Thodi Si Jagah
Author:
Ashok VajpeyiPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Poetry0 Ratings
Price: ₹ 316
₹
395
Available
अशोक वाजपेयी हिन्दी के समकालीन कवियों में उन थोड़े-से लोगों में से हैं जिन्होंने अपने समय में प्रेम की सघनता, उत्कृष्टता और महिमा को लगातार अपनी कविता के केन्द्र में बनाए रखा है। एक ऐसे समय में जब रति और शृंगार के पारम्परिक सौन्दर्य-मूल्य कविता के दृश्य से ग़ायब ही हो गए हैं, अशोक वाजपेयी ने उन्हीं को अपनी कविता में सबसे अधिक जगह दी है। उनकी प्रेम कविता में जो ऐन्द्रिकता है, वह परम्परा को पुनराविष्कृत करती है और साथ ही उसे समकालीन आँच और लपक भी देती है। प्रेम की अनेक सूक्ष्मताएँ खड़ी बोली में इन कविताओं के माध्यम से पहली बार कविता के परिसर में प्रवेश करती हैं।</p>
<p>प्रेम में, अशोक वाजपेयी के कविता-संसार में भरा-पूरापन है, रसिकता और प्रयास है। उसमें जीवन से भागकर कहीं और नहीं, बल्कि इसी अच्छी-बुरी दुनिया में अपने लिए थोड़ी-सी जगह पाने की दुर्लभ ज़िद है।</p>
<p>कविता में प्रेम करना या कि प्रेम की कविता करना अशोक वाजपेयी की अदम्य जिजीविषा का ही प्रमाण है। यह स्पन्दन और ऊष्मा की पुस्तक है : प्रेम के स्पन्दन, जीवन और भाषा की ऊष्मा की पुस्तक।
ISBN: 9788171191703
Pages: 152
Avg Reading Time: 5 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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“वो अकेला रात पर भारी पड़ा कल भी ‘अली’
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भारी पड़ने और बेकार में रौशन रहने में जो नजाकत, एहसास और ज़बान का लुत्फ़ है, वो बहुत ख़ूबसूरत है। इस तरह आम तौर पर उनके यहाँ इज़हार-ओ-बयान में कोई तसन्ना नहीं है। वो बड़ी सादगी और बेतक़ल्लुफ़ी से अपने जज़्बात और महसूसात को नज़्म कर देते हैं :
“रुसवाई हर क़दम पे मेरे साथ साथ थी
आवाज़ दे के तुम को बुला भी नहीं सका।”
(प्राक्कथन से)
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