Surkh
Author:
Bhavesh DilshadPublisher:
PustaknamaLanguage:
HindiCategory:
Poetry0 Ratings
Price: ₹ 131.2
₹
160
Available
बनाव-सिंगार, बाग़, तितली, भोग-विलास से कोत तो क्या, बस पहाड़, जंगल, खाई, ख़ला, समन्दर, ये सब मुझे ाियादा पुकारते रहे। ये रहस्य, सन्नाटे, चुनौतियां और बेबाकियां। कभी हैरान करती रहीं, कभी तलाश तो कभी मुझे बयान। छटपटाहट, घुटन, कसक और उन्हीं लमहों में पूरी फ़क़ीरी, ािद और विध्वंस भी... इसी दौर में वो मुझे मिली। घूंघट, पर्दे और नक़्ली ोवरों के बोझ से घुटी-घुटी सी। दोनों ने तनहाई चुनी पर सच से चौंककर हम कतराये तो नहीं। एक-दूसरे का हाथ थामे बढ़ते रहे। एक-दूजे को जानने, पहचानने से चला सिलसिला समझने और महसूसने तक पहुंचा। फिर ढलने और पिघलने तक। बाहिर बरसों और यूं सदियों का सफ़र करते हम इकाई में रच-बस गये। अपने ही ढंग से, अपनी ही एक दुनिया में... वो मेरा पहला प्यार और इकलौती क़सम हो चुकी। प्यार, सफ़र, सिलसिला चल रहा है। चलता रहेगा। हम अपनी एक दुनिया बसा लेंगे। नहीं तो किसी अतल, अबूझ या गुमनाम कोने में एक-दूजे के सहारे जी लेंगे। हर क़दम नयी-नयी बेचैनियों, ख़लिशों के साथ वही सरमस्ती है। जबात की उथल-पुथल है। न चाहे भी रहेगी। इसी सफ़र के बीच इस ट्रायोलॉजी की शक्ल में खींच ली गयी मेरी और मेरी शाइरी की यह तस्वीर यहीं रह जाएगी। हमेशा के लिए! भवेश दिलशाद
ISBN: 9789392581120
Pages: 88
Avg Reading Time: 3 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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Faiz Ahmed 'Faiz'
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- Description: “फ़ैज़ की शाइरी ऐसे ज़िन्दा इशारों का पर्याय है जो दर्द की चीख़ और कराह को कसकर अन्दर ही अन्दर दबाये और छुपाये हुए हैं, मगर जो दरअस्ल दबाये दबते हैं न छुपाये छुपते। फ़ैज़ की शाइरी एक ऐसा संगीत है जो मालूम तो होता है रोमानी, मगर असलन् इजतिहारी है–अपने रोमानी तेवर में भी ख़ालिसन् इन्क़िलाबी। यानी संघर्षों में उसका जन्म हुआ है। ‘फ़ैज़’ के कलाम में वह नर्मी और मिठास है जो मन को मोह लेती है। जिस गहरी समझ, भावनागत निश्छलता और कलात्मकता से प्रेमानुभूतियों को उन्होंने सामाजिक समस्याओं के साथ मिलाकर पेश किया है, वह अपने-आपमें अभूतपूर्व है। उनकी नज़्में उर्दू की बेहतरीन नज़्में हैं और नज़्म की सारी विशेषताएँ और भी निखर-सँवरकर उनकी ग़ज़लों में ढल गई हैं। ‘फ़ैज़’ मानवीय मूल्यों की गरिमा के महान नायक हैं। उनकी शाइरी में मानवीय सम्बन्धों की प्रेममय सहजता उजागर हुई है, जिसका लक्ष्य हर तरह के ज़ोर-ज़ुल्म और शोषण-व्यवस्था का उन्मूलन है। उनके दावों और अमल में, कथनी और करनी में कहीं टकराव नहीं, उनके व्यक्तित्व की यह विशिष्टता उनके काव्य की भी शक्ति और विशिष्टता है। भारत और पाकिस्तान के साथ-साथ विश्व-भर में उनकी असाधारण लोकप्रियता इसका एक ज्वलन्त प्रमाण है।
Canvas
- Author Name:
Vicky Arya
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- Description: Awating description for this book
Jaise Chand Par Se Dikhti Dharti
- Author Name:
Harjendra Chaudhary
