Shambook
(0)
₹
250
200 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
‘पद्मपुराण’ के सृष्टिखंड और उत्तरखंड, ‘महाभारत’ के शान्तिपर्व तथा ‘आनन्द रामायण’ के भी अनेक अध्यायों में शम्बूक की कथा समाहित है जिससे इसकी प्राचीनता और परम्परागत मान्यता दोनों ही बातें सिद्ध हो जाती हैं। इस पुस्तक में शम्बूक को भूमिपुत्र के रूप में प्रस्तुत किया गया है। शम्बूक की तर्कशीलता जीवन के उस पहलू को उद्घाटित करती है जिसकी उपेक्षा करने से राम का ब्रह्मतत्त्व एवं उनकी विराटता अपनी अर्थवत्ता खो देती है। आधुनिक युग की प्रजातांत्रिक समाजवादी विचारधारा इसी बिन्दु पर प्राचीन भारतीय सांस्कृतिक परम्परा से मेल खा जाती है।
Read moreAbout the Book
‘पद्मपुराण’ के सृष्टिखंड और उत्तरखंड, ‘महाभारत’ के शान्तिपर्व तथा ‘आनन्द रामायण’ के भी अनेक अध्यायों में शम्बूक की कथा समाहित है जिससे इसकी प्राचीनता और परम्परागत मान्यता दोनों ही बातें सिद्ध हो जाती हैं। इस पुस्तक में शम्बूक को भूमिपुत्र के रूप में प्रस्तुत किया गया है। शम्बूक की तर्कशीलता जीवन के उस पहलू को उद्घाटित करती है जिसकी उपेक्षा करने से राम का ब्रह्मतत्त्व एवं उनकी विराटता अपनी अर्थवत्ता खो देती है। आधुनिक युग की प्रजातांत्रिक समाजवादी विचारधारा इसी बिन्दु पर प्राचीन भारतीय सांस्कृतिक परम्परा से मेल खा जाती है।
Book Details
-
ISBN9788180316777
-
Pages104
-
Avg Reading Time3 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Thami Hui Barish Mein Dophar
- Author Name:
Savita Bhargav
- Book Type:

-
Description:
अग्रणी हिन्दी कवि सविता भार्गव का नया संग्रह ‘थमी हुई बारिश में दोपहर’ स्त्री-कविता के क्षेत्र में ही नहीं वरन् समकालीन भारतीय कविता के क्षेत्र में भी एक नया प्रस्थान माना जा सकता है। स्त्री-जीवन के अनेकानेक अनदेखे, अनछुए प्रसंगों, अनुभवों और जटिलताओं से समृद्ध यह संग्रह अपने ताप, ताज़गी और त्वरा के लिए एक विलक्षण संग्रह के रूप में स्थापित होगा। प्रेम, दाम्पत्य, कुटुम्ब, समाज और राजनीति सब मिलकर एक नया रसायन बनाते हैं। बिना किसी दुराव के, बिल्कुल अकुंठ भाव से कवि ने अनेक तरह के सम्बन्धों का उद्घाटन किया है। और ये सम्बन्ध इकहरे नहीं हैं। एक आरम्भिक कविता में सविता भार्गव कहती हैं : ‘तुम कल्पना करो/मैं तुम्हारी नई प्रेमिका हूँ/और रच डालो/शमशान तक पहुँचने के/सारे दृश्य’।
यहाँ ‘शमशान’ का हठात् प्रयोग इस कविता को स्त्री-पुरुष सम्बन्धों से परे एक वृहत्तर अर्थ देता है। प्रेम की ऐसी कविताएँ न तो देह पर रुकती हैं न देह का लोप करती हैं, बल्कि देह और जीवन की अन्तिम परिणति तक ले जाती हैं। ‘मैं जाग रही हूँ किसके लिए’ सरीखी कविताओं में भी इसे देखा जा सकता है। इसके दूसरे छोर पर ‘इस्तरी करती स्त्री’ को रखा जा सकता है जहाँ एक स्त्री- देह की स्वायत्तता व्यक्त होती है। इसके बरअक्स ‘अविराम घूमती पृथ्वी की तरह’ स्त्री-पुरुष के योग को तलाशती एक अद्भुत कविता है। पूरा संग्रह ऐसी कविताओं का अक्षय-कोश है।
लेकिन जिन कविताओं को समकालीन हिन्दी कविता की उपलब्धि कहा जा सकता है वे हैं ‘अनुभव’, ‘यौवन बीत गया’ और ‘माँ वापस जा रही है’।
सिनेमा का सीन करते हुए/थोड़ी सी झिझक से/कैमरे के सामने खड़ी होती हूँ/क्योंकि कैमरा पूरा समाज है/और मैं अकेली स्त्री हूँ/पसीना पोंछते और मेकअप धोते हुए/मैं शामिल हो जाती हूँ/समाज में। (अनुभव)
कुछ दिन बेटी के घर में रहने के बाद माँ वापस जा रही है और बेटी के ‘भीतर कुहरा बैठ रहा है’। यह एक अविस्मरणीय मार्मिक कविता है जो केवल एक स्त्री की लेखनी ही रच सकती थी। लेकिन जिस कविता ने मुझे रोक लिया वो है ‘यौवन बीत गया’। शायद ऐसी कविता पहले नहीं लिखी गयी समकालीन भारतीय साहित्य में।
खेल जो मैंने खेले/लगते आज वे कितने अधूरे/डूबा दिन/रातें रहीं नहीं चाँदनी/बारिश बीती/चींटियाँ खोद रहीं/फिर से मिट्टी/मेरी मिट्टी होती/चींटियों जैसी
यह संग्रह अपने सर्वथा नए बिम्बों, लयों और भावों के लिए समादृत होगा। ‘मेरे होंठ की फाँक जैसा टेढ़ा चाँद’ कितना नया बिम्ब है ! ‘थमी हुई बारिश में दोपहर’ अपने आप में जीवन के द्वन्द्व और द्विगु का विलक्षण रूपक है।
—अरुण कमल
HINDI KI CHUNINDA GHAZALEN
- Author Name:
Editor : Gourinath
- Book Type:

