Maa Maati Manush
Author:
Mamta BanerjeePublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Poetry0 Ratings
Price: ₹ 396
₹
495
Available
ये ममता बनर्जी की कविताएँ हैं; ममता बनर्जी, जो पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री हैं, अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस की मुखिया और ‘फ़्रायर ब्रांड’ नेता, जिन्हें उनके दो टूक लहज़े और अक्सर ग़ुस्से के लिए भी जाना जाता है।</p>
<p>इन कविताओं को पढ़कर आश्चर्य नहीं होता। दरअसल सार्वजनिक जीवन में आपादमस्तक डूबे किसी मन के लिए बार-बार प्रकृति में सुकून के क्षण तलाश करना स्वाभाविक है। लेकिन ममता जी प्रकृति की छाँव में विश्राम नहीं करतीं, वे उससे संवाद करती हैं। प्रकृति के रहस्यों को सम्मान देती हैं, और मनुष्य मात्र से उस विराटता को धारण करने का आह्वान करती हैं जो प्रकृति के कण-कण में विद्यमान है।</p>
<p>उनकी एक कविता की पंक्ति है ‘अमानवीयता ही है सभ्यता की नई सज्जा’—यह उनकी राजनीतिक चिन्ता भी है, और निजी व्यथा भी। और लगता है, इसका समाधान वे प्रकृति में ही देखती हैं। सूर्य को सम्बोधित एक कविता में कहा गया है : ‘पृथ्वी को तुम्हीं सम्हाल रखोगे/मनुष्यता को रखो सर्वदा पहले/जाओ मत पथ भूल’।</p>
<p>वे प्रकृति में जैसे रच-बस जाती हैं। उनका संस्कृति-बोध गहन है और मानवीय संवेदना का आवेग प्रखर। ‘एक मुट्ठी माटी’ शीर्षक कविता में जैसे यह सब एक बिन्दु पर आकर जुड़ जाता है—‘एक मुट्ठी माटी दे न माँ रे/मेरा आँचल भरकर/मीठापन माटी का सोने से शुद्ध/देखेगा यह जग जुड़कर/थोड़ा-सा धन-धान देना माँ/लक्ष्मी को रखूँगी पकड़/नई फसल से नवान्न करूँगी/धान-डंठल सर पर रख।’</p>
<p>कहने की आवश्यकता नहीं कि इन कविताओं में हम एक सफल सार्वजनिक हस्ती के मन के एकान्त को, और मस्तिष्क की व्याकुलता को साफ़-साफ़ शब्दों में पढ़ सकते हैं।
ISBN: 9789387462731
Pages: 184
Avg Reading Time: 6 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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रघुवीर सहाय का यह बहुचर्चित कविता-संग्रह कवि के अपने व्यक्तित्व की खोज की एक बीहड़ यात्रा है। मनुष्य से नंगे बदन संस्पर्श करने के लिए ‘सीढ़ियों पर धूप में’ संग्रह में कवि ने अपने को लैस किया था : अब वही साक्षात्कार इस दौर की कविताओं में उसके लिए एक चुनौती बनकर आया है।
बनी-बनाई वास्तविकता और पिटी-पिटाई दृष्टि से रघुवीर सहाय का हमेशा विरोध रहा है। अपनी कविताओं में उन्होंने अनुभव और भाषा दोनों के वैविध्य से जूझते हुए जो पाया था, वह चौंकाने या रोआब डालनेवाला कुछ नहीं था : वह नए मानव-सम्बन्ध का परिचय था और यह एक रोचक घटना है कि वह बहुधा परम्परावादियों के यहाँ ‘सहज’ कहकर मान्य हुआ, जबकि वह सहज बिलकुल नहीं था।
अपने को किसी क़दर सम्पूर्ण व्यक्ति बनाने की लगातार कोशिश के साथ रघुवीर सहाय ने पिछले दौर से निकलकर ‘आत्महत्या के विरुद्ध’ में एक व्यापकतर संसार में प्रवेश किया है। इस संसार में भीड़ का जंगल है जिसमें कवि एक साथ अपने को खो देना और पा लेना चाहता है। वह नाचता नहीं, चीखता नहीं और सिर्फ़ बयान भी नहीं करता। वह इस जंगल में बुरी तरह फँसा हुआ है लेकिन उसमें से निकलना किन्हीं सामाजिक-राजनीतिक शर्तों पर उसे स्वीकार नहीं। नतीजा : ये कविताएँ।
भारतभूषण अग्रवाल के शब्दों में : ‘‘भीड़ से घिरा एक व्यक्ति—जो भीड़ बनने से इनकार करता है और उससे भाग जाने को ग़लत समझता है—रघुवीर सहाय का साहित्यिक व्यक्तित्व है।...