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- Description: हरजेन्द्र चौधरी के पहले कविता-संग्रह ‘इतिहास बोलता है’ की कविताओं में जो गड़गड़ाता आवेश था, वह इस संग्रह की कविताओं में काफ़ी हद तक मंथर हो गया लगता है। समाज और संसार को अपनी अवधारणाओं, अपने सपनों के मुताबिक ढाल लेने की वह बेचैनी इन कविताओं में भी दिखाई पड़ती है लेकिन अधिक संयत, अधिक सधे हुए रूप में। चतुर्दिक घटित हो रहे सामाजिक परिवर्तन की गहरी पहचान और उसके सघन अनुभव इन कविताओं को अपेक्षाकृत अधिक 'स्थायी' प्रभविष्णुता प्रदान करते दिखाई पड़ते हैं। कवि यहाँ सामाजिक परिवर्तन की दिशा-गति के बिम्ब रचता है, जिनमें एक नैतिक आग्रह और 'रेजिस्टेंस' भाव अन्तर्निहित है। धरती पर से चाँद देखने की बजाय चाँद पर से धरती देखने-दिखाने वाली इन कविताओं में भाषा और बिम्बों की गजब की ताज़गी है। ये कविताएँ एक गहरी मानवीय संवेदना की कविताएँ हैं। यह आकस्मिक नहीं है कि हरजेन्द्र चौधरी की कविताओं में किसान, कवि, औरत और बच्चे की उपस्थिति बार-बार दर्ज होती है। यहाँ इन्हें मानवीय संवेदना के बचे रहने के लक्षण और उसे बचाए रखने की चिन्ता के प्रमाणों के रूप में भी पढ़ा-देखा जा सकता है। साथ ही इन कविताओं में हम अपने 'समय का चेहरा' देख सकते हैं, जो निरन्तर बदल रहा है—जितना बाहर जीवन में, उतना ही इन कविताओं के भीतर भी। प्रतिकूल परिस्थितियाँ और मानवीय संघर्ष—दोनों की टकराहट भरी पारस्परिकता बार-बार इन कविताओं में स्थान पाती है। सामूहिक ज़िन्दगी को अनेकविध प्रभावित करने वाले 'सुदूर' कारणों को भी इन कविताओं में बिना किसी बड़बोलेपन के इतनी सहजता से स्थान दे दिया गया है कि पाठक चमत्कृत हुए बिना इनकी पकड़ में आ जाता है।
Geet Govind
- Author Name:
Kapila Vatsayan
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Description:
केन्दुविल्व (केन्दुली) नामक ग्राम में बारहवीं शती में जन्मे महाकवि जयदेव जगन्नाथ की आराधना से प्राप्त भोजदेव और रमादेवी की सन्तान थे। उत्कल राजा एकजात कामदेव के राजकवि के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने 'गीतगोविन्द’ की रचना की। देवशर्मा की जगन्नाथ की कृपा से प्राप्त पुत्री पद्मावती से उनका विवाह हुआ। वह आन्ध्र के एक ब्राह्मण की पुत्री थी, ऐसी भी आख्यायिका है। जयदेव ने ‘गीतगोविन्द' की उन्नीसवीं अष्टपदी से उसे पुनरुज्जीवित किया, ऐसी भी कथा है। जिस दिन रथयात्रा होती है, यही उन्नीसवीं अष्टपदी—‘प्रिये चारुशीले’ मखमल के कपड़े पर लिखकर जगन्नाथ के हाथों दी जाती है।
महीपति ने ‘भक्तविजय' में जयदेव को व्यास का अवतार कहा है। विश्व-साहित्य में राधा-कृष्ण के दैवी प्रेम पर आधारित भाव-नाट्य के रूप में यह एक अप्रतिम रस काव्य है। इस नृत्यनाट्य में पद्मावती राधा की और जयदेव कृष्ण की भूमिका करते थे और वह मन्दिर में खेला जाता था। दोनों केरल में गए और यह काव्य प्रस्तुत किया, ऐसा उल्लेख है। चैतन्य सम्प्रदाय के अनुयायी ‘गीतगोविन्द’ को भक्ति का उत्स मानते हैं। जगन्नाथ मन्दिर के एक शिलालेख के अनुसार देव सेवकों को प्रति संध्या जगन्नाथ के आगे यह नृत्यगायन करने का आदेश दिया गया है। इस काव्य में सहजयान बौद्ध प्रभाव का सूक्ष्म दर्शन होता है : प्रज्ञा और उपाय तत्त्व ही राधा और कृष्ण हैं। राधा-कृष्ण का मिलन इस काव्य में जीव-ब्रह्म के मिलन का प्रतीक है—सुमुखि विमुखिभावं तावद्विमुंच न वंचय। जयदेव के नाम से बंगाली पद मिलते हैं। ‘गुरुग्रन्थ साहब’ में और दादूपंथी साधकों के पद-संग्रह में भी जयदेव की बानी है। राजस्थानी में भी जयदेव के पद मिले हैं।
भारतीय भाषा परिषद् ने दिनांक 18-19 मई, 1980 को ‘गीतगोविन्द’ संगोष्ठी आयोजित की थी। उसमें पढ़े गए बंगाली, मराठी, ओड़िया, मलयाली, गुजराती, हिन्दी-भाषी विद्वानों के निबन्धों और भाषणों का हिन्दी अनुवाद, इस विषय की विशेषज्ञा, डॉ. कपिला वात्स्यायन की भूमिका के साथ प्रस्तुत है।
