Prapanchpanchshati
Author:
Moolchandra PathakPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Poetry0 Ratings
Price: ₹ 200
₹
250
Available
प्रपंचपंचशती की परिकल्पना एवं रचना एक मुक्तक काव्य के रूप में की गई है। पाँच सौ पद्यों के विस्तार में रचित इस काव्य में प्रपंच रूप जगत् तथा उसके अंशभूत मानव समाज, विशेष रूप से भारतीय समाज की विविध सामयिक प्रवृत्तियों एवं सामान्य जनों के मनोभावों व विचारों का सार रूप में दिग्दर्शन व विवेचन किया गया है। काव्य में जिन विषयों का विचार किया गया है, वे हैं नीति, लोक, प्रकृति, नारी, राजनीति, शिक्षा, वाक्, धन, धर्म, जीवन व मृत्यु, काल आदि। मुक्तक काव्य होने के नाते इसके पद्यों में किसी भी विषय का सांगोपांग तथा शास्त्रीयता से पूर्ण विस्तृत विवेचन नहीं किया गया है। एक ही विषय को लेकर विभिन्न अवसरों पर रचित सभी पद्यों को एक ही विषयसूचक शीर्षक के अंतर्गत संकलित किया गया है। काव्य के नामकरण में प्रपंच शब्द का प्रयोग इसके शास्त्रीय अभिप्राय को लेकर नहीं, अपितु इसके लोक प्रचलित अर्थ को ही लेकर किया गया है। इसमें कहीं सामान्य रूप से वर्णनात्मक, कहीं व्याख्यात्मक तो कहीं व्यंग्यात्मक शैली का आश्रय लिया गया है। जिन विषयों व भावों को इसमें प्रकट किया गया है, वे लेखक की अपनी विचारणा, लोकदृष्टि व जीवनदृष्टि के सूचक हैं।
ISBN: 9789386054159
Pages: 144
Avg Reading Time: 5 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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Description:
सॉनेट मंडल अंग्रेजी कविता और साहित्य के सुपरिचित नाम हैं। हिन्दी में यह उनका पहला कविता-संग्रह है। लौटती दोपहरें की कविताएँ पढ़कर लगेगा कि ये एक ध्यानस्थ मस्तिष्क से प्रसूत रचनाएँ हैं। एक मन जो पूर्ण एकाग्रता की एक सीधी रेखा पर स्वयं को, अपने बहुत निकट से प्रसरित होकर ब्रह्मांड के छोर तक जाते समय को, अपने अतीत को और उस बीते, लेकिन कहीं अब भी ठहरे हुए काल में फॉसिल्स की तरह जमी स्मृतियों को बहुत ललक से देखता है।
वे कहते हैं—‘समय मेरी अदृश्य छाया है/उजाले में अदृश्य/नंगी आँखों से छिपी/सहज-बोध के लिए खुली।’ इस समय को पकड़ने और इन कविताओं के अन्तस तक पहुँचने के लिए हमें एक समतल अहसास के रास्ते पर चलना होता है। उनके कवि ने अपनी हर पद-चाप को ध्यान से सुना है, और बहुत करीने से कविता में निथारा है।
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