रघुवीर सहाय की अनेक रचनाएँ आधुनिक कविता की स्थायी विभूति बन चुकी हैं; उनके नागर मन की भावप्रवणता, सूक्ष्मदर्शिता और तटस्थ निर्ममता अब नए परिचय की मोहताज नहीं। पर अभी यह पहचाना जाना शेष है कि सहज सौन्दर्य और सूक्ष्म अनुभूति से निर्मित रघुवीर सहाय का काव्य-संसार जितना निजी है, उतना ही हम सबका है—एक गहरे और अराजनीतिक अर्थ में जनवादी। सचमुच, ऐसे ही कवि को जनता से घृणा करने का अधिकार दिया जा सकता है।’’
Mrityu : Kavitayein
- Author Name:
Arun Dev
- Book Type:

- Description: जीवन और मृत्यु सहोदर स्थितियाँ हैं। लेकिन खड़ी बोली हिन्दी में ऐसी कोई कविता पुस्तक नहीं जो केवल मृत्यु सम्बन्धी अनुभव और स्थितियों से निर्मित हो। इस अर्थ में अरुण देव के इस संग्रह का प्रकाशन एक विरल घटना है। सौ पदों में प्रशस्त यह पुस्तक मृत्यु के प्राय: सभी आयामों,पक्षों और मृत्युजनित भावों को पुंजीभूत करती है। इन कविताओं की सबसे बड़ी विशेषता है जीवन के साथ घनिष्ठता। मृत्यु की कविताएँ अन्ततः जीवन की कविताएँ होती हैं, जो जीवन था, जो है और जो होगा। कभी-कभी कविता इतनी कम जगह घेरती है मानो कोई अन्तिम साँस हो। कभी कबीर से लेकर कामू तक के प्रसंग एक बिम्ब को महाकाव्यात्मक विस्तार दे देते हैं। लेकिन कहीं भी न तो ईश्वर का स्मरण है, न किसी अन्य लोक या उत्तर-जीवन की अभिलाषा। जो है यहीं है। मृत्यु भी इसी जीवन, इसी संसार की परिघटना है, शाश्वत और सर्वग्रासी। लेकिन जीवन सबसे बड़ा है। अरुण कमल प्रख्यात कवि
Jo Nadi Hoti
- Author Name:
Pragya Rawat
- Book Type:

-
Description:
प्रज्ञा रावत का हिन्दी कविता-संसार में प्रवेश एक विरल घटना है। घर-परिवार के तमाम कार्यभार के बीच अपने निजी एकान्त में निरन्तर सृजनशील प्रज्ञा ने कभी अपने को प्रक्षेपित नहीं किया, बल्कि श्लाघनीय निस्पृहता के साथ अपना रचना-कर्म जारी रखा। निजी अनुभवों के ताप से सिद्ध ऐसी प्रखर कविताएँ पहले कभी लिखी नहीं गईं। इनके सर्वथा नए एवं विलक्षण जीवन-प्रसंग भाषा को नई गृहस्थी प्रदान करते हैं, जहाँ कविता नया कलेवर, नया परिपाक एवं आभरण ग्रहण करती है।
प्रज्ञा रावत की कविताएँ अपने अनूठे सम्भार एवं रूप-विधान के लिए अलग से सराही जाएँगी। दुर्लभ बिम्बों एवं अनगिनत लयों का सम्पुंजन इन्हें एक पृथक् व्यक्तित्व प्रदान करता है। प्रज्ञा की कविताएँ अपने सौष्ठव एवं संरचनागत दृढ़ता के लिए सहृदय समालोचकों द्वारा पहले भी समादृत हो चुकी हैं। यह निःसंकोच कहा जा सकता है कि प्रज्ञा रावत सभी स्त्री रचनाकारों से भिन्न नितान्त नवीन एवं स्वतंत्र स्वत्व से समृद्ध कवयित्री हैं। यहाँ न तो स्त्री-विमर्श का कोई अतिरंजित स्वर है, न ही कोई अन्य ग्रन्थि। जो है, जीवन का सहज स्वीकार और अभिव्यक्ति है, बहुत कुछ सुभद्राकुमारी चौहान की तरह। इसलिए प्रज्ञा रावत का यह संग्रह एक नए रचना उन्मेष के तौर पर स्वीकार किया जाएगा।
—अरुण कमल
Sirhane ke pal
- Author Name:
Sulabha Kore
- Book Type:

- Description: मराठी भाषी हिंदी कवयित्री सुलभा कोरे का ताज़ा काव्य-संग्रह 'सिरहाने के पल' प्रकृति और जीवन, जीवन और देश, देश और सरोकार के अंतरसंबंधों की सचेत टोह लेती कविताओं का विलक्षण संकलन है। सुलभा कोरे कविता इसलिए लिखती हैं ताकि 'धरती साँस ले सके', पेड़ सपने देख सकें और चिडिय़ा दाना चुग सके। सदियों से जिनके मुँह पर पाबंदियाँ लगी हुई हैं, उन पाबंदियों को चुनौती देती सुलभा की कविताएँ उन्हें बोलने का आह्वान करती हैं। आह्वान करती हैं ताकि वह अपना आसमां $खुद तोल सकें। 'सिरहाने के पल' की कविताएँ इस्तकबाल करती हैं 'अंतिम छोर पर खड़ी औरतों' का, उनकी उड़ान का, उनकी जिम्मेदारियों का और 'गहरी खाई में उतरने' के उनके अदम्य साहस का। 'सिरहाने के पल' की कविताएँ सारे जलते-सुलगते सवालों से बहसतलब होती हैं। भूले-बिसरे यादों को ताज़ा करने का काव्य-आग्रह आपको कविता के पास ले जाएगा। 'अतीत के बवंडर में गुम हो गए पलों' की शिनाख्त करती सुलभा कोरे की कविता राजनीतिक छल-छद्म से भी दो-दो हाथ करती है। कविता अपने पाठकों से सावधान रहने की गुजारिश करती हुई याद दिलाती है कि इस देश में 'सब कुछ बेचा जाएगा', देशभक्ति भी बेची जाएगी और देशद्रोह भी, इमानदारी भी और बेईमानी भी। छोटी-छोटी किंतु निहायत ज़रूरी बातों, विचारों, घटनाओं और मुद्दों का काव्य रूपांतरण कविता को गरिमामयी बनाता है। —कमलानंद झा
Thodi Yaaden, Thodi Baaten, Thoda Dar
- Author Name:
Shailendra Sharan
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- Description: Book
Navin
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Gopal Singh 'Nepali'
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- Description: हिन्दी कविता को जनमानस तक पहुँचाने में गोपाल सिंह नेपाली का अद्वितीय योगदान है। -हरिवंशराय बच्चन ‘हम राजनीति में नौजवान और साहित्य में बूढ़े एक साथ नहीं बने रह सकते’—इस कविता-संग्रह ‘नवीन’ की भूमिका में गोपाल सिंह नेपाली यह उल्लेखनीय वक्तव्य देते हैं और एक तरह से साहित्य और साहित्यिकों के लिए भी एक कार्यभार तय कर देते हैं। इस संग्रह का समय 1940 का दशक है जब देश आजादी पाने से कुछ ही दूर था और राजनीति के साथ-साथ स्वतंत्रता आंदोलन भी एक नई करवट ले रहा था। अब जरूरत थी साहित्य के एक नया रूप लेने की। ‘नवीन’ की कविताओं में उन्होंने यही करने का प्रयास किया है। न सिर्फ कथ्य, बल्कि शिल्प, छन्द और भाषा के स्तर पर भी। संग्रह की पहली ही कविता ‘नवीन’ में वे पुराने तथा रूढ़िबद्ध को छिन्न-भिन्न करते हुए नवीन कल्पना का आह्वान करते हैं : तुम प्रार्थना किये चले, नहीं दिशा हिली/तुम साधना किये चले, नहीं निशा हिली/इस आर्त दीन देश की न दुर्दशा हिली। अब अश्रु-दान छोड़ आज शीश-दान से/तुम अर्चना करो, अमोघ अर्चना करो।... नवीन कल्पना करो। प्रकृति की महिमा के साथ-साथ इस संग्रह में राष्ट्र और जन-चेतना से सम्पन्न कविताएँ भी विशेष रूप से ध्यान खींचती हैं। ‘फुटपाथ पर खड़े दर्शकों से’ और ‘नौजवान की मृत्यु पर’ जैसी कविताएँ अपनी चुस्त गठन और स्पष्ट भावाभिव्यक्ति में जैसे आज भी पूरे समाज को झकझोर देने की क्षमता रखती हैं।
