Kaun Hai Aisa Poojari Dair Mein
Author:
Maikash AkbarabadiPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Poetry0 Ratings
Price: ₹ 199.2
₹
249
Available
हिंदी पाठकों के लिए मयकश अकबराबादी के फ़ारसी और उर्दू कलाम का इन्तिख़ाब पहली बार प्रकशित हो रहा है. किताब के संपादक सुमन मिश्र हैं.
ISBN: 9789394494404
Pages: 129
Avg Reading Time: 4 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Yadi Pyar Karo
- Author Name:
Taslima Nasrin
- Book Type:

- Description: प्रेम। अकुंठ प्रेम। निर्बंध प्रेम। देह और आत्मा को आप्लावित करता प्रेम। शरीर के सर्वांग को कँपाता आग-सा जलता, बर्फ़-सा शीतल प्रेम। प्रेम जिसके चिह्न देर तक साथ रहते हैं, देह पर भी, मन पर भी, रूह के भीतर गहरे अँधेरे में भी। यादों में चहकता, उम्मीद और इन्तज़ार में छटपटाता प्रेम! प्रेम की इन कविताओं को तसलीमा नसरीन के अलावा भला कौन लिख सकता था। प्रेम के समूचे अनुभव को शब्द देने के लिए एक साहसी क़लम की ज़रूरत हर दौर में पड़ेगी, उनके पास वह क़लम है, वह साहस भी। उनके भीतर की प्रेमाकांक्षी स्त्री कहती है—‘यदि प्यार करो’ तो उसे कहो, और इस तरह कहो कि ‘चिड़ियाँ कहें, पेड़ के पत्ते, फूल बोलें, आकाश बोले, मेघ-वर्षा बोलें, धूप बोले, चन्द्रमा की रोशनी बोले, पड़ोसी बोलें, तालाब का घाट बोले, कि तुम मुझे प्यार करते हो।’ ‘यदि प्यार करो’ में संकलित तसलीमा नसरीन की इन कविताओं में वह सब कुछ है जिसका आविष्कार प्रेम ने अब तक किया है—बेशर्त समर्पण भी, अधिकार भी, ईर्ष्या भी, और हाँ, अपने होने का गहरा बोध भी, अपने अस्तित्व को अपनी हद में सम्पूर्ण बनाए रखने की ज़िद भी, क्योंकि अगर मैं ही नहीं हूँगी तो प्यार कौन करेगी, और तुम किससे प्यार करोगे? तसलीमा का प्यार न समाज के सामने शर्मिन्दा है, न उम्र के सामने अवश, न मानक-स्वीकृत रिश्तों की चहारदीवारी तक सीमित। यह सम्पूर्ण प्रेम है, जैसा उसे होना चाहिए।
Ek Din Lautegi Ladki
- Author Name:
Gagan Gill
- Book Type:

-
Description:
‘एक दिन लौटेगी लड़की’ गगन गिल का पहला कविता-संग्रह है। आज भी यह कविताएँ अपनी दृढ़ता और शब्द-संयम से आने वाले परिष्कार का बोध कराती हैं जो उनके बाद के काम में फलीभूत भी हुआ।
गगन की इन कविताओं में स्त्री-मन का एक अनुशासित लेकिन भव्य संशय और दुःखबोध है, जो अभी तक रूढ़ि नहीं बना। इन कविताओं के रचाव का रंग बड़ी सहजता से कहीं गहन और कहीं धीमा होता चलता है, ऊपर से चढ़ाया कोई रोग़न इनमें लगभग नहीं है। इसलिए इन कविताओं में भावों का गठन और विकास गगन का एकदम अपना भी है, और हमारे समय में एक स्त्री की अवस्थिति की खुरदुरी सचाइयों का आईना भी! उदासी का मतलब यहाँ पूरी चारित्रिक दृढ़ता से एक ऐतिहासिक सच से रू-ब-रू होना है—रूखी हृदयहीनता या पीड़ा का विलास नहीं।
इतिहास गगन की परवर्ती कविताओं में दुःख, निर्लिप्तता, राग और विराग के सन्दर्भों में बार-बार आया है। उत्कट मोह और उत्कट वीतरागिता से भरे ब्यौरे उनमें यत्र-तत्र ऐतिहासिक अवशेषों की मार्मिक और आतंकित करने वाली भव्यता के साथ बिखरे हुए हैं। इतिहास के या किन्हीं शब्दातीत अनुभवों को बड़ी कुशलता से उद्दीप्त कर पाने की गगन की क्षमता यहाँ पहले-पहल अपने अँखुए खोल रही है।
गगन के पास पंजाब की भाषा के, इतिहास के गहरे संस्कार हैं। कई मध्ययुगीन ऐतिहासिक अनुभवों-दुःस्वप्नों की टापें इसीलिए कई बार अचानक इन कविताओं में हमें सुनाई देती हैं। शब्दों की यह आह्वानात्मक ताक़त गगन के गद्य में भी है, और पद्य में भी।
सच्चे और सही मायनों में यह विवेक की कविताएँ हैं, काल को वामन-डगों से मापती हुईं।
—मृणाल पांडे
Pratinidhi Kavitayen : Manglesh Dabral
- Author Name:
Mangalesh Dabral
- Book Type:

-
Description:
आलोकधन्वा कहते हैं कि ‘मंगलेश फूल की तरह नाज़ुक और पवित्र हैं।’ निश्चय ही स्वभाव की सचाई, कोमलता, संजीदगी, निस्पृहता और युयुत्सा उन्हें अपनी जड़ों से हासिल हुई है, पर इन मूल्यों को उन्होंने अपनी प्रतिश्रुति से अक्षुण्ण रखा है।
मंगलेश डबराल की काव्यानुभूति की बनावट में उनके स्वभाव की केन्द्रीय भूमिका है। उनके अन्दाज़े-बयाँ में संकोच, मर्यादा और करुणा की एक लर्ज़िश है। एक आक्रामक, वाचाल और लालची समय में उन्होंने सफलता नहीं, सार्थकता को स्पृहणीय माना है और जब उनका मन्तव्य यह हो कि मनुष्य होना सबसे बड़ी सार्थकता है, तो ऐसा नहीं कि यह कोई आसान मकसद है, बल्कि सहज ही अनुमान किया जा सकता है कि यह आसानी कितनी दुश्वार है।
Rashmi Lok : Dinkar Granthmala
- Author Name:
Ramdhari Singh Dinkar
- Book Type:

-
Description:
हमारे क्रान्ति-युग का सम्पूर्ण प्रतिनिधित्व कविता में इस समय दिनकर कर रहा है। क्रान्तिवादी को जिन-जिन हृदय-मंथनों से गुज़रना होता है, दिनकर की कविता उनकी सच्ची तस्वीर रखती है।
—रामवृक्ष बेनीपुरी
दिनकर जी सचमुच ही अपने समय के सूर्य की तरह तपे। मैंने स्वयं उस सूर्य का मध्याह्न भी देखा है और अस्ताचल भी। वे सौन्दर्य के उपासक और प्रेम के पुजारी भी थे। उन्होंने ‘संस्कृति के चार अध्याय' नामक विशाल ग्रन्थ लिखा है, जिसे पं. जवाहरलाल नेहरू ने उसकी भूमिका लिखकर गौरवान्वित किया था। दिनकर बीसवीं शताब्दी के मध्य की एक तेजस्वी विभूति थे।
—नामवर सिंह
उनकी राष्ट्रीय चेतना और व्यापक सांस्कृतिक दृष्टि, उनकी वाणी का ओज और काव्यभाषा के तत्त्वों पर बल, उनका सात्त्विक मूल्यों का आग्रह उन्हें पारम्परिक रीति से जोड़े रखता है।
—अज्ञेय
ADHOORA RASHTRAGAN
- Author Name:
Dr. Omprakash Singh Shant
- Book Type:

- Description: Collection of poems
Hindnama : Ek Mahadesh Ki Gatha
- Author Name:
Krishna Kalpit
- Book Type:

- Description: हिन्दनामा’ एक महादेश की गाथा उसी तरह है जिस तरह प्रेमचन्द का ‘गोदान’ भारतीय किसान जीवन की गाथा है। ‘हिन्दनामा’ इतिहास है न काल्पनिक उपन्यास। यह एक धूलभरा दर्पण है जिसमें हमारे देश की बहुत सी धूमिल और चमकदार छवियाँ दिखाई देती हैं। ‘हिन्दनामा’ दरअसल हिन्दुस्तान के बारे में एक दीर्घ कविता है जिसमें कोई कालक्रम नहीं है। सब कुछ स्मृतियों की तरह गड्डमड्ड है, जहाँ प्राचीन और अर्वाचीन इस तरह मिलते हैं जैसे किसी नदी के घाट पर शेर और बकरी एक साथ अपनी प्यास बुझा रहे हों। इसकी कोई बिबलियोग्राफ़ी नहीं है—यह कबीर के करघे पर बुनी हुई एक रंगीन चादर है, जो शताब्दियों से शताब्दियों तक तनी हुई है। उग्र राष्ट्रवाद के इस वैश्विक दौर में अपने राष्ट्र को जानने की कोशिश निश्चय ही जोखिम का काम है, और यह कहने की शायद कोई ज़रूरत नहीं कि ‘हिन्दनामा’ हिन्दूनामा नहीं है। हिन्दुस्तान का इन्द्रधनुष जो सात रंगों से मिलकर बना है, उसकी ऐसी गाथा है जो कभी और कहीं भी ख़त्म नहीं होती—चलती ही जाती है। हिन्दी काव्य-जगत के लिए बरसों बाद हासिल एक उपलब्धि है ‘हिन्दनामा’।
Purua Pachuvan
- Author Name:
Kailash Gautam
- Book Type:

- Description: कैलाश गौतम भोजपुरी जनपद के किसान मन कवि हैं। ऋतुओं से किसान जीवन का लगाव, किसान जीवन में धर्म का मतलब, किसान-परिवार की संकल्पना और खेती-किसानी की मुश्किलें, कहिए तो किसान जीवन के सामाजिक-सांस्कृतिक पहलू उनकी कविता का बड़ा भाग गढ़ते हैं। सत्ताओं की तानाशाही, उनका गैर-जम्हूरी चरित्र कैलाश जी की कविता के व्यंग्य के निशाने पर होता है। उनका यह संग्रह भोजपुरी समाज को नजदीक से जानने-समझने का मौका उपलब्ध कराता है।...यह कविता-संग्रह यथार्थ के मार्मिक और सच्चे विवरण के लिए, जबरदस्त भाषा के लिए और संवेदनशील नजर के लिए पढ़ा जाना चाहिए।
AAO BACHCHO TUMHEN BATAYEN
- Author Name:
Ram Badan Ray
- Book Type:

- Description: Children's poems and Short-stories
Sipi Aur Shankha
- Author Name:
Ramdhari Singh Dinkar
- Book Type:

-
Description:
– ‘सीपी और शंख' रामधारी सिंह ‘दिनकर’ द्वारा अंग्रेज़ी से अनूदित विश्व की श्रेष्ठ कविताओं का संग्रह है। बावजूद इसके ये दिनकर जी के व्यक्तित्व के रूपों को उद्घाटित करती उनकी अपनी मौलिक रचनाएँ भी प्रतीत होती हैं, क्योंकि उन्होंने भावों से प्रेरणा लेते हुए अपनी तरफ़ से ऐसे-ऐसे चित्रों की सृष्टि कर डाली है जो मूल में कहीं नहीं। इसलिए इन कविताओं में दिनकर जी के अपने चिन्तन और भाषा का परस्पर अन्योन्य सम्बन्ध भी परिलक्षित होते हैं।
संग्रह में पुर्तगीज़ी, स्पेनिश, अंग्रेज़ी, जर्मन, फ़्रेंच, अमरीकी, चीनी, पोलिश और भारतीय भाषाओं में मलयालम की अछूती भावभूमि और नवीन भंगिमाओं वाली कविताएँ शामिल हैं। रूमानी, आत्मपीड़न के अतिरिक्त भक्तिभाव से पूर्ण इन कविताओं की मुख्य विशेषता रस-प्रवणता, लावण्ययुक्त बिम्ब और श्रम की प्रतिष्ठा है।
इस संग्रह की कौन सी कविता किस कवि की कविता का प्रतिबिम्ब है, यह सूचित करने को पुस्तक के अन्त में एक सूची भी दी गई है ताकि सहज ही सृजन के विभिन्न आयामों से जुड़ा जा सके। निस्सन्देह, कविता में नवीन रुचि रखनेवाले पाठकों को दिनकर जी की यह कृति पसन्द ही नहीं आएगी, बल्कि अविस्मरणीय भी साबित होगी।
Fir ek Duryodhan Eintha Hai
- Author Name:
Sanjeev 'Majdoor' Jha
- Book Type:

- Description: हिन्दी की युवा पीढ़ी के सक्रिय हस्ताक्षर संजीव मज़दूर झा का यह पहला कविता संग्रह कवि की संभावनाओं को प्रकाशित करते हुए हमें आश्वस्त करता है कि संजीव सरीखे कवियों के माध्यम से कविता का प्रतिरोधी और आलोचनात्मक स्वर निरंतर शक्तिशाली बना रहेगा। संजीव ने अपने आसपास की दुनिया को सीधी-सपाट, परंतु जीवंत और तेज भाषा में व्यक्त किया है। इस संदर्भ में सिर और लाठी शीर्षक कविता विशेष रूप से रेखांकित करने योग्य है जो वर्तमान व्यवस्था के सभी पक्षों को बेनकाब करती हुई मनुष्य के सोचने की ताकत और साहस का यशोगान करती है। कवि ने सुचिंतित निर्णय के साथ अधिकतर कविताओं में भाषा को अभिधात्मक रखा है जिससे कविता सहज और सम्प्रेष्य तो बनती ही है साथ ही बेहद प्रभावकारी भी बन जाती है। संजीव मज़दूर गरीबों, दलितों और स्त्रियों के पक्षकार हैं। वह निर्ममता के साथ वर्ण व्यवस्था और पुरुष वर्चस्व पर चोट करते हैं। उनकी कविता स्वतंत्र, न्यायपूर्ण समाज के स्वप्नों से प्रेरित है। साथ ही, जीवन और प्रकृति के कुछ मनोरम चित्र भी यहाँ मिलते हैं जो कवि के आयतन को विस्तार देते हैं। संजीव झा मज़दूर की ये कविताएँ इसलिए भी विचारणीय हैं कि यहाँ नयी पीढ़ी के एक कवि की दृृष्टि से समकालीन जीवन को देखने-समझने का अवसर हमें मिलता है। भाषा और संवेदना के नये आचरण तथा कोण यहाँ मिलते हैं— जब विकास नहीं था दुनिया थी जब तंत्र नहीं था लोक था एक दिन फिर तुम न होगे पर हम होंगे यही विश्वास और साहसिक आशा आज हमें चाहिए। संजीव मज़दूर झा की सर्वोत्तम कविताएँ इन्हीं मूल्यों का प्रकाश स्तम्भ हैं। —अरुण कमल
Herstory
- Author Name:
Neha Bansal
- Book Type:

- Description: Herstory is a new collection of poems by Neha Bansal, a civil servant, providing a fresh perspective on the lives of others.
Pratinidhi kavitayen : Rajesh Joshi
- Author Name:
Rajesh Joshi
- Book Type:

-
Description:
राजेश जोशी की कविताओं को पढ़ना एक पीढ़ी और उसके समय से दस-पन्द्रह साल पीछे की कविता और उससे जुड़ी बहसों के बारे में सोचना, और इतने ही साल आगे की कविता और उसकी मुश्किलों की ओर ताकना है।
कविता की एक संश्लेषी परम्परा रही है, जिसके भीतर राजेश जोशी की सक्रियता देखी जा सकती है। इसी बात ने उन्हें ख़ास पहचान दी और समकालीन कविता को भी। केदारनाथ सिंह का यह कथन बिलकुल दुरुस्त है कि ‘राजेश जोशी आज की कविता के उन थोड़े से महत्त्वपूर्ण हस्ताक्षरों में हैं, जिनसे समकालीन कविता की पहचान बनी है।’
राजेश जोशी की ‘समझ’ से समकालीन कविता और उसकी नई पीढ़ी अभिन्न है।
कविता की एक संश्लेषी परम्परा, जो पीछे ही नहीं आगे भी जाती है। इसमें प्रतिरोध और प्रतिबद्धता है तो पर्याप्त लोच भी है।
Preet Vedi-Niharika
- Author Name:
Radhika Shaha
- Book Type:

- Description: It's masterpiece poetry collection
Matdan Kendra Par Jhapaki
- Author Name:
Kedarnath Singh
- Book Type:

-
Description:
ये कविताएँ एक कवि का पक्ष रखती हैं जिसे केदार जी इक्कीसवीं सदी की दूसरी दहाई में आकर पक्षहीन हो चुके हम लोगों को सौंप रहे हैं। ये कविताएँ हिंसा के विशाल परदे के आगे एक मनुष्य का हिंसक होने से इनकार हैं—देखने में बहुत विनम्र, विनीत, लेकिन चट्टान-सा सख़्त, दृढ़ और निर्णायक।
ज़रूरी नहीं कि उनकी सूची में हमारा नाम हो ही, जिनका नाम किसी सूची में नहीं, उनकी भी एक दुनिया है, जिसका नेतृत्व पेड़ करते हैं, और आपस में टकराते सत्ता के काले-पीले-सफ़ेद नारों के बरक्स जिसके पास पृथ्वी के सबसे सटीक और सबसे सुन्दर नारे हैं। वे नारे जो नदियों को उनका पानी, चींटियों को उनके बिल और आँखों को उनकी झपकी लौटा देने की पैरवी कर रहे हैं। इस संग्रह को पढ़ते हुए हमें इन रवहीन नारों की ताक़त का अहसास होता है।
केदार जी अब हमारे बीच नहीं हैं, उनकी कविताओं का यह संकलन एक वसीयत की तरह हमारे पास रहेगा जिसमें संसार की सबसे मूल्यवान वस्तु, मनुष्यता की देखरेख की ज़िम्मेदारी वे हमें सौंप रहे हैं।
‘‘पृथ्वी के सारे ख़ून एक हैं/एक ही यात्रा में/एक ही पृथ्वी-भर लम्बी देह में/दौड़ रहे हैं वे/...अरबों धड़कनें एक ही लय में/घुमा रही हैं दुनिया को/ हर ख़ून हर ख़ून से बतियाता है।''
ये कविताएँ अपने सहज, निरायास आग्रह के साथ हमें ख़ून से बातें करते ख़ून की आवाज़ सुनने को कहती हैं। ''क्षमा करें भद्रजन/यदि फिर पूछ रहा हूँ/...मेरे देश के एक हाथ को/एक खुले हुए भूखे मुँह तक पहुँचने में/कितने बरस लगते हैं?’’ यह एक निर्दलीय प्रश्न है, लेकिन निरपेक्ष नहीं, यह मनुष्यता की आहत कोख में चीख़ता प्रश्न है; उम्मीद है हम इसका जवाब ढूँढ़ने का प्रयास करेंगे!
Kuano Nadi
- Author Name:
Sarveshwardayal Saxena
- Book Type:

-
Description:
“शब्द पड़ने लगे छोटे
दर्द बढ़ने लगा
कहे भी थे जो कभी सब हो गए अनकहे”
छठे दशक में हिन्दी कविता में जो ताज़गी और सम्पन्नता आई थी, वह आज भले ही इधर-उधर छितरा गई दिखती हो, पर सर्वेश्वर के काव्य में आज भी सही-सलामत मौजूद है। इंसान के गहरे दु:खों में सामयिक दृश्यों का अर्थ व्यक्त करनेवाली वही सहजता उनकी कविता में अन्त तक मिलती है जो पहले कविता-संग्रह ‘काठ की घंटियाँ’ के प्रकाशन ने उनके नाम के साथ जोड़ी थी। राजनीति की अमानवीयता और मानव सम्बन्धों के विशृंखलन का त्रास सर्वेश्वर ने समाज के दबे हुए वर्गों, युद्ध में खेत रहे समाजों और प्राकृतिक कोप में असहाय मरते लोगों के बीच महसूस और अभिव्यक्त किया है। यह संग्रह सर्वेश्वर की काव्य-यात्रा में किसी मोड़ का सूचक नहीं, केवल उन अन्तर्धाराओं के पहले से अधिक अधीर और मुखर हो उठने का सूचक है जिन्हें पाठक तथा समीक्षक उनकी कविता में बराबर पाते रहे हैं। ‘कुआनो नदी’ माला की तीन कविताओं के माध्यम से सर्वेश्वर ने एक ऐसा गहन प्रतीक हिन्दी कविता को दिया है, जिसका अर्थवृत्त समय के साथ फैलता रहा है।
Apni Mutthi Me Ambar Bhar
- Author Name:
Dr. Ram Prakash
- Book Type:

- Description: Dr. Ram Prakash Poetry Collection
Prem Mein Ped Hona
- Author Name:
Jacinta Kerketta
- Book Type:

-
Description:
जसिंता केरकेट्टा की ये कविताएँ, जैसा कि स्वाभाविक है, उस प्रेम की कविताएँ नहीं हैं, जो केवल दो व्यक्तियों के बीच होता है, ये कविताएँ उस प्रेम पर केन्द्रित हैं जिससे समग्र सृष्टि को संबल मिलता है। वह प्रेम जो मनुष्य का प्रकृति से है, वह प्रेम जो प्रकृति बिना किसी प्रतिसाद की कामना के समूची मानवता को देती है! ये कविताएँ उस क्षुद्रता को भी सम्बोधित हैं, जिसका प्रदर्शन हम प्रकृति के उस प्रेम का अन्यायपूर्ण बँटवारा करके करते हैं।
जसिंता ने बहैसियत कवि और बहैसियत व्यक्ति इस प्रेम के वैभव को बहुत नज़दीक से देखा और आत्मसात किया है; इसी प्रेम के चलते उन्होंने आदिवासी जन की पीड़ा और प्रकृति के आर्तनाद को अपनी कविता में लगातार जगह दी है। प्रेम क्यों नहीं बहुतों से हो सकता है? बहुत सारे लोगों, बहुत सारे बच्चों, स्त्रियों, पेड़-पौधों, नदी, झरनों, पहाड़ों और पूरी धरती से? वे सही ही पूछती हैं।
इस संग्रह में निसन्देह कुछ कविताओं में हमें वह प्रेम भी मिलता है; जो दो व्यक्तियों के बीच होता है। लेकिन इसे भी देखने का उनका नज़रिया वही नहीं है, जो सबके लिए सामान्य है। इसीलिए वे ये पंक्तियाँ लिख पाती हैं : प्रेम में आदमी/क्यों एक हो जाना चाहता है?/अपनी भिन्नता के साथ/क्यों दो नहीं रह पाता?—और इस प्रश्न का समाहार वे वर्तमान के एक बड़े फलक पर ले जाकर करती हैं : इधर देश के प्रेम में कुछ लोग/सबको ‘एक’ कर देना चाहते हैं/जो ‘एक’ न हो पाए, वे मारे जाते हैं।
प्रेम का अर्थ ‘क़ब्ज़ा’ नहीं होता/न किसी की देह, न ख़ुशियों, न सपनों पर—इन पंक्तियों को हम इस कविता-संग्रह का एकाग्र मंतव्य कह सकते हैं, जिसका विस्तार एक व्यक्ति से लेकर प्रकृति के विराट तक है।
Aapai Aapan Paar
- Author Name:
Anamika
- Book Type:

- Description: हूँ न मैं हूँ धीरे-से इतना बस / थकी हुई चिड़िया से कहता है / पानी में फूला हुआ दाना।अनुभूति के बहुस्तरीय सच को कविता में पूरा-पूरा कह सकने वाली, हमारे समय की समर्थ कवि अनामिका की प्रेम कविताओं का यह संग्रह ‘आपै आपन पार’ प्रेम का जैसे एक सम्पूर्ण पाठ है। ‘लरिकाई को प्रेम’ से चलकर ‘वार्धक्य में प्रेम की दस्तक’ और घनानंद से लेकर आज के तकनीक-समृद्ध समय तक फैला प्रेम का यह आख्यान प्रेम के अनेक पड़ावों से गुज़रता है और जीवन के इस आधारभूत तत्त्व को हिंसाओं और अतिक्रमणों की दलदल से निथारकर हमारे सामने मूर्त करता है, जिस दलदल और जिस शोर को हमने शायद प्रेम की चुनौती से भागने के लिए ही रचा है। प्रेम जो अगर बुलाता है, तो परीक्षा भी लेता है, कसौटी भी बनता है प्रेमी के समर्पण की, उसकी; सीमाओं को बताते हुए, कहते हुए कि और बड़े होकर आओ; और परिष्कृत, और ज्यादा मनुष्य। वह चाहता है कि मनुष्य विभाजनों से ऊपर उठे, समाज के भी और मन के भी। इन कविताओं में प्रेम की पीड़ा भी है, आकांक्षा भी है, लोक और साहित्य में रची-बसी प्रेम की छवियाँ भी हैं, परम्परा और आधुनिकता के बीच जो पुल प्रेम बनाता है, वह भी है। कहना अतिशयोक्ति न होगी कि ‘आपै आपन पार’ से गुज़रना प्रेम के एक समूचे अनुभव से गुज़रना है और उसके विमर्श से भी। कविताओं के साथ इस पुस्तक में प्रेम-कविता को लेकर एक ‘उपरान्त कथन’ भी है जो हिन्दी और विश्व-साहित्य में प्रेम की अभिव्यक्ति पर विहगावलोकन करते हुए प्रेम के सूक्ष्म का अन्वेषण समय और भूगोल के एक बड़े वृत्त में करता है|
Tulsi Rachna-Sanchayan
- Author Name:
Dr. Ramji Tiwari
- Book Type:

- Description: तुलसी रचना संचयन एक चिर कालिक अभाव की परिपूर्ति का उपक्रम है। समृद्ध भारतीय ज्ञान-परंपरा और लोकमंगल विधायिनी, अप्रतिहत आध्यात्मिक आस्था के सजग प्रहरी महात्मा तुलसीदास का 'रामचरितमानस' भारतीय संस्कृति का श्रेष्ठतम प्रतीक है। किंतु 'मानस' की अतिव्याप्त लोकप्रियता के कारण उनके अन्य मूल्यवान और कालजयी ग्रंथ प्रायः छायावेष्टित ही रह जाते हैं। इस 'संचयन' में गोस्वामीजी के सर्वस्वीकृत बारह ग्रंथों के महत्त्वपूर्ण अंशों को संकलित किया गया है। पाठकों की सुविधा के लिए आरंभ में ही सभी कृतियों का किंचित् विस्तार से परिचय दे दिया गया है, जिससे वे चयनित अंशों में मूल प्रतिपाद्य, शिल्प-सौष्ठव और कवि-दृष्टि का साक्षात्कार कर सकें। अंशों के चयन में इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है कि कृति विशेष का सर्वोत्तम सामने आ जाए और सभी अंशों के योग से राम-कथा एवं गोस्वामीजी के कृतित्व का समग्र स्वरूप स्पष्ट हो जाए, जिससे पाठकों के लिए संपूर्ण तुलसी वाड्मय का सम्यक् रसास्वादन और समाकलन संभव हो सके। पाठकों की सुविधा के लिए परिशिष्ट में कठिन शब्दों के अर्थ दे दिए गए हैं। आशा है, यह संचयन विद्यार्थियों, शोधार्थियों और सामान्य अध्येताओं के लिए प्रेरक और उपकारक सिद्ध होगा।
Pratinidhi Kavitayen : Bhawani prasad Mishra
- Author Name:
Bhawani Prasad Mishra
- Rating:
- Book Type:

-
Description:
बीसवीं सदी के तीसरे दशक से लेकर नौवें दशक की शुरुआत तक कवि भवानी प्रसाद मिश्र की अनथक संवेदनाएँ लगातार सफ़र पर रहीं।
हिन्दी भाषा और उसकी प्रकृति को अपनी कविता में सँजोता और नए ढंग से रचता यह कवि न केवल घर, ऑफ़िस या बाज़ार, बल्कि समूची परम्परा में रची-पची और बसी अन्तर्ध्वनियों को जिस तरकीब से जुटाता और उन्हें नई अनुगूँजों से भरता है, वे अनुगूँजें सिर्फ़ कामकाजी आबादी की अनुगूँजें नहीं हैं, उस समूची आबादी की भी हैं जिसमें सूरज, चाँद, आकाश-हवा, नदी-पहाड़, पेड़-पौधे और तमाम चर-अचर जीव-जगत आता है। स्वभावत: इस सर्जना में मानव-आत्मा का सरस-संगीत अपनी समूची आत्मीयता और अन्तरंगता में सघन हो उठा है। कविता में मनुष्य और लोक-प्रकृति और लोक-जीवन की यह संयुक्त भागीदारी एक ऐसी जुगलबन्दी का दृश्य रचती है जिसे केवल निराला, किंचित् अज्ञेय और यत्किंचित् नागार्जुन जैसे कवि करते हैं।
कविता के अनेक रूपों, शैलियों और भंगिमाओं को समेटे यह कवि पारम्परिक रूपों के साथ-साथ नवीनतम रूपों का जैसा विधान रचता है, वह उसकी सामर्थ्य की ही गवाही देता है। मुक्त कविता, गीत-ग़ज़ल, जनगीत, खंडकाव्य, कथा-काव्य, प्रगीत कविता के साथ उसकी सीधी-सादी प्रत्यक्ष भावमयी शैली के साथ आक्रामक, व्यंग्य और उपहासमयी, सांकेतिक और विडम्बनादर्शी भंगिमाएँ भी यहाँ मौजूद हैं। कई एक साथी कवियों में जैसी एकरसता देखी जाती है, भवानी प्रसाद मिश्र ने उसे अपनी भंगिम-विपुलता और शैली-वैविध्य से बार-बार तोड़ा है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book