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सबसे अच्छी कविता वह है जो कविता की शर्तों से बाहर है। विज्ञ समाज ने जिसे नकार दिया है। सबसे अच्छी कविता उस जीवन की खोज में निकलती है, जिसे देखा नहीं गया और वह समकालीन कविता की तमाम जकड़बंदी और घेरेबंदी से बाहर हो जाती है। आशुतोष अग्निहोत्री समकालीन हिन्दी कविता के ऐसे ही विलक्षण कवि हैं। इनकी कविता हर वक़्त साथ रहनेवाली प्रतिच्छवि की तरह है। कभी यह विचारों के सहारे खड़ी होती है तो कभी भावों के और कभी यह विभिन्न दृश्यों या चित्र-छवियों में रमती हुई नज़र आती है। ठीक एक आदमी की तरह ही उसका जीवित और गतिशील अस्तित्व है। जीवन की तरह ही उसका विस्तार है, और जीवन से भी कहीं बढ़कर उसकी दूरगामी छाया या प्रभाव है। आशुतोष अग्निहोत्री का एक स्वतंत्र कवि-व्यक्तित्व है। इनकी दृष्टि कविता-पगी है। इनकी कविताएँ हमारी दृष्टि को व्यापक बनाती हैं। इनका देखना कुछ राग लिए होता है। कल्पना का उन्मेष भी अनुपम है। आशुतोष अग्निहोत्री की कविताएँ धरती के हर कुछ से एक रिश्ता कायम करती हैं। उनके अनुभव से हमारे अंतरमन का तार सहजता से जुड़ जाता है। उनमें जातीय परम्परा का बोध भी है। अनेक रंग और सौंदर्य-बोध से नि:सृत इनकी कविताएँ जीने का अपना एक छंद विकसित करती हैं। इस नये किंतु परिपक्व कवि का मैं अभिनंदन करता हूँ। —भारत यायावर

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सबसे अच्छी कविता वह है जो कविता की शर्तों से बाहर है। विज्ञ समाज ने जिसे नकार दिया है। सबसे अच्छी कविता उस जीवन की खोज में निकलती है, जिसे देखा नहीं गया और वह समकालीन कविता की तमाम जकड़बंदी और घेरेबंदी से बाहर हो जाती है। आशुतोष अग्निहोत्री समकालीन हिन्दी कविता के ऐसे ही विलक्षण कवि हैं। इनकी कविता हर वक़्त साथ रहनेवाली प्रतिच्छवि की तरह है। कभी यह विचारों के सहारे खड़ी होती है तो कभी भावों के और कभी यह विभिन्न दृश्यों या चित्र-छवियों में रमती हुई नज़र आती है। ठीक एक आदमी की तरह ही उसका जीवित और गतिशील अस्तित्व है। जीवन की तरह ही उसका विस्तार है, और जीवन से भी कहीं बढ़कर उसकी दूरगामी छाया या प्रभाव है।

आशुतोष अग्निहोत्री का एक स्वतंत्र कवि-व्यक्तित्व है। इनकी दृष्टि कविता-पगी है। इनकी कविताएँ हमारी दृष्टि को व्यापक बनाती हैं। इनका देखना कुछ राग लिए होता है। कल्पना का उन्मेष भी अनुपम है।

आशुतोष अग्निहोत्री की कविताएँ धरती के हर कुछ से एक रिश्ता कायम करती हैं। उनके अनुभव से हमारे अंतरमन का तार सहजता से जुड़ जाता है। उनमें जातीय परम्परा का बोध भी है। अनेक रंग और सौंदर्य-बोध से नि:सृत इनकी कविताएँ जीने का अपना एक छंद विकसित करती हैं। इस नये किंतु परिपक्व कवि का मैं अभिनंदन करता हूँ।

—भारत यायावर

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Paperback
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
1st
Publication year
2019
Weight
130 grams
ISBN-13
9789349159860
Pages
136
Reading time
~4 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14 × 21 cm
Language
Hindi

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