- Description: collection of best hindi ghazals
Lata Aur Vriksh
- Author Name:
Smt. Kranti Trivedi
- Book Type:

- Description: लता और वृक्ष “कहो न मिनी, इसका क्या अर्थ है?” “मन तौ शुदम का अर्थ होता है—मैं तेरा हो गया।” शब्द और अर्थ पर वार्त्तालाप होते देख इंदरानी खिसक ली, नहीं तो देखती अपार प्रेम भरा आलिंगन कैसे हुआ करता है। सुखबीर ने बहुत ही कोमलता से पूछा, “इसके आगे भी कुछ होगा, मिनी? आज इसी क्षण सुनने का मन हो रहा है।” संसार की सबसे सुखी नारी के स्वर में मिनी ने कहना आरंभ किया—“फारसी का यह पूरा छंद है— मन तौ शुदम, तौ मन शुदी। मन तम शुदी, तौ जाँ शुदी। ता कथाम गीयंद वाद अजी। मन दीगरम व तौ दीगरी।” “अब अर्थ भी बता दो, यह तुमने कहाँ पढ़ा था?” “मरियम अम्मा की नोट-बुक में था। मुझे अच्छा लगा तो रट लिया। इसका अर्थ है— मैं तेरा हो गया, तू मेरा हो गया। मैं शरीर बन गया, तू प्राण बन गया। कभी कोई यह कह न सके मैं और तू और तू और मैं हैं।
Pratinidhi Kavitayen : Kunwar Narain
- Author Name:
Kunwar Narain
- Book Type:

-
Description:
शुरू से लेकर अब तक की कविताएँ सिलसिलेवार पढ़ी जाएँ तो कुँवर नारायण की भाषा में बदलते मिज़ाज को लक्ष्य किया जा सकता है। आरम्भिक कविताओं पर नई कविता के दौर की काव्य-भाषा की स्वाभाविक छाप स्पष्ट है। इस छाप के बावजूद छटपटाहट है—कविता के वाक्य-विन्यास को आरोपित सजावट से मुक्त कर सहज वाक्य-विन्यास के निकट लाने की। आगे चलकर यह वाक्य-विन्यास कुँवर नारायण की कविता के लिए स्वभाव-सिद्ध हो गया है। लेकिन उनकी विशेषता यह है कि उन्होंने सहज वाक्य-विन्यास को बोध के सरलीकरण का पर्याय अधिकांशत: नहीं बनने दिया। सहज रहते हुए सरलीकरण से बचे रहना, साधना के कठिन अभ्यास की माँग करता है। 'सहज-सहज सब कोई कहै—सहज न चीन्हे कोय!' बाल-भाषा में 'प्रौढ़ व्यक्तित्व को अभिव्यक्ति' देने की चुनौती को कुँवर नारायण ने बहुत गहरे में लिया और जिया है। परम्परा की स्मृति और 'सैकड़ों नए-नए' पहलुओं को धारण करनेवाली काव्य-भाषा सम्भव करने के लिए जो साधना उन्होंने की होगी, उसका अनुमान ही किया जा सकता है। कुँवर नारायण इस महत्त्वपूर्ण सचाई के प्रति सजग हैं कि ‘कलाकार-वैज्ञानिक के लिए कुछ भी असाध्य नहीं।’ वे इस गहरी सचाई से भी वाक़िफ़ हैं कि चिन्तन चाहे दार्शनिक प्रश्नों पर किया जाए चाहे वैज्ञानिक तथ्यों पर, काव्यात्मक भाषा ही प्रत्यक्ष दिखने वाले विरोधों के परे जाकर मूलभूत सत्यों को धारण करने का हौसला कर पाती है।
—पुरुषोत्तम अग्रवाल
Beautiful Poem (Series-1)
- Author Name:
Dr.Sanjay Rout
- Book Type:

- Description: Beautiful Poem (Series-1) is a book written by Dr.Sanjay Rout published by ISL Publicaions. It is a collection of poetry based on the theme of 'Love'. It is helpful for all age group people who want to make their life more meaningful and meaningful through nature poetry.
Pukarti Hain Smritiyan
- Author Name:
Anand Pachauri
- Book Type:

- Description: Book
Pratinidhi Kavitayen : Manglesh Dabral
- Author Name:
Mangalesh Dabral
- Book Type:

-
Description:
आलोकधन्वा कहते हैं कि ‘मंगलेश फूल की तरह नाज़ुक और पवित्र हैं।’ निश्चय ही स्वभाव की सचाई, कोमलता, संजीदगी, निस्पृहता और युयुत्सा उन्हें अपनी जड़ों से हासिल हुई है, पर इन मूल्यों को उन्होंने अपनी प्रतिश्रुति से अक्षुण्ण रखा है।
मंगलेश डबराल की काव्यानुभूति की बनावट में उनके स्वभाव की केन्द्रीय भूमिका है। उनके अन्दाज़े-बयाँ में संकोच, मर्यादा और करुणा की एक लर्ज़िश है। एक आक्रामक, वाचाल और लालची समय में उन्होंने सफलता नहीं, सार्थकता को स्पृहणीय माना है और जब उनका मन्तव्य यह हो कि मनुष्य होना सबसे बड़ी सार्थकता है, तो ऐसा नहीं कि यह कोई आसान मकसद है, बल्कि सहज ही अनुमान किया जा सकता है कि यह आसानी कितनी दुश्वार है।
Jeevan Ke Din
- Author Name:
Prabhat
- Book Type:

-
Description:
ये लोक में टहलती हुई कविताएँ हैं। इन्होंने शहर की मुख्यधारा से सिर्फ़ लिपि उठाई है, बाक़ी सब इनका अपना है। नागर मुख्यधारा में रहते-बहते न इन कविताओं को रचा जा सकता है, न पढ़ा जा सकता है। इन्हें लिखने के लिए धीमी हवा की तरह बहते पानी की सतह जैसा मन चाहिए होता है, जो निश्चय ही कवि के पास है। कवि ने इन कविताओं को जैसे धीरे-धीरे उड़ती चिडिय़ों के पंखों से फिसलते ही अपनी भाषा की पारदर्शी प्याली में थाम लिया है, और फिर काग़ज़ पर सहेज दिया है। इनमें दु:ख भी है, सुख भी है, अभाव भी है, प्रेम भी, बिछोह भी, जीवन भी और मृत्यु भी, और इन कविताओं को पढ़ते हुए वे सब प्रकृति के स्वभाव जितने नामालूम ढंग से, बिना कोई शोर मचाए हमारे आसपास साँस लेने लगते हैं। यही इन कविताओं की विशेषता है कि ये अपनी विषयवस्तु के साथ इस तरह एकमेक हैं कि आप इनका विश्लेषण परम्परागत समीक्षा-औज़ारों से नहीं कर सकते। ये अपने आप में सम्पूर्ण हैं; और जिस चित्र, जिस अनुभव को आप तक पहुँचाने के लिए उठती हैं, उसे बिना किसी बाह्य हस्तक्षेप के जस का तस आपके इर्द-गिर्द तम्बू की तरह तान देती हैं, और अनजाने आप अगली साँस उसकी हवा में लेते हैं।
संग्रह की एक कविता ‘गड़रिये’ जैसे इन कविताओं के मिज़ाज को व्यक्त करती है—‘वे निर्जन में रहते हैं/ इनसानों की संगत के वे उतने अभ्यस्त नहीं हैं जितने प्रकृति की संगत के/...वे झाड़ों के सामने खुलते हैं/वे झिट्टियों के लाल-पीले बेरों से बतियाते हैं/...वे आकाश में पैदल-पैदल जा रही बारिश के पीछे-पीछे/दूर तक जाते हैं अपने रेवड़ सहित...’
ये कविताएँ अपने परिवेश के समूचेपन में पैदल-पैदल चलते हुए सुच्चे फूलों की तरह जुटाई गई कविताएँ हैं; जिनका प्रतिरोध, जिनकी असहमति उनके होने-भर से रेखांकित होती है। वे एक वाचाल समाज को थिर, निर्निमेष दृष्टि से देखते हुए उसे उसकी व्यर्थता के प्रति सजग कर देती हैं, और उसके दम्भ को सन्देह से भर देती हैं।
Aapkamai
- Author Name:
Swanand Kirkire
- Rating:
- Book Type:

-
Description:
गीत कहाँ है अब यहाँ/गीत जैसा कुछ है’—गीतकार स्वानंद किरकिरे इस संग्रह की एक कविता की शुरुआत इन पंक्तियों से करते हैं। वे इधर की फ़िल्मों के चहेते गीतकारों में से एक हैं, जिसकी वजह शायद यह ईमानदारी ही है? इन कविताओं की उपलब्धि भी और औज़ार भी यही ईमानदारी है। कवि के रूप में उन्होंने कहीं अपने व्यक्ति से बेईमानी नहीं की, न ख़ुद से यह कहा कि वे शायर हैं, न यह कि गीतकार हैं, न यह कि कवि हैं। वे तेज़गाम दुनिया के बीचोंबीच बैठे, अपने-आप के परदे से दुनिया को देख रहे हैं और वह जितना उन्हें समझ आ रही है, उसे लिख रहे हैं। कविताओं की इस पुस्तक को पढ़ना एक अनुभव है...। और उम्मीद है, हिन्दी का नया पाठक इसे अपनी अनुभव-सम्पदा में मोती की तरह जड़कर रखेगा।
Jag Me Noor Badha Kar Dekh
- Author Name:
Rameshraaj
- Rating:
- Book Type:

- Description: 1974 से 1990 के बीच लिखी गयीं चतुष्पदियाँ
Silent Uproar
- Author Name:
Surbhi Islam
- Book Type:

- Description: Step into a world where Surbhi Islam skillfully simmers life’s ingredients in the pot of her soul, creating a poetic feast that resonates deeply. With culinary art as her palette and flavors as her strokes, she creates vibrant dishes that evoke a symphony of emotions on the palate. Ta da! A new tadka of poetry collection is ready!!
Chuni Hui Kavitayen
- Author Name:
Atal Bihari Vajpayee
- Book Type:

- Description: This book has no description
Athato Kavya Jigyasa
- Author Name:
Virendra Mullick
- Book Type:

- Description: पूजी द्वारा विकासक रूप मे प्रतिपादित बाजारवाद, सबकिछु केँ 'पसार' बना देलकए। प्रशासन, न्याय, वित्त, सूचना, स्वास्थ्य, शिक्षा... सबकिछु बाजार नियंत्रित होइत मनुखक विसंगति केँ ओहि स्तर तक ल' गेलए जे सांस्कृतिक परिचिति पर्यंत विलोपित भ' जाए। अही मर्मांतक पीड़ा सँ आप्लावित अछि ई कविता संग्रह 'अथातो काव्य जिज्ञासा'। कविता बिडंबनापूर्ण परिवेशक प्रतिपक्षी अछि, चिंतित अछि आ अस्तित्वक प्रश्न सँ पाठक केँ आविष्ट करै अछि, सोचबाक लेल, सक्रिय हेबाक लेल उत्प्रेरित करै अछि। पूजी, बाजार आ साम्राज्यवादक वर्चस्व हमर भाषा, हमर संस्कृति, हमर सर्वस्व विश्व मानवीय दृष्टिकोणक संग कविता, मनुष्यताक उत्कर्षक लेल प्रतिबद्ध अछि, बिना कोनो संशय-ओझरौनी के बेस स्पष्ट बिम्ब मे मुखर अछि, सत्यक साक्षात्कार लेल तत्पर अछि। ..... लोकक पेट पर मारैत लात नित नव-नव सिद्धांत आ विज्ञापनक भरमार। सामयिक, असत्य आ अन्यायक बलधकेल अधिनायकवादी सत्ताक पिशाची-नर्तनक काल मे, कविता अपन कर्तव्य सँ संपृक्त अछि, आशा आ विश्वासक संग अडिग अछि। मुदा नागरिक वीर देश केर एखनहु बरूदक ढेरी पर कविताक संग विहुँसि खेलाइछ। एक अग्निजीवी कविक लेल इएह ने काव्य-स्वभाव, कविता-प्रवृत्ति छी! —कुणाल (कवि-रंगकर्मी)
Bawan Chitthiyan
- Author Name:
Babusha Kohli
- Book Type:

- Description: ‘रज़ा पुस्तक माला में युवा लेखकों और ग़ैर-रस्मी लेखन को विशेष स्थान देने की हमारी चेष्टा है। कवि का गद्य वैसे भी सामान्य गद्य से अलग रंगत का होता है। कवयित्री बाबुषा कोहली की 'बावन चिठ्ठियाँ’ मनीष पुष्कले के रेखांकनों के साथ प्रस्तुत करते हुए हमें प्रसन्नता है। उनमें बहुत कुछ है जो असाधारण है, असाधारण को अनायास छूता-ज़ाहिर करता है।’ —अशोक वाजपेयी
Siyalkot Ki Sarhad
- Author Name:
Madan Mohan Samar
- Book Type:

- Description: Book
Boli Baat
- Author Name:
Shriprakash Shukla
- Book Type:

-
Description:
‘बोली बात’ युवा कवि श्रीप्रकाश शुक्ल का दूसरा काव्य-संकलन है जिसमें कवि ने न सिर्फ़ अपनी विकास यात्रा को रेखांकित किया है, बल्कि समाज और उसके जन-जीवन के प्रति अपनी सरोकारों को और भी गहरे ढंग से जताया है। संग्रह में शामिल ‘ग़ाज़ीपुर’ कविता की ये पंक्तियाँ स्पष्ट रूप से बताती हैं कि कवि अपने आसपास को कितनी संवेदनशीलता के साथ ग्रहण कर रहा है: “यह एक ऐसा शहर है/जहाँ लोग धीरे-धीरे रहते हैं/और धीरे-धीरे रहने लगते हैं/यहाँ आनेवाला हर व्यक्ति कुछ सहमा-सहमा रहता है/कुछ-कुछ अलग-अलग रहता है/जैसे उमस-भरी गर्मी में दूसरे का स्पर्श/लेकिन धीरे-धीरे ससुराल गई महिला की तरह/जीना सीख लेता है।”
कवि का पहला संकलन कुछ वर्ष पहले आया था, जिसका नाम था—‘जहाँ सब शहर नहीं होता’। ‘बोली बात’ पिछले संग्रह के नाम से ध्वनित होनेवाली भाव-भूमि और दृष्टि-भंगिमा का ही अगला सोपान है, यह कहा जा सकता है। एक नए कवि का दूसरा संग्रह एक तरह से उसके विकास की कसौटी भी होता है और इस संग्रह की कविताओं को देखते हुए यह आश्वस्तिपूर्वक कहा जा सकता है कि इस संग्रह में काफ़ी कुछ ऐसा है जो कवि के रचनात्मक विकास की ओर ध्यान आकृष्ट करता है और कहें तो प्रमाणित भी। इस पूरे संग्रह को एक साथ पढ़ा जाए तो इसकी एक-एक कविता के भीतर से एक ऐसी दुनिया उभरती हुई दिखाई पड़ेगी, जिसे समकालीन विमर्श की भाषा में ‘सबाल्टर्न’ कहा जाता है। संग्रह की पहली कविता ‘हड़परौली’—इसका सबसे स्पष्ट और मूर्त्त उदाहरण है। इस प्रवृत्ति को सूचित करनेवाली एक साथ इतनी कविताएँ यहाँ मिल सकती हैं, जो कई बार एक पाठक को रोकती-टोकती-सी लगें। पर एक अच्छी बात यह है कि इसी के चलते अनेक नए देशज शब्द भी यहाँ मिलेंगे, जिन्हें पहली बार कविता की दुनिया की नागरिकता दी गई है।
कुल मिलाकर यह एक ऐसा संग्रह है जो अपने खाँटी देसीपन के कारण अलग से पहचाना जाएगा। कविता के एक पाठक के रूप में मैं यह निस्संकोच कह सकता हूँ कि इस विशिष्टता के अलावा भी यहाँ बहुत कुछ मिलेगा जो कविता-प्रेमियों को आकृष्ट करेगा और बेशक आश्वस्त भी।
—केदारनाथ सिंह
Jharkhand Ki Samkaleen Kavita
- Author Name:
Ed. Shiromani Mahto +2
- Book Type:

- Description: झारखंड के 24 कवियों का यह संकलन कई दृष्टि से महत्त्वपूर्ण और उल्लेखनीय है। संकलन में शामिल लगभग सभी कवि बहुत पहले से ही अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करने के लिए जाने जाते रहे हैं। स्मृति-निर्मित प्रत्ययों के माध्यम से अनुभव को विस्तार देने के कारण अनिता वर्मा और ज्ञानात्मक संवेदन की गहराई के कारण अनिल अनलहातु की कविताएँ ध्यान खींचती रही हैं। इसी तरह, उसमें शामिल अन्य सभी चर्चित कवियों—अशोक सिंह, बलभद्र, सुशील कुमार, नीलोत्पल रमेश, अनिल किशोर सहाय, नरेश अग्रवाल, विनय सौरभ, अनिता रश्मि, सुषमा सिन्हा, नीरज नीर आदि की कविताओं में भी औरों से कुछ अलग कहने और दिखने की कोशिश दिखाई देती है। रश्मि शर्मा और अखिलेश्वर पांडेय भी अपने समय के यथार्थ को देखने के नए नज़रिए और संवेदना की बनावट के कारण आकर्षित करते हैं। हालाँकि, इनमें से कुछ कवि भले ही झारखंड के रहवासी हो गए हों, कविता में प्रवासी ही बने हुए हैं। उनकी काव्यभाषा में भी भोजपुरी, मगही, अंगिका आदि की सुगंध है; नगपुरिया, खोरठा, पंचपरगनिया और कुर्माली से उनका रिश्ता बन नहीं पाया है। इसलिए भी यह दुहराना पड़ रहा है कि इस संकलन की खास पहचान आदिवासी कवियों से ही बनती है। वैसे झारखंड की अपनी औद्योगिक संस्कृति भी है, लेकिन इस्पात की धमन-भट्ठियों और कोयला खदानों मेें कार्य करनेवाले मज़दूरों के कठिन संघर्ष पर कविताएँ आश्चर्यजनक रूप से इसमें नहीं हैं। इस छोटी-सी कमी के बाद भी, इसकी विविधता और व्यापकता सराहनीय है। इससे झाारखंड की रचनाशीलता को गति मिलेगी। संपादक त्रयी में एक शिरोमणि महतो तो कवि हैं, लेकिन उनके दो कविता-प्रेमी शिक्षक सहयोगी सुभाष कुमार यादव और राजेश कुमार विशेष बधाई के पात्र हैं। —मदन कश्यप
Yashodhara
- Author Name:
Maithlisharan Gupt
- Book Type:

-
Description:
राजभवन की सुख-समृद्धि तथा ऐश्वर्य और भोग-विलास को ही नहीं वरन् यशोधरा जैसी पत्नी तथा राहुल जैसे एकमात्र पुत्र का परित्याग करके निर्वाण के मार्ग में निकले भगवान बुद्ध की कथा इतनी महान बनी कि स्वयं बौद्ध धर्म के जन्म और विस्तार की प्रेरक कथा बन गई।
मैथिलीशरण गुप्त मूलत: कवि थे, जो राष्ट्रकवि बन गए। अत: उन्होंने भगवान बुद्ध की कथा को काव्य-कथा के रूप में प्रस्तुत किया है। इस रचना में गुप्त जी ने यशोधरा के त्याग की परम्परा को मुख्य रूप से उद्घोषित किया है, जिसने भगवान बुद्ध के राजभवन लौटने और स्वयं यशोधरा के कक्ष में उससे भेंट करने जाने पर अपने बेटे राहुल का महान पुत्रदान देकर अपने मन की महानता को प्रतिष्ठित किया। राष्ट्रकवि की यह रचना मनोरंजक ही नहीं, प्रेरक भी है।
Sanshyatma
- Author Name:
Gyanendrapati
- Book Type:

-
Description:
ज्ञानेन्द्रपति के कवि-कर्म ने कविता-प्रेमी हिन्दी जनता को आश्वस्त किया है कि जन-मन को सींचने-सँवारने वाली और ‘जन-शत्रु जीवन-शत्रु’ ताक़तों से लोहा लेनेवाली कविता-धारा आज के सुहावन भुलावन समय में भी सूखी नहीं है। कवि के पिछले संग्रह ‘गंगातट’ में स्थानिकता के जल-दर्पण में आज के वैश्विक समय की थाह मिली थी, तो ‘संशयात्मा’ का परिसर विश्व-विस्तृत है, जिसके केन्द्र में एक भारतीय अन्तःकरण है—करुणा से आप्लावित और सात्त्विक क्रोध से संतप्त।
‘संशयात्मा’ की कविताओं में हमारे समय की साँवली सच्चाइयाँ दर्ज हैं, दूधिया मिथ्याओं को सहज ही अनावृत करती हुईं। यहाँ झारखंड के पहाड़ों का अरण्यरोदन सुना जा सकता है और महानगर के कोलाहल में अनसुनी रह जानेवाली वह टेर भी जो अधरात लौटकर नींद के मुँदे कपाट खड़काती है। यहाँ इथियोपिया एक काली दुबली दौड़ाक लड़की का नाम है। यहाँ हवाई द्वीप के अपने दलदली ठिकाने में, इकला बचा, विदागीत गाता हुआ ओ-ओ आ-आ पाखी कभी नहीं मिले साइबेरियाई सारसों को सम्बोधित है जो उसके पीछे अनस्तित्व के आकाश में उड़ जानेवाले हैं। मिट रही प्रजातियों और नष्ट हो रही जैव विविधताओं का शोक-लेख इतना मार्मिक है कि मानवता की जयगाथा को मानवीयता की अपमृत्यु का अंदेशा कवलित कर लेता है। रह-रह हिंस्रता के हवाले होता मानव-मन हो, या सीवनों पर उधड़ता समाज—कवि की देखती-लेखती आँख अपलक खुली रहती है। सत्य का निष्कवच साक्षात्कार कवि-कर्म को अनायास उस उपक्रम में बदल देता है जिसे मुक्तिबोध ‘सभ्यता-समीक्षा’ कहते थे।
ज्ञानेन्द्रपति की काव्य-भाषा केवल इस मा’नी में समकालीन चलन से अलग नहीं कि वहाँ न देशज अपांक्तेय है, न तत्सम अछूत; बल्कि इसलिए भी कि वह ज़िन्दगी की धाह से अपना उजास पाती है; उसके शब्द धूल-गर्द और वनफूलों के परागकणों से अटे हैं। कविता केवल भाषा से रची ही नहीं जाती, वह भाषा को भी रचती चलती है और यह काम ज़िन्दगी की निहाई पर होता है—इस तथ्य को भी इन कविताओं को पढ़ते हुए महसूसा जा सकता है। संशयात्मा विनश्यति—गीता की उक्ति है; ‘संशयात्मा’ की कविताओं को पढ़कर बेहिचक यह कहा जा सकता है—संशयात्मा विपश्यति।
Kaafila-E-Nau-Bahaar
- Author Name:
Vikas Sharma Raj
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book