Raat Samundar Mein
Author:
Amjad Islam AmjadPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Poetry0 Ratings
Price: ₹ 200
₹
250
Available
कहाँ आ के रुकने थे रास्ते! कहाँ मोड़ था! उसे भूल जा
वो जो मिल गया उसे याद रख, जो नहीं मिला, उसे भूल जा
वो तिरे नसीब की बारिशें किसी और छत पे बरस गईं
दिल-ए-बेख़बर मिरी बात सुन, उसे भूल जा, उसे भूल जा
मैं तो गुम था तेरे ही ध्यान में, तिरी आस तेरे गुमान मे
सबा कह गई मिरे कान में, मिरे साथ आ, उसे भूल जा
किसी आँख में नहीं अश्क-ए-ग़म तिरे बाद कुछ भी नहीं है कम
तुझे ज़िन्दगी ने भुला दिया, तू भी मुस्कुरा, उसे भूल जा
ISBN: 9789347265358
Pages: 160
Avg Reading Time: 5 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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Description:
हिन्दी गीत-काव्य की एक प्रशस्त परम्परा है। छन्दमुक्त कविता के तमाम आन्दोलनों एवं आग्रहों के बावजूद गीत नए-नए सन्दर्भों में प्रस्फुटित हो रहे हैं। सुप्रसिद्ध कवयित्री माया गोविन्द का प्रस्तुत गीत-संग्रह ‘माया राग’ हिन्दी गीतों की संवेदना को संवर्धित करता है। संग्रह में भावनाओं की प्रचुरता है। कहा जा सकता है कि बौद्धिकता पर हार्दिकता का काव्यात्मक प्रकाश फैला हुआ है।
माया गोविन्द हिन्दी काव्य मंचों की श्रीवृद्धि करती रही हैं। उन्होंने हिन्दी सिनेमा में अपने स्तरीय गीतों से गीतात्मकता की गुणवृद्धि की है। यही कारण है कि उनके गीतों में लय की अद्भुत छटाएँ मिलती हैं। ऐसा लगता है कि गीत गाए जाने के बाद लिखे गए हैं। इनमें जीवन की विभिन्न स्थितियाँ हैं। फिर भी, यह कहना अधिक उचित होगा कि माया गोविन्द ने एक स्त्री की दृष्टि से इस सृष्टि को देखा है। इसीलिए ये गीत स्त्री की पीड़ा को सशक्त ढंग से अभिव्यक्त करते हैं। आसक्ति और अनासक्ति के बीच व्याकुल मन की थाह माया गोविन्द ने भली-भाँति लगाई है। सावन और होली आदि के बहाने जीवन के उत्सव की विविध छटाएँ व्यंजित हुई हैं। कहीं-कहीं अद्भुत कथन उभरे हैं—‘प्यास की रुक्मिणी का करो तुम हरण’ या ‘अधरों पर अधर जैसे, इन्द्रधनुष की लकीर’।
भाषा, भाव और शैली की दृष्टि से ‘माया राग’ के गीत निश्चित रूप से पाठकों के हृदय को आन्दोलित करेंगे।
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