Hansi Aur Des
Author:
Rupam MishraPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Poetry0 Ratings
Price: ₹ 200
₹
250
Available
रूपम मिश्र की कविताओं की ‘आत्मा का आयतन’ बड़ा है। इन कविताओं में समाज और राजनीति के फासीवादी दौर में संवेदनशील लोगों के भीषण अन्तर्द्वंद्व अंकित हुए हैं। यहाँ ‘न्याय के लिए तड़पता मन’ है तो अपनापन खोजते थकता-हारता मन भी है और उसी क्षण भाग जाने का भी एक मन है। यहाँ गाँव-क़स्बे में सदियों से गंगा-जमुनी तहज़ीब का देशज मर्सिया है, मुसलमान जोगियों के डर ने उनके बिरहों और निर्गुण सारंगी को ख़ामोश किया है, वही ख़ामोशी इन कविताओं में गूँज उठी है। ‘हँसी और देस’ में जैसे कोई बड़ी ठेठ ज़िद्दी निगाहों से सूचना-संचार के मायाजाल और नफ़रत की बाज़ारू सियासत को बेध रहा है।
यहाँ कितनी ही कहानियाँ हैं—बहुत सी तो ऐसी जो बिसरा दिए जाने की कगार पर हैं, लेकिन आदमीपने के अकाल में लड़ते हुए मनुष्यों के जीते रहने की तमन्ना भी है। लोक-रहन, माटी-पानी और हरियाली को मिटते देखना त्रासद है, इस त्रासदी में प्रेम मानो एक आपद्धर्म है, उनके पूरी तरह मिट जाने से पहले ही मिलन की चाह है क्योंकि उनसे विरहित दुनिया में प्रेम का कोई परिवेश न होगा। भले ही ‘नैतिकता की रंगदारी वसूलते लफुए’ हर कहीं दिखते हों लेकिन असम्भव समझ लिए गए प्रतिरोध की छवियाँ जो अभी भी वास्तव हैं, (बस हमने नज़रें फेर ली हैं), उन्हें इस संग्रह की कविताएँ आँख में उँगली डालकर दिखाती हैं। इन कविताओं में हिन्दी का बहुभाषिक वैभव चमकता है। यहाँ अवध के गँवई मुहावरों और शब्दों का भाषिक छिड़काव नहीं, बल्कि अनुभव और सोच की मातृभाषा का आत्मविश्वास है। रूपम की काव्यभाषा जनता की जनवादी राजनीति के संक्रामक हो उठने के क्षण में उससे गलबहियाँ को आतुर है।
—प्रणय कृष्ण
ISBN: 9789347043963
Pages: 142
Avg Reading Time: 5 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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Vijay Bahadur Singh
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- Description: विजय बहादुर सिंह आधुनिक हिंदी के विकास में अपनी सृजनात्मक आलोचना से उल्लेखनीय योगदान देने वाले लेखकों में विजय बहादुर सिंह का नाम अग्रगण्य है। नियमित लेखन के साथ विजय बहादुर सिंह दीर्घ अवधि से शोध और अध्यापन कार्य से भी जुड़े रहे हैं। लेकिन मुख्यतः एक साहित्यालोचक के रूप में विख्यात विजय बहादुर सिंह ने आधुनिक हिंदी कविता और कवियों की सृजनात्मक उपलब्धियों के साथ-साथ हिंदी कथा और उपन्यास साहित्य पर भी अपनी आलोचना प्रस्तुत की है। ‘आलोचक का स्वदेश’ उनके द्वारा रचित चर्चित साहित्यिक जीवनी है। रचनाएँ डॉ. सिंह ने आठ खंडों में ‘भवानी प्रसाद मिश्र रचनावली’, चार खंडों में ‘दुष्यंत कुमार रचनावली’ और आठ खंडों में ‘नंददुलारे वाजपेयी रचनावली’ का निर्दोष और चर्चित संपादन किया। उन्होंने ‘आलोचक का स्वदेश’ नाम से नंददुलारे वाजपेयी की साहित्यिक जीवनी भी लिखी। ‘वृहत्त्रयी’, ‘नागार्जुन का रचना संसार’, ‘कविता और संवेदना’, ‘उपन्यास : समय और संवेदना’, ‘महादेवी के काव्य का नेपथ्य’ आदि उनकी प्रमुख आलोचनात्मक कृतियाँ हैं। उनकी प्रमुख काव्य कृतियाँ हैं- ‘मौसम की चिट्ठी’, ‘पृथ्वी का प्रेमगीत’, ‘पतझर की बाँसुरी’, ‘भीमबैठका’। पुरस्कार व सम्मान विजय बहादुर सिंह को उनके कृतित्व तथा सृजनात्मक अवदान के लिए ‘रामविलास शर्मा सम्मान’, ‘लोक सम्मान’, ‘श्रेष्ठ कला आचार्य और कौमी एकता सम्मान’, केंद्रीय हिंदी संस्थान के ‘सुब्रह्मण्यम भारती पुरस्कार’ तथा मप्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन के ‘भवभूति अलंकरण’ से सम्मानित किया जा चुका है।
