Swadhinta Ka Stri-Paksha
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नई स्त्री शिक्षा-सम्बलित-सजग स्त्री है! उसके प्रेम का पात्र बन पाना, उसके टक्कर का पुरुष बन पाना इतना आसान भी नहीं! स्त्रीवाद आप में उसके प्रेम के योग्य हो पाने की उमंग जगाता है! आत्मविकास का एक मौका देता है आपको! आत्मविश्वास की पहली सीढ़ी है आत्मनिरीक्षण! खौलते हुए पानी में चेहरा नहीं दिखता! अहंकार, क्रोध-लोभ या कामना एक विकट आँच है! इस आँच की सवारी मन को अदहन का पानी बना देती है: अन्तर्मन तो समझता है, लेकिन उसकी रिले-सर्विस जरा स्लो है, और उसका स्विच ‘ऑफ’ कर देने की सुविधा भी होती है, बाइबिल इसी अर्थ में तो कहती है–‘सीइंग दे दोंट सी, हियरंग दे दोंट हियर!’ सब बड़ी विभूतियों, लगातार सबको खरी-खोटी सुनानेवाले आत्मग्रस्त विष्णुओं का यही हाल है, मूर्ख वे थोड़े हैं–पर उनका आत्मबल कम है: बुरा जो ढूँढ़न मैं चला, बुरा न मिल्या कोय, जो दिल ढूँढ़ा आपना, मुझसे बुरा न कोय! स्त्री आन्दोलन यही विनय, यही आत्मसाक्ष्य जगाना चाहता है। प्रत्याक्रमण में, प्रतिघात या प्रतिशोध में इसकी आस्था नहीं है, शान्त प्रतिरोध यह करता है, आपको मौका देता है कि आप अपने भीतर झाँकें और सचमुच महसूस करें कि चित्त के पितृसत्तात्मक दबावों से या आदतन आपसे ऐसा व्यवहार नहीं हो गया जो दूसरों से आप अपने लिए नहीं चाहते? एक गम्भीर संकल्प लें कि अब ऐसा बिलकुल नहीं होगा। –भूमिका से
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नई स्त्री शिक्षा-सम्बलित-सजग स्त्री है! उसके प्रेम का पात्र बन पाना, उसके टक्कर का पुरुष बन पाना इतना आसान भी नहीं! स्त्रीवाद आप में उसके प्रेम के योग्य हो पाने की उमंग जगाता है! आत्मविकास का एक मौका देता है आपको! आत्मविश्वास की पहली सीढ़ी है आत्मनिरीक्षण! खौलते हुए पानी में चेहरा नहीं दिखता! अहंकार, क्रोध-लोभ या कामना एक विकट आँच है! इस आँच की सवारी मन को अदहन का पानी बना देती है: अन्तर्मन तो समझता है, लेकिन उसकी रिले-सर्विस जरा स्लो है, और उसका स्विच ‘ऑफ’ कर देने की सुविधा भी होती है, बाइबिल इसी अर्थ में तो कहती है–‘सीइंग दे दोंट सी, हियरंग दे दोंट हियर!’ सब बड़ी विभूतियों, लगातार सबको खरी-खोटी सुनानेवाले आत्मग्रस्त विष्णुओं का यही हाल है, मूर्ख वे थोड़े हैं–पर उनका आत्मबल कम है:
बुरा जो ढूँढ़न मैं चला, बुरा न मिल्या कोय,
जो दिल ढूँढ़ा आपना, मुझसे बुरा न कोय!
स्त्री आन्दोलन यही विनय, यही आत्मसाक्ष्य जगाना चाहता है। प्रत्याक्रमण में, प्रतिघात या प्रतिशोध में इसकी आस्था नहीं है, शान्त प्रतिरोध यह करता है, आपको मौका देता है कि आप अपने भीतर झाँकें और सचमुच महसूस करें कि चित्त के पितृसत्तात्मक दबावों से या आदतन आपसे ऐसा व्यवहार नहीं हो गया जो दूसरों से आप अपने लिए नहीं चाहते? एक गम्भीर संकल्प लें कि अब ऐसा बिलकुल नहीं होगा।
–भूमिका से
Book Details
-
ISBN9788126722914
-
Pages196
-
Avg Reading Time7 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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—भूमिका से
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निज़ाम साहब का काव्य मैंने पढ़ा भी है उनके गहन-गम्भीर स्वर में सुना भी और इस अनुभव से बार-बार आप्यायित हुआ हूँ।
निज़ाम साहब की कविताएँ मुझे सबसे पहले इसीलिए आकृष्ट करती हैं कि वे भारतीय रचनाएँ हैं। जिस संवेदन संसार में वे हमें आमंत्रित करती हैं, वह हमारा जाना-पहचाना है और उसमें वह बड़ी सहजता से प्रवेश करते हैं। फिर जो देश-काल उनकी रचनाओं में गूँजता है, वह भी हमारा अपना सुपरिचित देश-काल है। हमें अपने को यह याद नहीं दिलाना पड़ता कि हम किसी सुन्दर मगर पराए बग़ीचे में झाँक रहे हैं।