Patthar par Buvai
- Author Name:
Vijay Singh Chauhan
- Book Type:

- Description: विजय सिंह चौहान द्वारा लिखित एक आकर्षक हिंदी कविता संग्रह 'पत्थर पर बुकाई' के गहन छंदों में डूब जाएँ। यह विचारपूर्ण संकलन हिंदी छंदों के माध्यम से गहरी भावनाओं और दार्शनिक चिंतन की खोज करता है। पुस्तक के कवर पर काई से ढके पत्थर की संरचना का एक कलात्मक जल रंग चित्रण है, जो प्रतीकात्मक रूप से कच्चे, प्राकृतिक तत्वों का प्रतिनिधित्व करता है जो अक्सर काव्यात्मक अभिव्यक्ति को प्रेरित करते हैं। कविता के शौकीनों और हिंदी साहित्य के प्रेमियों के लिए बिल्कुल सही, यह संग्रह समकालीन हिंदी कविता के लेंस के माध्यम से जीवन की जटिलताओं पर एक अनूठा दृष्टिकोण प्रदान करता है। सुरुचिपूर्ण प्रस्तुति इसे किसी भी साहित्यिक संग्रह के लिए एक उत्कृष्ट जोड़ या हिंदी छंद की गहराई और सुंदरता की सराहना करने वालों के लिए एक सार्थक उपहार बनाती है।
Nepathy Mein Hansi
- Author Name:
Rajesh Joshi
- Book Type:

- Description: ये कविताएँ पिछले सात आठ बरसों में लिखी गई है । हमारे आसपास इस बीच बहुत तेजी से परिवर्तन हुए हैं । घटनाओं की गीत इतनी तेज और अप्रत्याशित बल्कि कहना चाहिये कि विस्मित कर देने वाली है कि उसे अव- धारणाओं में पकड़ना अगर असंभव नहीं तो कठिन अवश्य हो गया है । दृश्य गहरी मानवीय तकलीफों और बेचैनियों से भरा है । इन कविताओं में .शायद इसके कुछ संकेत मिलें । शायद इसीलिए इन कविताओं में 'मूड्स' की बहुत भिन्नताएं हैं । निराशा, उदासी और उन्माद के इस दृश्य के बीच भी उम्मीद बची है । और यह उम्मीद है, इस देश की विराट श्रमशील जनता-जों बहुत थोड़े में अपना गुजर-बसर करते हुए भी, ज्यादा से ज्यादा जगह को मनुष्य के रहने लायक और सुंदर बनाने में जुटी हैं । ये कविताएँ उस धुँधले उजाले को देख और दिखा सकें ऐसी मेरी इच्छा है ।
Sanyogvash
- Author Name:
Ashutosh Dubey
- Book Type:

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Description:
हमारे जीवन का एक उप-जीवन भी होता है। अपने दिखाई दे सकने वाले क्रियाकलापों के समानान्तर हम उसे अपने अंतर्लोक में जीते हैं। यहाँ हम चीज़ों को उनकी दृश्यमान हदों के अलावा उनकी संभावनाओं में भी देखते हैं। यह दुनिया को देखने की एक भिन्न पद्धति होती है।
आशुतोष दुबे अकसर अपनी कविता हमारे ‘होने’ के साथ-साथ चलती इसी पटरी से उठाते हैं, वह जगह जो हमें अपने वर्तमान की स्थूलताओं में छोड़कर कभी अतीत में दिपदिपाते एक आलोक-वृत्त में घुमा लाती है, कभी आगत के किसी अदेखे-अछूते लोक में लिवा ले जाती है।
ये अत्यन्त महीन रेशों में धड़कते उसी जीवन की कविताएँ होती हैं, जिन्हें अपनी दैनिक दुश्चिन्ताओं और दुष्कामनाओं के शोर से बाहर आकर पढ़ना होता है। बल्कि कह सकते हैं कि इस बोझ से ख़ाली होने में वे भी आपकी मदद करती हैं। वे आपके अनुभव-जगत और उसके यथार्थ के एक अन्य पहलू से आपको परिचित कराती हैं जो बहुत छोटी-छोटी चीज़ों की मद्धिम लेकिन अटल आभा में छिपा होता है। ख़तरनाक ढंग से पूर्वानुमेय और कल्पना-वंचित हो चुके हमारे इस समय में ये कविताएँ हमें विस्मित होने का अवसर देती हैं, हमें हमारे सूक्ष्म के सामने ले जाती हैं और इस तरह हमें अपने आप से भी बचाती हैं।
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