Swadhinata, Pyar : Sándor Petőfi Ki Kavitayein
- Author Name:
Sándor Petőfi
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Description:
हंगरी में बच्चे माँ-पिता, खाना-पीना आदि शब्दों के बाद जो शब्द सबसे पहले सीखते हैं, वह है पैतोफ़ी–कवि। उनकी भाषा में शान्दोर पैतोफ़ी, कवि एवं कवि-कर्म के पर्याय हैं। हंगरी के यह अमर कवि हंगरी को आस्ट्रियाई साम्राज्य से मुक्त कराने का आह्वान करते हुए स्वयं रणभूमि में कूद पड़े थे और मात्र 26 वर्ष की आयु में शहीद हो गए थे। वह 1848 का दौर था, जब लगभग सारे यूरोप में राष्ट्रीय स्वाधीनता के लिए क्रान्तियाँ हो रही थीं।
2022 में पैतोफ़ी के जन्म के 200 बरस पूरे हो रहे हैं। इतनी कम उम्र में और लगभग सात साल की अवधि में ही, पैतोफ़ी ने हंगारी साहित्य को कविता, लोकगीत, नाट्य रूपक, पत्र और अनेक महाकाव्यों की जो भेंट दी, उसने हंगारी भाषा और साहित्य में भी अनेक क्रान्तियों की नींव रख दी।
‘स्वाधीनता, प्यार’ में संकलित कविताएँ दर्शाती हैं कि इस आधुनिक कवि ने मूलत: लोकवाणी और लोकगीतों की शैली में निजी, सामाजिक, राजनीतिक, पारिवारिक और सौन्दर्य-प्रेम-मस्ती के कितने-कितने आयामों में प्रवेश किया था। पैतोफ़ी का रचना संसार नृत्य, संगीत, फ़िल्म, काव्य आदि की अजस्र धाराएँ आज भी प्रवाहित कर रहा है।
इन कविताओं में अनुभूति, कल्पना, विचार, आशा-निराशा आदि अनेक भावनाओं का समागम है। विनोद, कटाक्ष, खिलन्दड़ापन, दीवानगी-मस्ती के साथ-साथ, स्वाधीनता के अडिग सेनानी की दृष्टि सामाजिक विषमताओं को उघाड़ती चलती है–दुनिया को एक बेहतर, मानवीय दुनिया बनाने का आह्वान करते हुए।
Thodi Si Jagah
- Author Name:
Ashok Vajpeyi
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Description:
अशोक वाजपेयी हिन्दी के समकालीन कवियों में उन थोड़े-से लोगों में से हैं जिन्होंने अपने समय में प्रेम की सघनता, उत्कृष्टता और महिमा को लगातार अपनी कविता के केन्द्र में बनाए रखा है। एक ऐसे समय में जब रति और शृंगार के पारम्परिक सौन्दर्य-मूल्य कविता के दृश्य से ग़ायब ही हो गए हैं, अशोक वाजपेयी ने उन्हीं को अपनी कविता में सबसे अधिक जगह दी है। उनकी प्रेम कविता में जो ऐन्द्रिकता है, वह परम्परा को पुनराविष्कृत करती है और साथ ही उसे समकालीन आँच और लपक भी देती है। प्रेम की अनेक सूक्ष्मताएँ खड़ी बोली में इन कविताओं के माध्यम से पहली बार कविता के परिसर में प्रवेश करती हैं।
प्रेम में, अशोक वाजपेयी के कविता-संसार में भरा-पूरापन है, रसिकता और प्रयास है। उसमें जीवन से भागकर कहीं और नहीं, बल्कि इसी अच्छी-बुरी दुनिया में अपने लिए थोड़ी-सी जगह पाने की दुर्लभ ज़िद है।
कविता में प्रेम करना या कि प्रेम की कविता करना अशोक वाजपेयी की अदम्य जिजीविषा का ही प्रमाण है। यह स्पन्दन और ऊष्मा की पुस्तक है : प्रेम के स्पन्दन, जीवन और भाषा की ऊष्मा की पुस्तक।
Silent Voices, Loud Whispers
- Author Name:
Ashee B Bansaal
- Book Type:

- Description: In the depths of the heart, where emotions ignite, Where questions bloom, and wisdom takes flight, A poetry book emerges, a vessel of art, Embarking on a journey to unravel life's chart. Within these pages, a hundred poems reside, Whispering tales of wonder, with questions as their guide. For life, ever enigmatic, dances in the shadows, Challenging our beliefs, like capricious meadows.
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