कहानी अनेक मोड़ों से गुज़रते हुए एक चौंका देने वाले अन्त तक पहुँचती है। कथासागर के कैनवस पर समाज के कुछ अनछुए पहलुओं का दिलचस्प चित्रण है यह संग्रह।
इस किताब में संग्रहीत कहानियों की विविधता एवं नवीनता अभूतपूर्व है। एक ही संग्रह में कॉलेज के रोमांस की भीनी ख़ुशबू ,भाग्य के खेल के उतार-चढ़ाव, ज़िन्दगी की रेस की हार-जीत, शक्की पत्नी के पति की व्यथा, प्राइवेट नौकरी की अनिश्चितता, पत्रों का आदान-प्रदान, सेवानिवृत्त शिक्षिका की आत्मनिर्भरता, लालच और लापरवाही के बीच ऊँचे ओहदों पर बैठे ईमानदार और भ्रष्ट अफ़सरों की जद्दोजहद, रेल दुर्घटना की विभीषिका के साथ-साथ और भी बहुत कुछ पढ़ने को मिलेगा। जीवन्त, सरल और सरस भाषा में कहानी का जामा पहने जीवन की ये विषमताएँ आपको गुदगुदाएँगी, झिंझोड़ेंगी और सम्भव है कि रुलाएँ भी।
Dogri Folk Tales
- Author Name:
Shivanath
- Book Type:

- Description:
The language of about five million Dogras, Dogri has a rich oral literature and folk tales form a substantial part of it. There are over seven hundred Dogri folk tales which have been collected and printed so far. This volume is the 1st attempt to bring out the English translation of some of these folk tales. The tales in this volume provide a peep into the 'backyard' of Dogra culture. Here gods and goddesses assume human forms and join human beings to drive home some important truth or moral lesson.
Ente Thalaykkale Konna
- Author Name:
S. Salimkumar +1
- Book Type:

- Description:
എൻ്റെ തലയ്ക്കലെ കൊന്ന: ലെൻ്റിനയുടെ ശവകുടീരത്തിനു മീതേ മൃദുവായ മഞ്ഞ പൂത്തുലഞ്ഞു നിൽക്കുന്ന കൊന്നമരം. ഇംചാനോക്ക് എന്ന ധീരനായ വേട്ടക്കാരൻ തൻ്റെ ഇരയുടെ ആത്മാവ് വേട്ടയാടുന്നതിനു പരിഹാരമായി സ്വന്തം മുടിയിഴകൾ പറിച്ച് അർപ്പിച്ചു മാപ്പുപറയുന്നു. പോകെൻമോങ് എന്ന പയ്യൻ അവനെ വിശ്വസിച്ച നാട്ടുകാർക്ക് ഒരു വിമാനത്താവളം വിൽക്കുന്നു. കൊല്ലപ്പെട്ട ഒരു തീവ്രവാദിയുടെ എഴുത്തും പാവപ്പെട്ട ഗ്രാമീണരുടെ ദാരിദ്ര്യത്തിന്റെ അവസ്ഥയും. ഒരു സ്ത്രീയുടെ സ്വകാര്യരഹസ്യം അവരുടെയും മകളു ടെയും ചെറുമകളുടെയും ജീവിതത്തെ മാറ്റിമറിക്കുന്നു. നിരക്ഷരയായ ഒരു ഗ്രാമീണവനിതയുടെ ചെറുചോദ്യത്തിൽ സ്തംഭിച്ചുപോയ മിലിട്ടറി ഓഫീസർ അവളുടെ ഭർത്താവിനെ മോചിപ്പിക്കുന്നു. മാതൃഭൂ മിക്കുവേണ്ടി പ്രാണത്യാഗം നടത്തിയ ഒരു ചെറുപ്പക്കാരൻ അയാളുടെ കാമുകിയുടെ ജീവിതത്തിൽ അവശേഷിപ്പിക്കുന്ന നിഗൂഢതകൾ. പിന്നെ ഒരു പച്ചപ്പുഴുവിനു ചിറകു മുളക്കുന്നതും... മനുഷ്യാവസ്ഥയെപ്പറ്റി ആഴത്തിലുള്ള അവബോധം പ്രകടമാക്കുന്ന കഥകളുടെ സമാഹാരമാണ് "എൻ്റെ തലയ്ക്കലെ കൊന്ന'.
Hanukiah Ari Hogada Deepa 1939-2015
- Author Name:
Vittal Shenoy
- Book Type:

- Description:
DESCRIPTION AWAITED
Urdu Ki Prasiddh Kahaniyan
- Author Name:
Rahul Jha
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Adhoore Afsaane
- Author Name:
Lavnya Deepak Shan
- Book Type:

- Description:
Books
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book