Suraj Ko Angootha
- Author Name:
Jitendra Srivastava
- Book Type:

- Description: सूरज को अँगूठा दिखाते हुए ठहाके लगाने का साहस करती जितेन्द्र श्रीवास्तव की कविताओं का प्राणतत्त्व राजनीति और समाजनीति—दोनों के समान योग से निर्मित है। यही कारण है कि जितेन्द्र की कविताएँ इकहरी नहीं, बहुस्तरीय हैं। मनुष्य और मनुष्यता की चिन्ता करने के क्रम में यह कवि सत्ताकांक्षी राजनीति और वर्चस्ववादी सामाजिक संरचना की गहरी पड़ताल करता है। यह अकारण नहीं है कि वह बात करता है सपनों की, इच्छाओं की और चुप्पी के समाजशास्त्र की। पिछले तीन दशकों से हिन्दी कविता में निरन्तर सक्रिय, स्वीकृत और सम्मानित जितेन्द्र श्रीवास्तव गृहस्थ जीवन के सिद्ध और अद्वितीय कवि हैं। उनकी कविता से ही एक शब्द लेकर कहें तो पारिवारिक विन्यास के रास्ते जीवन की विविधता को प्रकट करने का कौशल उनकी कविताओं का जीवद्रव्य है। जितेन्द्र श्रीवास्तव की भाषा में अपूर्व और दुर्लभ आत्मीयता है। चिन्तन करते हुए, समस्याओं पर विचार करते हुए, दुःख बतियाते हुए, पत्नी से कुछ कहते हुए, छोटे भाई की शादी में माँ की चर्चा करते हुए, पिता को याद करते हुए, पुराने मित्र से मिलते हुए, बहुत दिनों के बाद अपनी पुश्तैनी खेती-बारी को निहारते हुए, आत्मबल को बटोरते हुए—आप कविताओं में विन्यस्त इन सभी रंगों से गुज़रते हुए पाएँगे कि जितेन्द्र की काव्य-भाषा में 'आत्मीयता' आश्चर्यजनक रूप से बनी रहती है। न कोई दिखावे की तल्खी, न नफ़रत का अतिरिक्त प्रदर्शन—फिर भी पक्षधरता में कोई विचलन नहीं। यह रक्त और विवेक में समाई हुई पक्षधरता है जिसे व्यक्त करने के लिए कवि को अलग से कोई उद्यम नहीं करना पड़ता। उम्मीद है उनका यह नया संग्रह हिन्दी कविता के पाठकों को एक नया आस्वाद देगा।
Soorsagar Satik : Vols. 1-2
- Author Name:
Hardev Bahari
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Description:
सूरसागर का प्रस्तुत संस्करण दो भागों में प्रकाशित हो रहा है। प्रत्येक भाग में 1000 से कुछ अधिक पद होंगे। पदों की व्याख्या करना इसका उद्देश्य नहीं है। यह सम्भव है कि किन्हीं अंशों के एक से अधिक अर्थ निकलते हों, किन्तु स्थानाभाव के कारण अनेक अर्थ दे पाना सम्भव नहीं था। पदों में जो कठिन शब्द आए हैं, उन्हें अंग्रेज़ी अंक देकर संकेतित कर दिया गया है। इससे पाठकों को स्वतंत्र रूप से अर्थ चिन्तन की सुविधा रहेगी।
भूमिका में ‘सूरसागर’ के संकलनों और संस्करणों पर विचार करने के पश्चात् ‘सूरसागर’ के दर्शन, भक्तिपक्ष, भावप्रसार, अभिव्यंजना-कौशल, पद-शैली, भाषा आदि विषयों का विवेचन किया गया है जिससे ‘सूरसागर’ की आत्मा को समझने में सहायता मिलेगी। इस प्रकार ‘सूरसागर’ के प्रस्तुत संस्करण को यथासम्भव पूर्ण और उपयोगी बनाने की चेष्टा की गई है।
Prapanch Padi
- Author Name:
C. Narayan Reddy