निज़ाम साहब के काव्य में एक और बात मुझे विशेष आकृष्ट करती है; वह है उसमें भावना और विचार का विलक्षण सामंजस्य। निज़ाम दूर की कौड़ी लानेवाले या उड़ती चिड़िया के पर काटनेवाले शायर नहीं हैं। चमत्कारी बात उनकी अभीष्ट नहीं है। सीधा-साधा मानवीय सत्य कितना बड़ा चमत्कार होता है, यह वह जानते हैं, और उसी को अपने भीतर से पाना, उसी को दूसरे के भीतर उतार देना उनका अभीष्ट है।
ग़ज़ल के स्वभाव में ही यह चीज़ है कि उसका एक-एक शे’र विचार अथवा भाव वस्तु की दृष्टि से एक मुक्तक होता है : लय अथवा तुक इन मुक्तकों को शृंखलित करती चलती है। विचारों अथवा भावों के जगत में मुक्त आसंगों की-सी एक निरायास यात्रा होती रहे, इस उद्देश्य की पूर्ति निज़ाम की ग़ज़लें भी बख़ूबी करती हैं। कभी-कभी तो एक ही शे’र पढ़कर पाठक गहरे में छुआ जाकर देर तक वहीँ निःस्तब्ध रुका रह सकता है—ग़ज़ल इसकी छूट देती है।
मेरा विश्वास है कि निज़ाम साहब का यह संग्रह हिन्दी जगत में दूर-दूर तक पढ़ा जाएगा और सम्मान पाएगा; इतना ही नहीं, वह एक बहुत बड़े पाठक वर्ग का अपना हो जाएगा; अपना, आत्मीय और सखावत सहज आनन्द देनेवाला।
—अज्ञेय (भूमिका से)।
Kot Ke Bajoo Par Batan
- Author Name:
Pawan Karan
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Description:
पवन करण ने कविता का पाठ जीवन की पाठशाला से सीखा है। पवन करण के यहाँ कुम्हार के आवाँ से निकले घड़े की तरह आँच सोखकर, भीतर तलहटी में स्मृतियों की राख चिपकाए, अनपढ़ मुँह के बाहर आती बोली के झिझकते शब्दों में, अभाव का उत्सव खेलते जीवन के दृश्य दिखाई देते हैं। भले ही टेक्नॉलोजी और मैनेजमेंट के प्रशिक्षण ने बहुत जगहों पर आदमी को ही हाशिए पर सरका दिया हो, किन्तु मध्यवर्गीय भद्रलोक की वर्जनाओं से भिड़न्त की धमक वाली ये कविताएँ पाठक के संवेदनतंत्र में कुछ अलग ही प्रकार से हलचल पैदा करती है, क्योंकि भारतीय समाज अभी अपना नग्न फोटोसेशन कराने को उत्सुक प्रेमिका तथा बेटी और प्रेमिका के बीच पिता के प्यार के अन्तर तथा विवाह की तैयारी करती प्रेमिका से पति की ‘आन्तरिकता को जानने को उत्सुक आहत प्रेमी को अपने संस्कारों के बीच जगह नहीं दे पाया है। ‘कोट के बाज़ू पर बटन’ की भी कुछ कविताएँ भद्रलोक के काव्य-वितान में छेद करते हुए प्रेम और देह के बीच खड़ी की गई झीनी, रोमांटिक चादर को किनारे सरकाती हैं।
पवन करण के कहने की कला भाषा के सहज सम्बोधन में निहित है जिसके कारण पाठक चालाक शब्दों और उनकी चमक में चौंधियाने से बचता है। भाषा के स्तर पर कथ्य के बारीक यथार्थ को पवन करण ने बहुत सहजता से व्यक्त कर दिया है। निर्मल वर्मा जिस यथार्थ को कहानी में ‘झाड़ी में छिपे पक्षी’ की तरह बताते हैं, उस यथार्थ को पवन करण बहुत सरलता से पकड़कर झाड़ी के ऊपर बिठा देते हैं कि यह है देखो। उन्होंने अपनी कहन के शब्द, मुहावरे और औज़ार सड़क और गलियों से उठाए हैं, अत: भाषा में भद्रकाव्य के घूँघट न होने से वह नए अनुभव का आस्वाद देती हैं। कविताएँ कहीं भी कवि के ‘मैं’ को अस्वीकार नहीं करतीं अत: रचनात्मक संघर्ष द्विस्तरीय हो जाता है—व्यक्तिगत जो आन्तरिक है और बाह्य जो सामाजिक है।
Sapno Ka Dhuan
- Author Name:
Ramdhari Singh Dinkar
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Description:
‘सपनों का धुआँ’ राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की आज़ादी के बाद लिखी गई कविताओं का संग्रह है। इस संग्रह में दिनकर जी की उन कविताओं को संकलित किया गया है, जिनमें समकालीन स्थितियों के प्रति उनकी भावनात्मक प्रतिक्रिया सशक्त रूप में प्रस्फुटित हुई है। इस पुस्तक में जहाँ एक तरफ़ स्वराज से फूटनेवाली आशा की धूप और उसके विरुद्ध जन्मे हुए असन्तोष का धुआँ कविताओं में प्रतिबिम्बित होता है, वहीं दूसरी ओर एक विदुषी को लिखा गया कवि का गीत-पुंज भी है, जो कवि के गहन चिन्तन की दस्तावेज़ के रूप में हमारे सामने आता है।
मन-मस्तिष्क को उद्वेलित करनेवाली ये कविताएँ सभी पाठकों के लिए उपादेय हैं।
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