Ayushya
Author:
Rajvardhan AzadPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Poetry0 Ratings
Price: ₹ 636
₹
795
Available
जीवन में आस्था और उसके सत्य के अन्वेषण की जिज्ञासा ही ‘आयुष्य’ की मूल प्रेरणा है। इस प्रबन्ध-काव्य में कथा के स्थान विचार की सरिता प्रवाहित होती है जो मानव-जीवन के इस सिरे से लेकर उस सिरे तक जाती है—यानी जन्म से लेकर जीवन के अवसान तक।
आठ सर्गों में विभाजित इस प्रबन्ध-काव्य का प्रत्येक चरण मनु के बाह्य और आन्तरिक जीवन का सम्पूर्ण चित्र प्रस्तुत करता है। एक दार्शनिक की भंगिमा में कवि मनुष्य की ऐहिक यात्रा के अलग-अलग पड़ावों पर ठहरकर उन सारे बिम्बों को सँजोता है, उन पर विचार करता है, जो हमारे अस्तित्व को परिभाषित करते हैं।
बचपन के ललित चित्रों से आरम्भ होकर यह कृति यौवन के सपनों-संघर्षों, प्रौढ़ वय के गाम्भीर्य और वृद्धावस्था के शान्त समतल से होती हुई समय के उस विराट विवर पर समाप्त होती है जहाँ सब कुछ किसी विराट में विलय हो जाता है—जीवन भी, सृष्टि भी; और जिज्ञासु मानव मस्तिष्क जहाँ हठात् जीवन के उद्देश्य का अन्वेषण नए सिरे से करने को व्याकुल हो उठता है।जीव का विलोपन या जीवन का विघटन?मनुष्य के संसार में अवतरण का प्रयोजन?
आज जब हम सभ्यता के ऐसे चरण में पहुँच गए हैं जहाँ मनुष्य जीवन का मोल शायद कुछ भी नहीं, हर दिन ऐसा लगता है, ‘आयुष्य' की प्रश्नाकुलता को अनुभव करना एक नई दृष्टि की आधार-भूमि बनेगी।
ISBN: 9789360866716
Pages: 226
Avg Reading Time: 8 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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Description:
सुरजीत पातर की कविताएँ हमें एक पूरी क़ौम के जलते हुए जंगल में घिरे होने का अहसास कराती हैं। रात, अँधेरा, सन्नाटा, ख़ौफ़, चीख़, आग जैसे शब्दों की बारंबारता से वह पूरा माहौल मुखर हो उठता है। आग कभी आदमी को जलाती है और कभी आदमी के सीने में ही जल उठती है।
बँटवारे का दर्द आधुनिक पंजाब की दुखती रग है। पाँच नदियों में से ढाई हिन्दुस्तानी पंजाब के हाथ आईं। और फिर पिछले पन्द्रह वर्षों से जारी घनीभूत तनाव। यह तनाव गुरु नानक और गुरु गोविन्द सिंह के व्यक्तित्वों में टकराव से पैदा होकर पंजाब के मानसिक संसार को विभाजित करता हुआ शब्द और अर्थ तक के बीच फैल जाता है। सच्चाई का बयान करने में कभी कविता साथ देती है लेकिन कभी उसके दबाव से बिखर उठती है। जब कवि को कविता की व्यर्थता का अहसास होता है तभी हमारे सामने भाषा के पार एक जीती-जागती दुनिया खड़ी हो जाती है।
इन कविताओं में सूफ़ी परम्परा से लेकर आधुनिक काव्यान्दोलनों तक का विशाल फलक रूप और टेकनीक के स्तर पर मौज़ूद है। रूप की यह विविधता एक विशाल सच्चाई को हर बार नए तरीके से कहने और फिर भी कुछ बचा रह जाने की बेचैनी से पैदा हुई है।
Tetherings
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