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- Description: ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ और ‘साहित्य अकादेमी पुरस्कार’ से सम्मानित डॉ. सी. नारायण रेड्डी तेलुगू के प्रसिद्ध लेखक हैं। यों कहें तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि तेलुगू साहित्य की प्रत्येक विधा को डॉ. रेड्डी ने अपने अमृत-स्पर्श से जीवन्त बना दिया। साहित्य स्रष्टा होने के साथ-साथ वे कुशल प्रशासक भी थे। अपने दैनिक जीवन में अपनी हास्यप्रियता और वाक्चातुर्य के कारण वे अपने परिवेश को सदा जीवन्त बनाए रखते थे। ‘मंथन’, ‘भूमिका’, ‘विश्वम्भरा’ आदि काव्यों में मानव के विकास के इतिहास को सुगम रूप से प्रस्तुत करने के बाद उन्होंने अनेक छोटी-मोटी कविताएँ लिखते हुए भी एक विनूतन शैली में 108 प्रपंच-पदियों की रचना की। ये प्रपंच-पदी उर्दू की रुबाई शैली में लिखे गए हैं। रुबाई में चार चरण होते हैं, जिनमें पहले, दूसरे और चौथे में तुक मिलाया जाता है। रेड्डी जी ने रुबाई में एक और चरण जोड़कर उसे पंच-पदी (पाँच चरणोंवाला) बनाया और संसार की रीति-नीतियों के चित्रण के कारण इन्हें ‘प्रपंच-पदी’ कहा है। प्रपंच-पदियों की रचना में डॉ. रेड्डी ने तेलुगू भाषा में प्रचलित चतुरश्र और मिश्र गतियों का प्रयोग किया है। इनके प्रयोग से काव्य-रचना प्रभावशाली बन गई है। प्रपंच-पदियों की फलश्रुति में डॉ. रेड्डी ने इन पदों के उद्देश्य को स्पष्ट किया है। ये टूटे जन-मन में उत्साह भरनेवाले, सुप्त नीतियों को प्रकाश में लानेवाले, निद्रित चरणों को जागृत करनेवाले और वर्तमान में परिवर्तन लाने के प्रयास के परिणाम हैं। जीवन में कड़वे और मीठे सत्यों को मथकर डॉ. रेड्डी ने इन 108 प्रपंच-पदियों की रचना की। तेलुगू में लब्धप्रतिष्ठ डॉ. नारायण रेड्डी हिन्दी और उर्दू में भी मौलिक रूप से ग़ज़लों की रचना करते रहे। उनकी इस विशिष्ट रचना-प्रक्रिया और ‘प्रपंच-पदियों’ का हिन्दी जगत् में काफ़ी चर्चा रही है।
Phases of the Moon
- Author Name:
Ismaeel Ahmad
- Rating:
- Book Type:

- Description: Intimate. Raw. Emotional. The moon doesn’t get tired of making people feel full even when she’s empty, does she? This book is a collection of poetry that has been built by tears, laughter, friends, family, the obscure niceties and fallacies of this world. Just like the moon, we seldom struggle with being full, and other times with being empty, and sometimes a conflict in between. But, we are whole, nevertheless. Being trapped in a cycle is not always an endless routine, but new beginnings, pure intentions, untethered release too. This book will carry you into themes of heartbreak, rebirth, sadness, happiness, friendship, loneliness and more. Hold my hand, and let’s walk through hurting, healing, and loving.
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